12/10/2015
सर्दियों का अमृत है गाजर
दोस्तों सर्दियों के मोसम की शुरवात हो चुकी है। गाजर आने वाली हैं यंहा पर में आपको गाज के कुछ अनूठे प्रयोग बताने जारहा हूँ उमीद करता हु ये आपके लिए काफी ज्ञानवर्धक होगा।
गाज़र को उसके प्राकृतिक रूपमें ही अर्थात् कच्चा खाने से ज्यादा लाभ होता है। उसके भीतर का पोला भाग नहीं खाना चाहिये क्योंकि वह अत्यधिक गरम होता है। अत: पित्तदोष, बीर्यंदोष एवं छातीमें दाह उत्पन्न करता है।
गाजर स्वादमें मधुर, कसैली, कडवी, तीक्ष्य, स्निग्ध, उष्णवीर्य, गरम, दस्तको बाँधनेवाली, मूत्रल, हिर्दय के लिये हितकर, रक्त को शुद्ध बनानेवाली, कफ निकालने वाली, वातदोष नाशक , षुष्टिवर्धक तथा दिमाग और नस-नाडियो के लिये बलप्रद है। यह अफारा, बवासीर, पेटके रोगों, सूजन, खाँसी, पथरी, मूत्रदाह, मूत्राल्पता तथा दुर्बलता का नाश करनेवाली है।
गाजर के बीज गरम होते हैं। अत: गर्भवती महिलाओं को उनका उपयोग नहीं करना चाहिये। बीज पचने में भारी होते हैं। कैल्सियम एवं केरोटिन की प्रचुर मात्रा होने के कारण छोटे बच्चों के लिये यह एक उत्तम आहार है । गाज़र मेँ आँतों के हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट करने का अदभुत गुण है। इसमें विटामिन 'ए' भी काफी मात्रा में पाया जाता है। अत: यह नेत्र रोग में भी लाभदायक है।
गाज़र रक्त शुद्ध करने वाली है। 10 - 15 दिन केवल गाजर के रस पर रहने से रक्तविकार, गाँठ, सूजन एवं पांडूरोग -जैसे त्वचा के रोगों मेँ लाभ होता है । इसमें लौह तत्त्व भी प्रचुरता मेँ पाया जाता है। खूब चबा-चबा कर खाने से दांत चमकीले मजबूत और मसूड़े शक्तिशाली बनते हैं।
विशेष - गाजर के भीतर का पिला भाग खाने से ज्यादा गाजर खाने के बाद 30 मिनट के अंदर पानी पिने से खांसी आने लगती है। अत्यधिक गाजर खाने से पेट में दर्द होता है। इस समय में थोडा गुड खाएं पितप्रक्रति के लोगों को गाजर का सावधानी पूर्वक उपयोग करना चाहिय।
गाजर का औशधिपर्योग
1 . दिमाग कमजोरी - गाजर के रस का नित्य प्रयोग करने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है।
2 . दस्त - दस्त होने पर गाजर का सूप लाभदायक सिद्ध होता है।
3 . सूजन - इसके रोगी को सब आहार त्यागकर केवल गाजर का रस अथवा उबली हुई गाजर पर रहनेसे लाभ होता है।
4 . मासिक न दिखने पर - मासिक कम आने पर या समय से न आने र गाजर के 5 ग्राम बीजों का 20 ग्राम गुड़के साथ काढा बनाकर लेने से लाभ होता है।
5 . पुराने घाव - गाजर को उबालकर उसे घाव पर लगाने से लाभ होता है।
6 . खाज - गाज़र को कदूकस करके अथवा बारीक पीसकर उसमें धोड़ा नमक मिला ले और गरम करके खाज पर रोज बाँधने से लाभ होता है।
7 . आधासीसी - गाजरके पत्तों पर दोनों ओर शुद्ध घी लगाकर उन्हें गरम करो। फिर उनका रस निकालकर २-३ बूंदें कान एवं नाक में डाले। इससे आधासीसी का दर्द मिटता है।
8 . श्वाश हिचकी - गाजर के रसकी 4 या 5 बूंदें दोनों नथुनों में डालने से लाभ होता है।
9 . नेत्ररोग - द्रिष्टि का कमजोर होना, रतोंधी, पढ़ते समय आँखों में तकलीफ होना आदि रोगों में कच्ची गाजर या उसके रस का सेवन लाभप्रद है । यह प्रयोग चश्मे का नंबर घटा सकता है।
10 . पाचनसम्बन्धी गडबडी - अरुचि, मन्दागनी, अपच आदि रोगों मेँ गाजर के रस में नमक, धनिया, जीरा, काली मिर्च, नीबूका रस डालकर पीये अथवा गाजर का सूप बनाकर पिने से लाभ होता है।
11 . पेशाबकी तकलीफ - गाजर का रस पिने से पेशाब आता है। रक्तशर्करा भी कम होती है। गाज़रका हलवा खानेसे पेशाब में कैल्सियम, फास्फोरस का आना बंद हो जाता है।
12 . नकसीर फूटना - ताजे गाजर का रस अथवा उसकी लुगदी सिर पर एवं ललाट पर लगाने से लाभ होता है।
13 . जलनेपर - जलने से होने वाले दाह में प्रभावित अंग पर बार बार गाजर का रस लगाने से लाभ होता हैँ।
14 . हदयरोग - हदयकी कमजोरी अथवा धडकनें बढ़ जाने पर लाल गाजर को भुन ले या उबाल ले फिर उसे रातभर के लिय आकाश में रख दे, सुभ उसमें मिस्री तथा केवड़े या गुलाबका अर्क मिलाकर रोगी को देने से अथवा 2 या 3 बार कच्ची गाजर का रस पिलानेसे लाभ होता है।
15 . प्रसवपीड़ा - यदि प्रसवके समय स्त्रीको अत्यंत कष्ट हो रहा हो तो गाजर के बीजों के काढ़े में एक वर्षका पुराना गुड डालकर गर्म - गर्म पिलाने से प्रसव जल्दी होता है ।
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http://www.bharatyogi.net/2015/09/carrot-benefits-for-health-in-hindi.html
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