26/11/2020
जानें प्रवासी मजदूरों के 'फरिश्ते' सोनू सूद के संघर्ष की कहानी
सोनू सूद कुशल अभिनेता के साथ - साथ एक दयालू व्यक्ति और जिम्मेंदार नागरिक भी हैं। पर्दे पर इनका अभिनय तो सभी ने देखा ही है, परतुं लॉकडाउन में इन्होने बढ़ चढ़कर सामाजिक दायित्व को संभाला है। इसके अलावा अनाज़ तथा धन से भी लॉकडाउन में बच्चों तथा लोगों को काफी मदद की है। हालांकि इनकी भी ज़िंदगी बहुत सरल नहीं थी, हर व्यक्ति को अपने जीवन में लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत तथा संघर्ष करना पड़ता है। तो आइए नज़र डालते हैं आज उनकी कहानी पर।
सोनू का जन्म 30 जुलाई 1973 को पंजाब के मोगा में हुआ था, उनके पिता एक एंटरप्रेन्योर थे और उनकी मां अध्यापिका थीं। सोनू को बचपन से ही एक्टर बनने की चाह थी। वहीं सोनू सूद की मां उन्हें कुछ अच्छा काम करते हुए देखना चाहती थी। इसलिए उन्होने अपने बेटे सोनू को इंजीनियरिंग करने के लिए सोनू को नागपुर भेज दिया। अपनी मां के कहने पर सोनू इंजीनियरिंग करने के लिए भी चले गए और Electronics engineer भी बन गए लेकिन उनके मन से
एक्टर बनने का कीड़ा नहीं निकला था। इसके बाद सोनू ने अपनी मां से विनती करते हुए कहा - मुझे एक साल दे दीजिए अगर मैं कुछ नहीं कर पाया तो मैं वापस आकर पापा के साथ कपड़े की दुकान संभाल लूंगा। बस फिर क्या था बेटे की बात को सुनकर उनकी मां भावुक हो उठी और उन्होंने अपने बेटे को मुंबई जाने को कह दिया।
मुंबई पहुंचने के बाद असली मायने में शुरू हुआ सोनू का संघर्ष, सोनू ने शुरूआती दिनों में एक फ्लैट में 5-6 लोगों के साथ रहने लगे। सोनू का बॉलीवुड फिल्मों में कोई गॉडफादर नहीं था, इसलिए उन्हें कही कोई काम नहीं मिल पा रहा था और हर जगह से उनको रिजेक्ट किए जा रहा था। काम की तलाश में सोनू लोकल ट्रेन पकड़कर रोज सफर किया करते। सोनू ने अपने इंस्टाग्राम पर साल 1998 का लोकल ट्रेन का पास भी शेयर किया हुआ है, जो कि बोरीवली से चर्चगेट तक का है।
काम की तलाश में सोनू अपनी तस्वीरें आये दिन कही न कही भेजते रहते थे, ताकि कोई तो उनको ऑडिशन के लिए बुला ले। एक दिन अचानक सोनू को कॉल कि साउथ इंडियन फिल्म के लिए उन्हें सेलेक्ट कर लिया गया है, तो आप ऑडिशन के लिए आ जाइए। फिर क्या था सोनू समय से वहां पहुंच गए। ऑडिशन के दौरान डायरेक्टर प्रोड्यूसर ने उनसे शर्ट उतारने के लिए कहा, इसके बाद उन्होंने शर्ट उतार दी। जिसके बाद उनकी बॉडी की खूब तारीफ की गई और उनको साउथ फिल्म के लिए सेलेक्ट कर लिया गया। इसके बाद भी लगातार 4-5 तेलुगू और तमिल फिल्मों में ही मौका मिला, फिर साल 2001 में आखिरकार बॉलिवुड ने उनके लिए दरवाजा खोल दिया और सोनू को बॉलिवुड फिल्म 'शहीद-ए-आजम', में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में सोनू भगत सिंह की भूमिका में नजर आए थे। इस फिल्म को करने के बाद सोनू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ते चले गए।