The Society of Company Secretaries of India

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02/12/2022
02/12/2022

भारतीय अर्थव्यवस्था,
स्वतंत्र निदेशकों के लिये नए मानदंड,
एक कंपनी में स्वतंत्र निदेशकों का महत्त्व एवं उनसे संबंधित सेबी के दिशा-निर्देश

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित कड़े मानदंडों को मंज़ूरी दे दी है और अन्य उपायों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिये एक रूपरेखा प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है।

सेबी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार स्थापित एक वैधानिक निकाय है। सेबी का मूल कार्य प्रतिभूतियों में निवेशकों के हितों की रक्षा करना तथा प्रतिभूति बाज़ार को बढ़ावा देने के साथ ही इसे विनियमित करना है।
प्रमुख बिंदु:
स्वतंत्र निदेशक:

शेयरधारकों द्वारा पारित एक विशेष प्रस्ताव के माध्यम से ही स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति की जा सकती है। एक विशेष प्रस्ताव को पारित होने के पक्ष में 75% मतों की आवश्यकता होती है।
नियामक ने स्वतंत्र निदेशक बनने के लिये आवश्यक कौशल प्रकटीकरण आवश्यकताओं को भी विस्तृत और मज़बूत किया है।
निदेशक मंडल की नामांकन और पारिश्रमिक समिति, जो नियुक्तियों और मुआवजे से संबंधित निर्णय लेती है एवं लेखा परीक्षा समिति में अब साधारण बहुमत की तुलना में दो-तिहाई स्वतंत्र निदेशक होने चाहिये।
संबंधित पार्टी के सभी लेन-देन (एक कंपनी और उसकी संबंधित संस्थाओं के बीच) को ऑडिट समिति में केवल स्वतंत्र निदेशकों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
साथ ही एक सूचीबद्ध कंपनी को एक स्वतंत्र निदेशक के त्यागपत्र का खुलासा करना आवश्यक होगा।
साथ ही एक स्वतंत्र निदेशक के लिये एक ही कंपनी/होल्डिंग/सहायक/सहयोगी कंपनी या प्रमोटर समूह से संबंधित किसी भी कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक के रूप में संक्रमण के लिये एक वर्ष की ‘कूलिंग अवधि’ होगी।
स्वतंत्र निदेशक
स्वतंत्र निदेशक (जिसे प्रायः बाह्य निदेशक के रूप में भी जाना जाता है) अल्पसंख्यक शेयरधारकों का प्रतिनिधित्व करने वाले निदेशक मंडल में शामिल एक निदेशक होता है और जिसका कंपनी या संबंधित व्यक्तियों के साथ कोई आर्थिक संबंध (बैठक शुल्क के अतिरिक्त) नहीं होता है।
स्वतंत्र निदेशक का प्राथमिक कार्य स्वतंत्र पक्ष लेना होता है, ताकि बहुसंख्यक शेयरधारकों पर नियंत्रण और संतुलन स्थापित किया जा सके, जो कंपनी को अनुचित जोखिमों में डाल सकता है।
कंपनी अधिनियम, 2013 ने सभी सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों के लिये कुल निदेशकों में से कम-से-कम एक-तिहाई को स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य किया है।
स्वतंत्र निदेशक के तौर पर उनकी भूमिका उन्हें सैंद्धांतिक होने को मजबूर करती है, वहीं व्यवसाय उनसे व्यावहारिक होने की उम्मीद करता है, जिसके कारण उनके लिये संतुलन स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होता है।
​मान्यता प्राप्त निवेशक

सेबी ने समृद्ध एवं जानकार निवेशकों की इस नई श्रेणी को मंज़ूरी दी है, जिन्हें जोखिम वाले उत्पादों में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी, जबकि आमतौर पर निजी व्यक्तियों को इसकी अनुमति नहीं दी जाती है।
ये संस्थाएँ (मान्यता प्राप्त निवेशक) व्यक्ति, पारिवारिक ट्रस्ट, स्वामित्व आदि हो सकती हैं।
उन्हें सेबी के नियमों में अनिवार्य न्यूनतम राशि से कम निवेश करने की छूट दी जाएगी और कुछ हद तक नियामक आवश्यकताओं से छूट भी मिलेगी।
यह ‘वैकल्पिक निवेश कोष’ (AIFs) के आकर्षण को बढ़ाएगा।
‘वैकल्पिक निवेश कोष’ का आशय भारत में स्थापित किसी भी ऐसे फंड से है, जो अपने निवेशकों के लाभ के लिये एक परिभाषित निवेश नीति के अनुसार निवेश करने हेतु परिष्कृत निवेशकों, चाहे भारतीय हो या विदेशी, से धन एकत्र करता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण परिवर्तन:

विभिन्न भुगतान माध्यमों का उपयोग करके निवेशकों को सार्वजनिक/अधिकार के मुद्दों में भाग लेने हेतु आसान पहुँच प्रदान करने तथा सेबी ने अनुसूचित बैंकों के अलावा अन्य बैंकों को ऐसे मुद्दों के लिये बैंकर के रूप में कार्य करने की अनुमति देने का भी निर्णय लिया है।
प्रारंभिक और अनुवर्ती सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण के विपरीत राइट्स इश्यू आम जनता हेतु नहीं बल्कि कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों के लिये खुला है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध नियमन के तहत सूचना देने वालों के लिये इनाम की राशि को 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर अधिकतम 10 करोड़ रुपए कर दिया है।
इनसाइडर ट्रेडिंग में किसी सार्वजनिक कंपनी के स्टॉक में किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा व्यापार करना शामिल है जिसके पास किसी भी कारण से उस स्टॉक के बारे में गैर-सार्वजनिक, भौतिक जानकारी है।
नियामक ने अपने म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन को भी मंज़ूरी दे दी है, जिसके लिये परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (AMC) को जोखिम वाली योजनाओं (नए फंड) में अधिक धन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है।
वर्तमान में AMC को नए फंड ऑफर में एकत्रित की गई राशि का केवल 1% या 50 लाख रुपए, जो भी कम हो, का निवेश करना होता है।
नए मानदंड 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी होंगे।
महत्त्व:

ये परिवर्तन कॉर्पोरेट गवर्नेंस के कार्यों को मज़बूत करने के साथ-साथ अधिक निवेशकों को आकर्षित करना चाहते हैं।
यह कॉरपोरेट कार्यालय (Boardroom) में अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हित को बनाए रखने में मदद करेगा जहाँ उनका प्रतिनिधित्व न्यूनतम है।
आशा है कि इसके माध्यम से स्वतंत्र निदेशक वास्तव में 'स्वतंत्र' हो सकेंगे और उनके पास केवल नाम की स्वतंत्रता नहीं होगी।

Ref: Dristi IAS

05/05/2022
24/11/2021
https://youtu.be/ye-IswYynzQ
14/09/2021

https://youtu.be/ye-IswYynzQ

Dr Vinay Kumar VermaProfessor at SHRI RAMAKRISHNA Group OF INSTITUTIONS, M.COM, MBA, PH.D.(CA,CS,CMA INTER)CCP,CCD,CCSRP...................B.Com, M.Com, BBA...

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