08/09/2019
मैं आज अपनी डायरी पढ रहा था , मेरा इलाहाबाद बैक वाला दोस्त स.अमर सिहं मेरे पास 13-08-2014 को आया था और उसकी उस दिनकी बात जोकि मैने डायरी मे लिख ली थी पढ कर यादे ताजा हो गई
उस दिन वो बोला
यार मै खाने के लिये नही जीता
मै जीने के लिये खाता हू |
5 साल हो गये इस बात को , जमाना कितना बदल रहा है
आज कल मा बाप खुद व अपने बचचौ को कया कया नही खिला रहे और बीमार हो रहे है , मोटापे के शिकार हो रहे है
एक बात वो और बोला
यार मै मरने से पहले मरना नही चाहता
कैसे समझाये लोगो को , स्वस्थ हे , निरोगी रहे ,
मिले या वाटस् अप करे 9910036946
आप का वैलनैस कोच : ओम प्रकाश गरोवर