25/07/2020
GST Hindi Update Tax Alert :-Changes in GST 99H/ 2020-21
टैक्सअलर्ट: जीएसटी में बदलाव
गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (GSTN) मौजूदा GST रिटर्न में कुछ नई सुविधाएँ / बदलाव लाने की योजना बना रहा है। वर्तमान GST रिटर्न के साथ में Credit note और Debit note के साथ मूल Invoice के विवरण को शामिल करना पड़ता है। परंतु सरकार ने कानून में बदलाव करके यह बता दिया था कि अब डेबिट नोट और क्रेडिट नोट जारी करते हुए बेसिक invoice की डिटेल देना जरूरी नहीं है। इससे बहुत बड़ा फर्क पड़ गया था कि पहले अगरआपको साल भर के सभी बिलों पर डिस्काउंट देना था तो आपको उतने ही क्रेडिट नोट बनाने पड़ते थे जितने आपने बिल जारी किए हैं। यह काफी मुश्किल भरा होता था तथा accountant इतना ही चाहते थे। परंतु अब इस बदलाव के बाद एक ही क्रेडिट नोट सालभर के लिए जारी किया जा सकता है। कानून में बदलाव के बाद भी यह सुविधा पोर्टल पर available नहीं थी। अब सरकार जो नए बदलाव पोर्टल में लेकर आ रही है उसमें एक यह सुविधा भी शामिल है।
इन बदलावों में GSTR 1 से GSTR 3B में Liability की ऑटो गणना शामिल है। इसके साथ ही GSTR-2A / 6A में अतिरिक्त सुविधाओं का भी समावेश किया गयाहै।सरकार एक नई GST ईचालान योजना का जल्द ही नोटिफ़िकेशन जारी करने जा रही है जिसके तहत 500 करोड़ रूपये और उससे अधिक के turnover वाले business वालो कोई- इनवॉइस बनाना दिनाक 01.10.2020 से ज़रूरी होगा।
मौजूदा जीएसटी रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में GSTN जो परिवर्तन लाने वाला है वह इसप्रकार है:-
1. क्रेडिट / डेबिट नोट Delinking:- जैसा कि हमने ऊपर बताया था कि क्रेडिट / डेबिटनोट में क्रेडिट और डेबिट नोट के साथ-साथ मूल invoice के विवरण देने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योकि इसमे लिंकिंग की फैसिलिटी को बंद कर दिया जाएगा। GSTR1 और GSTR6 दाखिल करते समय invoice संख्या और तारीख के साथ साथ B2CL को B2CS के साथ विलय कर दिया जाएगा और रिपोर्टिंग के लिए केवल एक श्रेणी होगी। इससे यह फर्क पड़ेगा कि क्रेडिटनोट तथा डेबिटनोट के साथ इनवॉइस नंबर देना जरूरी नहीं होगा।
2. जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि क्रेडिट नोट और डेबिट नोट में इनवॉइस नंबर देना जरूरी नहीं है तो उसका प्रभाव GSTR 2A, औरGSTR6A पर भी पड़ेगा। अतः उससे संबंधित amedment भी कर लिए गए हैं।
3. GSTR-2A में भी काफी सारे बदलाव किए गए हैं।सबसे पहला बदलाव यह होगा कि GSTR-2A में यह भी दिखाई देगा कि सप्लायर द्वारा दी गई inovice के GSTR 1 दाखिल करने की तारीख कौनसी है? इससे यह सुविधा होगी कि GSTR-2A का reconcilation अपने अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर में आने वाले बिलों के साथ बहुत ही सरल हो जाएगा। इसको एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लो जनवरी 2020 माह में एक टैक्सपेयर के अकाउंट में 10,00,00/- की क्रेडिट आ रही है परंतु GSTR-2A में छह लाख के बिल ही आ रहे हैं तो उसे Section 36(4) के हिसाब से 6,00,000/- +60,000(10%) तक की ही क्रेडिट मिल पाएगी। अब कुछ और सप्लायर देरी से GSTR-1 भरते हैं तो यह जनवरी माह के GSTR-2A में शामिल हो जाती थी परंतु यह पता नहीं लगता था कि कौन सा बिल बाद में फाइल किया गया है। टैक्सपेयर के पास कोई चारा नहीं रहता था और उसे फरवरी माह में फिर से जनवरी के महीने का GSTR-2A और अकाउंटबुक को recocilation करना पड़ता था तथा उसमें से बाद में आए invoices को छांटना पड़ता था। पर यह संपूर्ण कार्रवाई काफी कष्टदायक होती थी पर अब इनवॉइस के साथ में सप्लायर द्वारा GSTR-1 फाइल करने की तिथि आने से यह काफी सुविधाजनक हो जाएगा।
दूसरा बदलाव GSTR-2A में यह किया गया है कि इस स्टेटमेंट में सप्लायर के आए हुए invoices के साथ में यह भी दर्शाया जाएगा की सप्लायर ने GSTR3बी कब दाखिल किया है। हम सबको मालूम है कि Section 16(2) of CGST Act, 2017 मैं यह प्रावधान है कि रजिस्टर्ड पर्सन को क्रेडिट कभी मिलेगी जब उसके सप्लायर ने GST का भुगतान कर दिया हो। परंतु सभी टैक्सपेयर की यह समस्या रहती थी कि वह कैसे पता लगाएं कि सप्लायर ने जीएसटी का भुगतान कर दिया है? अब GSTR-2A में बिल के साथ साथ सप्लायर द्वारा GSTR-3B दाखिल करने की तिथिआने से टैक्सपेयर यह सुनिश्चित कर सकता है कि सप्लायर ने GST का भुगतान कर दिया है। इसके साथ ही GSTR-2A में आने वाली इनवॉइस के साथ यह भी दर्शाया जाएगा कि यह किस period से संबंधित है। हालांकि इनवॉइस की तिथि से टेक्स्ट पर यह पता लगा सकता है परंतु कई बार सप्लायर इसको काफी लेट दर्शाता है तो यह सुविधा कामआ सकती है। इसके साथ ही जीएसटीआर 2A में इन्वाइस मे कोई संशोधन सप्लायर द्वारा GSTR-1 में किया गया है तो वो भी पोर्टल पर दिखाई देगा तथा इस बदलाव का nature क्या है, वह भी बताया जाएगा।
4. जो भी invoice आप GSTR-1 में दिखाएंगे उसके गणना से GSTR3बी में liability की गणना अपने आप हो जाएगी। इससे यह फायदा होगा कि GSTR-3B और GSTR-1 में फर्क आना अपने आप बंद हो जाएगा। हमारे हिसाब से इसमें बदलाव करने की छूट भी टैक्सपेयर को दी जाएगी ताकि अगर कोई पुरानी liability दिखानी है तो उसे इसमें सम्मिलित किया जा सके।
5. GSTR2A - IMPG और IMPEG विवरण और SEZ इकाई से निर्मित वस्तुओं से अगर हम कोई माल खरीदेंगे तो उसके आया तका विवरण भी FORM GSTR 2A मे दिखाई देने लगेगा। अभी तक SEZ से खरीदे हुए माल की क्रेडिट GSTR-2A में नहीं आती थी अब यह सुविधा भी शुरू हो जाएगी।
6. इसके साथ ही GSTR 9 के रिटर्न की TABLE8A का विवरण भी GSTR2A के अनुसार ITC की detail अपने आप आ जाएगी। इसके साथ ही इसकी इनवॉइस के हिसाब से detail भी करदाताओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। इससे पहले GSTR-9 की Table-8A में जो डिटेल आती थी, वह किस प्रकार से आई है, टैक्सपेयर और उसके ऑडिटर को भी पता नहीं लगता था? GSTR-2A में अलग डिटेल आती थी तथा GSTR-9 मेंअलग figures आते थे। ऑडिटर के पास भी इसका कोई जवाब नहीं होता था तथा वह इस difference अलग से लिखकर रख लेना था। ताकि जब भी कोई जवाब देना पड़े तो वह इस differnce को बता दे। 2017-18 की ऑडिट किस प्रकार ही की गई है। अब यह सुविधा सभी टैक्सपेयर तथा उनके ऑडिटर के लिए बहुत हीअच्छीहै।
7. सरकार द्वारा फार्म GSTR2B भी करदाताओ को उपलब्ध कराया जाएगा। यह मासिक स्टेटमेंट करदाताओ को elgible ITCऔर inelgibile ITC के डेटा उपलब्ध होंगे और यह फ़िल्टर और खोजने का विकल्प भी प्रदान करेगा और साथ में यह उसकी (PDF) पीडीएफ और एक्सेल में स्टेटमेंट डाउनलोड करने की सुविधा भी करदाताओ को देगा। यह उसके रजिस्टर मेल id पर भेजने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। अब eligible और inelgible ITC की परिभाषा हर करदाता के लिए अलग होती है। जैसा कि सीमेंट एक फैक्ट्री के लिए immovalbe proerty में कामआ सकती है तथा इसकी क्रेडिट नहीं मिलती है परंतु वही contractor के लिए यह इनपुट है तथा इसकी credit मिलती है। इसी प्रकार से एक tour operator के लिए rent-a-cab एक eligible credit है तथा दूसरी तरफ trader को इसकी क्रेडिट नहीं मिलेगी। Eligible और ineligible credit इस प्रयोग को लेकर भी अलग हो सकती है। रिपेयर में काम आने वाले पेंट पर क्रेडिट मिलती है परंतु नई बिल्डिंग बनाने में काम आने वाले पेंट पर क्रेडिट नहीं मिलती है।अतः GSTR-3B स्टेटमेंट कई तरह के विवादों को जन्म दे सकता है।