Gabbar Singh ayurvedic medicin shops

Gabbar Singh ayurvedic medicin shops Ayurvedic medicine shops Mera pass Har Tarah Ki Ayurvedic Shuddh walon ki jadi buti dwara Har Tarah

*🙏🌹🌹अनमोल वचन🌹🌹🙏*         *जब पानी उबलता है तो*               *हम उसमें अपना*       *प्रतिबिम्ब नहीं देख सकते हैं*      ...
04/03/2023

*🙏🌹🌹अनमोल वचन🌹🌹🙏*

*जब पानी उबलता है तो*
*हम उसमें अपना*
*प्रतिबिम्ब नहीं देख सकते हैं*
*और शांत पानी में*
*हम खुद को देख सकते हैं*
*ठीक वैसे ही अगर हमारा*
*हृदय शांत रहेगा तो*
*हमारी आत्मा के*
*वास्तविक स्वरूप को*
*हम देख सकेंगे।*
🙏🌹🌹🌹🙏

*जिंदगी गुजारने के दो तरीके हैं*
*जो पसंद है उसे हासिल कर लो या*
*जो हासिल है उसे पसंद कर लो।*

*🙏🌹🌹
🌹🌹🙏*

Gabbar Singh Nijanand Parnami

WhatsApp Group Invite

17/12/2021
17/11/2021

🎄🌲🎄🌲🎄🌲🎄🌲

*!!प्राणाधार साथजी !!*

*ए माया छे अति बलवंती,ऊपनी छे मूल धनी थकी।*

*मुनिजनने मनाव्या हार,शिव ब्रह्मादिक न लहे पार।।*
(रास १/४)
इस माया की शक्ति बहुत अधिक है।माया की उतपति धाम धनी के आदेश/हुक्म से
हुई है।बड़े-बड़े ऋषि मुनियों,तपस्वियों ने माया से हार मान ली है।शिव जी तथा ब्रह्मादि आदि देवता भी माया की शक्ति का पार नहीं पा सके है।
माया का मूल स्थान अव्याकृत का महाकारण (सुमंगला पुरुष) है।

*एहना आऊध अमृत रूप रस, छल बल वल अकल।अगिनकुटिल ने कोमल,*
*चंचल चतुर चपल।।*
(रास १/९)

शब्द,स्पर्श,रूप,रस और गंध ये माया के ऐसे हथियार है,जो जीव को अमृत समान प्रिय लगते है।इनका छल रूपी बल इतना टेढ़ा होता है की जीव कि बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है।यह माया कुटिल
हदय वाली उस गणिका के समान है।जो अपने कोमल अंगों और चंचल नेत्रों के चतुराई भरे चपल हाव-भाव से जीव को अपने मोहजाल में फंसा लेती है और जीव के अंदर इन पांच विषयों के सुखों की तृष्णा रूपी अग्नि पैदा करके अपने बंधन में बांधे रखती है।

साथजी,जब तक इस माया के मोहपाश से छूट नहीं जाते तब तक मायाकी आशक्ति मिटती नहीं है।अनाशक्त भाव आने से ध्यान,चितवन हो सकता है।
।।प्रणामजी।।
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

18/10/2021

Parnanmji

08/10/2021

आदरणीय साथ जी प्रणाम,
साथ जी आइये कुछ अनमोल मोती श्री खुलासा ग्रन्थ से...
साथ जी खुलासा उर्दू शब्द है, जिसका अर्थ है किसी गूढ़ रहस्य को खोलकर बताना।

अलग अलग धर्मो में नाना प्रकार के कथानक है,जिसे श्री प्राणनाथ जी ने इस ग्रन्थ के माध्यम से उन रहस्यों को उजागर किया है।

धनी जी के जोश से उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया की सभी धर्मो में एकता की बातें दिखाई देती है।सब उस परम पिता परमेश्वर के अंश है,उनकी संतान है,तो क्या ऐसा हो सकता है कि एक को वह अपना सही ज्ञान दें और दूसरे को गलत;
"यों लड़के सब जुदा हुए,पर खसम न होवे दोय"

इसलिए निश्चित ही हमारे समझने के ढंग में कही कोई दोष है।प्राणनाथ जी ने इस विषय पर गहराई से चिंतन किया और राज जी से इच्छा व्यक्त की कि उन्हें सही ज्ञान दिया जाये।

अनूप शहर में महामति प्राणनाथ जी को तीन दिन तक भावावेश रहा,और उस समाधी स्थिति में उन्हें बहुत से गहरे रहस्य प्रकट हुए।
वैसे तो अनेक बार अलग अलग धर्मो के विद्वानों ने मिलकर मिलकर धर्मो के गूढ़ तत्वों को मिलान कर समझने की कोशिश की पर नाकाम रहे।
इसका मिलान कैसे हो इसका किसी को ज्ञान नहीं हुआ।
परंतु इस अबूझ रहस्य का ज्ञान महामति जी को उस तीन दिन की भाव समाधी में हो गया था।
धाम धनी अक्षरतीत के जोश से उन्हें यह दिव्य ज्ञान हुआ की कृष्ण-क्राइस्ट-मुहम्मद जैसे शब्द अक्षर ब्रम्ह की एक शक्ति के वाचक है।
ये तीनो शब्द उस एक शक्ति के लिए अलग अलग भाषा में नाम है।
चूँकि यह सृष्टि परब्रम्ह परमात्मा की इच्छा से उपजी है,तो उनकी यह इच्छा इस सृष्टि में हुकम स्वरुप कहलाती है।
तौरेत उसे अंग्रेजी में वर्ड कहती है।
बाइबल उसे ईसा कहती है।
ब्रम्ह वैवर्त पुराण और महाभारत उसे कृष्ण कहते है।
बौद्ध उसे बोधिसत्व कहते है।
यहूदी उसे रुहुलकुदस कहते है।
और कुरान उसे नूर मोहम्मद कहता है।

श्री जी साहेब जी मेहरबान जी प्रणाम जी गब्बर सिंह प्रणाम जी साहेब जी

08/10/2021

Parnamji

16/02/2021

🙏💚🙏💚🙏💚
प्रणामजी

*यदि यह कहा जाय*
*कि श्री प्राणनाथ जी*
*सवँज्ञ है* *तो दील्ही*
*में बाईस प्रश्नो की*
*पत्री को फारसी में*
*अनुवाद कराने तथा*
*तफसीर हुसेनी को*
*सुनने के लिये* *कायममुल्ला की*
*सहायता कयु लेनी* *पडी ?*
इसके उत्तर में यही
कहा जा सकता हे कि प्रकृति की मयादा
निभाने के लिए ही
श्री जी ने स्वंय को
चमकारों से दूर रखने
का प्रयास किया ताकि वे अपने स्वरुप
को कुछ सीमा तक
छिपाये रख सके।
यदि वे स्वंय बाईस प्रश्नो
की टीका कर उनकी
अलौकिक शकित से
प्रभावित होकर वे
सुन्दरसाथ भी अपना
सवँस्व त्याग करने के
लिये तैयार हो जाते
जो दिल्ली मैं औरंगजेब को पैगाम
देने के समय छोडकर
चले गये थे।इससे
उनके ईमान की परीक्षा नही हो सकती
थी।दुसरा उस टीका
पर संशय भी खडा
किया जा सकता था
कि श्री प्राणनाथ जी
स्वंय अपने मुख से
अपनी प्रशंसा करके
स्वंय
को इमाम महदी धोषित करना
चाहते है।

*अवव्ल खां जिन्होंने*
*चाबुक से अपने शरीर*
*को प्रताडित करना* *कयु*
*शरू कर दिया ?*
अवल्ल खां को इमाम
महेदी की पेहचान करने में इतनी देर कयों की।

*जहान महंमद श्री*
*प्राणनाथजी चरणों*
*में आने पर* *सुन्दरसाथ को कया*
*कहता है ?*
जहान महंमद सभी
प्रठानों को कुरान की
तालीम देता था।श्री जी के चरणों में आने
वह उन्हे अल्लाह तआला के
रुप में मानते हुए कहता है।
" *मै तो साहिब देखिया,*
*जाहिर अपने नैन।* *तहां खतरा होत है,*
*ए मुखथे कहो न बैन।।* "
(वितक -५३ चो-११३)गब्बर सिंह प्रमाण जी सुन्दर साथ जी प्रमाण जी श्री जी साहेब जी मेहरबान प्रमाण जी

01/05/2020

सहारनपुर

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