Acharya Harish Malik

Acharya Harish Malik Acharya Malik is also a leading name in the field of Palmistry, which he learned from Dayanand Verma Ji.

He has visited many places like the United Kingdom, Greece, Germany and Switzerland and has explored Palmistry further.

05/06/2025
26/10/2024

दीपावली 2024 कब ???
इस वर्ष दीपावली 31 अक्टूबर या 1 नवंबर कब मनाई जाए?? इसको लेकर पंचांगकारो और ज्योतिषों में भारी मतभेद है
हमारे अधिकांश पर्व ज्योतिष गणना मे मतभेद के कारण प्रायः अलग अलग क्षेत्रों और परंपराओं के अनुसार दो दिन या कभी कभी तीन दिन भी मनाए जाते है। गुजराती पंचांग, राजस्थान पंचांग, कश्मीर, हरियाणा,हिमाचल प्रदेश आदि के पंचांग 1 नवंबर को दीपावली पर्व सिद्ध कर रहे हैं। गुजरात मे कृतिकादि गणना से नवीन संवत्सर कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को आरंभ होता है। इस वर्ष गुजरात मे नव संवत्सर 2 नवंबर को आरंभ होगा तदनुसार दीपावली 1 नवंबर को मनाई जाएगी। जैन परंपरा के अनुसार महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस दीपावली को ही मनाया जाता है। विभिन्न पंचांग कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष महावीर स्वामी का परिनिर्वाण दिवस 1 नवंबर को तथा परम्परा अनुसार दीपावली भी मनाई जाएगी।
दीपावली (कार्तिक अमा) प्रदोष (सूर्यास्त के बाद त्रिमुहूर्त) व्यापनि कार्तिक अमा के दिन दीपावली मनाने का विधान है। इस वर्ष 31अक्टूबर एवं 1 नवंबर 2024 को दोनों दिन अमा प्रदोष व्यापनि हैं। दोनों दिन प्रदोष मे अमा की व्याप्ति होने पर दूसरे दिन ही दीपावली मनाई जाएगी।
उक्तानुसार 1 नवंबर 2024 को दीपावली है। प्रतिष्ठित श्री मार्तण्ड पंचांग मे इस तथ्य को भलीभाँति बताया गया हैं।
सम्मानित श्री वेंकटेश्वर शताब्दि पंचांग में भी दीपावली 1 नवंबर को दिया गया हैं। इस विषय मे ज़न सामान्य मे प्रचलित नियम हैं कि नाग पंचमी, हरितालिका व्रत और दीपावली एक ही वार मे मनाए जाते हैं। इस वर्ष नाग पंचमी एवं हरितालिका क्रमशः दिनाँक 9 अगस्त, 6 सितम्बर शुक्रवार को पड़ चुके हैं और 1 नवंबर को शुक्रवार हैं इस आधार पर भी 1 नवंबर को दीपावली मनाना चाहिए।
1 नवंबर 2024 को दीपावली होने की स्थिति में 30 अक्टूबर को धनतेरस 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा तथा 3 नवंबर को यम द्वितीया चित्रगुप्त पूजा होगी।
1 नवंबर लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 06:20 से 08:15 तथा 08:50 से 10:28 तक

24/09/2024

🌺🌺श्राद महिमा 🌺🌺
वराह पुराण के अनुसार चारों वर्णों के लोग श्राद्ध के अधिकारी हैं 18सितंबर से श्राद्ध प्रारंभ है और 2अक्टूबर2024 तक श्राद्ध पक्ष चलेगा
तर्पण कराएं यज्ञ कराएं गौ सेवा करें पितरों की तिथि पर श्राद्ध तर्पण ब्राह्मण भोजन दान गोसेवा गंगा स्नान यज्ञ जरूर करना चाहिएl
काले तिल जौ ,गाय का दूध,गाय का घी,गाय की दही का विशेष महत्व है,कुशा का विशेष महत्व है
लोहे का बर्तन का प्रयोग बिल्कुल ना करें जलाशय में जाकर जल की एक बूंद भी पितरों को श्रद्धा से अर्पित कर दें तो वह संतुष्ट होकर आशीर्वाद दे देते हैl
वराह पुराण कहता है यदि व्यक्ति साधन हीन है और कहीं बन प्रदेश में है तो दोनों हाथ उठाकर पितरों को अपनी स्थिति बताकर श्रद्धा समर्पण कर दे तब भी पित्र प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं
वशिष्ठ सूत्र और नारद पुराण के अनुसार गया में श्राद्ध का बहुत महत्व है
स्कंद पुराण अनुसार बद्रिका आश्रम की गरुड़ शीला पर किया गया पिंड दान गया के बराबर माना जाता है
श्राद्ध में श्रद्धा का सर्वाधिक महत्व है पितृपक्ष में पितरों के निमित्त भागवत पुराण कथा कराएं भागवत कथा सुने गोकर्ण जी ने धुंधकारी की मुक्ति के लिए भागवत कथा का आयोजन किया था
पितृपक्ष पित्र पूजा 18सितंबर से2अक्टूबर 2024 तक रहेगी पित्र पूजा हिंदू सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है
जब हम अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करें तर्पण करें पिंड दान करें पितृ गायत्री जाप करें पित्र पूजा में चांदी के बर्तन विशेष महत्वपूर्ण होते हैं काले तिल और कुशा का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है तुलसापत्र अनिवार्य है ब्राह्मण भोजन गौमाता को भोजन स्वान को भोजन कौवा को भोजन चीटियों को भोजन अग्नि ग्रास मुख्य है गाय का दूध गाय का घी का प्रयोग करें पितरों के निमित्त हवन करें दान करें
लगातार 16 दिन गौ माता की सेवा करें लगातार 16 दिन पीपल पर जाएं परिक्रमा करें जल चढ़ाएं दक्षिण दिशा में लगातार जलाजली दें नाम गोत्र का उच्चारण करते हुए ब्राह्मण द्वारा पित्र तिथि पर संकल्प द्वारा तर्पण अवश्य कराये
अपने पितरों के निमित्त वृक्षारोपण करें पीपल का वृक्ष का रोपण करें वट वृक्ष का रोपण करें तुलसी वृक्ष का रोपण करें पित्र दोष समाप्त होता है
तीर्थ स्थान पर जाने का भी महत्व है गंगा स्नान का भी महत्व है तीर्थ स्थानों पर पिंडदान तर्पण ब्राह्मण भोजन कराने का विशेष महत्व है
गीता का पाठ रोज करें भागवत पुराण का पाठ करें सात्विक भोजन करें गंगाजल का रोज पान करें शुद्ध ब्रह्मचर्य का पालन करें पितरों की कृपा प्राप्त होगी
जन्म कुंडली में सूर्य नारायण राहु के साथ होंगे तो पिता का दोष चंद्रमा राहु के साथ होंगे तो माता का दोष मंगल राहु के साथ होंगे तो भ्राता का दोष बुध और राहु एक साथ होंगे तो बहन बेटी बुआ का दोष बृहस्पति राहु के साथ होंगे तो गुरु का दोष यह किसी साधु संत का दोष शुक्र राहु के साथ होंगे तो स्त्री जाति का दोष शनि राहु की युति होगी तो प्रेत बाधा होगी इन सब का उपाय भी जरूर कराएं
यह पित्र दोष माना जाता है मुख्य ग्रह राहु केतु शनि से पीड़ित होंगे तो पितृदोष जरूर होगा
ओम शांति 🌺🌺🌺🌺

18/09/2024

*खलील जिब्रान की प्रसिद्ध कहानी*

एक मछली बेचने वाली औरत गांव से शहर मछली बेचने आई। मछलियां बेच कर जब लौटती थी तो अचानक बाजार में उसे बचपन की एक सहेली मिल गई। वह सहेली अब मालिन हो गई थी। उस मालिन ने कहा, आज रात मेरे घर रुको! कल सुबह होते ही चले जाना। कितने वर्षों बाद मिले, कितनी-कितनी बातें करने को हैं!

मछली बेचने वाली औरत मालिन के घर रुकी। मालिन का घर बगिया से घिरा हुआ। फिर पुरानी सहेली की सेवा मालिन ने खूब दिल भर कर की। और जब सोने का समय आया तो, मालिन इसके पहले कि वह सोती, बगिया में गई, चांद निकला था, बेला के सफेद फूल खिले थे, उसने फूलों की झोली भर ली और फूलों का ढेर अपनी सहेली उस मछली बेचने वाली औरत के पास आकर लगा दिया, कि रात भर बेला के फूलों की सुगंध! लेकिन थोड़ी देर बाद मालिन परेशान हुई, क्योंकि मछली बेचने वाली औरत सो ही नहीं रही, करवट बदलती है बार-बार। पूछा कि क्या नींद नहीं आ रही है?

उसने कहा, क्षमा करो, ये फूल यहां से हटा दो। और मेरी टोकरी, जिसमें मैं मछलियां लाई थी, उस पर जरा पानी छिड़क कर मेरे पास रख दो।
मालिन ने कहा, तू पागल हो गई है?

उसने कहा, मैं पागल नहीं हो गई। मैं तो एक ही सुगंध जानती हूं: मछलियों की। और बाकी सब दुर्गंध है।

*भीड़ मछलियों की गंध को जानती है। उससे परिचित है। शास्त्रों के पिटे-पिटाए शब्द दोहराए जाएं तो भीड़ उनसे राजी होती है, क्योंकि बाप-दादों से वही सुने हैं, पीढ़ी-दर-पीढ़ी वही सुने हैं। सुनते-सुनते उनके कान भी पक गए हैं। वे ठीक लगते हैं।*

मैं उनसे वह कह रहा हूं जो मेरी प्रतीति है, मेरा अनुभव है।
और मजा यह है कि मैं उनसे वह कह रहा हूं जो कि शास्त्रों की अंतर्निहित आत्मा है। मगर शास्त्रों के शब्द मैं उपयोग नहीं कर रहा हूं। शब्द तो पुराने पड़ गए। शब्द तो बदल दिए जाने चाहिए। अब तो हमें नये शब्द खोजने होंगे। हर सदी को अपने शब्द खोजने होते हैं। हर सदी को अपने धर्म के लिए पुनः-पुनः अवतार देना होता है। हर सदी को अपनी अभिव्यक्ति खोजनी होती है।

तो मैं वही कह रहा हूं जो बुद्ध ने कहा, कृष्ण ने कहा, मोहम्मद ने कहा, जीसस ने कहा; लेकिन अपने ढंग से कह रहा हूं। मैं बीसवीं सदी का आदमी हूं। मैं चाहूं भी तो कृष्ण की भाषा नहीं बोल सकता। कृष्ण की भाषा अब किसी अर्थ की भी नहीं है। सार्थक थी उस दिन जिस दिन अर्जुन से कृष्ण बोले थे। आज न तो अर्जुन है, न कुरुक्षेत्र है, न महाभारत हो रहा है। आज कृष्ण की गीता पर अगर कुछ कहना भी हो तो बीसवीं सदी की भाषा में कहना होगा। और *तुम्हारी आदत शब्दों को पकड़ने की है, आत्मा को पहचानने की नहीं।*

तो भीड़ मेरे नये शब्दों से परेशान है, मेरी नई दृष्टि से परेशान है। जो समझ सकते हैं, वे तो तत्क्षण पहचान लेते हैं कि मैं वही कह रहा हूं जो सदा कहा गया है। भाषा भिन्न है, भाव भिन्न नहीं है। अभिव्यंजना भिन्न है। शायद मेरा वाद्य भिन्न है, मगर जो गीत मैं गा रहा हूं वह शाश्वत का गीत है, सनातन गीत है। उसके अतिरिक्त कोई गीत ही नहीं है। मैं तो हूं भी नहीं, परमात्मा जो गा रहा है उसे ही बिना बाधा डाले तुम तक पहुंच जाने दे रहा हूं। मगर भीड़ की अपनी आदतें हैं।

जो कारागृहों में रहने के आदी हो गए हैं, उन्हें मुक्त करना आसान नहीं। *जो अंधविश्वासों में जीने के आदी हो गए हैं, उनको उनके बाहर लाना आसान नहीं।* जिन्होंने कुछ पक्षपात निर्मित कर लिए हैं, पक्षपात ही जिनके प्राण बन गए हैं, उनसे उनके पक्षपात छीनना आसान नहीं। मेरे हाथ लहूलुहान होंगे।

ओशो : प्रेम-पंथ ऐसो कठिन

08/04/2024

आज 8 अप्रैल 2024 चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या सोमवार को सूर्य ग्रहण भारतीय स्टैंडर्ड समय के अनुसार रात्रि 9:12 से देर रात 2:22 तक होगा लेकिन भारत में नहीं दिखाई देने के कारण इसका कोई भी सूतक पातक तथा धार्मिक महत्व नहीं है इसलिए किसी प्रकार की कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है

22/09/2023

*श्राद्ध किस लिए करना है?*

क्या हमारे ऋषि मुनि पागल थे?
जो कौवौ के लिए खीर बनाने को कहते थे?
और कहते थे कि कव्वौ को खिलाएंगे तो हमारे पूर्वजों को मिल जाएगा?
नहीं, हमारे ऋषि मुनि क्रांतिकारी विचारों के थे।
*यह है सही कारण।*

तुमने किसी भी दिन पीपल और बड़ के पौधे लगाए हैं?
या किसी को लगाते हुए देखा है?
क्या पीपल या बड़ के बीज मिलते हैं?
इसका जवाब है ना.. नहीं....
बड़ या पीपल की कलम जितनी चाहे उतनी रोपने की कोशिश करो परंतु नहीं लगेगी।
कारण प्रकृति/कुदरत ने यह दोनों उपयोगी वृक्षों को लगाने के लिए अलग ही व्यवस्था कर रखी है।
यह दोनों वृक्षों के टेटे कव्वे खाते हैं और उनके पेट में ही बीज की प्रोसेसीग होती है और तब जाकर बीज उगने लायक होते हैं। उसके पश्चात
कौवे जहां-जहां बीट करते हैं वहां वहां पर यह दोनों वृक्ष उगते हैं
पिपल जगत का एकमात्र ऐसा वृक्ष है जो round-the-clock ऑक्सीजन O2 छोड़ता है और बड़ के औषधि गुण अपरम्पार है।
देखो अगर यह दोनों वृक्षों को उगाना है तो बिना कौवे की मदद से संभव नहीं है इसलिए कव्वे को बचाना पड़ेगा।
और यह होगा कैसे?
मादा कौआ भादर महीने में अंडा देती है और नवजात बच्चा पैदा होता है।
तो इस नयी पीडी के उपयोगी पक्षी को पौष्टिक और भरपूर आहार मिलना जरूरी है इसलिए ऋषि मुनियों ने
कव्वौ के नवजात बच्चों के लिए हर छत पर श्राघ्द के रूप मे पौष्टिक आहार
की व्यवस्था कर दी।
जिससे कि कौवौ की नई जनरेशन का पालन पोषण हो जायें.......

इसलिए दिमाग को दौड़ाए बिना श्राघ्द करना प्रकृति के रक्षण के लिए और
घ्यान रखना जब भी बड़ और पीपल के पेड़ को देखो तो अपने पूर्वज तो याद आयेगे ही क्योंकि उन्होंने श्राद्ध दिया था इसीलिए यह दोनों उपयोगी पेड़ हम देख रहे हैं।

 #हरिद्वार #गंगा स्नान #आमावस्या #भादो #सितम्बर2023हर हर गंगा
14/09/2023

#हरिद्वार #गंगा स्नान #आमावस्या #भादो #सितम्बर2023
हर हर गंगा

16/07/2023

*राजनैतिक सफलता के कुछ विशेष योग -*

1. यदि सूर्य स्व या उच्च राशि (सिंह, मेष) में होकर केंद्र, त्रिकोण आदि शुभ भावो में बैठा हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।

2. सूर्य दशम भाव में हो या दशम भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।

3. सूर्य यदि मित्र राशि में शुभ भाव में हो और अन्य किसी प्रकार पीड़ित ना हो तो भी राजनैतिक सफलता मिलती है।

4. शनि यदि स्व, उच्च राशि (मकर , कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ स्थानों में बैठा हो तो राजनीती में अच्छी सफलता मिलती है।

5.यदि चतुर्थेश चौथे भाव में बैठा हो या चतुर्थेश की चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति को विशेष जनसमर्थन मिलता है।

6. चतुर्थेश का स्व या उच्च राशि में होकर शुभ स्थानं में होना भी राजनैतिक सफलता में सहायक होता है।

7. बृहस्पति यदि बलि होकर लग्न में बैठा हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।

8. दशमेश और चतुर्थेश का योग हो या दशमेश चतुर्थ भाव में और चतुर्थेश दशम भाव में हो तो ये भी राजनीती में सफलता दिलाता है।

9. सूर्य और बृहस्पति का योग केंद्र ,त्रिकोण में बना हो तो ये भी राजनैतिक सफलता दिलाता है।

10. बुध-आदित्य योग (सूर्य + बुध) यदि दशम भाव में बने और पाप प्रभाव से मुक्त हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।

विशेष - कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव बलि होने के बाद व्यक्ति को राजनीति में किस स्तर तक सफलता मिलेगी यह उसकी पूरी कुंडली की शक्ति और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है।
जिन लोगो की कुंडली में सूर्य नीच राशि (तुला) में हो राहु से पीड़ित हो अष्टम भाव में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो राजनीति में सफलता नहीं मिल पाती या बहुत संघर्ष बना रहता है। शनि पीड़ित या कमजोर होने से ऐसा व्यक्ति चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो पाता, कमजोर शनि वाले व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य बलि हो तो संगठन में रहकर सफलता मिलती है।

उपाय - राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिए-

1. आदित्य हृदय स्तोत्र का रोज पाठ करें।

2. सूर्य को रोज जल अर्पित करें।

3. ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें। ..............

।।श्री हनुमते नमः।।

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