19/06/2023
माँ याद आ जाती है ,
हाँ कभी भी
एक माँ बेटे को हाथ पर चुम्बन देकर
ट्रेन की सिटी बजने पर बिदा दे रही थी
ओर माँ का मीठा सा हाथ पर चुम्बन
मुझे भी याद आ गया
फ़िल्म में धूप में सूखते हुए अचार ओर अचार को कौवा चोंच में दबाकर उड़ गया का सीन देखकर
माँ के अचार बनाते हुए तमाम दृश्य याद आने लगे
हमें बोलती थी ध्यान रखना पंछी आए तो
वो उसके लिए अलग से रखा है वो खाने देना
इधर आए तब ही उड़ाना बेटा
उनका भी तो हक़ है ना हम पर
पत्नी अपनी बड़ी बहन को बोल रही थी
दीदी छोटे बच्चों के कुछ पुराने कपड़े निकले तो
मुझे भेज देना ना मेरी बाई के दो प्यारे बच्चे है
उन्हें दे दूँगी तो ख़ुश होंगे
माँ भी अपनी छोटी बहन से ऐसे ही हमारी काम वाली काकी के बच्चों के लिए कपड़े देने
ओर ख़ुद की साड़ियाँ उनकी बाई के लिए
ले जाने का बोलती थी
उनकी फ़ोन पर बात सुनकर माँ की याद आ ही गई
माँ ऐसे ही
हर बात में याद आ जाती है मुझे तो
कभी भी , कही भी ..
-लक्ष्मण पार्वती पटेल
-कहानी वाला
#कहानीवाला