Jyotish Gyan

Jyotish Gyan ज्योतिष विद्या के द्वारा समस्या समाध?

30/08/2020

* #पितृ_श्राद्ध_आरम्भ*
पूर्णिमा श्राद्ध - 2/9/20, बुधवार
1 प्रतिपदा श्राद्ध - 3/9/20 गुरुवार
2 द्वितीया श्राद्ध - 4/9/20 शुक्रवार
3 तृतीया श्राद्ध- 5/9/20 शनिवार
4 चतुर्थी श्राद्ध-6/9/20 रविवार
5 पंचमी श्राद्ध- 7/9/20 सोमवार
6 षष्ठी श्राद्ध-8/9/20 मंगलवार
7 सप्तमी श्राद्ध- 9/9/20 बुधवार
8 अष्टमी श्राद्ध- 10/9/20 गुरुवार
9 नवमी श्राद्ध- 11/9/20 शुक्रवार
10 दशमी श्राद्ध- 12/9/20 शनिवार
11 एकादशी श्राद्ध- 13/9/20 रविवार
12 द्वादशी श्राद्ध- 14/9/20 सोमवार
13 त्रयोदशी श्राद्ध- 15/9/20 मंगलवार
14 चतुर्दशी श्राद्ध- 16/9/20 बुधवार
15 सर्वपितृ अमावस श्राद्ध 17/9/20 गुरुवार

* े_प्रेत_या_पितर_रुष्ट_होने_के_लक्षण_और_उपाय*
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बहुत जिज्ञासा होती है आखिर ये पितृदोष है क्या? पितृ -दोष शांति के सरल उपाय पितृ या पितृ गण कौन हैं ?आपकी जिज्ञासा को शांत करती विस्तृत प्रस्तुति।

पितृ गण हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है ,क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है,पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है।

आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है ,वहाँ हमारे पूर्वज मिलते हैं अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं की इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढती है।

वहाँ से आगे ,यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को भेज कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है,लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है ,जो परमात्मा में समाहित होती है जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता मनुष्य लोक एवं पितृ लोक में बहुत सारी आत्माएं पुनः अपनी इच्छा वश ,मोह वश अपने कुल में जन्म लेती हैं।

* #पितृ_दोष_क्या_होता_है* ??
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हमारे ये ही पूर्वज सूक्ष्म व्यापक शरीर से अपने परिवार को जब देखते हैं ,और महसूस करते हैं कि हमारे परिवार के लोग ना तो हमारे प्रति श्रद्धा रखते हैं और न ही इन्हें कोई प्यार या स्नेह है और ना ही किसी भी अवसर पर ये हमको याद करते हैं,ना ही अपने ऋण चुकाने का प्रयास ही करते हैं तो ये आत्माएं दुखी होकर अपने वंशजों को श्राप दे देती हैं,जिसे "पितृ- दोष" कहा जाता है।

पितृ दोष एक अदृश्य बाधा है .ये बाधा पितरों द्वारा रुष्ट होने के कारण होती है पितरों के रुष्ट होने के बहुत से कारण हो सकते हैं ,आपके आचरण से,किसी परिजन द्वारा की गयी गलती से ,श्राद्ध आदि कर्म ना करने से ,अंत्येष्टि कर्म आदि में हुई किसी त्रुटि के कारण भी हो सकता है।

इसके अलावा मानसिक अवसाद,व्यापार में नुक्सान ,परिश्रम के अनुसार फल न मिलना , विवाह या वैवाहिक जीवन में समस्याएं,कैरिअर में समस्याएं या संक्षिप्त में कहें तो जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति और उसके परिवार को बाधाओं का सामना करना पड़ता है पितृ दोष होने पर अनुकूल ग्रहों की स्थिति ,गोचर ,दशाएं होने पर भी शुभ फल नहीं मिल पाते,कितना भी पूजा पाठ ,देवी ,देवताओं की अर्चना की जाए ,उसका शुभ फल नहीं मिल पाता।

पितृ दोष दो प्रकार से प्रभावित करता है

1.अधोगति वाले पितरों के कारण
2.उर्ध्वगति वाले पितरों के कारण

अधोगति वाले पितरों के दोषों का मुख्य कारण परिजनों द्वारा किया गया गलत आचरण,की अतृप्त इच्छाएं ,जायदाद के प्रति मोह और उसका गलत लोगों द्वारा उपभोग होने पर,विवाहादिमें परिजनों द्वारा गलत निर्णय .परिवार के किसी प्रियजन को अकारण कष्ट देने पर पितर क्रुद्ध हो जाते हैं ,परिवार जनों को श्राप दे देते हैं और अपनी शक्ति से नकारात्मक फल प्रदान करते हैं।

उर्ध्व गति वाले पितर सामान्यतः पितृदोष उत्पन्न नहीं करते ,परन्तु उनका किसी भी रूप में अपमान होने पर अथवा परिवार के पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन नहीं करने पर वह पितृदोष उत्पन्न करते हैं।

इनके द्वारा उत्पन्न पितृदोष से व्यक्ति की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति बिलकुल बाधित हो जाती है ,फिर चाहे कितने भी प्रयास क्यों ना किये जाएँ ,कितने भी पूजा पाठ क्यों ना किये जाएँ,उनका कोई भी कार्य ये पितृदोष सफल नहीं होने देता। पितृ दोष निवारण के लिए सबसे पहले ये जानना ज़रूरी होता है कि किस गृह के कारण और किस प्रकार का पितृ दोष उत्पन्न हो रहा है ?

जन्म पत्रिका और पितृ दोष जन्म पत्रिका में लग्न ,पंचम ,अष्टम और द्वादश भाव से पितृदोष का विचार किया जाता है। पितृ दोष में ग्रहों में मुख्य रूप से सूर्य, चन्द्रमा, गुरु, शनि और राहू -केतु की स्थितियों से पितृ दोष का विचार किया जाता है।

इनमें से भी गुरु ,शनि और राहु की भूमिका प्रत्येक पितृ दोष में महत्वपूर्ण होती है इनमें सूर्य से पिता या पितामह , चन्द्रमा से माता या मातामह ,मंगल से भ्राता या भगिनी और शुक्र से पत्नी का विचार किया जाता है।

अधिकाँश लोगों की जन्म पत्रिका में मुख्य रूप से क्योंकि गुरु ,शनि और राहु से पीड़ित होने पर ही पितृ दोष उत्पन्न होता है ,इसलिए विभिन्न उपायों को करने के साथ साथ व्यक्ति यदि पंचमुखी ,सातमुखी और आठ मुखी रुद्राक्ष भी धारण कर ले , तो पितृ दोष का निवारण शीघ्र हो जाता है।

पितृ दोष निवारण के लिए इन रुद्राक्षों को धारण करने के अतिरिक्त इन ग्रहों के अन्य उपाय जैसे मंत्र जप और स्तोत्रों का पाठ करना भी श्रेष्ठ होता है।

* #विभिन्न_ऋण_और_पितृ_दोष*
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हमारे ऊपर मुख्य रूप से 5 ऋण होते हैं जिनका कर्म न करने(ऋण न चुकाने पर ) हमें निश्चित रूप से श्राप मिलता है ,ये ऋण हैं : मातृ ऋण ,पितृ ऋण ,मनुष्य ऋण ,देव ऋण और ऋषि ऋण।

मातृ ऋण👉 माता एवं माता पक्ष के सभी लोग जिनमेंमा,मामी ,नाना ,नानी ,मौसा ,मौसी और इनके तीन पीढ़ी के पूर्वज होते हैं ,क्योंकि माँ का स्थान परमात्मा से भी ऊंचा माना गया है अतः यदि माता के प्रति कोई गलत शब्द बोलता है ,अथवा माता के पक्ष को कोई कष्ट देता रहता है,तो इसके फलस्वरूप उसको नाना प्रकार के कष्ट भोगने पड़ते हैं। इतना ही नहीं ,इसके बाद भी कलह और कष्टों का दौर भी परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता ही रहता है।

पितृ ऋण👉 पिता पक्ष के लोगों जैसे बाबा ,ताऊ ,चाचा, दादा-दादी और इसके पूर्व की तीन पीढ़ी का श्राप हमारे जीवन को प्रभावित करता है पिता हमें आकाश की तरह छत्रछाया देता है,हमारा जिंदगी भर पालन -पोषण करता है ,और अंतिम समय तक हमारे सारे दुखों को खुद झेलता रहता है।

पर आज के के इस भौतिक युग में पिता का सम्मान क्या नयी पीढ़ी कर रही है ?पितृ -भक्ति करना मनुष्य का धर्म है ,इस धर्म का पालन न करने पर उनका श्राप नयी पीढ़ी को झेलना ही पड़ता है ,इसमें घर में आर्थिक अभाव,दरिद्रता ,संतानहीनता ,संतान को विभिन्न प्रकार के कष्ट आना या संतान अपंग रह जाने से जीवन भर कष्ट की प्राप्ति आदि।

* #देव_ऋण* 👉 माता-पिता प्रथम देवता हैं,जिसके कारण भगवान गणेश महान बने |इसके बाद हमारे इष्ट भगवान शंकर जी ,दुर्गा माँ ,भगवान विष्णु आदि आते हैं ,जिनको हमारा कुल मानता आ रहा है ,हमारे पूर्वज भी भी अपने अपने कुल देवताओं को मानते थे , लेकिन नयी पीढ़ी ने बिलकुल छोड़ दिया है इसी कारण भगवान /कुलदेवी /कुलदेवता उन्हें नाना प्रकार के कष्ट /श्राप देकर उन्हें अपनी उपस्थिति का आभास कराते हैं।

* #ऋषि_ऋण* 👉 जिस ऋषि के गोत्र में पैदा हुए ,वंश वृद्धि की ,उन ऋषियों का नाम अपने नाम के साथ जोड़ने में नयी पीढ़ी कतराती है ,उनके ऋषि तर्पण आदि नहीं करती है इस कारण उनके घरों में कोई मांगलिक कार्य नहीं होते हैं,इसलिए उनका श्राप पीडी दर पीढ़ी प्राप्त होता रहता है।

* #मनुष्य_ऋण* 👉 माता -पिता के अतिरिक्त जिन अन्य मनुष्यों ने हमें प्यार दिया ,दुलार दिया ,हमारा ख्याल रखा ,समय समय पर मदद की गाय आदि पशुओं का दूध पिया जिन अनेक मनुष्यों ,पशुओं ,पक्षियों ने हमारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद की ,उनका ऋण भी हमारे ऊपर हो गया।

लेकिन लोग आजकल गरीब ,बेबस ,लाचार लोगों की धन संपत्ति हरण करके अपने को ज्यादा गौरवान्वित महसूस करते हैं। इसी कारण देखने में आया है कि ऐसे लोगों का पूरा परिवार जीवन भर नहीं बस पाता है,वंश हीनता ,संतानों का गलत संगति में पड़ जाना,परिवार के सदस्यों का आपस में सामंजस्य न बन पाना ,परिवार कि सदस्यों का किसी असाध्य रोग से ग्रस्त रहना इत्यादि दोष उस परिवार में उत्पन्न हो जाते हैं।

ऐसे परिवार को पितृ दोष युक्त या शापित परिवार कहा जाता है रामायण में श्रवण कुमार के माता -पिता के श्राप के कारण दशरथ के परिवार को हमेशा कष्ट झेलना पड़ा,ये जग -ज़ाहिर है इसलिए परिवार कि सर्वोन्नती के पितृ दोषों का निवारण करना बहुत आवश्यक है।

* #पितृों_के_रूष्ट_होने_के_लक्षण*
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पितरों के रुष्ट होने के कुछ असामान्‍य लक्षण जो मैंने अपने निजी अनुभव के आधार एकत्रित किए है वे क्रमशः इस प्रकार हो सकते है।

* #खाने_में_से_बाल_निकलना*
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अक्सर खाना खाते समय यदि आपके भोजन में से बाल निकलता है तो इसे नजरअंदाज न करें

बहुत बार परिवार के किसी एक ही सदस्य के साथ होता है कि उसके खाने में से बाल निकलता है, यह बाल कहां से आया इसका कुछ पता नहीं चलता। यहां तक कि वह व्यक्ति यदि रेस्टोरेंट आदि में भी जाए तो वहां पर भी उसके ही खाने में से बाल निकलता है और परिवार के लोग उसे ही दोषी मानते हुए उसका मजाक तक उडाते है।

* #बदबू_या_दुर्गंध*
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कुछ लोगों की समस्या रहती है कि उनके घर से दुर्गंध आती है, यह भी नहीं पता चलता कि दुर्गंध कहां से आ रही है। कई बार इस दुर्गंध के इतने अभ्‍यस्‍त हो जाते है कि उन्हें यह दुर्गंध महसूस भी नहीं होती लेकिन बाहर के लोग उन्हें बताते हैं कि ऐसा हो रहा है अब जबकि परेशानी का स्रोत पता ना चले तो उसका इलाज कैसे संभव है

* #पूर्वजों_का_स्वप्न_में_बार_बार_आना*
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मेरे एक मित्र ने बताया कि उनका अपने पिता के साथ झगड़ा हो गया है और वह झगड़ा काफी सालों तक चला पिता ने मरते समय अपने पुत्र से मिलने की इच्छा जाहिर की परंतु पुत्र मिलने नहीं आया, पिता का स्वर्गवास हो गया हुआ। कुछ समय पश्चात मेरे मित्र मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता को बिना कपड़ों के देखा है ऐसा स्‍वप्‍न पहले भी कई बार आ चुका है।

* #शुभ_कार्य_में_अड़चन*
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कभी-कभी ऐसा होता है कि आप कोई त्यौहार मना रहे हैं या कोई उत्सव आपके घर पर हो रहा है ठीक उसी समय पर कुछ ना कुछ ऐसा घटित हो जाता है कि जिससे रंग में भंग डल जाता है। ऐसी घटना घटित होती है कि खुशी का माहौल बदल जाता है। मेरे कहने का तात्‍पर्य है कि शुभ अवसर पर कुछ अशुभ घटित होना पितरों की असंतुष्टि का संकेत है।

* े_किसी_एक_सदस्य_का_कुंवारा_रह_जाना*
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बहुत बार आपने अपने आसपास या फिर रिश्‍तेदारी में देखा होगा या अनुभव किया होगा कि बहुत अच्‍छा युवक है, कहीं कोई कमी नहीं है लेकिन फिर भी शादी नहीं हो रही है। एक लंबी उम्र निकल जाने के पश्चात भी शादी नहीं हो पाना कोई अच्‍छा संकेत नहीं है। यदि घर में पहले ही किसी कुंवारे व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है तो उपरोक्त स्थिति बनने के आसार बढ़ जाते हैं। इस समस्‍या के कारण का भी पता नहीं चलता।

* #मकान_या_प्रॉपर्टी_की_खरीद_फरोख्त_में_दिक्कत_आना*
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आपने देखा होगा कि कि एक बहुत अच्छी प्रॉपर्टी, मकान, दुकान या जमीन का एक हिस्सा किन्ही कारणों से बिक नहीं पा रहा यदि कोई खरीदार मिलता भी है तो बात नहीं बनती। यदि कोई खरीदार मिल भी जाता है और सब कुछ हो जाता है तो अंतिम समय पर सौदा कैंसिल हो जाता है। इस तरह की स्थिति यदि लंबे समय से चली आ रही है तो यह मान लेना चाहिए कि इसके पीछे अवश्य ही कोई ऐसी कोई अतृप्‍त आत्‍मा है जिसका उस भूमि या जमीन के टुकड़े से कोई संबंध रहा हो।

* #संतान_ना_होना*
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मेडिकल रिपोर्ट में सब कुछ सामान्य होने के बावजूद संतान सुख से वंचित है हालांकि आपके पूर्वजों का इस से संबंध होना लाजमी नहीं है परंतु ऐसा होना बहुत हद तक संभव है जो भूमि किसी निसंतान व्यक्ति से खरीदी गई हो वह भूमि अपने नए मालिक को संतानहीन बना देती है

उपरोक्त सभी प्रकार की घटनाएं या समस्याएं आप में से बहुत से लोगों ने अनुभव की होंगी इसके निवारण के लिए लोग समय और पैसा नष्ट कर देते हैं परंतु समस्या का समाधान नहीं हो पाता। क्या पता हमारे इस लेख से ऐसे ही किसी पीड़ित व्यक्ति को कुछ प्रेरणा मिले इसलिए निवारण भी स्पष्ट कर रहा हूं।

* #पितृ_दोष_कि_शांति_के_उपाय *
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1👉 सामान्य उपायों में षोडश पिंड दान ,सर्प पूजा ,ब्राह्मण को गौ -दान ,कन्या -दान,कुआं ,बावड़ी ,तालाब आदि बनवाना ,मंदिर प्रांगण में पीपल ,बड़(बरगद) आदि देव वृक्ष लगवाना एवं विष्णु मन्त्रों का जाप आदि करना ,प्रेत श्राप को दूर करने के लिए श्रीमद्द्भागवत का पाठ करना चाहिए।

2👉 वेदों और पुराणों में पितरों की संतुष्टि के लिए मंत्र ,स्तोत्र एवं सूक्तों का वर्णन है जिसके नित्य पठन से किसी भी प्रकार की पितृ बाधा क्यों ना हो ,शांत हो जाती है अगर नित्य पठन संभव ना हो , तो कम से कम प्रत्येक माह की अमावस्या और आश्विन कृष्ण पक्ष अमावस्या अर्थात पितृपक्ष में अवश्य करना चाहिए।
वैसे तो कुंडली में किस प्रकार का पितृ दोष है उस पितृ दोष के प्रकार के हिसाब से पितृदोष शांति करवाना अच्छा होता है।

3👉 भगवान भोलेनाथ की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष बैठ कर या घर में ही भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर निम्न मंत्र की एक माला नित्य जाप करने से समस्त प्रकार के पितृ- दोष संकट बाधा आदि शांत होकर शुभत्व की प्राप्ति होती है |मंत्र जाप प्रातः या सायंकाल कभी भी कर सकते हैं :

मंत्र : "ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय च धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात।

4👉 अमावस्या को पितरों के निमित्त पवित्रता पूर्वक बनाया गया भोजन तथा चावल बूरा ,घी एवं एक रोटी गाय को खिलाने से पितृ दोष शांत होता है।

5👉 अपने माता -पिता ,बुजुर्गों का सम्मान,सभी स्त्री कुल का आदर /सम्मान करने और उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते रहने से पितर हमेशा प्रसन्न रहते हैं।

6👉 पितृ दोष जनित संतान कष्ट को दूर करने के लिए "हरिवंश पुराण " का श्रवण करें या स्वयं नियमित रूप से पाठ करें।

7👉 प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती या सुन्दर काण्ड का पाठ करने से भी इस दोष में कमी आती है।

8👉 सूर्य पिता है अतः ताम्बे के लोटे में जल भर कर ,उसमें लाल फूल ,लाल चन्दन का चूरा ,रोली आदि डाल कर सूर्य देव को अर्घ्य देकर ११ बार "ॐ घृणि सूर्याय नमः " मंत्र का जाप करने से पितरों की प्रसन्नता एवं उनकी ऊर्ध्व गति होती है।

9👉 अमावस्या वाले दिन अवश्य अपने पूर्वजों के नाम दुग्ध ,चीनी ,सफ़ेद कपडा ,दक्षिणा आदि किसी मंदिर में अथवा किसी योग्य ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

10👉 पितृ पक्ष में पीपल की परिक्रमा अवश्य करें अगर १०८ परिक्रमा लगाई जाएँ ,तो पितृ दोष अवश्य दूर होगा।

* #विशिष्ट_उपाय* :

1👉 किसी मंदिर के परिसर में पीपल अथवा बड़ का वृक्ष लगाएं और रोज़ उसमें जल डालें ,उसकी देख -भाल करें ,जैसे-जैसे वृक्ष फलता -फूलता जाएगा,पितृ -दोष दूर होता जाएगा,क्योकि इन वृक्षों पर ही सारे देवी -देवता ,इतर -योनियाँ ,पितर आदि निवास करते हैं।

2👉 यदि आपने किसी का हक छीना है,या किसी मजबूर व्यक्ति की धन संपत्ति का हरण किया है,तो उसका हक या संपत्ति उसको अवश्य लौटा दें।

3👉 पितृ दोष से पीड़ित व्यक्ति को किसी भी एक अमावस्या से लेकर दूसरी अमावस्या तक अर्थात एक माह तक किसी पीपल के वृक्ष के नीचे सूर्योदय काल में एक शुद्ध घी का दीपक लगाना चाहिए,ये क्रम टूटना नहीं चाहिए।

एक माह बीतने पर जो अमावस्या आये उस दिन एक प्रयोग और करें

इसके लिए किसी देसी गाय या दूध देने वाली गाय का थोडा सा गौ -मूत्र प्राप्त करें उसे थोड़े जल में मिलाकर इस जल को पीपल वृक्ष की जड़ों में डाल दें इसके बाद पीपल वृक्ष के नीचे ५ अगरबत्ती ,एक नारियल और शुद्ध घी का दीपक लगाकर अपने पूर्वजों से श्रद्धा पूर्वक अपने कल्याण की कामना करें,और घर आकर उसी दिन दोपहर में कुछ गरीबों को भोजन करा दें ऐसा करने पर पितृ दोष शांत हो जायेगा।

4👉 घर में कुआं हो या पीने का पानी रखने की जगह हो ,उस जगह की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें,क्योंके ये पितृ स्थान माना जाता है इसके अलावा पशुओं के लिए पीने का पानी भरवाने तथा प्याऊ लगवाने अथवा आवारा कुत्तों को जलेबी खिलाने से भी पितृ दोष शांत होता है।

5 👉 अगर पितृ दोष के कारण अत्यधिक परेशानी हो,संतान हानि हो या संतान को कष्ट हो तो किसी शुभ समय अपने पितरों को प्रणाम कर उनसे प्रण होने की प्रार्थना करें और अपने द्वारा जाने-अनजाने में किये गए अपराध / उपेक्षा के लिए क्षमा याचना करें ,फिर घर अथवा शिवालय में पितृ गायत्री मंत्र का सवा लाख विधि से जाप कराएं जाप के उपरांत दशांश हवन के बाद संकल्प ले की इसका पूर्ण फल पितरों को प्राप्त हो ऐसा करने से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं ,क्योंके उनकी मुक्ति का मार्ग आपने प्रशस्त किया होता है।

6👉 पितृ दोष की शांति हेतु ये उपाय बहुत ही अनुभूत और अचूक फल देने वाला देखा गया है,वोह ये कि- किसी गरीब की कन्या के विवाह में गुप्त रूप से अथवा प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग करना |(लेकिन ये सहयोग पूरे दिल से होना चाहिए ,केवल दिखावे या अपनी बढ़ाई कराने के लिए नहीं )|इस से पितर अत्यंत प्रसन्न होते हैं ,क्योंकि इसके परिणाम स्वरुप मिलने वाले पुण्य फल से पितरों को बल और तेज़ मिलता है ,जिस से वह ऊर्ध्व लोकों की ओरगति करते हुए पुण्य लोकों को प्राप्त होते हैं.|

7👉 अगर किसी विशेष कामना को लेकर किसी परिजन की आत्मा पितृ दोष उत्पन्न करती है तो तो ऐसी स्थिति में मोह को त्याग कर उसकी सदगति के लिए "गजेन्द्र मोक्ष स्तोत्र " का पाठ करना चाहिए।

8👉 पितृ दोष दूर करने का अत्यंत सरल उपाय : इसके लिए सम्बंधित व्यक्ति को अपने घर के वायव्य कोण (N -W )में नित्य सरसों का तेल में बराबर मात्रा में अगर का तेल मिलाकर दीपक पूरे पितृ पक्ष में नित्य लगाना चाहिए+दिया पीतल का हो तो ज्यादा अच्छा है ,दीपक कम से कम 10 मिनट नित्य जलना आवश्यक है।

इन उपायों के अतिरिक्त वर्ष की प्रत्येक अमावस्या को दोपहर के समय गूगल की धूनी पूरे घर में सब जगह घुमाएं ,शाम को आंध्र होने के बाद पितरों के निमित्त शुद्ध भोजन बनाकर एक दोने में साड़ी सामग्री रख कर किसी बबूल के वृक्ष अथवा पीपल या बड़ किजद में रख कर आ जाएँ,पीछे मुड़कर न देखें। नित्य प्रति घर में देसी कपूर जाया करें। ये कुछ ऐसे उपाय हैं,जो सरल भी हैं और प्रभावी भी,और हर कोई सरलता से इन्हें कर पितृ दोषों से मुक्ति पा सकता है। लेकिन किसी भी प्रयोग की सफलता आपकी पितरों के प्रति श्रद्धा के ऊपर निर्भर करती है।

* #पितृदोष_निवारण_के_लिए_करें_विशेष_उपाय* ( * #नारायणबलि_नागबलि* )
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अक्सर हम देखते हैं कि कई लोगों के जीवन में परेशानियां समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती। वे चाहे जितना भी समय और धन खर्च कर लें लेकिन काम सफल नहीं होता। ऐसे लोगों की कुंडली में निश्चित रूप से पितृदोष होता है।

यह दोषी पीढ़ी दर पीढ़ी कष्ट पहुंचाता रहता है, जब तक कि इसका विधि-विधानपूर्वक निवारण न किया जाए। आने वाली पीढ़ीयों को भी कष्ट देता है। इस दोष के निवारण के लिए कुछ विशेष दिन और समय तय हैं जिनमें इसका पूर्ण निवारण होता है। श्राद्ध पक्ष यही अवसर है जब पितृदोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दोष के निवारण के लिए शास्त्रों में नारायणबलि का विधान बताया गया है। इसी तरह नागबलि भी होती है।

* #क्या_है_नारायणबलि_और_नागबलि*
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नारायणबलि और नागबलि दोनों विधि मनुष्य की अपूर्ण इच्छाओं और अपूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिए की जाती है। इसलिए दोनों को काम्य कहा जाता है। नारायणबलि और नागबलि दो अलग-अलग विधियां हैं। नारायणबलि का मुख्य उद्देश्य पितृदोष निवारण करना है और नागबलि का उद्देश्य सर्प या नाग की हत्या के दोष का निवारण करना है। इनमें से कोई भी एक विधि करने से उद्देश्य पूरा नहीं होता इसलिए दोनों को एक साथ ही संपन्न करना पड़ता है।

* ारणों_से_की_जाती_है_नारायणबलि_पूजा*

जिस परिवार के किसी सदस्य या पूर्वज का ठीक प्रकार से अंतिम संस्कार, पिंडदान और तर्पण नहीं हुआ हो उनकी आगामी पीढि़यों में पितृदोष उत्पन्न होता है। ऐसे व्यक्तियों का संपूर्ण जीवन कष्टमय रहता है, जब तक कि पितरों के निमित्त नारायणबलि विधान न किया जाए।प्रेतयोनी से होने वाली पीड़ा दूर करने के लिए नारायणबलि की जाती है।परिवार के किसी सदस्य की आकस्मिक मृत्यु हुई हो। आत्महत्या, पानी में डूबने से, आग में जलने से, दुर्घटना में मृत्यु होने से ऐसा दोष उत्पन्न होता है।

* #क्यों_की_जाती_है_यह_पूजा* ...?
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शास्त्रों में पितृदोष निवारण के लिए नारायणबलि-नागबलि कर्म करने का विधान है। यह कर्म किस प्रकार और कौन कर सकता है इसकी पूर्ण जानकारी होना भी जरूरी है। यह कर्म प्रत्येक वह व्यक्ति कर सकता है जो अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहता है। जिन जातकों के माता-पिता जीवित हैं वे भी यह विधान कर सकते हैं।संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि, कर्ज मुक्ति, कार्यों में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए यह कर्म पत्नी सहित करना चाहिए। यदि पत्नी जीवित न हो तो कुल के उद्धार के लिए पत्नी के बिना भी यह कर्म किया जा सकता है।यदि पत्नी गर्भवती हो तो गर्भ धारण से पांचवें महीने तक यह कर्म किया जा सकता है। घर में कोई भी मांगलिक कार्य हो तो ये कर्म एक साल तक नहीं किए जा सकते हैं। माता-पिता की मृत्यु होने पर भी एक साल तक यह कर्म करना निषिद्ध माना गया है।

* ीं_की_जा_सकती_है_नारायणबलि_नागबलि*
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नारायणबलि गुरु, शुक्र के अस्त होने पर नहीं किए जाने चाहिए। लेकिन प्रमुख ग्रंथ निर्णण सिंधु के मतानुसार इस कर्म के लिए केवल नक्षत्रों के गुण व दोष देखना ही उचित है। नारायणबलि कर्म के लिए धनिष्ठा पंचक और त्रिपाद नक्षत्र को निषिद्ध माना गया है।धनिष्ठा नक्षत्र के अंतिम दो चरण, शततारका, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद एवं रेवती, इन साढ़े चार नक्षत्रों को धनिष्ठा पंचक कहा जाता है। कृतिका, पुनर्वसु, विशाखा, उत्तराषाढ़ा और उत्तराभाद्रपद ये छह नक्षत्र त्रिपाद नक्षत्र माने गए हैं। इनके अलावा सभी समय यह कर्म किया जा सकता है।

* #पितृपक्ष_सर्वाधिक_श्रेष्ठ_समय*
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नारायणबलि- नागबलि के लिए पितृपक्ष सर्वाधिक श्रेष्ठ समय बताया गया है। इसमें किसी योग्य पुरोहित से समय निकलवाकर यह कर्म करवाना चाहिए। यह कर्म गंगा तट अथवा अन्य किसी नदी सरोवर के किनारे में भी संपन्न कराया जाता है। संपूर्ण पूजा तीन दिनों की होती है।
संकलित
*श्री पित्रलोक अधीश्वर अर्यमा पित्रराजाय नमः*
*जय श्री राम जी*

 #छोटा-सा  #हवन भी देता है-  #बड़े फायदे👍शास्त्रों में ऐसा ही एक धार्मिक कर्म बताया गया है - हवन। जिसका शुभ प्रभाव न केव...
01/07/2020

#छोटा-सा #हवन भी देता है- #बड़े फायदे👍

शास्त्रों में ऐसा ही एक धार्मिक कर्म बताया गया है - हवन।
जिसका शुभ प्रभाव न केवल व्यक्ति बल्कि प्रकृति को भी लाभ ही पहुंचाता है।
ग्रंथों में अनेक तरह के यज्ञ और हवन बताए गए हैं। विज्ञान भी हवन और यज्ञ के दौरान बोले जाने वाले मंत्र, प्रज्जवलित होने वाली अग्रि और धुंए से होने वाले प्राकृतिक लाभ की पुष्टि करता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से हवन से निकलने वाले अग्रि के ताप और उसमें आहुति के लिए उपयोग की जाने वाली हवन की प्राकृतिक सामग्री यानी समिधा वातावरण में फैले रोगाणु और विषाणुओं को नष्ट करती है, बल्कि प्रदूषण को भी मिटाने में सहायक होती है। साथ ही उनकी सुगंध व ऊष्मा मन व तन की अशांत व थकान को भी दूर करने वाली होती है।
इस तरह हवन स्वस्थ और निरोगी जीवन का श्रेष्ठ धार्मिक और वैज्ञानिक उपाय है। खासतौर पर कुछ विशेष काल में किए गए हवन तो धार्मिक लाभ के साथ प्राकृतिक व भौतिक सुख भी देने वाले माने गए हैl

ज्योतिष क्या है आकाश की तरफ नजर डालते ही दिमाग में सवाल पैदा होता है कि ग्रह-नक्षत्र क्या होते हैं? इनमें से कुछ दिन ....

28/06/2020

दिन का शुभ आरंभ शुभ चीजों को देखने से होता है। इसके लिए भारतीय ऋषि-मुनियों ने हमें करदर्शनम यानी हाथों के दर्शन का संस्कार दिया है।

शास्त्रों में भी जागते ही बिस्तर पर सबसे पहले बैठकर दोनों हाथों की हथेलियों (करतल) के दर्शन का विधान बताया गया है। इससे व्यक्ति की दशा सुधरती है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

जब आप सुबह नींद से जागें तो अपनी हथेलियों को आपस में मिलाकर पुस्तक की तरह खोल लें और यह श्लोक पढ़ते हुए हथेलियों का दर्शन करें

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

अर्थात मेरे हाथ के अग्रभाग में भगवती लक्ष्मी का निवास है। मध्य भाग में विद्यादात्री सरस्वती और मूल भाग में भगवान विष्णु का निवास है। अतः प्रभातकाल में मैं इनका दर्शन करता हूं। इस श्लोक में धन की देवी लक्ष्मी, विद्या की देवी सरस्वती और अपार शक्ति के दाता, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की स्तुति की गई है, ताकि जीवन में धन, विद्या और भगवत कृपा की प्राप्ति हो सके

🚩जय श्री हरि 🚩

आज का राशिफल                 दिनांक:- 07 मार्च  2018                           दिन:- बुधवारमेष (Aries ) 7 March 2018मामू...
07/03/2018

आज का राशिफल
दिनांक:- 07 मार्च 2018
दिन:- बुधवार

मेष (Aries ) 7 March 2018
मामूली विवाद से कार्यस्थल पर तनाव होगा | लोकप्रियता के बल पर उलझे मामले सुलझा लेंजे | सपने पूरे करने का उचित समय हैं | धार्मिक यात्रा योग हैं |

वृषभ (Ta**us) 7 March 2018
मेहनत से काम करे सफलता मिलेगी | कार्ययोजना बनाकर चलें , जल्दबाजी में योजना तैयार होना मुश्किल हैं | मागंने पर पारिवारि सहयोग मिलेगा | स्वास्थ्य में सुधार हो सकता हैं |

मिथुन (Gemini) 7 March 2018
संतान के दायित्व की पूर्ति होगी। आय के नवीन स्त्रोत बनेंगे। शिक्षा प्रतियोगिता के क्षेत्र में आशातीत सफलता मिलेगी। वाणी की सौम्यता आपको संकट से उबारेगी। वाहन प्रयोग में सावधानी अपेक्षित है।

कर्क (Cancer) 7 March 2018
जीवनसाथी से मधुर व्यवहार बना रहेगा | युवाओम को मनचाही नौकरी मिलेगी | प्रॉपर्टी संबंधीं विवाद पक्ष में हल हो सकते है | मुश्किल काम अब सहज ही पूरे हो सकते हैं | स्वास्थ्य में ताजगी रहेगी |

सिंह (Leo) 7 March 2018
मेहनत का भरपूर लाभ मिलेगा | कार्यशैली में बदलाव कर भारी मुनाफा बनाएंगे | प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलेगी | सोच-समझकर पूंजी निवेश करें | समय अनुकूल बना रहेगा |

कन्या (Virgo) 7 March 2018
भावनात्मक संबंधों में समझदारी और मधुरता बढेगी | प्रियजन से मुलाकात सुखद रहेगी | जरुरतें पूरी करने के लिए आय के नए स्रोत ढूंढने होंगे |

तुला (Libra) 7 March 2018
कारोबारी लेन-देन में सतर्क रहें , आरोप लग सकते है | मधुर व्यवहार से कार्यक्षेत्र में लोकप्रियता बढेगी | जरुरतमंदों की मदद करके खुश होंगे | युवाओं को नए रोजगार मिलेंगे |

वृश्चिक (Scorpio) 7 March 2018
अनुभवी लोगों के साथ से काम सहज ही पूरे होंगे | घरेलू जरुरतें पूरी करने के लिए मेहनत करेंगे | जल्दी धन कमाने के लिए गलत रास्ते पर न जाए | स्वास्थ्य अच्छा रहेगा |

धनु (Sagittarius) 7 March 2018
जल्दअबाजी में बना-बनाया काम बिगड सकता है |न चाहते हुए भी किसी की मदद करनी पडेगी |व्यापारिक लेन-देन मे सावधानी बरते ,नुकसान संभव है |

मकर (Capricorn) 7 March 2018
पारिवारिक जीवन सुखमय होगा। स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें। राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति होगी। व्यर्थ की समस्या पर नियंत्रण होगा। अनचाही यात्रा मिल सकती है। वाहन प्रयोग में सावधानी रखें।

कुंभ (Aquarius) 7 March 2018
आय-व्यय में तालमेल का अभाव परेशान कर सकता है | यात्रा कार्यक्रम टालना पड सकता है | बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता रहेगी | कारोबारी सौदे होंगे |

मीन (Pisces) 7 March 2018
जमीन-जायदाद का झगड़ा बढ़ेगा | कारोबारी साझेदारी से मुनाफा होगा | जरुरतमंदों की मदद करके खुश होंगे | जिसे चाहते हैं | उसके साथ समय बिता पाएंगे | मेहनत से काम करे |

RAHUKAAL ON 07 मार्च, 2018
12:31 to 13:58

नोट:- कोई भी शुभ कार्य राहुकाल में प्रारम्भ नहीं करना चाहिए ।

आपका दिन मंगलमय हो

Astrology is the study of cycles. By observing the cyclical movements of the planets, we are able to gain a greater understanding of the cycle and the patterns in our own lives. Astrology can be powerful tool for healing and the transformation and it can be a key that can unlock a greater spiritual....

आज का राशिफल                 दिनांक:- 04 मार्च  2018                           दिन:- रविवारमेष (Aries ) 4 March 2018वैवा...
04/03/2018

आज का राशिफल
दिनांक:- 04 मार्च 2018
दिन:- रविवार

मेष (Aries ) 4 March 2018
वैवाहिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे | पुरानी उलझने सुलझेगी | नई चुनौतियों का सामना हिम्मत से करें , राह आसान होगी | वाणी पर नियंत्रण रखें | राजकीय मामले पक्ष में हल हो सकते हैं |

वृषभ (Ta**us) 4 March 2018
मेहनत के अनुरूप लाभ मिलेगा | समय अनुकूल बना रहेगा | कार्यस्थल पर सफलता मिलेगी | अटके काम सहज ही पूरे हो जाएंगे | मेहनत का फल मिलेगा | स्वास्थ्य में सुधार होगा |

मिथुन (Gemini) 4 March 2018
लाभदायी योजनाओं में पूंजी निवेश करने का सही समय हैं | दिमाग के बजाय दिल से काम लेंने का समय हैं | साझेदारी बनी रहेगी | प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलने से खुशी होगी | यात्रा का शुभ योग हैं |

कर्क (Cancer) 4 March 2018
बातचीत में सयंम बरतें | मधुर व्यवहार से मित्रों को मना लेंगे | मित्रों के सहयोग से अटके काम पूरे होंगे | आकस्मिक लाभ के अव्सर मिलेगें | स्वास्थ्य में ताजगी बनी रहेगी |

सिंह (Leo) 4 March 2018
नए सपर्कों का लाभ मिलेगा | जोखिम के कार्यों में रुचि बढ़ेगी | अच्छे अनुभव महत्वपूर्ण मामले सुलझा लेंगे | कारोबारी योजना में विस्तार करने से अधिक लाभ होगा | धार्मिक यात्रा शुभ रहेगी |

कन्या (Virgo) 4 March 2018
योवाओ की जोखिम के कार्यो में रुचि बढेगी | बिखरे काम समेटने में सफलता मिलेगी | साझेदारी लाभदायी रहेगी | राजकीय मामले सुलझने के आसार है |

तुला (Libra) 4 March 2018
दाम्पत्य सुख मिलेगा | जरूरी काम पहले करें | सोच-समझकर योजना में पैसा लगाएं | यात्रा योग हैं | जिसे चाहते हैं उसे दिल की बात कहने का सही समय हैं | स्वास्थ्य सही रहेगा |

वृश्चिक (Scorpio) 4 March 2018
पारिवारिक समारोह में व्यस्त रहेंगे | भावनात्मक संबंधों में संशय दूर होगा | घरेलू विवाद सुलझने की उम्मीद है | कारोबारी विस्तार का मन बनेगा |

धनु (Sagittarius) 4 March 2018
अधिकारी योग्यता देखकर नई जिम्मेदारी सौंप सकते हैं | कला जगत से जुडे लोगों को अच्छी सफलता मिलेगी | युवाओं को मनचाही नौकरी मिल सकती हैं |

मकर (Capricorn) 4 March 2018
प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलेगी | सतर्क रहें , हानि का भय हैं | बुजुर्गों की भावनाओं का सम्मान करें | विरोधी परेशान करेंगे | कामकाज की अधिकता रहेगी |

कुंभ (Aquarius) 4 March 2018
सामाजिक जिवन में सम्मान बढेगा | अध्ययन में सफलता मिलेगी | काम छोडकर दूसरो का सहयोग करेंगे | लगातार सपंर्क बनाए रखने का प्रयास करेंगे |

मीन (Pisces) 4 March 2018
नए सौदे से मुनाफा होगा | अटके काम पूरे होंगे | संबंध सुधारने के लिए पहल करेंगे | जिसे चाहते है उसे मन की बात कह देने से नजदीकियां बढेगी | परीक्षा में सफलता मिलेगी |

RAHUKAAL ON 04 मार्च, 2018
16:51 to 18:17

नोट:- कोई भी शुभ कार्य राहुकाल में प्रारम्भ नहीं करना चाहिए ।

आपका दिन मंगलमय हो

Astrology is the study of cycles. By observing the cyclical movements of the planets, we are able to gain a greater understanding of the cycle and the patterns in our own lives. Astrology can be powerful tool for healing and the transformation and it can be a key that can unlock a greater spiritual....

आज का राशिफल                 दिनांक:- 03 मार्च  2018                           दिन:- शनिवारमेष (Aries ) 3 March 2018अटके...
03/03/2018

आज का राशिफल
दिनांक:- 03 मार्च 2018
दिन:- शनिवार

मेष (Aries ) 3 March 2018
अटके काम मित्रों के सहयोग से पूरे होंगे | पुराने मामलें सुलझेंगे | जनहित को ध्यान में रखकर निर्णय लें | प्रियजन से मुलाकात सुखद रहेगी |

वृषभ (Ta**us) 3 March 2018
वैभव के सामान पर खर्च संभव है | जोखिम के कार्यो में हाथ डालने से बचें, अनावश्यक परेशानी बढ़ सकती है | घूमने का कार्यक्रम बना रहेगा | लाभप्रद जिम्मेदारी मिलेगी |

मिथुन (Gemini) 3 March 2018
चुनौतियों का मुकाबला करेंगे | रूखे व्यवहार से अपनों को नाराज कर लेंगे | जरूरतमंदों मदद से खुशी होगी | उच्च अध्ययन के लिए विदेश जाना पड़ेगा |

कर्क (Cancer) 3 March 2018
विशेष प्रयास करके अपना कार्य करवा लेंगे | आपको पारिवार का भरपूर सहयोग मिलेगा | अधिकारियों से मेलजोल लाभदायी रहेगा | भाग्य भरोसे नहीं रहे मेहनत पर ध्यान दें |

सिंह (Leo) 3 March 2018
अधूरे काम पूरे होंगे | अधिकारों के लिए संघर्ष करना होगा | अति -आत्मविश्वास में नुकसान कर लेंगे | दाम्पत्य सुख मिलेगा | आय के नए स्रोत बनेंगे |

कन्या (Virgo) 3 March 2018
प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलेगी | अपनों के व्यवहार से नीचा देखना पडेगा | साझेदारी की योजना अटकेगी | परिणय चर्चाओं में सफलता मिलेगी | स्वास्थ्य में ताजगी रहेगी |

तुला (Libra) 3 March 2018
कारोबार में संभावनाएं तलाशनी होंगी | अधिकरी कार्यशैली की प्रशंसा करेंगे | पैतृक संपत्ति से लाभ होगा | दाम्पत्य सुख मिलेगा | खर्च पर नियंत्रण रखे | युवाओं को नई नौकरी मिलेगी |

वृश्चिक (Scorpio) 3 March 2018
अधिकारी योग्यता का लोहा मानेंगे | तरक्की होने की उम्मीद हैं | यात्रा योग हैं | कामकाज पर भावनाओं को हावी न होने दें | प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलेगी |

धनु (Sagittarius) 3 March 2018
कोर्ट -कचहरी में चल रहे मामले सुलझेंगे | साझेदारी लाभदायी हो सकती है | आर्थिक स्थिति सुढृढ होने से भूमि -भवन और वाहन खरीदने का मन बनेगा |

मकर (Capricorn) 3 March 2018
रुके कार्य शुरु हो सकते है | किया हुआ वादा निभाना मुश्किल होगा | पारिवारिक संबंधों में मधुरता बढ़ेगी | जोखिम उठाने की बजाय पहले विचार करें | समय अनुकूल रहेगा |

कुंभ (Aquarius) 3 March 2018
मेहमानों के आवागमन से निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव संभव हैं | समय पर कर्ज चुकाने की चिंता रहेगी | सोच-समझकर नया काम शुरु करें | यात्रा का सम्पूर्ण लाभ मिलेगा | स्वास्थ्य अच्छा रहेगा |

मीन (Pisces) 3 March 2018
कार्यक्षेत्र में नई तकनीक अपनाने से सफलता मिलेगी | मित्र साथ देंगे | अपनों की भावनाओं का ध्यान रखेंगे | कोर्ट-कचहरी के मामले पक्ष में हल होंगे।

RAHUKAAL ON 03 मार्च, 2018
09:39am to 11:06am

नोट:- कोई भी शुभ कार्य राहुकाल में प्रारम्भ नहीं करना चाहिए ।

आपका दिन मंगलमय हो

Astrology is the study of cycles. By observing the cyclical movements of the planets, we are able to gain a greater understanding of the cycle and the patterns in our own lives. Astrology can be powerful tool for healing and the transformation and it can be a key that can unlock a greater spiritual....

आज का राशिफल                 दिनांक:- 28 फरवरी 2018                           दिन:- बुधवारमेष (Aries ) 28 February 2018भ...
28/02/2018

आज का राशिफल
दिनांक:- 28 फरवरी 2018
दिन:- बुधवार

मेष (Aries ) 28 February 2018
भाग्योदय संभव हैं | घरेलू विवाद सुलझेगा डरने के बाजाय दिल की बात कह दें, संबंध बेहतर होंगे | धन संबंधी मामलों को पहले पूरा करें | यात्रा होगी | समय अच्छा रहेगा |

वृषभ (Ta**us) 28 February 2018
व्यापारिक लेन-देन में बेहतर प्रस्ताव आएगें | कार्यस्थल पर अव्यवस्था होनें से मन अशांत रहेगा |विवाद्स्पद मामलों सें दूर रहें |अपने काम पर ध्यान दें |

मिथुन (Gemini) 28 February 2018
कारोबारी विस्तार की रूपरेखा बनेगी | राजकीय मामले पक्ष में हल हो सकते है | कार्य स्थल पर मर्यादा का ध्यान रखें | व्यक्तिगत संबंधों को दरकिनार कर सामूहिक हित में फैसला लेंगे |

कर्क (Cancer) 28 February 2018
काम जल्दी होने से मन प्रसंन्न रहेगा | स्वास्थ्य में सुधार होगा | सुख-सुविधा के सामान पर पालतू खर्च ना करे | किसी भी काम को जल्दबाजी मे ना करें नुकसान बच सकता है |

सिंह (Leo) 28 February 2018
वादा पूरा न कर पाने मित्र नाराज होंगे | जरूरी काम पहले करें , सफलता मिलेगी | जिसे चाहते है उसे दिल की बात कहने का सही समय हैं | आय बढ़ेगी |

कन्या (Virgo) 28 February 2018
नौकरी बदलने का बनेगा | प्रणय संबंध मजबूत होंगे | वैवाहिक चर्चाओं में सफलता मिलेगी | सोच-समझकर पूंजी निवेश करें | पुराने मित्र मिलेंगे | स्वास्थ्य अच्छा रहेगा |

तुला (Libra) 28 February 2018
मन ही मन अनहोनी की आशंका के चलते कोई फैसला लेना आपके लिअ मुश्किल होगा | सविधा के अभाव में अपना जरूरी कार्य नहीं कर पाएंगे | स्वास्थ्य में सुधार आएगा |

वृश्चिक (Scorpio) 28 February 2018
अधीनस्थों के सहयोग से काम की गति धीमी रहेगी | अकेलापन महसूस करेंगे | सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रमों में बढ-चढकर हिस्सा लेंगे | मेहनत पर अधिक ध्यान दें |

धनु (Sagittarius) 28 February 2018
कारोबारी यात्रा रद्द होगी | कार्यशैली में बदलाव कर मुनाफा कमाएंगे | मामूली बातों को तूल देने से बचें | सीदेपन का लोग गलत फायदा उठाएंगे |

मकर (Capricorn) 28 February 2018
प्रभावशाली लोगों से संपर्क का लाभ मिलेगा | व्यवहार में सुधार कर सबको आश्चर्य में डाल देंगे | घरेलू सुख-सुविधा के सामान पर खर्च होगा | मित्र मिलेंगे |

कुंभ (Aquarius) 28 February 2018
साझेदारी में नए सौदे हाथ आ सकते हैं | निजी मामले सुलझाने के लिए आपको किसी की मदद लेनी पड़ सकती हैं | आपके साथ धोखा हो सकता हैं | समय अनुकूल रहेगा |

मीन (Pisces) 28 February 2018
बातचीत में सयंम बरतें | मधुर व्यवहार से मित्रों को मना लेंगे | मित्रों के सहयोग से अटके काम पूरे होंगे | आकस्मिक लाभ के अव्सर मिलेगें | स्वास्थ्य में ताजगी बनी रहेगी |

RAHUKAAL ON 28 February, 2018
12:33 to 13:59

नोट:- कोई भी शुभ कार्य राहुकाल में प्रारम्भ नहीं करना चाहिए ।

Astrology is the study of cycles. By observing the cyclical movements of the planets, we are able to gain a greater understanding of the cycle and the patterns in our own lives. Astrology can be powerful tool for healing and the transformation and it can be a key that can unlock a greater spiritual....

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