14/08/2016
*रक्षाबंधन पर बनेगा सिंहासन-गौरी योग, ये हैं पूरे दिन के शुभ मुहूर्त*
18 अगस्त को आ रहे भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पर इस बार भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। तीन वर्ष के बाद यह संयोग बन रहा है, जब रक्षाबंधन के दिन लोगों को भद्रा काल देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग दिनभर शुभ मुहूर्तों में राखी बांध सकेंगे। साथ ही इस बार सिंहसान-गौरी योग के बनने से रक्षाबंधन का पर्व और भी विशेष रहेगा।
इस बार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व भद्रा मुक्त रहेगा क्योंकि भद्रा काल सूर्योदय होने से पहले ही समाप्त हो जाएगा। इस कारण लोग चाहें तो सुबह मुहूर्त में रक्षाबंधन कर सकते हैं। दोपहर व शाम को भी राखी बांधने के लिए शुभ मुहूर्त हैं।
*ये हैं रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त*
सुबह 06 से 07.30 बजे तक- शुभ
सुबह 10.30 से दोपहर 12 बजे तक- चर
दोपहर 12 से 01.30 बजे तक- लाभ
दोपहर 01.30 से 03 बजे तक- अमृत
शाम 04.30 से 06 बजे तक- शुभ
शाम 06 से 07.30 बजे तक- अमृत
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*सर्वप्रथम किसने बांधी राखी किस को और क्यों???*
*लक्ष्मी जी ने सर्वप्रथम बालि को बांधी थी।*
ये बात हैं जब की
जब दानबेन्द्र राजा बलि अश्वमेध यज्ञ करा रहें थे
तब नारायण ने राजा बलि को छलने के लिये वामन अवतार लिया और तीन पग में सब कुछ ले लिया
तब उसे भगवान ने पाताल लोक का राज्य रहने के लिये दें दिया
तब उसने प्रभु से कहा की कोई बात नहीँ मैं रहने के लिये तैयार हूँ
पर मेरी भी एक शर्त होगी
भगवान अपने भक्तो की बात कभी टाल नहीँ सकते
उन्होने कहा ऐसे नहीँ प्रभु आप छलिया हो पहले मुझे वचन दें की जो मांगूँगा वो आप दोगे
नारायण ने कहा दूँगा दूँगा दूँगा
जब त्रिबाचा करा लिया तब बोले बलि
की मैं जब सोने जाऊँ तो जब उठूं तो जिधर भी नजर जाये उधर आपको ही देखूं
नारायण ने अपना माथा ठोका और बोले इसने तो मुझे पहरेदार बना दिया हैं ये सबकुछ हार के भी जीत गया है
पर कर भी क्या सकते थे वचन जो दें चुके थे
ऐसे होते होते काफी समय बीत गया
उधर बैकुंठ में लक्ष्मी जी को चिंता होने लगी नारायण के बिना
उधर नारद जी का आना हुआ
लक्ष्मी जी ने कहा नारद जी आप तो तीनों लोकों में घूमते हैं क्या नारायण को कहीँ देखा आपने
तब नारद जी बोले की पाताल लोक में हैं राजा बलि की पहरेदार बने हुये हैं
तब लक्ष्मी जी ने कहा मुझे आप ही राह दिखाये की कैसे मिलेंगे
तब नारद ने कहा आप राजा बलि को भाई बना लो और रक्षा का वचन लो और पहले तिर्बाचा करा लेना दक्षिणा में जो मांगुगी वो देंगे
और दक्षिणा में अपने नारायण को माँग लेना
लक्ष्मी जी सुन्दर स्त्री के भेष में रोते हुये पहुँची
बलि ने कहा क्यों रो रहीं हैं आप
तब लक्ष्मी जी बोली की मेरा कोई भाई नहीँ हैं इसलिए मैं दुखी हूँ
तब बलि बोले की तुम मेरी धरम की बहिन बन जाओ
तब लक्ष्मी ने तिर्बाचा कराया
और बोली मुझे आपका ये पहरेदार चाहिये
जब
ये माँगा
तो बलि पीटने लगे अपना माथा
और सोचा
धन्य हो माता पति आये सब कुछ लें गये और ये महारानी ऐसी आयीं की उन्हे भी लें गयीं
तब से ये रक्षाबन्धन शुरू हुआ था
और इसी लिये जब कलावा बाँधते समय मंत्र बोला जाता हैं
येन बद्धो राजा बलि दानबेन्द्रो महाबला तेन त्वाम प्रपद्यये रक्षे माचल माचल:
ये मंत्र हैं
रक्षा बन्धन अर्थात बह बन्धन जो हमें सुरक्षा प्रदान करे
सुरक्षा किस से
हमारे आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से रोग ऋण से।
राखी का मान करे।
अपनी भाई बहन क प्रति प्रेम और सम्मान की भावना रखे।
फैशन ना बनाये।...:::!!!
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*🌸रक्षाबंधन के पर्व की वैदिक विधि-वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :*
🌹इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
(१) दूर्वा (घास)
(२) अक्षत (चावल)
(३) केसर
(४) चन्दन
(५) सरसों के दाने।
🌸इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी।
*⚫इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -*
*🌺(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो। सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बढती जाए। दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए।*
*🌺(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव के प्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।*
*🌺(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो। उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो।*
*🌺(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति शीतल होती है और यह सुगंध देता है। उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो। साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।*
*🌺(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें।*
⚫इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान -चित्र पर अर्पित करें। फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे।
🌸इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र- पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं।
*🌸राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले –*
🌺येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल।।
*🌸शिष्य गुरु को रक्षासूत्र बाँधते समय –*
‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’ कहे।
*🌸रक्षासूत्र बाँधते समय चाकलेट ना खिलाकर भारतीय मिठाई या गुड से मुहं मीठा कराएँ।*
*⚫अपना देश अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति अपनी भाषा अपना गौरव। हमारी हिन्दू बहने तरह तरह के कौशलों में सिद्धहस्त होती है उनके लिए यह रक्षासूत्र कोई बड़ी बात नहीं है।*
*🌺🙏🏻मेरा अपनी प्यारी बहनों से निवेदन है कि एक बार इस तरह से राखी बनाकर अपने भाइयों को अवश्य बांधें ।*
🌻जय श्री राधे🌻