24/06/2021
सुबह-सुबह ललचाती चाय
सबके मन को भाती चाय।
गरमी, जाड़े, बरसात में
हम सब को फुसलाती चाय।
पापा जी शौख फरमाते,
माँ की थकन मिटाती चाय।
चुनिया, मुनिया, राजेश को
आपस में लड़वाती चाय।
घर, आँफिस या हो चौपाटी
अपने पास बुलाती चाय।
जब होते हैं हम सफर में
गैरों को मित्र बनाती चाय।
एक बार यदि मुँह लग जाए
फिर कहाँ छूट पाती चाय।