22/10/2020
दिव्यांग के बाद भी मलाथी कृष्णामूर्ति ने पैरा ओलंपिक में जीत हासिल कर किया भारत का नाम रोशन
जिंदगी के दो पहलू होते है, सुख और दुख, इसलिए लोगों को दोनों ही परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कई लोग ऐसे होते है,जो असफलता का दोष किस्मत को ही देते हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी शख्सियत के बारे में बताने जा रहे हैं,जिन्होंने लकवाग्रस्त होने के बावजूद भी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी और अपनी काबिलियत के दम पर देश का नाम रोशन किया।
मलाथी कृष्णामूर्ति हॉला का जन्म 6 जुलाई 1958 को बंगलौर में हुआ। उनके पिता एक छोटा सा होटल चलाते थे तथा उनकी माँ घर संभालती थी। जब मलाथी 1 वर्ष की थी, तब उन्हें काफी तेज़ बुखार हुआ और उसकी वजह से उनके पूरे शरीर को लकवा मार गया। उनके पविवार वालों को उस वक़्त कुछ समझ ही नहीं आया कि उनकी बच्ची को अचानक से क्या हो गया। अपनी मासूम सी बच्ची को इस हालत में देखकर पूरे घर में सन्नाटा सा छा गया। लगातार 2 साल तक डॉक्टर्स मलाथी को बिजली के झटके देते रहे, इसके बाद उनके ऊपरी हिस्से में तो इसका प्रभाव पड़ा। परन्तु निचले हिस्से में बदलाव नहीं हो पाया, जिसकी वजह से वो बचपन में ही लकवाग्रस्त हो गई।
मगर मलाथी ने दिव्यांग होने के बाद भी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी कमज़ोरी को ही अपना हथियार बना लिया। मलाथी कृष्णमूर्ति ने ठान लिया चाहें कुछ भी हो जाए अब जिंदगी में कुछ बड़ा करना है। इसके बाद मालाथी ने अपनी इस कमज़़ोरी को अपनी ताकत बनाया और र्स्पोट्स को चुना। उनके लिए ये करना आसान नहीं था, लेकिन अपनी हिम्मत और परिवार के सहारे वो जिंदगी में आगे बढ़ती चली गई। उन्होंने रोज़ाना दौड़ना शुरू कर दिया, इस दौरान उन्हें काफी दर्द भी झेलनी पड़ती थी। अपने दर्द को पीछे छोड़ते हुए जब वे पैरा ओलंपिक में उतरी तो उन्होंने 200 मीटर, शॉटपुट, डिसकस और जेवेलिन थ्रो में गोल्ड जीता। होल्ला भारत की इंटरनेशनल पैरा एथलीट हैं,उन्हें अर्जुन और पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा जा चुका हैं।