Gaurav Mahajan

Gaurav Mahajan Social Worker / Author / Blogger / Busines Real Estate / Politician

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है. दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक...
04/02/2026

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साल 2026 की शुरुआत बेहद चिंताजनक रही है. दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच 800 से ज्यादा लोग लापता हुए हैं. यानी लगभग हर रोज़ 50 से ज्यादा लोग बिना किसी सूचना के गायब हो रहे हैं. इन लापता लोगों में सबसे ज्यादा महिलाएं और लड़कियां गायब हुई हैं. कुल मामलों में से लगभग 63% इसी श्रेणी के लोग हैं, बाकी पुरुष और लड़के हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि राजधानी में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है.

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29/10/2025




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20/10/2025

आप सभी को मेरी तरफ से दीपावली की हार्दिक-हार्दिक शुभकामनाएं ।

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🔱ओम नमो शिवाय 🔱Sale purchase and renting in paschim vihar call me GK  property
18/07/2025

🔱ओम नमो शिवाय 🔱





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ओ पालन हारे तुम्हारे बिन अपना कोई नहीं हमरी उलझन सुलझाओ भगवान तुम्हारे बिन अपना कोई नहीं!
17/07/2025

ओ पालन हारे तुम्हारे बिन अपना कोई नहीं हमरी उलझन सुलझाओ भगवान तुम्हारे बिन अपना कोई नहीं!

दुख पर ध्यान दोगे तो हमेशा दुखी रहोगे, सुख पर ध्यान देना शुरू करो। तुम जिस पर ध्यान देते हो वह चीज सक्रिय हो जाती है।   ...
17/07/2025

दुख पर ध्यान दोगे तो हमेशा दुखी रहोगे, सुख पर ध्यान देना शुरू करो। तुम जिस पर ध्यान देते हो वह चीज सक्रिय हो जाती है।


जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया।वह दौड़ी−...
15/07/2025

जगत−जननी पार्वती ने एक भूखे भक्त को श्मशान में चिता के अंगारों पर रोटी सेंकते देखा तो उनका कलेजा मुँह को आ गया।

वह दौड़ी−दौड़ी ओघड़दानी शंकर के पास गयीं और कहने लगीं−”भगवन्! मुझे ऐसा लगता है कि आपका कठोर हृदय अपने अनन्य भक्तों की दुर्दशा देखकर भी नहीं पसीजता। कम−से−कम उनके लिए भोजन की उचित व्यवस्था तो कर ही देनी चाहिए। देखते नहीं वह बेचारा भर्तृहरि अपनी कई दिन की भूख मृतक को पिण्ड के दिये गये आटे की रोटियाँ बनाकर शान्त कर रहा है।”
महादेव ने हँसते हुए कहा- “शुभे! ऐसे भक्तों के लिए मेरा द्वार सदैव खुला रहता है। पर वह आना ही कहाँ चाहते हैं यदि कोई वस्तु दी भी जाये तो उसे स्वीकार नहीं करते। कष्ट उठाते रहते हैं फिर ऐसी स्थिति में तुम्हीं बताओ मैं क्या करूं?”

माँ भवानी अचरज से बोलीं- “तो क्या आपके भक्तों को उद्रपूर्ति के लिए भोजन को आवश्यकता भी अनुभव नहीं होती?”

श्री शिव जी ने कहा- “परीक्षा लेने की तो तुम्हारी पुरानी आदत है यदि विश्वास न हो तो तुम स्वयं ही जाकर क्यों न पूछ लो। परन्तु परीक्षा में सावधानी रखने की आवश्यकता है।”भगवान शंकर के आदेश को देर थी कि माँ पार्वती भिखारिन का छद्मवेश बनाकर भर्तृहरि के पास पहुँचीं और बोली- ”बेटा! मैं पिछले कई दिन से भूखी हूँ। क्या मुझे भी कुछ खाने को देगा?”

“अवश्य" भर्तृहरि ने केवल चार रोटियाँ सेंकी थीं उनमें से दो बुढ़िया माता के हाथ पर रख दीं। शेष दो रोटियों को खाने के लिए आसन लगा कर उपक्रम करने लगे।

भिखारिन ने दीन भाव से निवेदन किया- "बेटा! इन दो रोटियों से कैसे काम चलेगा? मैं अपने परिवार में अकेली नहीं हूँ एक बुड्ढा पति भी है उसे भी कई दिन से खाने को नहीं मिला है।”

भर्तृहरि ने वे दोनों रोटियाँ भी भिखारिन के हाथ पर रख दीं। उन्हें बड़ा सन्तोष था कि इस भोजन से मुझसे से भी अधिक भूखे प्राणियों का निर्वाह हो सकेगा। उन्होंने कमण्डल उठाकर पानी पिया। सन्तोष की साँस ली और वहाँ से उठकर जाने लगे।तभी आवाज सुनाई दी- "वत्स! तुम कहाँ जा रहे हो?"

भर्तृहरि ने पीछे मुड़ कर देखा। माता पार्वती दर्शन देने के लिए पधारी हैं।
माता बोलीं- "मैं तुम्हारी साधना से बहुत प्रसन्न हूँ। तुम्हें जो वरदान माँगना हो माँगो।"

प्रणाम करते हुए भर्तृहरि ने कहा- "अभी तो अपनी और अपने पति की क्षुधा शाँत करने हेतु मुझसे रोटियाँ माँगकर ले गई थीं। जो स्वयं दूसरों के सम्मुख हाथ फैला कर अपना पेट भरता है वह क्या दे सकेगा। ऐसे भिखारी से मैं क्या माँगू।"

पार्वती जी ने अपना असली स्वरूप दिखाया और कहा- "मैं सर्वशक्ति मान हूँ। तुम्हारी परदुःख कातरता से बहुत प्रसन्न हूँ जो चाहो सो वर माँगो।"
भर्तृहरि ने श्रद्धा पूर्वक जगदम्बा के चरणों में शिर झुकाया और कहा- "यदि आप प्रसन्न हैं तो यह वर दें कि जो कुछ मुझे मिले उसे दीन−दुखियों के लिए लगाता रहे और अभावग्रस्त स्थिति में बिना मन को विचलित किये शान्त पूर्वक रह सकूँ।"पार्वती जी 'एवमस्तु' कहकर भगवान् शिव के पास लौट गई।
त्रिकालदर्शी शम्भु यह सब देख रहे थे उन्होंने मुसकराते हुए कहा- "भद्रे, मेरे भक्त इसलिए दरिद्र नहीं रहते कि उन्हें कुछ मिलता नहीं है। परंतु भक्ति के साथ जुड़ी उदारता उनसे अधिकाधिक दान कराती रहती हैं और वे खाली हाथ रहकर भी विपुल सम्पत्तिवानों से अधिक सन्तुष्ट बने रहते है।"
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हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव
16/06/2025

हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव हर हर महादेव


ॐ नमो शिवाय                                                                                                             ...
15/06/2025

ॐ नमो शिवाय 🔱H A R H A R M A H A D E V🔱


13/06/2025

Celebrating my 8th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

दुनिया चले ना श्री राम के बिना राम जी चले ना हनुमान के बिना जय बजरंगबली 🚩           Today
11/06/2025

दुनिया चले ना श्री राम के बिना राम जी चले ना हनुमान के बिना
जय बजरंगबली 🚩



















Today

















अब समझ आया... वो तीर असल में विज्ञान था!"बचपन में जब मैं रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिक देखता था, तो युद्ध के दृश्य मे...
10/06/2025

अब समझ आया... वो तीर असल में विज्ञान था!"
बचपन में जब मैं रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिक देखता था, तो युद्ध के दृश्य मेरे मन को रोमांच से भर देते थे। रंग-बिरंगे तीर, एक-दूसरे से टकराते हुए… रथों का टूटना, धनुषों का कटना, और पृष्ठभूमि में गूंजती दिव्य चौपाइयाँ – वो सब किसी जादू से कम नहीं लगता था।

तब सोचा करता था – क्या ये सब केवल कल्पना है? अलंकार मात्र?

पर आज… जब मैंने D4 एयर डिफेंस सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में ‘तीर से तीर’ यानी मिसाइल से मिसाइल को टकराकर हवा में ही खत्म होते देखा — मेरी आंखें भर आईं… क्योंकि मेरे धर्मग्रंथ अब कल्पना नहीं, साक्षात् सत्य लगने लगे।

आज जब मैं भारत के रक्षा कवच को देखता हूँ, तो मुझे सिंहिका की याद आती है — रामायण की वो राक्षसी जो आकाश मार्ग से जाने वाले प्राणियों की छाया पकड़ती थी। क्या ये समुद्र के नीचे रावण द्वारा स्थापित एयर डिफेंस सिस्टम नहीं था?

और लक्ष्मण रेखा? क्या वह अदृश्य लेज़र बीम प्रोटेक्शन जैसा नहीं था? जो दिखाई नहीं देता था, लेकिन कोई पार करता तो जलकर भस्म हो जाता!

महाभारत में संजय द्वारा धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाना — क्या वो किसी आधुनिक लाइव ब्रॉडकास्ट या सैटेलाइट फीड से कम था?

सच कहूं, आश्चर्य इस बात पर नहीं होता कि वो सब तकनीकें थीं...

आश्चर्य इस बात पर होता है कि जब पश्चिम के लोग गुफाओं में रहते थे, तब मेरे पूर्वज मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एयर वॉर टेक्नोलॉजी इस्तेमाल कर रहे थे।

अब तो गर्व होता है — हर चौपाई, हर श्लोक, हर रेखा पर।

मेरे धर्मग्रंथ केवल आध्यात्मिक नहीं, वैज्ञानिक भी हैं।

और मेरे पूर्वज — केवल ऋषि नहीं, ब्रह्मज्ञानी वैज्ञानिक भी थे।

गर्व है मुझे — अपने सनातन धर्म पर, अपनी संस्कृति पर, और उन ग्रंथों पर जिन्हें आज की वैज्ञानिक आँखें भी झुककर नमन करती हैं।

🚩 जय श्रीराम।

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