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God has created all of us....
If he gives hardship.....he also gives solutions to those hardships.....
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_*अक्षय तृतीया* (आखा तीज)_, [वैशाख ]उसका महत्व क्यों है और जानिए इस  दिन कि कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ:🕉 ब्रह्माजी के पुत...
03/05/2022

_*अक्षय तृतीया* (आखा तीज)_, [वैशाख ]
उसका महत्व क्यों है और जानिए इस दिन कि कुछ महत्वपुर्ण जानकारियाँ:
🕉 ब्रह्माजी के पुत्र *अक्षय कुमार* का अवतरण।
🕉 *माँ अन्नपूर्णा* का जन्म।
🕉 *चिरंजीवी महर्षी परशुराम* का जन्म हुआ था इसीलिए आज *परशुराम जन्मोत्सव* भी हैं।
🕉 *कुबेर* को खजाना मिला था।
🕉 *माँ गंगा* का धरती अवतरण हुआ था।
🕉 सूर्य भगवान ने पांडवों को *अक्षय पात्र* दिया।
🕉 महाभारत का *युद्ध समाप्त* हुआ था।
🕉 वेदव्यास जी ने *महाकाव्य महाभारत की रचना* गणेश जी के साथ शुरू किया था।
🕉 प्रथम तीर्थंकर *आदिनाथ ऋषभदेवजी भगवान* के 13 महीने का कठीन उपवास का *पारणा इक्षु (गन्ने) के रस से किया* था।
🕉 प्रसिद्ध तीर्थ स्थल *श्री बद्री नारायण धाम* का कपाट खोले जाते है।
🕉 बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में *श्री कृष्ण चरण के दर्शन* होते है।
🕉 जगन्नाथ भगवान के सभी *रथों को बनाना प्रारम्भ* किया जाता है।
🕉 आदि शंकराचार्य ने *कनकधारा स्तोत्र* की रचना की थी।
🕉 *अक्षय* का मतलब है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो!!!
🕉 *अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है....!!!*

अक्षय रहे *सुख* आपका,😌
अक्षय रहे *धन* आपका,💰
अक्षय रहे *प्रेम* आपका,💕
अक्षय रहे *स्वास्थ* आपका,💪
अक्षय रहे *रिश्ता* हमारा 🌈
💦💓🤝🏻🤝🏻💓💦

18/11/2021

लग्नेश का द्वादश भाव मे फल....
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लग्नेश की लग्न में स्थिति --
कुंडली के लग्न में ही लग्नेश भी स्थित है और वह किसी तरह के पाप प्रभाव में भी नहीं है तब लग्न अत्यधिक शक्तिशाली बन जाता है. व्यक्ति बहुत मजबूत होता है, उसके इरादे कोई नहीं हिला सकता है. पुरुषार्थ से जीवन में सभी कुछ हासिल करता है. अपनी चाहतों को अधिक से अधिक पूरा करने की चाह होती है क्योंकि लग्न में ही स्थित है तो अपना ध्यान पहले करने वाला जातक होता है. अपनी ओर सभी का ध्यान भी चाहता है.

लग्नेश की दूसरे भाव में स्थिति –

जन्म कुंडली का दूसरा भाव धन भाव होने के साथ कुटुम्ब का भी माना जाता है. यदि लग्नेश कुंडली के दूसरे भाव में स्थित है तब व्यक्ति अपने प्रयासों से धन कमाता है. कुटुम्ब भाव है तो व्यक्ति का झुकाव अपने घर-परिवार की ओर काफी ज्यादा होता है. धन कमाने में जुटा रहता है और व्यक्ति के भीतर संस्कार भी देखे जा सकते हैं.

लग्नेश की तीसरे भाव में स्थिति –

तीसरे भाव को प्रयासों का माना गया है. कम्यूनिकेशन्स के लिए भी इसी भाव को देखा गया है. यदि लग्नेश तीसरे भाव में स्थित हो तब व्यक्ति को अपने शौक पूरे करने का जोश रहता है. मौज मस्ती व दोस्तों के साथ रहना अच्छा लगता है लेकिन बात-बात में क्रोध करने वाला भी होता है, भले ही वह कई बार क्रोध को अप्रत्यक्ष रुप से ही प्रकट करता हो. आलसी होता है किसी तरह के कोई प्रयास नहीं करना चाहता है. सामाजिक कार्यों में रुचि नहीं होती है. जैसा कि यह भाव कम्यूनिकेशन्स का भी है तो जातक लोगों से मेलजोल कम ही रखता है. समाज में कैसे रहा जाता है इसकी जानकारी नहीं होती है लेकिन अपनी अकड़ में रहना अच्छा लगता है.

लग्नेश की चतुर्थ भाव में स्थिति –
चतुर्थ भाव को सुख भाव कहा गया है तथा माता को भी इसी भाव से देखते हैं. यदि लग्नेश चतुर्थ भाव में स्थित है तब व्यक्ति का झुकाव अपनी माता की ओर होगा. सभी प्रकार की सुख सुविधाओं को पाने वाला होगा. सुख-संपत्ति के प्रति जातक को घमंड भी रहेगा. दूसरों को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति भी व्यक्ति में देखी जा सकती है. लग्नेश के चतुर्थ में होने से वह दशम भाव को भी दृष्ट करेगा जिससे व्यक्ति का अपने व्यवसाय के प्रति रुझान देखा जा सकता है.

लग्नेश की पंचम भाव में स्थिति –

पंचम भाव एक धर्म त्रिकोण माना गया है और इसे लक्ष्मी स्थान भी कहते हैं. व्यक्ति को नाम व शोहरत मिलेगी, इस भाव से शिक्षा भी देखी जाती है तो व्यक्ति अच्छी शिक्षा प्राप्त करेगा. बुद्धिमान होगा और अपने बल पर धनी बनने वाला भी होगा. पंचम भाव से भावुकता भी देखी जा हैं क्योंकि प्रेम संबंध भी यहीं से देखे जाते हैं. जब भाव ही नहीं होगा तो प्रेम कैसे होगा. व्यक्ति का भावुकता के प्रति भी झुकाव देखा जा सकता है.

यहाँ एक बात ध्यान देने योग्य यह है कि यदि लग्न और लग्नेश के मध्य राशि परिवर्तन हो रहा है तब संतान प्राप्ति में कमी हो सकती है. यदि लग्नेश एक पाप ग्रह होकर पंचम में स्थित है या पंचम में पाप ग्रहों के प्रभाव में है तब व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित सी रहती है.



लग्नेश की छठे भाव में स्थिति –

छठे भाव को शुभ नहीं माना गया है. यह भाव रोग, ऋण तथा शत्रुओं का भाव माना गया है. शत्रु प्रत्यक्ष हों या अप्रत्यक्ष हों, उनका आकंलन इसी भाव से किया जाता है. व्यक्ति रोगग्रस्त रह सकता है यदि कुंडली का दशाक्रम भी खराब चल रहा हो.

छठे भाव का दूसरा पहलू देखें तो यह भाव प्रतिस्पर्धा का भी माना गया है और शत्रु व्यक्ति के प्रतिद्वंद्वी भी हो सकते हैं. व्यक्ति शत्रुओं का नाश करने वाला होगा. प्रतियोगिताओं में जीतने वाला होगा अर्थात हर प्रतिस्पर्धा को जीतकर चीजें हासिल करने वाला होगा. छठे भाव से माता के परिवार को देखा जाता है अर्थात जातक के ननिहाल को देखा जाता है. लग्नेश का इस भाव में होना जातक को उसके ननिहाल से ज्यादा जोड़कर रखता है. ननिहाल की ओर झुकाव अधिक रहता है. व्यक्ति अपने पिता को नाम देने वाला होता है.

इस भाव में होने से व्यक्ति थोड़ा भ्रमित रहने के साथ किसी ना किसी पचड़े में भी फंसा रहता है लेकिन जीवन में अपनी मेहनत से कमाने वाला होता है. अगर लग्नेश छठे भाव में पीड़ित होकर स्थित है तब कोई भी लाभ जातक को नहीं मिलेगा. किसी ना किसी समस्या से घिरा रहेगा और ईर्ष्यालु स्वभाव का होगा. यदि छठे में पीड़ित है लेकिन वर्ग कुंडलियों में स्थिति में सुधार है तब थोड़ा हालात सुधर सकते हैं.

लग्नेश की सप्तम भाव में स्थिति –
इस भाव से सभी तरह की साझेदारियाँ देखी जाती है. व्यक्ति का जीवनसाथी भी इसी भाव से देखा जाता है. इस भाव से यात्राएँ भी देखी जाती हैं. व्यक्ति की प्रसिद्धि भी इस भाव से देखी जाती है कि वह जनता में लोकप्रिय होगा कि नहीं. यह भाव काम त्रिकोण कहलाता है तो व्यक्ति की ईच्छाएँ भी इस भाव से देखी जाएगी. अगर लग्नेश सप्तम भाव में स्थित होगा तो इस भाव से मिलने वाले सभी फलों की तरफ उसका झुकाव रहेगा.

लग्नेश यदि सप्तम भाव में शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तब सब कुछ मिलेगा लेकिन अगर अशुभ प्रभाव में होगा तब इस भाव के फलों को नहीं पा सकेगा. विवाहित जीवन भी कष्टपूर्ण रहेगा. व्यक्ति अपने घर से भी दूर चला जाता है.



लग्नेश की अष्टम भाव में स्थिति –

आठवें भाव को अच्छा नहीं माना गया है लेकिन गूढ़ विद्याओं तथा रिसर्च काम के लिए इसे अच्छा कहा गया है. यदि आठवें भाव में लग्नेश अच्छी हालत में हैं तब व्यक्ति का झुकाव गूढ़ विद्याओं की ओर हो सकता है. भले ही वह उन्हें सीखे ना लेकिन उनमें सदा दिलचस्पी बनी रहती है. व्यक्ति स्वयं भी रहस्यमयी बना रह सकता है. कोई उसके बारे में ज्यादा नहीं जान पाएगा कि वह भीतर से कैसा है. किसी ना किसी विवाद में भी घिरा रह सकता है.

आठवाँ भाव शुभ भी नहीं माना जाता है इसलिए यहाँ लग्नेश के होने से बुद्धि भी भ्रम में रहेगी. व्यक्ति का झुकाव धार्मिकता की ओर भी रहेगा जो अत्यधिक गहरी बातें होगी धर्म की खासकर उनकी तरफ रुचि ज्यादा रहेगी.

लग्नेश की नवम भाव में स्थिति –

नवम भाव सबसे बली धर्म त्रिकोण हैं और पूरी कुंडली का सबसे अधिक महत्वपूर्ण भाव भी हैं क्योंकि यहीं से भाग्य भी देखा जाता है. यदि यह भाव बली है तो भाग्य से सभी कुछ व्यक्ति को जीवन में मिल जाएगा. इस भाव से पिता तथा गुरु दोनों का आंकलन किया जाता है. यदि लग्नेश इस नवम भाव में स्थित हो तब व्यक्ति का झुकाव धर्म की ओर तो होगा ही उसे अपने पिता तथा गुरु की ओर भी लगाव रहेगा. गुरुजनों तथा वरिष्ठ लोगों का आदर करेगा. शिक्षित होगा तथा जीवन को अच्छे तरीके से जीने वाला रहेगा. लग्नेश का नवम में जाना राजयोगकारी होगा.

यदि लग्नेश नवम भाव में पीड़ित है तब पिता से कोई लगाव नहीं होगा और लगाव होगा भी तो पिता से कुछ मिलेगा नहीं. जीवन में भाग्य को जगाने के लिए संघर्ष ज्यादा करने पड़ेगें. एक आम जीवन बिताने वाला व्यक्ति हो सकता है.

लग्नेश की दशम भाव में स्थिति –

लग्नेश का दशम भाव में जाना अच्छा माना गया है. यदि इस भाव में लग्नेश उच्च का हो जाए या एक अच्छी हालत में भी हो तब व्यक्ति किसी ना किसी संस्था को बनाने वाला होता है. अपने कार्य क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान भी बनाता है. व्यक्ति का रुझान अपने कार्यक्षेत्र अथवा व्यवसाय की ओर अधिक रहेगा और कर्म करना ही अपना पहला कर्तव्य भी समझेगा.

अगर लग्नेश दशम भाव में पीड़ित अवस्था में है अथवा नीच का भी है तब व्यक्ति पैसा तो कमाएगा लेकिन बुरे कर्मों से और नीच कर्म की ओर झुकाव भी ज्यादा रहेगा. किसी ना किसी तरह से पैसा कमाने में ही मन लगा रहेगा. मन में सदा धन कमाने की उधेड़बुन भी चलती रहेगी.



लग्नेश की एकादश भाव में स्थिति –

एकादश भाव को उपचय भाव भी कहा गया है. यह एक काम त्रिकोण भी है. लाभ तथा कला को भी यहाँ से देखा जाता है. पिता की ओर के रिश्तेदारों को भी इसी भाव से देखा जाता है. मित्रों को और उनके मध्य की लोकप्रियता को भी इसी भाव से देखा जाता है. यदि लग्नेश, एकादश भाव में स्थित है तब व्यक्ति मित्रों की ओर झुका रहेगा और पिता की ओर के लोगों से लगाव रहेगा. अपने आप को स्थापित करने तथा नाम, शोहरत कमाने में भी रुचि रहेगी.

यदि लग्नेश पीड़ित होकर एकादश भाव में स्थित है तब गलत तरीके से काम करने वाला होगा. अपने मतलब से ही लोगों से बात करेगा अर्थात मतलबी होगा. अपने लोगों से दूर रहेगा और नीच प्रवृत्ति वाला, घटिया तथा स्वार्थी होगा.

लग्नेश की द्वादश भाव में स्थिति
द्वादश भाव को व्यय भाव कहा कहा गया है. इस भाव से हर तरह के खर्चे देखे जाते हैं. विदेश यात्राएँ भी इस भाव से देखी जाती हैं. लग्नेश के इस भाव में जाने से व्यक्ति खर्चीला होगा, यात्राओं में रुचि रहेगी और अपने घर से दूर रहने वाला होगा. इस भाव से दानादि भी देखा जाता है और यदि लग्नेश अच्छी हालत में इस भाव में स्थित है तब धार्मिक कार्यों में दान देने में उसकी रुचि रहेगी, दानी होगा.

यदि लग्नेश इस भाव में पीड़ित अवस्था में है तब घर से दूर जाकर संघर्ष करेगा और अकेले रहने में उसकी रुचि भी रहेगी. विषय वासनाओं की ओर झुकाव अधिक होगा और उन पर अत्यधिक पैसा खर्च करेगा.

07/09/2021

आज की बात 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 !!क्या आप जानते है ताश के पत्तो का मर्म !!

हम ताश खेलते है, अपना मनोरंजन करते है। ताश का खेल हर जगह खेला जाता है। पर शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि ताश आधार वैज्ञानिक है, व साथ साथ ही प्राकृति से भी जुड़ा हुआ है:

आयताकार मोंटे कागज़ से बने पत्ते चार प्रकार के .....ईंट, पान, चिड़ी, और हुक्म, प्रत्येक 13 पत्तों को मिलाकर कुल 52 पत्ते होते हैं।

पत्ते.... एक्का से दस्सा, गुलाम, रानी एवं राजा ।

1. 52 पत्ते .......52 सप्ताह
2. 4 प्रकार के पत्ते .......4 ऋतु
3. प्रत्येक रंग के 13 पत्ते....प्रत्येक ऋतु में 13 सप्ताह
4. सभी पत्तों का जोड़ ..1 से 13 = 91 × 4 = 364
5. एक जोकर..... 364+1= 365 दिन...1 वर्ष
6. दूसरा जोकर गिने..365 +1=366 दिन..लीप वर्ष
7. 52 पत्तों में 12 चित्र वाले पत्ते - 12 महिने
8. लाल और काला रंग ... दिन और रात

पत्तों का अर्थ:-

1 दुक्की - पृथ्वी और आकाश
2. तिक्की- ब्रम्हा, विष्णू, महेश
3. चौकी - चार वेद (अथर्व वेद, सामवेद, ऋग्वेद, अथर्ववेद)
4. पंजी - पंच प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान)
5. छक्की - षड रिपू (काम, क्रोध, मद, मोह, मत्सर, लोभ)
6. सत्ती- सात सागर
7. अटठी- आठ सिद्धी
8. नव्वा- नौ ग्रह
9. दस्सी- दस इंद्रियां
10. गुलाम- मन की वासना
11. रानी- माया
12. राजा - सबका शासक
13. एक्का- मनुष्य का विवेक

11/08/2021

*रुद्राष्टक स्तोत्रं*
〰️〰️〰️〰️
करि दंडवत सप्रेम द्विज सिव सन्मुख कर जोरि।
बिनय करत गदगद स्वर समुझि घोर गति मोरि॥

अर्थ:-प्रेम सहित दण्डवत्‌ करके वे ब्राह्मण श्री शिवजी के सामने हाथ जोड़कर मेरी भयंकर गति (दण्ड) का विचार कर गदगद वाणी से विनती करने लगे-॥

छंद :

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं।
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं॥
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं॥

अर्थ:-हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर तथा सबके स्वामी श्री शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित (अर्थात्‌ मायादिरहित), (मायिक) गुणों से रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाश रूप एवं आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले दिगम्बर (अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले) आपको मैं भजता हूँ॥

निराकारमोंकारमूलं तुरीयं।
गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं॥
करालं महाकाल कालं कृपालं।
गुणागार संसारपारं नतोऽहं॥

अर्थ:-निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलासपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं।
मनोभूत कोटि प्रभा श्रीशरीरं॥
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा। लसद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा॥

अर्थ:-जो हिमाचल के समान गौरवर्ण तथा गंभीर हैं, जिनके शरीर में करोड़ों कामदेवों की ज्योति एवं शोभा है, जिनके सिर पर सुंदर नदी गंगाजी विराजमान हैं, जिनके ललाट पर द्वितीया का चंद्रमा और गले में सर्प सुशोभित है॥

चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं।
प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं॥
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं ।
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥

अर्थ:-जिनके कानों में कुण्डल हिल रहे हैं, सुंदर भ्रुकुटी और विशाल नेत्र हैं, जो प्रसन्नमुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं, सिंह चर्म का वस्त्र धारण किए और मुण्डमाला पहने हैं, उन सबके प्यारे और सबके नाथ (कल्याण करने वाले) श्री शंकरजी को मैं भजता हूँ॥

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं।
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं॥
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं।
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं॥

अर्थ:-प्रचण्ड (रुद्ररूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मे, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश वाले, तीनों प्रकार के शूलों (दुःखों) को निर्मूल करने वाले, हाथ में त्रिशूल धारण किए, भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होने वाले भवानी के पति श्री शंकरजी को मैं भजता हूँ॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी।
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी॥
चिदानंद संदोह मोहापहारी।
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥

अर्थ:-कलाओं से परे, कल्याणस्वरूप, कल्प का अंत (प्रलय) करने वाले, सज्जनों को सदा आनंद देने वाले, त्रिपुर के शत्रु, सच्चिदानंदघन, मोह को हरने वाले, मन को मथ डालने वाले कामदेव के शत्रु, हे प्रभो! प्रसन्न होइए, प्रसन्न होइए॥

न यावद् उमानाथ पादारविंदं।
भजंतीह लोके परे वा नराणां॥
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं।
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥

अर्थ:-जब तक पार्वती के पति आपके चरणकमलों को मनुष्य नहीं भजते, तब तक उन्हें न तो इहलोक और परलोक में सुख-शांति मिलती है और न उनके तापों का नाश होता है। अतः हे समस्त जीवों के अंदर (हृदय में) निवास करने वाले हे प्रभो! प्रसन्न होइए॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां।
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं॥
जरा जन्म दुःखोद्य तातप्यमानं॥
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो॥

अर्थ:-मैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म (मृत्यु) के दुःख समूहों से जलते हुए मुझ दुःखी की दुःख से रक्षा कीजिए। हे ईश्वर! हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥

श्लोक :

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति॥

अर्थ:-भगवान्‌ रुद्र की स्तुति का यह अष्टक उन शंकरजी की तुष्टि (प्रसन्नता) के लिए ब्राह्मण द्वारा कहा गया। जो मनुष्य इसे भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उन पर भगवान्‌ शम्भु प्रसन्न होते हैं॥
*🌹अजय कालिया🌹**🌹हर हर महादेव 🌹*
जय महाकाल 🌹🔱🕉️🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹*

29/07/2021

*नक्षत्र*

*१) अश्विनी-*
नक्षत्र - अश्विनी , नक्षत्र देवता - अश्विनीकुमार , नक्षत्र स्वामी - केतु , नक्षत्र पूज्य वृक्ष - वत्सनाग , नक्षत्र ऐच्छिक वृक्ष - अडोसा ( अडूसा ) , नक्षत्र चरणाक्षर - चु, चे, चो, ला ४ चरण मेष राशी में , नक्षत्र प्राणी- घोडा नक्षत्र तत्व - वायु , नक्षत्र गण- देव , नक्षत्र स्वभाव – मृदु.
अश्विनी नक्षत्र में जन्म हुए मनुष्य के गुण:- अलंकार प्रेमी , सुंदर, मनोहर -जिनको देखनेसे मन प्रसन्न हो, समर्थ, और बुद्धिमान होते है।
अश्विनी से जुड़े व्यवसाय:- प्रेरक प्रशिक्षक, अभियान प्रबंधक, एथलीट, खेल से संबंधित व्यवसाय, हवाई जहाज/ ऑटो / नाव / घोड़ा दौड़ी , सैन्य, कानून प्रवर्तन, इंजीनियरिंग, जौहरी, चिकित्सा व्यवसाय, फार्मासिस्ट, सलाहकार , औषधि माहिर, शारीरिक रूप से साहसी क्षेत्र में कला प्रदर्शन , अन्वेषक, शोधकर्ता, और माली।

*२) भरणी-*
नक्षत्र -भरणी , नक्षत्र देवता - यमाद्य पितर, नक्षत्र स्वामी -शुक्र, नक्षत्र आराध्य वृक्ष - आंवला, नक्षत्र ऐच्छिक वृक्ष- काला कत्था , राशी व्याप्ती - ली, लु, ले, लो ४ चरण मेष राशी में , नक्षत्र प्राणी - हाथी , नक्षत्र तत्व - अग्नी, नक्षत्र स्वभाव –क्रूर , नक्षत्र गण- मनुष्य।
भरणी नक्षत्र में पैदा हुए मनुष्य के गुण:- कार्य करनेकी क्षमता रखनेवाले , सत्य का मार्ग अपनानेवाले या सत्य बोलनेवले, निरोगी, चतुर और सुखी।
भरणी नक्षत्र से जुड़े व्यवसाय :- बच्चे से जुडी (शिक्षण, बच्चे की देखभाल, आदि), स्त्री रोग विशेषज्ञ, दाई, प्रजनन विशेषज्ञ, ताबूत बनानेवाला, संपत्ति सलाहकार, हत्या जासूसी, लेखक, अंतिम संस्कार सेवाओं के साथ जुड़े क्षेत्र, मनोरंजन, मॉडल, विदेशी या यौनकर्मियों से जुड़े , न्यायाधीश, होटल उद्योग, खानपान, पशु चिकित्सक, आग सेनानी, सर्जन, फोटोग्राफर, चरम गोपनीयता, भूभौतिकी, भूकंप और ज्वालामुखी विशेषज्ञों की स्थिति।

*३) कृतिका-*
नक्षत्र- कृतिका , नक्षत्र देवता – अग्नी , नक्षत्र स्वामी – रवि , नक्षत्र पूजनीय वृक्ष - गूलर (औदुंबर) ,
नक्षत्र ऐच्छिक वृक्ष – बहेड़ा , राशी व्याप्ती – अ, १ चरण मेष राशि में . ई, ऊ, ऐ ३ चरण वृषभ राशी में
नक्षत्र प्राणी- बकरी , नक्षत्र तत्व –अग्नी , नक्षत्र गण- राक्षस, नक्षत्र स्वभाव – क्रूर.
कृत्तिका नक्षत्र में जन्म लेनेवालोंके गुण:- अधिकतर भोजन में रूचि रखनेवाले , तेजस्वी और जीवन में तरक्की के आसमान को छूते है।
कृत्तिका नक्षत्र से जुड़े व्यवसाय :- प्राधिकारी या प्रबंधन की स्थिति, जनरल, आलोचक, अध्यापक, विश्वविद्यालय व्यवसाय, वकील, तकनीकी व्यवसाय, चाकू या तलवार, तलवारबाजी, आर्चर, लोहार, जौहरी, सर्जन, विस्फोटक या आग से जुड़े व्यवसायों के रूप में तेज वस्तुओं से संबंधित किसी भी क्षेत्र से , आग सेनानी, पुलिस, सेना, खनिक, पुनर्वास विशेषज्ञ, प्रेरक ट्रेनर, मिट्टी के बरतन, आध्यात्मिक शिक्षक, हेयर स्टाइलिस्ट, दर्जी, और अनाथालय के लिए काम करना।

*४ ) रोहिणी-*
नक्षत्र- रोहिणी , नक्षत्र देवता –ब्रम्हा , नक्षत्र स्वामी – चंद्र , नक्षत्र पूजनीय वृक्ष -काला जामुन ( जांभळ) नक्षत्र ऐच्छिक वृक्ष- बेल , राशी व्याप्ती - ओ, वा, वि, वू ४ चरण वृषभ राशी में , नक्षत्र प्राणी- सांप , नक्षत्र तत्व- पृथ्वी , नक्षत्र गण- मनुष्य , नक्षत्र स्वभाव- मृदु.
रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेनेवालोंके गुण:- साफ-सफाई में ध्यान देनेवाले, सच बोलना पसंद करनेवाले, स्थिर बुद्धिवाले, मधुर भाषण करनेवाले और सुन्दर दिखनेवाले !
रोहिणी नक्षत्र से जुडी वृत्ति :- कृषि, धान्य प्रसंस्करण, वनस्पति, वैद्य, कलाकार, संगीतकार, मनोरंजन उद्योग, कॉस्मेटिक उद्योग, जौहरी, रत्न व्यापारी, इंटीरियर डेकोरेटर, बैंकर, परिवहन व्यवसाय, पर्यटन, ऑटोमोबाइल उद्योग, तेल और पेट्रोलियम, वस्त्र उद्योग, शिपिंग उद्योग, पैकेजिंग और वितरण, और किसी भी जलीय उत्पादों और तरल पदार्थ के साथ जुड़ा हुआ पेशा !

*5) मृगशीर्ष-*
नक्षत्र- मृगशीर्ष , नक्षत्र देवता- चंद्र , नक्षत्र स्वामी- मंगळ , नक्षत्र पूजनीय वृक्ष - काला कत्था , नक्षत्र ऐच्छिक वृक्ष- पीपल , राशी व्याप्ती - वे, वो, २ चरण वृषभ राशी में , का, की २ चरण मिथुन राशी में , नक्षत्र प्राणी – सांप , नक्षत्र तत्व- वायु , नक्षत्र गण- देव , नक्षत्र स्वभाव- मृदु।
मृगशीर्ष नक्षत्र वाले मनुष्य के गुण:- चतुर-चपल, उमंग से भरपूर, धनि, और सुख का भोग लेनेवाले।
मृगशीर्ष नक्षत्र से सम्बंधित कार्य :- कलाकार के गायक, संगीतकार, लेखक, कवि, चित्रकार, दार्शनिक, रत्न उद्योग, उत्पाद या सामग्री पृथ्वी से संबंधित, भूमि अभिवृद्धि, सर्वेक्षक, यात्रि, खोजकर्ता, इमारत ठेकेदार, व्यापार मशीनरी या इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित, पशु चिकित्सक, पालतू जानवरों से संबंधित, फैशन और वस्त्र उद्योग, बिक्री प्रतिनिधि, विज्ञापन प्रसारक, शासन प्रबंध, ज्योतिषि, शिक्षक की वृत्ति।

*६) आर्द्रा-*
नक्षत्र –आर्द्रा, नक्षत्र देवता - रुद्र (शिव) , नक्षत्र स्वामी – राहु, नक्षत्र आराध्य वृक्ष - पिप्पली ( लम्बी काली मिर्च)
नक्षत्र पर्यायी वृक्ष – चंदन, नक्षत्र चरणाक्षर - कु,ख,ञ,छ. नक्षत्र प्राणी- कुत्ता, नक्षत्र तत्व- जल, नक्षत्र स्वभाव – तीक्ष्ण, नक्षत्र गण- मनुष्य।
जन्म नक्षत्र फल:- जो अहंकार दिखाता हो, मदत करनेवालोंको भुला देनेवाला, हिंसा प्रेमी, और पाप कर्म करने वाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति:- शारीरिक श्रम से जुड़े काम, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, बिजली इंजीनियर, ध्वनि तकनीशियन, इलेक्ट्रॉनिक संगीत, वीडियो गेम डेवलपर, विशेष प्रभाव और 3-डी प्रौद्योगिकी, विज्ञान कथा लेखक, भाषाकोविद, चित्रकार , दार्शनिक, भौतिक विज्ञानी, शोधकर्ता, सर्जन, फार्मासिस्ट, परमाणु ऊर्जा उद्योग, मनोचिकित्सक, न्यूरोलॉजिस्ट के साथ काम करता है; जासूसी, बिक्री विशेषज्ञ, विश्लेषक, राजनेता, चोर, शतरंज खिलाड़ी आदि विषयों का ज्ञाता।

*७) पुनर्वसु-*
नक्षत्र- पुनर्वसु, नक्षत्र देवता- अदिती, नक्षत्र स्वामी- गुरू, नक्षत्र आराध्य वृक्ष – बांस, नक्षत्र पर्यायी वृक्ष- बरगद
नक्षत्र चरणाक्षर- के,को,हा, ही, नक्षत्र प्राणी- बिल्ली, नक्षत्र तत्व- वायु, नक्षत्र स्वभाव- सत्व, नक्षत्र गण- देव.
जन्म नक्षत्र फल:- सुखी, सुशिल, दमनशील, अल्प मेधावी, रोंगो से पीड़ित , अधिक प्यासा, और अल्प संतोषी ( थोड़ा मिलनेसेहि सतुंष्ट होनेवाला)।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ:- पर्यटन, यात्रा उद्योग, होटल प्रबंधक , व्यापार उद्योग, निर्माण, वास्तुकला, सिविल इंजीनियर्स, वैज्ञानिक, अध्यापक, लेखक, गूढ़ अध्ययन, दार्शनिक, मंत्रि, इतिहासकार, प्राचीन वस्तु का व्यापारि, समाचार पत्र उद्योग, मकान मालिक, अंतरिक्ष यात्री, कोरियर, कारीगर, नवीन आविष्कार, तीरंदाजी, इनको अधिक तर अपने हाथों का उपयोग की आवश्यकता होती है।

*८) पुष्य-*
नक्षत्र- पुष्य, नक्षत्र देवता- गुरु, नक्षत्र स्वामी- शनि, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- पीपल,नक्षत्र पर्यायी वृक्ष- अंजीर
नक्षत्र चरणाक्षर- हु, हे, हो, डा, नक्षत्र प्राणी- बकरी, नक्षत्र तत्व- अग्नी, नक्षत्र स्वभाव- शुभ, नक्षत्र गण- देव
जन्म नक्षत्र फल:- जिनका मन सदा शांत रहता हो, महाज्ञानी, धनिक, सदा धर्म के मार्ग का अनुसरण करनेवाले और सुन्दर होते है।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ:- राजनेता, रईस, खानपान, खाद्य या पेय उद्योग, परिचारिक, डेयरी उद्योग, सलाहकार, मनोवैज्ञानिक, पादरी, पुजारि, पंडित,आध्यात्मिक सलाहकार, दान कार्यकर्ता, शिक्षक, बच्चे की देखभाल पेशेवर, कारीगर, अचल संपत्ति में व्यवसाय, किसान, पानी से संबंधित उद्योग, व्यापार रूढ़िवादी या पारंपरिक धर्मों से संबंधित कार्य में कुशल।

*९) आश्लेषा-*
नक्षत्र- आश्लेषा, नक्षत्र देवता- सांप , नक्षत्र स्वामी - बुध, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- नागकेसर ( लाल) , नक्षत्र पर्यायी वृक्ष -उंडी , नक्षत्र चरणाक्षर - डि,डू,डे,डो, नक्षत्र प्राणी- बिल्ली , नक्षत्र तत्व - जल , नक्षत्र स्वभाव- तीक्ष्ण नक्षत्र गण- राक्षस। नक्षत्र जन्मफल:- जिद्दी स्वाभववला, अधिक आशावादी, पापकर्म निरत, और कृतघ्न , मदतगार को भूलनेवला।
विशेष:- इस नक्षत्र में जन्म लेनेवाले मनुष्य की नक्षत्र शांति पूजा करना अनिवार्य है।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति - केमिस्ट या रासायनिक इंजीनियर, व्यवसाय जहर या खतरनाक सामग्री, पेट्रोलियम उद्योग, दवा उद्योग, ड्रग डीलर, तंबाकू उद्योग, चोर, गबन, वयस्क मनोरंजन उद्योग, सरीसृप, सपेरा, सर्जन, गुप्त आपरेशन-सर्विस, वकीलों के साथ काम करना, राजनीतिज्ञ सलाहकार, मनोवैज्ञानिक, कृत्रिम निद्रावस्था में लानेवाला, योग प्रशिक्षक, और नीमहकीम।

*१०) मघा-*
नक्षत्र- मघा, नक्षत्र देवता- पितर, नक्षत्र स्वामी- केतु, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- बरगद , नक्षत्र पर्यायी वृक्ष- रिठा
नक्षत्र चरणाक्षर- मा,मि,मू,मे, नक्षत्र प्राणी- चूहा , नक्षत्र तत्व- अग्नी , नक्षत्र स्वभाव- क्रूर , नक्षत्र गण- राक्षस
नक्षत्र जन्मफल :- दो से ज्यादा भाई-बहन के साथ रहनेवाला, धनिक, हर तरह के भोग भोगनेवाला, भगवान और माता-पिता की भक्ति करनेवाला, सदा उत्साह से भरपूर।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति:- प्रबंधक, कार्यकारी अधिकारी, अध्यक्ष, प्रशासन, रॉयल्टी, सरकारी अधिकारी, कथा लेखक, नौकरशाह, रईस, वकील, न्यायाधीश, रेफरी, राजनीतिज्ञ, लाइब्रेरियन, वक्ता, इतिहासकार, संग्रहालय में पदवी, एंटीक डीलर, पुरातत्व विद्वान जेनेटिक इंजीनियर, प्राचीन संस्कृति का शोध कर्ता, दस्तावेजीकरण कलाकार, वक्ता, तांत्रिक।

*११) पुर्वा फाल्गुनी-*
नक्षत्र- पुर्वा (फाल्गुनी) , नक्षत्र देवता - भग , नक्षत्र स्वामी – शुक्र, नक्षत्र आराध्य वृक्ष - पलाश (पळस)
नक्षत्र पर्यायी वृक्ष- बेल, नक्षत्र चरणाक्षर - मो,टा,टी,टु, नक्षत्र प्राणी- चूहा , नक्षत्र तत्व- क्रुर, नक्षत्र स्वभाव - सत्व
नक्षत्र गण- मनुष्य
नक्षत्र जन्मफल:- सदा प्रिय वचन बोलनेवाला, दान-धर्म करनेवाला, आकर्षक व्यक्तित्व , यात्रा प्रेमी और राज सेवक ( उच्च स्थान का सेवक )
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ:- कार्यकारी, सरकारी अधिकारी, मनोरंजन, मेकअप कलाकार, मॉडल, फोटोग्राफर, चित्रकार, कला संग्रहालय या गैलरी, संगीतकार, शिक्षक, रत्न व्यापारी, शारीरिक फिटनेस ट्रेनर, इंटीरियर डेकोरेटर, महिला के उत्पादों के साथ काम करते हैं, गुप्त -चिकित्सक, नींद चिकित्सक, जीवविज्ञानी, पर्यटन, कपास और रेशम उद्योग।

*१२) उत्तरा फाल्गुनी-*
नक्षत्र- उत्तरा (फाल्गुनी) , नक्षत्र देवता- अर्यमा , नक्षत्र स्वामी- रवि, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- पिंपरी( प्लक्ष )
नक्षत्र पर्यायी वृक्ष - श्वेत कनेर , नक्षत्र चरणाक्षर - टे,टो,पा,पी, नक्षत्र प्राणी- गाय , नक्षत्र तत्व – वायु,
नक्षत्र स्वभाव- सत्व , नक्षत्र गण- मनुष्य
नक्षत्र जन्मफल:- दिखनेमें सुन्दर, अपनी विद्या से धन कमानेवाला, भोगी, और सुखोंका अनुभोग लेनेवाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति:- मनोरंजन, संगीतकार, कलाकार, प्रबंधक, नेता, सार्वजनिक आंकड़ा, खेल सुपरस्टार, संगठन के प्रमुख, शिक्षक, उपदेशक, परोपकारि, शादी सलाहकार, संयुक्त राष्ट्र के साथ काम, राजनायक, संस्थापक, बैंकर, लेनदार, सामाजिक कार्यकर्ता, सलाहकार , कमांडर।

*१३) हस्त-*
नक्षत्र- हस्त, नक्षत्र देवता- सुर्य, नक्षत्र स्वामी- चंद्र, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- चमेली , नक्षत्र पर्याय वृक्ष- रिठा
नक्षत्र चरणाक्षर- पू,ष,ण,ठ , नक्षत्र प्राणी- भैंस , नक्षत्र तत्व- वायु, नक्षत्र स्वभाव- रज , नक्षत्र गण- देव
नक्षत्र जन्मफल:- उमंग से भरपूर, धैर्यवान, जो पेय- जल से सम्बंधित वस्तु का प्रेमी, दयावान, और कालांतर से बुद्धि में बदलाव आने से चोरी का मार्ग अपनानेवाला।
नक्षत्र से जुड़े व्यवसाय:- कारीगर, यांत्रिकी, गहने निर्मात विशेषज्ञ, शारीरिक श्रम, कसरत, सर्कस कलाकार, आविष्कारक, प्रकाशक, प्रिंटिंग उद्योग, कार्ड डीलर, जुआरी, बैंकर, लेखाकार, टाइपिस्ट क्लीनर, नौकरानी, मालिश, रासायनिक उद्योग, वस्त्र उद्योग, टैरो कार्ड पाठक, ज्योतिषी, नीलामकर्ता, मिट्टी के बरतन कर्ता, इंटीरियर डेकोरेटर, माली, खाद्य उत्पादन, नावी, मूर्तिकार, पेशेवर हास्य अभिनेता, भाषण चिकित्सक, परीक्षण कलाकार, जादूगर और चोरी में माहिर।

*१४) चित्रा-*
नक्षत्र- चित्रा, नक्षत्र देवता- त्वष्टा , नक्षत्र स्वामी- मंगळ, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- बेल , नक्षत्र पर्याय वृक्ष- बकूल
नक्षत्र प्राणी- बाघ , नक्षत्र तत्व- वायु, नक्षत्र स्वभाव- तीक्ष्ण ( तम), नक्षत्र चरणाक्षर- पे,पो,रा,री,
नक्षत्र गण- राक्षस
नक्षत्र जन्मफल:- अधिक रंग-बेरंगी कपड़े, आभूषण, सजावट के वस्तु पहनना पसंद करनेवाला या पहननेवाला, बड़े तेजस्वी आँखे और सुंदर दिखने वाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति:- आर्किटेक्ट, डिजाइनर, मूर्तिकार, कारीगर, फैशन डिजाइनर, कॉस्मेटिक डिजाइनर, प्लास्टिक सर्जन, फोटोग्राफर, ग्राफिक कलाकार, संगीतकार, प्रसारक, इंटीरियर डिजाइनर, गहने डिजाइनर, फेंग शुई विशेषज्ञ, आविष्कारक, मशीनरी के उत्पादन का व्यापारी, बिल्डर, चित्रकार , पटकथा लेखक, सेट डिजाइनर, कला निर्देशक, थिएटर कलाकार, झांज संगीतकार, औषधि माहिर, विज्ञापन, बहुमुखी प्रतिभाशाली।

*१५) स्वाती-*
नक्षत्र- स्वाती , नक्षत्र देवता- वायु , नक्षत्र स्वामी- राहु, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- अर्जुन , नक्षत्र पर्याय वृक्ष- जरुल
नक्षत्र चरणाक्षर- रू,रे,रो,ता . नक्षत्र प्राणी- भैंसा , नक्षत्र तत्व- अग्नी , नक्षत्र स्वभाव- सत्व , नक्षत्र गण- देव
नक्षत्र जन्मफल:- दमनशील इंद्रिय निग्रह रखनेवाला मेहनती व्यापारी, कृपा का पात्र धर्म का आचरण करके प्रिय वचन से सब का मन प्रसन्न करने वाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ:- व्यवसाय और व्यापार, खेल, गायक, संगीतकार, हवा उपकरण, अन्वेषक, स्वतंत्र उद्यमी, पायलट, शोधकर्ता, सेवा व्यवसाय, सॉफ्टवेयर उद्योग, चरम खेल, शिक्षक, राजदूत, वकील, न्यायाधीश, राजनीतिज्ञ, संघ के नेता, राजनयिक परिचारिक, योग प्रशिक्षक, से जुड़े काम में दिलचस्पी रखने वाले।

*१६) विशाखा-*
नक्षत्र- विशाखा, नक्षत्र देवता- इंद्राग्नी , नक्षत्र स्वामी- गुरू , नक्षत्र आराध्य वृक्ष- बबूल ( नागकेशर ) नक्षत्र पर्याय वृक्ष- पारिजात, नक्षत्र गण- राक्षस, नक्षत्र प्राणी- बाघ , नक्षत्र चरणाक्षर- ती,तो,ते,तू .
नक्षत्र तत्व- वायु, नक्षत्र स्वभाव- रज.
नक्षत्र जन्मफल:- द्वेषी जो दूसरे पर जलने वाला, लोभी, परन्तु तेजस्वी, बोलने में समर्थ वाग्मी, हरबात पर जघडनेवाला।
नक्षत्र से जुड़े काम और व्यवसाय:- शोधकर्ता, वैज्ञानिक, सैनिक, सैन्य नेता, लेखक, राजनेता, वकील, सार्वजनिक वक्ता, आव्रजन अधिकारि, पुलिस गार्ड, मजदूर, फैशन मॉडल, भाषण (प्रसारक) से जुड़े व्यवसाय, धार्मिक कट्टरपंथि, नर्तक, शराब का व्यापारी आदि विषयोंमें रूचि रखनेवाले हो सकते है।

*१७) अनुराधा-*
नक्षत्र- अनुराधा, नक्षत्र देवता- मित्र , नक्षत्र स्वामी- शनि, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- नागकेशर, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- बकुल ( मोलसिरि), नक्षत्र चरणाक्षर- ना,नि,नू,ने . नक्षत्र प्राणी- हिरन , नक्षत्र तत्व- पृथ्वी , नक्षत्र स्वभाव- सत्व , नक्षत्र गण- देव
जन्म नक्षत्रफल:- जो अनुराधा नक्षत्र में जन्म लेता है वह धनवान, विदेश वासी या विदेश से लगाव रहनेवाला, अधिक भूक से बाधित, और सदा घूमनेवाला, प्रयाणप्रिय !
नक्षत्र से जुड़े व्यवसाय :- कलाकार, संगीतकार, व्यवसाय प्रबंधन, पर्यटन उद्योग, दंत चिकित्सक, आपराधिक वकील, खनन इंजीनियर, वैज्ञानिक, सांख्यिकीविद्, गणितज्ञ, मानसिक माध्यम, ज्योतिषि, जासूस, फोटोग्राफर, सिनेमा, उद्योगपति, सलाहकार, मनोवैज्ञानिक, खोजकर्ता, राजनयिक, विदेशी देशों से जुड़े व्यवसाय समूह की गतिविधि संगठन / संस्था के कार्यकारी।

*१८) जेष्ठा-*
नक्षत्र- जेष्ठा, नक्षत्र देवता- इंद्र, नक्षत्र स्वामी- बुध, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- सांबर ( खजूर) , नक्षत्र पर्याय वृक्ष- बेतस, नक्षत्र चरणाक्षर- नो,या,यी,यु . नक्षत्र प्राणी- हिरन , नक्षत्र तत्व- पृथ्वी, नक्षत्र स्वभाव- तम, नक्षत्र गण- राक्षस.
जन्म नक्षत्रफल:- मित्रों की संख्या कम रहनेवाला , अर्थात कम-कम से मित्रता करनेवाला, सदा आनंद से परिपूर्ण, धर्म मार्ग से चलनेवाला, और गरम मिजाजवाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ :- संगीतकार, सैन्य नेता, राजनेता, पुलिस जासूस, इंजीनियर, प्रबंधक, दार्शनिक, बुद्धिजीवी, स्वरोजगार, सरकारी अधिकारि, प्रशासनिक पद, पत्रकार, रेडियो और टीवी कमेंटेटर, टॉक शो होस्ट, अभिनेता,फायरब्रिगेड, माफिया, वन रेंजर, साल्वेशन आर्मी के साथ व्यवसाय, शारीरिक श्रम, एथलीट, हवाई यातायात नियंत्रण, रडार, सर्जन।

*१९) मूल-*
नक्षत्र- मूळ, नक्षत्र देवता- निॠति (राक्षस), नक्षत्र स्वामी- केतु, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- राळ, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- बबूल, नक्षत्र चरणाक्षर- ये,यो,भा,भी . नक्षत्र प्राणी- कुत्ता , नक्षत्र तत्व- जल, नक्षत्र स्वभाव- तम, नक्षत्र गण- राक्षस।
जन्म नक्षत्रफल:- धनवान सम्मानित सुखी मनुष्य, परजन हिंसा से बाधित , स्थिर स्वभाववाला और सुख का अनुभाग लेनेवाला।
नक्षत्र से जुडी वृत्ति :- व्यापार, बिक्री, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, दार्शनिक, सार्वजनिक वक्ता, विवादकर्ता, प्रचारक, लेखक, वकील, राजनेता, आध्यात्मिक शिक्षक, चिकित्सक, औषधि माहिर, दंत चिकित्सक, दवा पुरुष, मनोचिकित्सक, संन्यासि, पुलिस अधिकारि, जांचकर्ता, सैनिक, आनुवंशिक शोधकर्ता, खगोल विज्ञानी , ताबूत बनानेवाला, रॉक संगीतकार, तांत्रिक अध्ययन, खनन उद्योग, विनाशकारी गतिविधि से संबंधित।

*२०) पूर्वाषाढा-*
नक्षत्र- पूर्वाषाढा, नक्षत्र देवता- जल, नक्षत्र स्वामी- शुक्र, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- वेत, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- गिलोय
नक्षत्र चरणाक्षर- भू,ध,प,ढ. नक्षत्र प्राणी- वानर, नक्षत्र तत्व- जल , नक्षत्र स्वभाव- रज, नक्षत्र गण- मनुष्य .
जन्म नक्षत्रफल:- सुन्दर-सुशिल सदा आनंद में रहनेवाली स्त्री का पति , अर्थात मनचाही पत्नी के साथ रहनेवाला, सम्मानित और अचल स्नेह-दया से परिपूर्ण।
नक्षत्र से जुड़े कार्य:- नेता, वकील, सार्वजनिक वक्ता, प्रेरक वक्ता, लेखक, अभिनेता, कलाकार, मनोरंजन, कवि, शिक्षक, पर्यटन उद्योग, विदेशी व्यापारि, शिपिंग उद्योग, नौसेना अधिकारी, समुद्री विशेषज्ञ, मत्स्य उद्योग, मनोचिकित्सक, कच्चे माल का उद्योग, पानी और तरल पदार्थ से सम्बंधित व्यवसाय, रिफाइनर, युद्ध रणनीतिकार, कॉस्ट्यूम डिजाइनर, हेयर स्टाइलिस्ट, वैद्यों के लिए करना।

*21) उत्तराषाढा-*
नक्षत्र- उत्तराषाढा, नक्षत्र देवता- विश्वदेव, नक्षत्र स्वामी- रवि, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- कटहल, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- कांचन, नक्षत्र चरणाक्षर- भे, भो,जा,जी, नक्षत्र प्राणी- मुंगुस, नक्षत्र तत्व- पृथ्वी, नक्षत्र स्वभाव- स्थिर नक्षत्र गण- मनुष्य।
जन्म नक्षत्र फल :- धार्मिक देवभक्त, विनय गुण से संपन्न,भारी मात्रा में मित्र और अपने लोगोंमे रहनेवाला, कृतज्ञ और सुन्दर दिखनेवाले होते है।
नक्षत्र से जुड़े व्यापार;- बड़ी जिम्मेदारी और नैतिक प्रकृति, से सम्बंधित, वैज्ञानिक, सैन्य कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी, प्रचारक, पुजारि, सलाहकार, ज्योतिषि, वकील, न्यायाधीश, मनोवैज्ञानिक, घोड़े का व्यवसाय, खोजकर्ता, पहलवान, एथलीट, शिकारी, मुक्केबाज, व्यापार के अधिकारि के व्यवसाय , प्राधिकरण के आंकड़ों का व्यवसाय, सुरक्षा कर्मि, समग्र चिकित्सक।

*२२) श्रवण-*
नक्षत्र- श्रवण, नक्षत्र देवता- विष्णु, नक्षत्र स्वामी- चंद्र, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- अर्क ,( दूधिया पौधा) नक्षत्र पर्याय वृक्ष- आम , नक्षत्र चरणाक्षर- शी,शू,शे,शो. नक्षत्र प्राणी- वानर, नक्षत्र तत्व- पृथ्वी, नक्षत्र स्वभाव- चर, नक्षत्र गण- देव।
जन्म नक्षत्रफल:- धनवान हर तरह के आनंद से परिपूर्ण , वेद-शास्त्र का ज्ञाता, बड़े दिलवाला ,अपने परिवार जन के साथ प्रेम से रहनेवाला और प्रसिद्ध व्यक्ति कहलानेवाला !
नक्षत्र से जुड़े कार्य:- शिक्षक, भाषाविद्, भाषण चिकित्सक, भाषा अनुवादक, कथाकार धार्मिक विद्वान, शिक्षक, नेता, शोधकर्ता, भूविज्ञानी, टेलीफोन ऑपरेटर, प्राचीन परंपरा का शोधकर्ता, हास्य अभिनेता, संगीत उद्योग, समाचार प्रसारक, टॉक शो होस्ट, सलाहकार, मनोचिकित्सकों के संरक्षण, मनोवैज्ञानिक, ज्योतिषि, रेडियो ऑपरेटर, परिवहन, पर्यटन, होटल और रेस्तरां उद्योग, चिकित्सक, समग्र चिकित्सा, दान कार्यकर्ता।

*२३) धनिष्ठा-*
नक्षत्र- धनिष्ठा, नक्षत्र देवता- वसु, नक्षत्र स्वामी- मंगळ, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- शमी, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- नीम
नक्षत्र चरणाक्षर- गा,गी,गू,गे. नक्षत्र प्राणी- सिंह, नक्षत्र तत्व- पृथ्वी, नक्षत्र स्वभाव- शुभ , नक्षत्र गण- राक्षस.
जन्म नक्षत्रफल:- दान-धर्म करनेवाला, शूरता से धन कमानेवाला परंतु लोभी अर्थात अनुभोग की अपेक्षा करनेवाला, संगीत प्रेमी और धनवान कहलानेवाला होगा !
नक्षत्र से जुडी वृत्ति:- संगीतकार, नर्तकी, कलाकार, डॉक्टर, सर्जन, रियल एस्टेट एजेंट, संपत्ति प्रबंधन, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, भौतिक विज्ञानी, इंजीनियरिंग, खनन, धर्मार्थ कार्यकारी , कवि, मनोरंजन, व्यापार, गीतकार, संगीत वाद्ययंत्र, गायक, मणि डीलर के निर्माता, एथलीट, समूह समन्वयक, ज्योतिषि, समग्र चिकित्सक।

*२४) शततारका-*
नक्षत्र- शततारका, नक्षत्र देवता- वरुण, नक्षत्र स्वामी- राहु, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- कदंब, नक्षत्र पर्याय वृक्ष- आपटा
नक्षत्र प्राणी- घोडा, नक्षत्र तत्व- जल, नक्षत्र स्वभाव- चर, नक्षत्र चरणाक्षर- गो,सा,सी,सू. नक्षत्र गण- राक्षस.
जन्म नक्षत्रफल:- स्पष्टतासे सामने से बोलनेवाला, अच्छे-बुरे आदत से पीड़ित, अपने धैर्य से शत्रु का संहार करनेवाला अर्थात शत्रु पर विजय प्राप्त करनेवाला और किसी के हाथ नहीं आने वाला।
नक्षत्र से संबंधित व्यवसाय:- चिकित्सक, सर्जन, एक्स-रे तकनीशियन, खगोल विज्ञानी, ज्योतिषि, इंजीनियर, वैमानिकी, अंतरिक्ष इंजीनियर, पायलट, परमाणु विज्ञानि, शोधकर्ता, बिजली, लेखक, सचिव, फिल्म और टेलीविजन, दवा, जड़ी बूटियों का कार्य कर्ता, ड्रग डीलर, अपशिष्ट निपटान, प्लास्टिक और पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल उद्योग, अन्वेषक।

*२५) पुर्वाभाद्रपदा-*
नक्षत्र- पुर्वाभाद्रपदा, नक्षत्र देवता- अजैक चरण, नक्षत्र स्वामी- गुरू, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- आम , नक्षत्र पर्याय वृक्ष- हिरडा, नक्षत्र चरणाक्षर- से,सो,दा,दी. नक्षत्र प्राणी- सिंह, नक्षत्र तत्व- अग्नी, नक्षत्र स्वभाव- सत्व नक्षत्र गण- मनुष्य।
जन्म नक्षत्रफल:- दुःख से चिंतित रहनेवाला, स्त्रीवश, धनिक, दान देने में समर्थ कहलानेवाला और दान-धर्म करनेवाला कहलाएगा।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियां:- व्यापार, प्रशासन, संख्याकोविद ,ज्योतिषी, पुजारी, तपस्वी, ताबूत निर्माताओं, कब्रिस्तान के रखवाले, सर्जन, चिकित्सक, मनोचिकित्सक, कट्टरपंथि, कण, हॉरर या रहस्य कहानिकार, हथियार निर्माता, काला जादू, चमड़ा उद्योग के लेखक, हत्या जासूस, धातु उद्योग, आग, विषाक्त पदार्थों का व्यवसाय।

*२६) उत्तराभाद्रपदा-*
नक्षत्र- उत्तराभाद्रपदा, नक्षत्र देवता- अहिर्बुधन्य, नक्षत्र स्वामी- शनि, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- नीम
नक्षत्र पर्याय वृक्ष- आमला , नक्षत्र चरणाक्षर-, नक्षत्र प्राणी- गाय, नक्षत्र तत्व- जल, नक्षत्र गण- मनुष्य, नक्षत्र स्वभाव- रज।
जन्म नक्षत्रफल:- जिनका जन्म इस नक्षत्र में होता है वह व्यक्ति अधिक बोलनेवाले,सुखी, शत्रुपर विजय प्राप्त करनेवाले होंगे तथा धर्म पर निष्ठा रखकर अपने पुत्र ,परिवार के साथ आनंद से रहेंगे।
नक्षत्र से जुड़े व्यवसाय:- दार्शनिक, लेखक, शिक्षक, धर्मार्थ कार्य, आयात या निर्यात काम, पर्यटन उद्योग, धार्मिक कार्य, ज्योतिषि, योग और ध्यान के विशेषज्ञ, परामर्शदाता, चिकित्सक, आरोग्य, तांत्रिक व्यवसायी, साधु, संगीतकार, रात का चौकीदार, इतिहासकार, पुस्तकालय, विरासत पर रहने वाले लोगों के साथ रहना इत्यादि।

*२७) रेवती-*
नक्षत्र- रेवती, नक्षत्र देवता- पूषा, नक्षत्र स्वामी- बुध, नक्षत्र आराध्य वृक्ष- मोह ( मधुक ), नक्षत्र पर्याय वृक्ष- जेष्ठमध या इमली , नक्षत्र चरणाक्षर- दे,दो,चा,चि, नक्षत्र प्राणी- हाथी , नक्षत्र तत्व- जल नक्षत्र स्वभाव- मृदु नक्षत्र गण- देव।
जन्म नक्षत्रफल:- सदा साफ सुतरा रहना पसंद करनेवाले, धैर्य और शौर्यता को प्रदर्शन करनेवाले धनि बनेंगे इनका शरीर भी मजबूत होगा।
नक्षत्र से जुडी वृत्तियाँ:- धर्मार्थ कार्य, शहरी योजनाकार, सरकारी कर्मचारि, मनोविज्ञान, रहस्यमय या धार्मिक कार्य, कृत्रिम निद्रावस्था में लानेवाला, ट्रैवल एजेंट, विमान परिचारिका, पत्रकार, संपादक, प्रकाशक, अभिनेता, हास्य कलाकार, राजनेता, चित्रकार, संगीतकार, मनोरंजन, भाषाविद्, जादूगर,सड़क योजनाकार, ज्योतिषि, प्रबंधक, रत्न डीलर, शिपिंग उद्योग, अनाथालय या पालक की देखभाल, ड्राइविंग व्यवसाय, हवाई यातायात नियंत्रण, यातायात पुलिस, प्रकाश घर के काम से सम्बंधित हो सकते है।
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