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16/01/2018
09/04/2016

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07/04/2016

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06/04/2016
बचपन में मां के साथ बेचते थे चूड़ी, IAS बनने के बाद ही लौटे अपने गांव:रांची/बोकारो। चूड़ी ले लो... चूड़ी... चूड़ी बेचने ...
05/04/2016

बचपन में मां के साथ बेचते थे चूड़ी, IAS बनने के बाद ही लौटे अपने गांव:

रांची/बोकारो। चूड़ी ले लो... चूड़ी... चूड़ी बेचने वाली यह आवाज कभी गांव की गलियों में हर दिन सुनाई पड़ती थी। पहले मां आवाज लगाती और फिर उनका बेटा बार-बार इसे दोहरा कर खरीददार जुटाता। 10 साल की उम्र तक मां के साथ चूड़ी बेचने वाले उस बच्चे ने कमाल कर दिखाया। उस बच्चे की पहचान आज IAS रमेश घोलप के तौर पर सबके सामने है। फिलहाल ये झारखंड मंत्रालय के ऊर्जा विभाग ज्वाइंट सेकेट्री के पद पर तैनात हैं। मां की कमाई पिता उड़ा देते थे शराब में, खुद काम किया, रुपए जुटाए और फिर की पढ़ाई...
संघर्ष की कहानी रमेश की जुबानी

-बचपन में मां के साथ दिनभर चूड़ी बेचता था। इससे जो पैसे जमा होते थे, उसे पिताजी अपनी शराब पर खर्च कर देते थे। ना रहने के लिए घर था और ना पढ़ने के लिए पैसे।
-मौसी के इंदिरा आवास में ही हम रहते थे। मैट्रिक परीक्षा से एक माह पूर्व ही पिता का निधन हो गया। इस सदमे ने मुझे झकझोरा। विपरीत हालात में मैट्रिक परीक्षा दी और 88.50% अंक हासिल किया।
-मां को सामूहिक ऋण योजना के तहत गाय खरीदने के नाम पर 18 हजार ऋण मिले। इस राशि ने मुझे पढ़ाई जारी रखने में मदद की।
-इसे लेकर मैं तहसीलदार की पढ़ाई करने निकला था। बाद में इसी रुपए से आईएएस की पढ़ाई की।
-दीवारों पर नेताओं की घोषणाओं, दुकानों का प्रचार शादी की पेंटिंग करता था और पढ़ाई के लिए पैसे की व्यवस्था करता था।
पहले प्रयास में रहे विफल
-महाराष्ट्र के सोलापुर जिला के वारसी तहसील स्थित उसके गांव ‘महागांव’ में रमेश की संघर्ष की कहानी हर जुबान पर है।
-गरीबी से संघर्ष कर आईएएस बने रमेश घोलप ने पिछले साल बतौर एसडीओ बेरमो में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
-इन्होंने अभाव के बीच ना सिर्फ आईएएस बनने का सपना देखा, बल्कि इसे अपनी मेहनत से सच भी कर दिखाया।
-काम किया, रुपए जुटाए और फिर पढ़ा। कलेक्टर बनने का सपना आंखों में संजोए रमेश पुणे पहुंचे।
-पहले प्रयास में विफल रहे, पर वे डटे रहे। साल 2011 में पुन: यूपीएससी की परीक्षा दी।
-इसमें रमेश 287वां स्थान प्राप्त कर आईएसएस बन चुके थे। पर खुशी तब दोगुनी हो गई, जब वे स्टेट सर्विस की परीक्षा में राज्य में फर्स्ट आए।
शिक्षक बना, मिला नया लक्ष्य

-मैंने 2005 में इंटर पास किया और 2008 में डिप्लोमा करके शिक्षक की नौकरी की। यहां शिक्षकों के आंदोलन का नेतृत्व किया।
-आंदोलन करते हुए मांग पत्र देने तहसीलदार के पास जाता था। बस इसी ने मन में कौतूहल मचा दी। आखिर ऐसा क्यों कि कोई तहसीलदार और मैं सिर्फ एक शिक्षक। मैंने तहसीलदार बनने की ठान ली।
अफसर बन कर ही लौटा अपने गांव

-मैंने वर्ष 2010 में अपनी मां को पंचायत के मुखिया के चुनाव में खड़ा किया। हमें लगता था जीत हमारी होगी, पर मां हार गई थी।
-इस हार के बाद मैंने गांव छोड़ने का निर्णय किया। मैंने तय कर लिया कि अब इस गांव में तभी आएंगे, जब अफसर बन जाएंगे।
-4 मई 2012 को अफसर बनकर पहली बार गांव पहुंचा। जहां मेरा जोरदार स्वागत हुआ।

01/04/2016

Indian team will play final icc t20

01/04/2016

ICC ने बदला फैसला, अब वेस्टइंडीज के बजाए फाइनल में
पहुंची टीम इंडिया
Home› Cricket News› ICC Change Decision : Team
India Enters At T20 World Cup Final
CRICKET NEWSInternational
+बाद में पढ़ें सुरेंद्र कुमार वर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated 13:58 शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016
आपने कल देखा था कि वेस्टइंडीज ने भारत को हराकर
टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बना लिया था, लेकिन
मैच के दौरान कैरेबियाई टीम की ओर से हुई 3 गलतियों का
फायदा मेजबान भारत को मिला और उसे फाइनल का टिकट दे दिया गया।
मुबंई के वानखेड़े स्टेडियम में बीती रात सेमीफाइनल मुकाबले
में कैरेबियाई टीम ने भारतीय आक्रमण की धज्जियां उड़ाते
हुए 2 गेंद शेष रहते मैच 7 विकेट से जीत लिया। इस जीत के
साथ ही उसने फाइनल में अपनी जगह भी पक्की कर ली। मैच
के बाद यह खबर हर ओर फैल गई कि टी-20 वर्ल्ड कप में खिताबी भिड़ंत विंडीज और इंग्लैंड की टीमों के बीच
होगी।
लेकिन मैच के बाद जब आपने टीवी चैनल स्वीचऑफ कर
दिया और भारत की हार पर चर्चा करने में व्यस्त हो गए, तो
इस बीच स्टेडियम में आईसीसी के अधिकारियों ने कई
घंटों की लंबी बैठक की। इस बैठक में मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड के अलावा दो मैदानी अंपायर के साथ-साथ दोनों टीमों
के कप्तान भी मौजूद थे।
लंबी चर्चा के बाद यह फैसला निकला कि फाइनल का
टिकट कैरेबियाई टीम के बजाए मेजबान टीम इंडिया को
दिया जाना चाहिए। वास्तविकता में भारत ही फाइनल में
पहुंचने का हकदार है। मैच में सरसरी तौर पर निगाह डाली जाए तो भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन ही सबसे
शानदार था। हालांकि आईसीसी के इस अप्रत्याशित फैसले
का कैरेबियाई कप्तान डेरेन सैमी ने जमकर विरोध किया,
लेकिन आईसीसी ने उनकी एक न सुनी और उन्हें
आधिकारिक रूप से सेमीफाइनल में भारत से हारा हुआ
घोषित कर दिया। क्रिकेट इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब मैच खत्म
होने के बाद विजयी टीम का फैसला आईसीसी के
अधिकारियों ने आपस में बैठक कर लिया। फाइनल जो 3
अप्रैल को कोलकाता के ईडन गार्डंस में इंग्लैंड के खिलाफ
खेला जाना है के सामने अब कैरेबियाई टीम की बजाए
भारतीय टीम होगी। इस फैसले के बाद जहां भारतीय टीम के प्रशंसकों में खुशी की अपार लहर दौड़ गई तो विंडीज टीम
की जीत की पार्टी ही खराब हो गई।
अब जानते हैं कि वो 3 कारण कौन से रहे जिसने आईसीसी
को मैच के दौरान जीत हासिल करने वाली टीम को हारा
हुआ घोषित कर दिया और मैच हार चुकी टीम को
विजयी घोषित करते हुए फाइनल में पहुंचा दिया। पहला कारण, विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल का सस्ते में
आउट होना रहा। गेल ने दावा किया था कि वह इस मैच में
शतक लगाएंगे और टीम को जीत भी दिलाएंगे, लेकिन हुआ
इसके उलट। वह सिर्फ 5 रन बनाकर आउट हो गए और टीम
भी जीत गई। आईसीसी ने इसे क्रिकेट प्रशंसकों की
भावनाओं के साथ खिलवाड़ माना। उनका मानना था कि लोग गेल की विस्फोटक पारी देखने आए थे लेकिन वह सस्ते में
आउट हो गए। ऐसे में उनके शतक के बगैर विंडीज टीम की
जीत का कोई औचित्य नहीं है।
दूसरा कारण, विराट कोहली बड़ी पारी खेलें और टीम
इंडिया हार जाए ऐसा संभव नहीं है। वह भी तब जब उन्होंने
बल्ले के साथ-साथ गेंद से भी कमाल किया हो। पहले बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने नाबाद 89 रन बनाए। फिर लंबे
समय बाद टी-20 मैच में गेंदबाजी करने उतरे और पहली ही
गेंद पर जॉनसन चार्ल्स का कीमती विकेट ले लिया।
कोहली की शानदार पारी और उनकी टीम की हार यह
क्रिकेट वर्ल्ड के लिए हितकारी नहीं होगा और भारत
को यह मैच जीतना ही चाहिए। तीसरा कारण, मैच के जीत के हीरो रहे लिंडल सिंमस ने इस
मैच में 89 रनों की नाबाद पारी खेली। लेकिन उनकी पारी
बेदाग नहीं रही क्योंकि वह दो बार कैच आउट हो चुके थे
लेकिन दोनों ही बार नोबॉल के कारण उनका विकेट
सुरक्षित रहा। फिर अंत तक मैच क्रीज पर डटे रहे जिसने
भारत से यह मैच छीन लिया। आईसीसी के अधिकारियों के अनुसार यह सरासर गलत है कि किसी एक बल्लेबाज को
एक ही मैच में दो बार लपका जाए और वो गेंद नोबॉल निकल
जाए। सिंमस शुरू में ही आउट हो जाते तो भारत यह मैच नहीं
गंवाता। भारत के इस मैच में हारने की सूरत में आयोजकों के
साथ-साथ आईसीसी को भी घाटा होने वाला है क्योंकि अब
फाइनल में भारतीय टीम नहीं होगी सो स्टेडियम के भरे होने की संभावना कम हो गई है, साथ ही इस बड़े मुकाबले को
देखने के लिए कम ही दर्शक टीवी की ओर रुख करेंगे। ऐसे में
दोनों को कमाई में फर्क पड़ सकता है। भारत फाइनल में होगा
तो कमाई भी अच्छी होगी। यह सोचकर भारतीय टीम को
फाइनल में भेजा गया और कैरेबियाई टीम को यह आश्वासन
दिया गया कि उनके इस बलिदान के बदले बीसीसीआई अगले दो महीने की सैलरी उनके खिलाड़ियों को देगी।
अगर आप इस खबर पर विश्वास करने लगे हैं तो यकीन
मानिए कि आप आज 'अप्रैल फूल' बन गए हैं।

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