Vastumandlam jyotish and vastu agency

Vastumandlam jyotish and vastu agency A high level astrology and vastu.we provides all solution of kundli and gives vastu advice for industry, housing and commercial properties.

14/06/2024

"हमारा सनातन विज्ञान"

आज सुबह बेटा बोला
पापा, मैं बङा होकर अमेरिका जाऊंगा
मैंनें होकर हतप्रभ
पूछा,
क्यों बेटा, अमेरिका क्यों,
हिन्दुस्तान में क्या नहीं है,
बेटा बोला,
पिताजी,
हमारे पास विज्ञान की विरासत नहीं हैं
ज्ञान को दें न्याय, वो अदालत नहीं हैं
हमनें आखिर दुनिया को दिया क्या है"
ये ताना क्या हमपर जलालत नहीं है......

सुनकर ये ब्यान,
मैं रह गया हैरान,
बोला पकङ कर उसके कान,
ध्यान से सून मेरी जान.…..

ये जो धरती पर चलते हैं विमान
कब तक का है इनका, दूसरे ग्रहों का प्लान
सीधे तो तुम उङा लेते हो
क्या बैक गियर में चलाने का है तुम्हें ज्ञान
त्रितल रथ, विद्युत-रथ और त्रिचक्र रथ
होते थे हमारे तीन प्रकार के विमान
वैमानिक प्रकरणं को पढ कर देख
ना केवल कृतक, बल्कि तांत्रिक ओ मान्त्रिक वायुयान,
थे हमारी उज्ज्वल पहचान
बापूजी तलपड़े को भूले हुऐ,
राइट ब्रदर्स के मानस पूत्रों
क्या तूमने सूना है महर्षि भारद्वाज का नाम
जब तेरा अमेरिका, घूमता था नंगा
तब इन्होंने बना दिये थे,
आठ प्रकार के विमान
यंत्र-सर्वस्व ग्रंथ और अंशुबोधिनी अनुसार
शक्तियुद्गम, भूतवाह, शिखोद्गम, अंशुवाह, तारामुख,
मणिवाह, मरुत्सखा और धूमयान
होते थे इनके आठ नाम
और ये कुतर्क मत देना,
कि सब है कपोल-कल्पित
क्योंकि
इतनी कल्पना भी नहीं होती, बिना अनुसंधान

अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन तो है तुम्हें याद
पर
ये रहस्य तो कब का उजागर कर चूके थे
परमाणुशास्त्र के जनक, हमारे आचार्य कणाद
और तूं तो जानता भी ना होगा
कि इसीलिए,
सुक्ष्मतम को "कण" कहते हैं आज
"वैशेषिकसूत्र" ग्रंथ था इनका ही प्रसाद
रावणभाष्य ओ भारद्वाजवृत्ति,
थे इसके दो भाग
लेकिन हाय लगे उस तुर्क लुटेरे बख्तियार खिलजी को
जो, नालंदा में, लगा गया था आग
"बाॅयनरी मॉलिक्यूल" और "कन्सर्वेशन आफ मैटर" तक ही,
पहुंचा है तेरा विज्ञान
पर कणाद तो
सूक्ष्मतम में भी, बता गये थे ब्रह्मांड

तेरे डाक्टर तो अब जाकर
समझे हैं सर्जरी, सौ ठोकर खाकर
खोल जरा तूं "चरकसंहिता"
फिर बोल जरा तूं नजर मिलाकर
और जरा ये तो बता
कि
फादर आॅफ सर्जरी
और
फादर आॅफ एनेस्थीसिया कौन है
क्या कहा, जरा जोर से बोल
हां........ महर्षि सुश्रुत नाम था उनका
जो हो नामालूम तो सून
देव वैद्य श्री धन्वन्तरि थे इनके गुरु
सुश्रुत संहिता लिख
इन्होंने ही की थी, शल्य चिकित्सा शुरू
300 शल्य चिकित्सा का किया वर्णन
आज भी विश्व इन्हें करता है नमन

पश्चिम क्या नापेगा,
हमारे ज्ञानचक्षुओं का परिक्षेत्र
ऋग्वेद, शतपथ ब्राहृण ने स्पष्ट लिखा है
खगोल विज्ञान को वेदों का नेत्र
ऋषि गृत्स्मद ने कब के खोल दिये थे,
चन्द्रमा के गर्भ पर होने वाले परिणाम
ऋषि दीर्घतमस् ने सूर्य को पढने में होकर अंधे बताया,
कि, सूर्य किरणों के कारण है चन्द्रमा प्रकाशमान
नक्षत्र, चान्द्रमास, सौरमास, मल मास,
ऋतु परिवर्तन, उत्तरायन, दक्षिणायन,
आकाशचक्र, सूर्य की महिमा, कल्प का माप
क्या सम्भव है,
ग्रहिय गतियों के ज्ञान बगैर
भास्कराचार्यजी तो कब के
‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में गुरुत्वाकर्षण समझा गये
पर तुम कहते हो तो
न्यूटन का सेव खा लेते हैं खैर

चल ईसा की पाँचवीं-छठी शताब्दी में चल
महान गणितज्ञ एवं खगोलज्ञ
वराहमिहिर से कर तूं परिचय
हजारों वर्षों पहले लिखी पंचसिद्धान्तिका
और अयनांश का मान 50.32 सेकेण्ड कर दिया तय
समय मापक घट यन्त्र कहो या,
इंद्रप्रस्थ का लौहस्तम्भ
चंद्रगुप्त द्वितीय के नवरत्नों में थे ये
जग में त्रिकोणमिती का किया आरम्भ
फलित ज्योतिष के थे महाज्ञाता
बृहत्संहिता का दिया उपहार
एक बार जो इन्हें समझ ले
मिले वास्तुविद्या फिर अपरम्पार

'रस रत्नाकर' और 'रसेन्द्र मंगल' का जो सूना हो नाम
तो हो दंडवत कर नागार्जुन को प्रणाम
पारस पत्थर नहीं केवल कल्पना
नागार्जुन ने इसे दिया था अंजाम
'कक्षपुटतंत्र', 'आरोग्य मंजरी', 'योग सार' और 'योगाष्टक' के रचियता
इनका सदा आभारी चिकित्सा विज्ञान
ऋषि शौनक के संस्कारों का तो इतना था प्रचार
दस हजार शिष्यों का इक गुरुकुल में होता था संस्कार
कैंसर कहो या कर्करोग,
जिसका पश्चिम ने न पाया पार
ऋषि पतंजलि के योगशास्त्र में देखो, है सरल सुगम उपचार
किया प्रवर्तन 'सांख्य दर्शन' का,
थे वे कपिल मुनि महायोग
दर्शन शास्त्र के प्रथम रचियता, थे महाज्ञानी ये लोग

विश्वामित्र क्षत्रिय की कामधेनु गाय बताऊं तूझे
कि उनके बनाए प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रकार
श्री वेदव्यास जी का तपोबल समझाऊँ
या उनका कौरवों की क्लोनिंग का चमत्कार
गर्ग मुनि के नक्षत्र ज्ञान की, थी अद्भूत महातरंग
कि महाभारत से पहले जिसने, दिया बता ये प्रसंग
तेरहवें दिन होगी अमावस,
तो चौदहवें दिन पूर्णिमा करेगी चंद्रग्रहण का संग
तिथी का ये क्षय, करेगा महाविनाश
होगी ये धरा लाल खून से, चहूं ओर दिखेंगे अंग

अब हतप्रभता,
मूझ से,
मेरे बेटे में स्थानांतरित हो चूकी थी
बङी बङी आंखें कर के बोला
पिताश्री,
जब हम विरासत के इतने धनी हैं
तो ये सब पाठ्यक्रम में क्यों नहीं है
क्यों हमें इतिहास में नीचा दिखाया जाता है
और
हर पेटेंट पश्चिम का बताया जाता है
तब,
मैंने उसे प्यार से बैठाया
और खोल कर समझाया
कि, जब हजारों सालों के हमलावरी कुठाराघात
इस महान विरासत की वजह से हमें तोङ ना पाए
तो अंग्रेज़ मैकाले को परिदृश्य में लाये
और काट दिया गया
हमारी स्वपोषित जङों को
जिनसे हम पाते थे अमूर्त संजीवनी
और फलस्वरूप
अब
विद्यालयों में
प्रवेश तो स्वतंत्र हिंदुस्तानी लेते हैं
लेकिन
बाहर अंग्रेजो के गुलाम आते हैं

ये सब बोलकर
जब मैं अपलक, निर्विकार सा
आकाश को ताक रहा था
तो
मेरे पैरों पर आ गिरे
मेरे बेटे के कुछ अश्रु बिंदु
और शायद
आंखों में चढा पश्चिमी मैल भी..........
साभार मित्र की वाल से।

01/06/2024
24/05/2024

.आज ईसी पोस्ट की जरुरत है आपको सो पढे जरुर
लू लगना

लू लगने से मृत्यु क्यों होती है?
दिल्ली से आंध्रप्रदेश तक....सैकड़ो लोग लू लगने से मर रहे हैं।

हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगो की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है?

👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।

👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।

👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है।( बंद कर देता है )

👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।

👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है ( जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है )

👉 स्नायु कड़क होने लगते है इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं।

👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन ) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।

👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक- एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।

👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोडा थोडा पानी पीते रहना चाहिए, और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव अगले 5 -7 दिनों मे एशिया के अधिकतर भूभाग को प्रभावित करेगा।

कृपया 12 से 3 के बीच ज्यादा से ज्यादा घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें।

तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।

यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।

(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है।)

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।

किसी भी अवस्था मे कम से कम 3 ली. पानी जरूर पियें।किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 ली. पानी जरूर लें।

जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।

ठंडे पानी से नहाएं। मांस का प्रयोग छोड़ें या कम से कम करें।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें।

हीट वेव कोई मजाक नही है।

एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।

जनहित मे इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें।

11/05/2024

कलयुग में हर तरफ राहु ही राहु - कुंडली में राहु को शुभ कैसे करें

नवग्रहों में से मंगल ग्रह इस धरा का प्रतिनिधित्व करता है और धरा के नीचे जो कुछ है वह शनि है, धरा का पानी चंद्र है, धरा पर अग्नि सूर्य है। धरा पर हरियाली बुध है, धरा पर फल गुरु है, इस धरा पर सारा सौंदर्य शुक्र है, और पाताल से पृथ्वी के मध्य जो कुछ भी है, वह सभी राहु है और पृथ्वी से आकाश के मध्य जो कुछ है वह केतु है। राहु को सुधारना हो तो देवी सरस्वती जी की आराधना करें। राहु खर्चीला है, केतु कंजूस है। राहु को मायावी ग्रह कहा गया है, छाया ग्रह कहा गया है, यह सांसारिक रिश्ते नाते जो दिखते है, परन्तु होते नहीं है, यही राहु है, राहु भी छलावा देता है, पर अंत में कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। नवग्रहों में राहु अकेला ऐसा ग्रह है तो व्यक्ति को अरबपति और करोड़पति बना सकता है। मायावी शक्तियों के कारक राहु यूट्यूब और सोशल मिडिया से लाभ कमाना राहु के कारण है।

राहु देता रातों रात सफलता

नशे की वस्तुओं से जुड़ा व्यापार कर रहे, व्यक्तियों पर राहु का प्रभाव है। अनिद्रा के रोग, और नीति निर्माण का कार्य राहु देता है। राहु को आज के समय का सबसे प्रभावी ग्रह कहा जा सकता है। राहु सांसारिक इच्छाओं को व्यक्त करता है, भौतिक वस्तुओं के पीछे जातक भागता है। वैसे तो राहु भ्रम, शक, संदेह और संशय देता है साथ ही यह झूठ, उलझनों में भी फंसाता है। रिश्तों में राहु दादा जी है, काले बादल और घना कोहरा राहु है। राहु ठगी कराता है, फ्रॉड और फरेब राहु है। राहु खुद सर्प का मुख है इसलिए रेंगने वाले जीवों का प्रतिनिधित्व राहु करता है। तंत्र-मंत्र और जादू राहु है। सनातन धर्म के सारे धर्म विरोधी राहु है। भूत बाधा राहु है। दंगे फसाद राहु है। अचानक से कुछ भी घटित होना राहु से जोड़ा गया है। दांतों के रोग राहु की देन है। राहु वेषधारी रावण है, राहु आडम्बर है, दिखावा है, संसार की चकाचौंध राहु है। राहु न पूरी होने वाली इच्छा है। राहु कभी भोग विलास से संतुष्ट नहीं होता है। सार रूप में देखें तो राहु व्यक्ति को कई बार रातों रात करोड़पति और अरबपति बनाता है।

राहु कभी हार नहीं मानता है

नवग्रहों में राहु ही केवल ऐसा एक मात्र ग्रह है जो व्यक्ति को बिना मेहनत के धन देने का सामर्थ्य रखता है। राहु प्रसन्न होने पर आये तो व्यक्ति को रातों रात अरबपति बना दे, और लेने पर आये तो रातों रात कंगाल बना दें। धन को माया का नाम दिया गया है, और राहु मायावी ग्रह है, साम, दाम, दंड और भेद से धन कमाना राहु का गुण है। दूसरों की तारीफ कर अपना काम निकालना राहु का काम है। राहु के पास चातुर्य है, इसलिए राहु कभी हार नहीं मानता, इसलिए राहु शुभ हो तो व्यक्ति राजनीति के खेल का धुरंधर खिलाडी होता है। राजनेताओं में एक बड़ा गुण होता है, वो अपने मान और अपमान दोनों को अधिक देर तक याद नहीं रखते है। अनदेखा कर आगे बढ़ जाते है। अचानक से धन कमाने के प्रयास राहु जनित होते है। लॉटरी, घुड़दौड़, शेयर-सट्टा और किसी प्रतियोगिता में बड़ा धन लाभ पाना राहु के प्रभाव से ही होता है।

जो कभी संतुष्ट न हो - वही राहु है

इंटरनेट, सोशल मीडिया, स्मार्ट फ़ोन, सोशल मीडिया पर अलग-अलग खाते राहु है। राहु से मोबाइल, दुर्बुद्धि, चातुर्य, मतभेद देता है। राहु और सांप एक जैसे है, राहु परछाई के समान है, इसलिए राहु दीखता है पर होता नहीं है। राहु को कम करना है तो परछाई को कम करना होगा। राहु को शांत करना हो तो केतु को बल दें। राहु जोड़-तोड़ से प्राप्त उच्च पद है, राजनीति में जोड़-तोड़ की गिरती सरकार है। आय से अधिक लाभ राहु है। ससुराल में मान है राहु। स्वार्थवश दूसरों को प्रभावित करना राहु है। मनोगत विज्ञानं राहु है, खगोल विज्ञानं है। दूर-दूर की यात्राएं है, राजनीति का खेल है, अचानक से बड़ा लाभ राहु है। राहु व्यसन में लेकर जाता है। परम्परों से हटाता है राहु। राहु प्रभाव से महत्वकांक्षाएं हावी हो जाती है। रात-रात भर जागना राहु है।

पाताल से लेकर पृथ्वी तक राहु

सारे ग्रह एक तरफ और राहु का प्रभाव एक तरफ, राहु व्यक्ति को कल्पनाओं में लेकर जाता है, वास्तविकता से रूबरू नहीं होने देता। राहु बिगड़े हाथी की तरह है, एक बार अगर बिगड़ जाए तो फिर सब कुछ तहस-नहस कर देता है। वही हाथी जब सधा हुआ हो तो इतना धन देता है की संभालना मुश्किल हो जाता है। जिन भी लोगों ने रातों रात सफलता पाई है, उन लोगों की कुंडली में राहु बहुत अच्छी स्थिति में होता है। राहु, सूर्य-चंद्र को ग्रहण लगाता है। राहु व्यक्ति को कूटनीति, धूर्त्तनीति, राजनीति, गुप्तचर का धनी बनाता है. भगवन शिव के अलावा राहु को कोई नहीं समझ सकता। कलयुग में राहु ही छाया हुआ है, जीवन भर का भटकाव राहु है, राहु का प्रभाव शुरू होने से पहले व्यक्ति का विवेक काम करना बंद कर देता है। अगर कुछ समझ नहीं आ रहा हो तो कुंडली देखनी चाहिए, उसमें दशा का सम्बन्ध राहु से आ रहा होगा। राहु चकाचौंध का जीवन देता है, भोग विलासिता सब राहु की मेहरबानी है। कलयुग में जिस ग्रह का प्रभाव सबसे अधिक मिलता है वह राहु है। पाताल से लेकर पृथ्वी तक राहु ही राहु है।

राहु को खुश कैसे करें?

राहु की कारक वस्तुएं - सीसा, सर्प, काला रंग, काले तिल, जौ, सरसों का तेल, काले रंग के पुष्प, हाथी, कच्चे कोयले, अभ्रक, मछली, गर्म कपड़े, बिजली के यंत्र, नीलगाय, धुआं, कुंडली में राहु जिस ग्रह का प्रतिनिधित्व करता हो उस ग्रह की वस्तुएं, गोमेद।
शनिवार के दिन अपने वजन के समान जौ लेकर, उसके 18 एक समान भाग कर लें। प्रत्येक भाग को एक काले रंग के कपड़ें में रख कर बांध कर रख दें। इसमें से प्रत्येक बुधवार एक पोटली ले, उस पर दूध का छींटा मार दें, और अपने सिर से घडी की दिशा के विपरीत दिशा में सात बार घुमा कर पोटली को बहते पानी में प्रवाहित कर दें।
प्रत्येक 18 बुधवार, सूर्यास्त के बाद, यह उपाय करें, सरसों के तेल का दीपक लेकर उसमें छाया देखकर, बाती डालकर जलाएं, और सामने बैठकर राहु मन्त्र-ॐ रां राहवे नम: का कम से कम एक माला जाप करें।
राहु प्रभावित व्यक्ति को चांदी का एक टुकड़ा हमेशा अपनी जेब में रखना चाहिए।
कुत्ते को रोटी खिलने से राहु दोष दूर होते है।
राहु की शांति के लिए माथे पर चन्दन का टीका लगाना चाहिए।
राहु के दोष दूर करने के लिए नियमित रूप से गंगा स्नान करना चाहिए।
शनिवार के दिन का व्रत करने से भी राहु ग्रह के दोषों की शांति होती है।
लोहे का कड़ा या छल्ला धारण करने से शनि शांति होती है, शनि को राहु के समान कहा गया है।
कोढ़ियों के आश्रम में सेवा और दान करने से राहु ग्रह की शांति होती है।
लगातार 18 शनिवार व्रत करने से राहु ग्रह की शांति होती है।
शनिवार के दिन काले वस्त्र धारण करने से राहु के दोषों में कमी होती है।
राहु की कृपा पाने के लिए शनिवार के दिन भैरव मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।
राहु की शांति के लिए हनुमान चालीसा और हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।
ससुराल पक्ष के साथ रिश्ते मधुर रखने से राहु के दोष नहीं लगते है।
सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से राहु जनित दोष दूर होते है।
राहु एक सर्प है, और सर्प के फैन को शांत रखने के लिए आवश्यक है कि उस पर कोई भार रखा जाए।
गरीब कन्याओं का विवाह कराने से भी राहु दोष कम होता है।
राहु कुंडली में त्रिकोण भाव में स्थित हो तो जातक को गोमेद रत्न धारण करना चाहिए।
स्नान के जल में कुशा डालकर नहाने से राहु दोष कम होती है।
कुंडली में राहु की स्थिति शुभ होने पर स्नान के जल में कस्तूरी, गजदंत और लोबान (चुटकीभर) मिलाकर स्नान करना चाहिए।
राहु की शांति के लिए निम्न वस्तुओं को एक काले वस्त्र में बांधकर पोटली बनाये और सूप में रखकर किसी गरीब को दान में दे दें।
राहु वस्तुएं - नीला वस्त्र, काला वस्त्र, काले तिल, काला कम्बल, सूप, सरसों के तेल से भरा पात्र, लोहा, सप्तधान्य, अभ्रक, गोमेद और खडग।
राहु को खुश करने के लिए- शीशे के 8 टुकड़े लेकर शनिवार के दिन बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए।
पंचधातु पर राहु यन्त्र बनवाकर मंदिर में स्थापित कर नित्य दर्शन पूजन करें।
राहु को शांत करने के लिए रात में सोने से पहले नमक के पानी में पैर धोकर सोने से राहु शांत रहता है और अनिद्रा रोग को दूर करता है।
भगवान शिव ने सर्प धारण किया है, भगवन शिव का दर्शन पूजन करने से राहु शांत रहता है।
राहु को शांत करने के लिए देवी सरस्वती जी की आराधना नित्य करनी चाहिए।
राहु का प्रभाव ईश्वर में आस्था रखने, धर्म से जुड़ने से कम होता है।

वास्तुमंडलम ज्योतिष & वास्तु एजेंसी
माणिक पुखराज मोती मूंगा
नीलम पन्ना गोमेद लहसुनिया वास्तु यंत्र लक्ष्मी यंत्र कुबेर यंत्र कनकधारा यंत्र व्यापार वृद्धि यंत्र रुद्राक्ष की माला अनेक मुखी रुद्राक्ष
वैजयंती माला मोती माला स्फटिक माला स्फटिक श्री यंत्र और पारद यंत्र
संपर्क हेतु

धीरज शर्मा
Mca, p.hd
9891623039

🕉🙏🚩🕉🙏🚩🕉

26/03/2024

🙏🌹 जय श्री राधे कृष्णा 🌹🙏13 मार्च 2024👉👉पुनर्जन्म से सम्बंधित चालीस प्रश्नों को उत्तर सहित पढ़े?????
(1) प्रश्न :- पुनर्जन्म किसको कहते हैं ?
उत्तर :- जब जीवात्मा एक शरीर का त्याग करके किसी दूसरे शरीर में जाती है तो इस बार बार जन्म लेने की क्रिया को पुनर्जन्म कहते हैं ।
(2) प्रश्न :- पुनर्जन्म क्यों होता है ?
उत्तर :- जब एक जन्म के अच्छे बुरे कर्मों के फल अधुरे रह जाते हैं तो उनको भोगने के लिए दूसरे जन्म आवश्यक हैं ।
(3) प्रश्न :- अच्छे बुरे कर्मों का फल एक ही जन्म में क्यों नहीं मिल जाता ? एक में ही सब निपट जाये तो कितना अच्छा हो ?
उत्तर :- नहीं जब एक जन्म में कर्मों का फल शेष रह जाए तो उसे भोगने के लिए दूसरे जन्म अपेक्षित होते हैं ।
(4) प्रश्न :- पुनर्जन्म को कैसे समझा जा सकता है ?
उत्तर :- पुनर्जन्म को समझने के लिए जीवन और मृत्यु को समझना आवश्यक है । और जीवन मृत्यु को समझने के लिए शरीर को समझना आवश्यक है ।
(5) प्रश्न :- शरीर के बारे में समझाएँ ?
उत्तर :- हमारे शरीर को निर्माण प्रकृति से हुआ है ।
जिसमें मूल प्रकृति ( सत्व रजस और तमस ) से प्रथम बुद्धि तत्व का निर्माण हुआ है ।
बुद्धि से अहंकार ( बुद्धि का आभामण्डल ) ।
अहंकार से पांच ज्ञानेन्द्रियाँ ( चक्षु, जिह्वा, नासिका, त्वचा, श्रोत्र ), मन ।
पांच कर्मेन्द्रियाँ ( हस्त, पाद, उपस्थ, पायु, वाक् ) ।
शरीर की रचना को दो भागों में बाँटा जाता है ( सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर ) ।
(6) प्रश्न :- सूक्ष्म शरीर किसको बोलते हैं ?
उत्तर :- सूक्ष्म शरीर में बुद्धि, अहंकार, मन, ज्ञानेन्द्रियाँ । ये सूक्ष्म शरीर आत्मा को सृष्टि के आरम्भ में जो मिलता है वही एक ही सूक्ष्म शरीर सृष्टि के अंत तक उस आत्मा के साथ पूरे एक सृष्टि काल ( ४३२००००००० वर्ष ) तक चलता है । और यदि बीच में ही किसी जन्म में कहीं आत्मा का मोक्ष हो जाए तो ये सूक्ष्म शरीर भी प्रकृति में वहीं लीन हो जायेगा ।
(7) प्रश्न :- स्थूल शरीर किसको कहते हैं ?
उत्तर :- पंच कर्मेन्द्रियाँ ( हस्त, पाद, उपस्थ, पायु, वाक् ) , ये समस्त पंचभौतिक बाहरी शरीर ।
(8) प्रश्न :- जन्म क्या होता है ?
उत्तर :- जीवात्मा का अपने करणों ( सूक्ष्म शरीर ) के साथ किसी पंचभौतिक शरीर में आ जाना ही जन्म कहलाता है ।
(9) प्रश्न :- मृत्यु क्या होती है ?
उत्तर :- जब जीवात्मा का अपने पंचभौतिक स्थूल शरीर से वियोग हो जाता है, तो उसे ही मृत्यु कहा जाता है । परन्तु मृत्यु केवल सथूल शरीर की होती है , सूक्ष्म शरीर की नहीं । सूक्ष्म शरीर भी छूट गया तो वह मोक्ष कहलाएगा मृत्यु नहीं । मृत्यु केवल शरीर बदलने की प्रक्रिया है, जैसे मनुष्य कपड़े बदलता है । वैसे ही आत्मा शरीर भी बदलता है ।
(10) प्रश्न :- मृत्यु होती ही क्यों है ?
उत्तर :- जैसे किसी एक वस्तु का निरन्तर प्रयोग करते रहने से उस वस्तु का सामर्थ्य घट जाता है, और उस वस्तु को बदलना आवश्यक हो जाता है, ठीक वैसे ही एक शरीर का सामर्थ्य भी घट जाता है और इन्द्रियाँ निर्बल हो जाती हैं । जिस कारण उस शरीर को बदलने की प्रक्रिया का नाम ही मृत्यु है ।
(11) प्रश्न :- मृत्यु न होती तो क्या होता ?
उत्तर :- तो बहुत अव्यवस्था होती । पृथ्वी की जनसंख्या बहुत बढ़ जाती । और यहाँ पैर धरने का भी स्थान न होता ।
(12) प्रश्न :- क्या मृत्यु होना बुरी बात है ?
उत्तर :- नहीं, मृत्यु होना कोई बुरी बात नहीं ये तो एक प्रक्रिया है शरीर परिवर्तन की ।
(13) प्रश्न :- यदि मृत्यु होना बुरी बात नहीं है तो लोग इससे इतना डरते क्यों हैं ?
उत्तर :- क्योंकि उनको मृत्यु के वैज्ञानिक स्वरूप की जानकारी नहीं है । वे अज्ञानी हैं । वे समझते हैं कि मृत्यु के समय बहुत कष्ट होता है । उन्होंने वेद, उपनिषद, या दर्शन को कभी पढ़ा नहीं वे ही अंधकार में पड़ते हैं और मृत्यु से पहले कई बार मरते हैं ।
(14) प्रश्न :- तो मृत्यु के समय कैसा लगता है ? थोड़ा सा तो बतायें ?
उत्तर :- जब आप बिस्तर में लेटे लेटे नींद में जाने लगते हैं तो आपको कैसा लगता है ?? ठीक वैसा ही मृत्यु की अवस्था में जाने में लगता है उसके बाद कुछ अनुभव नहीं होता । जब आपकी मृत्यु किसी हादसे से होती है तो उस समय आमको मूर्छा आने लगती है, आप ज्ञान शून्य होने लगते हैं जिससे की आपको कोई पीड़ा न हो । तो यही ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा है कि मृत्यु के समय मनुष्य ज्ञान शून्य होने लगता है और सुषुुप्तावस्था में जाने लगता है ।
(15) प्रश्न :- मृत्यु के डर को दूर करने के लिए क्या करें ?
उत्तर :- जब आप वैदिक आर्ष ग्रन्थ ( उपनिषद, दर्शन आदि ) का गम्भीरता से अध्ययन करके जीवन,मृत्यु, शरीर, आदि के विज्ञान को जानेंगे तो आपके अन्दर का, मृत्यु के प्रति भय मिटता चला जायेगा और दूसरा ये की योग मार्ग पर चलें तो स्वंय ही आपका अज्ञान कमतर होता जायेगा और मृत्यु भय दूर हो जायेगा । आप निडर हो जायेंगे । जैसे हमारे बलिदानियों की गाथायें आपने सुनी होंगी जो राष्ट्र की रक्षा के लिये बलिदान हो गये । तो आपको क्या लगता है कि क्या वो ऐसे ही एक दिन में बलिदान देने को तैय्यार हो गये थे ? नहीं उन्होने भी योगदर्शन, गीता, साँख्य, उपनिषद, वेद आदि पढ़कर ही निर्भयता को प्राप्त किया था । योग मार्ग को जीया था, अज्ञानता का नाश किया था ।
महाभारत के युद्ध में भी जब अर्जुन भीष्म, द्रोणादिकों की मृत्यु के भय से युद्ध की मंशा को त्याग बैठा था तो योगेश्वर कृष्ण ने भी तो अर्जुन को इसी सांख्य, योग, निष्काम कर्मों के सिद्धान्त के माध्यम से जीवन मृत्यु का ही तो रहस्य समझाया था और यह बताया कि शरीर तो मरणधर्मा है ही तो उसी शरीर विज्ञान को जानकर ही अर्जुन भयमुक्त हुआ । तो इसी कारण तो वेदादि ग्रन्थों का स्वाध्याय करने वाल मनुष्य ही राष्ट्र के लिए अपना शीश कटा सकता है, वह मृत्यु से भयभीत नहीं होता , प्रसन्नता पूर्वक मृत्यु को आलिंगन करता है ।
(16) प्रश्न :- किन किन कारणों से पुनर्जन्म होता है ?
उत्तर :- आत्मा का स्वभाव है कर्म करना, किसी भी क्षण आत्मा कर्म किए बिना रह ही नहीं सकता । वे कर्म अच्छे करे या फिर बुरे, ये उसपर निर्भर है, पर कर्म करेगा अवश्य । तो ये कर्मों के कारण ही आत्मा का पुनर्जन्म होता है । पुनर्जन्म के लिए आत्मा सर्वथा ईश्वराधीन है ।
(17) प्रश्न :- पुनर्जन्म कब कब नहीं होता ?
उत्तर :- जब आत्मा का मोक्ष हो जाता है तब पुनर्जन्म नहीं होता है ।
(18) प्रश्न :- मोक्ष होने पर पुनर्जन्म क्यों नहीं होता ?
उत्तर :- क्योंकि मोक्ष होने पर स्थूल शरीर तो पंचतत्वों में लीन हो ही जाता है, पर सूक्ष्म शरीर जो आत्मा के सबसे निकट होता है, वह भी अपने मूल कारण प्रकृति में लीन हो जाता है ।
(19) प्रश्न :- मोक्ष के बाद क्या कभी भी आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता ?
उत्तर :- मोक्ष की अवधि तक आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता । उसके बाद होता है ।
(20) प्रश्न :- लेकिन मोक्ष तो सदा के लिए होता है, तो फिर मोक्ष की एक निश्चित अवधि कैसे हो सकती है ?
उत्तर :- सीमित कर्मों का कभी असीमित फल नहीं होता । यौगिक दिव्य कर्मों का फल हमें ईश्वरीय आनन्द के रूप में मिलता है, और जब ये मोक्ष की अवधि समाप्त होती है तो दुबारा से ये आत्मा शरीर धारण करती है ।
(21) प्रश्न :- मोक्ष की अवधि कब तक होती है ?
उत्तर :- मोक्ष का समय ३१ नील १० खरब ४० अरब वर्ष है, जब तक आत्मा मुक्त अवस्था में रहती है ।
(22) प्रश्न :- मोक्ष की अवस्था में स्थूल शरीर या सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ रहता है या नहीं ?
उत्तर :- नहीं मोक्ष की अवस्था में आत्मा पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाता रहता है और ईश्वर के आनन्द में रहता है, बिलकुल ठीक वैसे ही जैसे कि मछली पूरे समुद्र में रहती है । और जीव को किसी भी शरीर की आवश्यक्ता ही नहीं होती।
(23) प्रश्न :- मोक्ष के बाद आत्मा को शरीर कैसे प्राप्त होता है ?
उत्तर :- सबसे पहला तो आत्मा को कल्प के आरम्भ ( सृष्टि आरम्भ ) में सूक्ष्म शरीर मिलता है फिर ईश्वरीय मार्ग और औषधियों की सहायता से प्रथम रूप में अमैथुनी जीव शरीर मिलता है, वो शरीर सर्वश्रेष्ठ मनुष्य या विद्वान का होता है जो कि मोक्ष रूपी पुण्य को भोगने के बाद आत्मा को मिला है । जैसे इस वाली सृष्टि के आरम्भ में चारों ऋषि विद्वान ( वायु , आदित्य, अग्नि , अंगिरा ) को मिला जिनको वेद के ज्ञान से ईश्वर ने अलंकारित किया । क्योंकि ये ही वो पुण्य आत्मायें थीं जो मोक्ष की अवधि पूरी करके आई थीं ।
(24) प्रश्न :- मोक्ष की अवधि पूरी करके आत्मा को मनुष्य शरीर ही मिलता है या जानवर का ?
उत्तर :- मनुष्य शरीर ही मिलता है
(25) प्रश्न :- क्यों केवल मनुष्य का ही शरीर क्यों मिलता है ? जानवर का क्यों नहीं ?
उत्तर :- क्योंकि मोक्ष को भोगने के बाद पुण्य कर्मों को तो भोग लिया , और इस मोक्ष की अवधि में पाप कोई किया ही नहीं तो फिर जानवर बनना सम्भव ही नहीं , तो रहा केवल मनुष्य जन्म जो कि कर्म शून्य आत्मा को मिल जाता है ।
(26) प्रश्न :- मोक्ष होने से पुनर्जन्म क्यों बन्द हो जाता है ?
उत्तर :- क्योंकि योगाभ्यास आदि साधनों से जितने भी पूर्व कर्म होते हैं ( अच्छे या बुरे ) वे सब कट जाते हैं । तो ये कर्म ही तो पुनर्जन्म का कारण हैं, कर्म ही न रहे तो पुनर्जन्म क्यों होगा ??
(27) प्रश्न :- पुनर्जन्म से छूटने का उपाय क्या है ?
उत्तर :- पुनर्जन्म से छूटने का उपाय है योग मार्ग से मुक्ति या मोक्ष का प्राप्त करना ।
(28) प्रश्न :- पुनर्जन्म में शरीर किस आधार पर मिलता है ?
उत्तर :- जिस प्रकार के कर्म आपने एक जन्म में किए हैं उन कर्मों के आधार पर ही आपको पुनर्जन्म में शरीर मिलेगा ।
(29) प्रश्न :- कर्म कितने प्रकार के होते हैं ?
उत्तर :- मुख्य रूप से कर्मों को तीन भागों में बाँटा गया है :- सात्विक कर्म , राजसिक कर्म , तामसिक कर्म ।
(१) सात्विक कर्म :- सत्यभाषण, विद्याध्ययन, परोपकार, दान, दया, सेवा आदि ।
(२) राजसिक कर्म :- मिथ्याभाषण, क्रीडा, स्वाद लोलुपता, स्त्रीआकर्षण, चलचित्र आदि ।
(३) तामसिक कर्म :- चोरी, जारी, जूआ, ठग्गी, लूट मार, अधिकार हनन आदि ।
और जो कर्म इन तीनों से बाहर हैं वे दिव्य कर्म कलाते हैं, जो कि ऋषियों और योगियों द्वारा किए जाते हैं । इसी कारण उनको हम तीनों गुणों से परे मानते हैं । जो कि ईश्वर के निकट होते हैं और दिव्य कर्म ही करते हैं ।
(30) प्रश्न :- किस प्रकार के कर्म करने से मनुष्य योनि प्राप्त होती है ?
उत्तर :- सात्विक और राजसिक कर्मों के मिलेजुले प्रभाव से मानव देह मिलती है , यदि सात्विक कर्म बहुत कम है और राजसिक अधिक तो मानव शरीर तो प्राप्त होगा परन्तु किसी नीच कुल में , यदि सात्विक गुणों का अनुपात बढ़ता जाएगा तो मानव कुल उच्च ही होता जायेगा । जिसने अत्यधिक सात्विक कर्म किए होंगे वो विद्वान मनुष्य के घर ही जन्म लेगा ।
(31) प्रश्न :- किस प्रकार के कर्म करने से आत्मा जीव जन्तुओं के शरीर को प्राप्त होता है ?
उत्तर :- तामसिक और राजसिक कर्मों के फलरूप जानवर शरीर आत्मा को मिलता है । जितना तामसिक कर्म अधिक किए होंगे उतनी ही नीच योनि उस आत्मा को प्राप्त होती चली जाती है । जैसे लड़ाई स्वभाव वाले , माँस खाने वाले को कुत्ता, गीदड़, सिंह, सियार आदि का शरीर मिल सकता है , और घोर तामसिक कर्म किए हुए को साँप, नेवला, बिच्छू, कीड़ा, काकरोच, छिपकली आदि । तो ऐसे ही कर्मों से नीच शरीर मिलते हैं और ये जानवरों के शरीर आत्मा की भोग योनियाँ हैं ।
(32) प्रश्न :- तो क्या हमें यह पता लग सकता है कि हम पिछले जन्म में क्या थे ? या आगे क्या होंगे ?
उत्तर :- नहीं कभी नहीं, सामान्य मनुष्य को यह पता नहीं लग सकता । क्योंकि यह केवल ईश्वर का ही अधिकार है कि हमें हमारे कर्मों के आधार पर शरीर दे । वही सब जानता है ।
(33) प्रश्न :- तो फिर यह किसको पता चल सकता है ?
उत्तर :- केवल एक सिद्ध योगी ही यह जान सकता है , योगाभ्यास से उसकी बुद्धि । अत्यन्त तीव्र हो चुकी होती है कि वह ब्रह्माण्ड एवं प्रकृति के महत्वपूर्ण रहस्य़ अपनी योगज शक्ति से जान सकता है । उस योगी को बाह्य इन्द्रियों से ज्ञान प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं रहती है
वह अन्तः मन और बुद्धि से सब जान लेता है । उसके सामने भूत और भविष्य दोनों सामने आ खड़े होते हैं ।
(34) प्रश्न :- यह बतायें की योगी यह सब कैसे जान लेता है ?
उत्तर :- अभी यह लेख पुनर्जन्म पर है, यहीं से प्रश्न उत्तर का ये क्रम चला देंगे तो लेख का बहुत ही विस्तार हो जायेगा । इसीलिये हम अगले लेख में यह विषय विस्तार से समझायेंगे कि योगी कैसे अपनी विकसित शक्तियों से सब कुछ जान लेता है ? और वे शक्तियाँ कौन सी हैं ? कैसे प्राप्त होती हैं ? इसके लिए अगले लेख की प्रतीक्षा करें...
(35) प्रश्न :- क्या पुनर्जन्म के कोई प्रमाण हैं ?
उत्तर :- हाँ हैं, जब किसी छोटे बच्चे को देखो तो वह अपनी माता के स्तन से सीधा ही दूध पीने लगता है जो कि उसको बिना सिखाए आ जाता है क्योंकि ये उसका अनुभव पिछले जन्म में दूध पीने का रहा है, वर्ना बिना किसी कारण के ऐसा हो नहीं सकता । दूसरा यह कि कभी आप उसको कमरे में अकेला लेटा दो तो वो कभी कभी हँसता भी है , ये सब पुराने शरीर की बातों को याद करके वो हँसता है पर जैसे जैसे वो बड़ा होने लगता है तो धीरे धीरे सब भूल जाता है...!
(36) प्रश्न :- क्या इस पुनर्जन्म को सिद्ध करने के लिए कोई उदाहरण हैं...?
उत्तर :- हाँ, जैसे अनेकों समाचार पत्रों में, या TV में भी आप सुनते हैं कि एक छोटा सा बालक अपने पिछले जन्म की घटनाओं को याद रखे हुए है, और सारी बातें बताता है जहाँ जिस गाँव में वो पैदा हुआ, जहाँ उसका घर था, जहाँ पर वो मरा था । और इस जन्म में वह अपने उस गाँव में कभी गया तक नहीं था लेकिन फिर भी अपने उस गाँव की सारी बातें याद रखे हुए है , किसी ने उसको कुछ बताया नहीं, सिखाया नहीं, दूर दूर तक उसका उस गाँव से इस जन्म में कोई नाता नहीं है । फिर भी उसकी गुप्त बुद्धि जो कि सूक्ष्म शरीर का भाग है वह घटनाएँ संजोए हुए है जाग्रत हो गई और बालक पुराने जन्म की बातें बताने लग पड़ा...!
(37) प्रश्न :- लेकिन ये सब मनघड़ंत बातें हैं, हम विज्ञान के युग में इसको नहीं मान सकते क्योंकि वैज्ञानिक रूप से ये बातें बेकार सिद्ध होती हैं, क्या कोई तार्किक और वैज्ञानिक आधार है इन बातों को सिद्ध करने का ?
उत्तर :- आपको किसने कहा कि हम विज्ञान के विरुद्ध इस पुनर्जन्म के सिद्धान्त का दावा करेंगे । ये वैज्ञानिक रूप से सत्य है , और आपको ये हम अभी सिद्ध करके दिखाते हैं..!
(38) प्रश्न :- तो सिद्ध कीजीए ?
उत्तर :- जैसा कि आपको पहले बताया गया है कि मृत्यु केवल स्थूल शरीर की होती है, पर सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ वैसे ही आगे चलता है , तो हर जन्म के कर्मों के संस्कार उस बुद्धि में समाहित होते रहते हैं । और कभी किसी जन्म में वो कर्म अपनी वैसी ही परिस्थिती पाने के बाद जाग्रत हो जाते हैं
इसे उदहारण से समझें :- एक बार एक छोटा सा ६ वर्ष का बालक था, यह घटना हरियाणा के सिरसा के एक गाँव की है । जिसमें उसके माता पिता उसे एक स्कूल में घुमाने लेकर गये जिसमें उसका दाखिला करवाना था और वो बच्चा केवल हरियाणवी या हिन्दी भाषा ही जानता था कोई तीसरी भाषा वो समझ तक नहीं सकता था ।
लेकिन हुआ कुछ यूँ था कि उसे स्कूल की Chemistry Lab में ले जाया गया और वहाँ जाते ही उस बच्चे का मूँह लाल हो गया !! चेहरे के हावभाव बदल गये !!
और उसने एकदम फर्राटेदार French भाषा बोलनी शुरू कर दी !! उसके माता पिता बहुत डर गये और घबरा गये , तुरंत ही बच्चे को अस्पताल ले जाया गया । जहाँ पर उसकी बातें सुनकर डाकटर ने एक दुभाषिये का प्रबन्ध किया ।
जो कि French और हिन्दी जानता था , तो उस दुभाषिए ने सारा वृतान्त उस बालक से पूछा तो उस बालक ने बताया कि " मेरा नाम Simon Glaskey है और मैं French Chemist हूँ । मेरी मौत मेरी प्रयोगशाला में एक हादसे के कारण ( Lab. ) में हुई थी । "
तो यहाँ देखने की बात यह है कि इस जन्म में उसे पुरानी घटना के अनुकूल मिलती जुलती परिस्थिति से अपना वह सब याद आया जो कि उसकी गुप्त बुद्धि में दबा हुआ था । यानि की वही पुराने जन्म में उसके साथ जो प्रयोगशाला में हुआ, वैसी ही प्रयोगशाला उस दूसरे जन्म में देखने पर उसे सब याद आया । तो ऐसे ही बहुत सी उदहारणों से आप पुनर्जन्म को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध कर सकते हो...!
(39) प्रश्न :- तो ये घटनाएँ भारत में ही क्यों होती हैं ? पूरा विश्व इसको मान्यता क्यों नहीं देता ?
उत्तर :- ये घटनायें पूरे विश्व भर में होती रहती हैं और विश्व इसको मान्यता इसलिए नहीं देता क्योंकि उनको वेदानुसार यौगिक दृष्टि से शरीर का कुछ भी ज्ञान नहीं है । वे केवल माँस और हड्डियों के समूह को ही शरीर समझते हैं , और उनके लिए आत्मा नाम की कोई वस्तु नहीं है । तो ऐसे में उनको न जीवन का ज्ञान है, न मृत्यु का ज्ञान है, न आत्मा का ज्ञान है, न कर्मों का ज्ञान है, न ईश्वरीय व्यवस्था का ज्ञान है । और अगर कोई पुनर्जन्म की कोई घटना उनके सामने आती भी है तो वो इसे मानसिक रोग जानकर उसको Multiple Personality Syndrome का नाम देकर अपना पीछा छुड़ा लेते हैं और उसके कथनानुसार जाँच नहीं करवाते हैं...!
(40) प्रश्न :- क्या पुनर्जन्म केवल पृथिवी पर ही होता है या किसी और ग्रह पर भी ?
उत्तर :- ये पुनर्जन्म पूरे ब्रह्माण्ड में यत्र तत्र होता है, कितने असंख्य सौरमण्डल हैं, कितनी ही पृथीवियाँ हैं । तो एक पृथीवी के जीव मरकर ब्रह्माण्ड में किसी दूसरी पृथीवी के उपर किसी न किसी शरीर में भी जन्म ले सकते हैं । ये ईश्वरीय व्यवस्था के अधीन है...
परन्तु यह बड़ा ही अजीब लगता है कि मान लो कोई हाथी मरकर मच्छर बनता है तो इतने बड़े हाथी की आत्मा मच्छर के शरीर में कैसे घुसेगी..?
यही तो भ्रम है आपका कि आत्मा जो है वो पूरे शरीर में नहीं फैली होती । वो तो हृदय के पास छोटे अणुरूप में होती है । सब जीवों की आत्मा एक सी है । चाहे वो व्हेल मछली हो, चाहे वो एक चींटी हो।

12/03/2024

प्रकृति के नियम है -
हम जो भोजन करते हैं,
24 घण्टे के अंदर शरीर से बाहर
निकल जाना चाहिए,
पानी जो हम पीते हैं,
शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए,
हवा जो हम सांस लेते है
वापस बाहर निकल जानी चाहिए,
वरना हम बीमार हो जायेंगे
लेकिन नकारात्मक बातें,
जैसे कि घृणा, गुस्सा, ईर्षा, आदि,
जिनको हम अपने अंदर दिन,
महीने और सालों तक रखे रहते हैं
यदि इन नकारात्मक विचारों को
अपने अंदर से नहीं निकालेंगे तो
निश्चित ही मानसिक रोगी बन जायेंगे ।

Address

Vastumandlam Jyotish And Vastu Agency 98 Ub Jawahar Nagar, Kamla Nagar, Delhi/7
Delhi
DELHI-07

Telephone

9278134781

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vastumandlam jyotish and vastu agency posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share