Chanakya NGO Consultancy

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Chanakya NGO Consultancy: NGO Trust Society Registration, Income Tax, FCRA Registration, Project Proposal writing for Grants, Income Tax exemption Registration under 80G and 12A, CSR1 Registration and Niti Ayog - NGO Darpan Registration. Chanakya NGO Consultancy Services for the eligibility of the applicable NGOs :
NGO Registration in India
Trust Registration under Indian Trust Act, Maharashtra Tr

ust Act, Devasathan Trust Act and other Acts in all states of India
Society Registration as national level status of NGO
Society Registration in all states of India
Section 8 Non Profit Company from RoC.
80 G Registration for Income Tax Rebate to donors who provide donation to NGO
12 A Registration for Income Tax Exemption for NGO
FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) Registration for eligibility to get Foreign Funding
FCRA Prior Permission Registration before 3 years
CSR Funding Eligibility Registration at Ministry of Home Affairs that is necessary to get CSR funds from the companies who provides grant under Corporate Social Responsibility
NGO Darpan Registration/Empanelment for Unique ID of NGO to get Government donation and funds. Other Registration Process for Eligibility to get funds from Government and other agencies
Project Proposals to get Grants and Funding
Annual Activity Reports as regular Profile of NGO that is required to apply to get funding for NGO
NGO Profile Development Service
Concept Note preparation to apply before submission of Project for Funding
Audit and Accounting Consultancy
Income Tax Return submission of NGOs through our concerned associates
Website Development for NGOs
Social Media Marketing and Identity services for NGO

03/08/2026

नैतिकता, पात्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ एनजीओ कंसल्टेंसी

चाणक्य एनजीओ कंसल्टेंसी की सोच और काम करने का तरीका

एनजीओ केवल ट्रस्ट, सोसायटी या सेक्शन 8 नॉन-प्रॉफिट कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा लेने का नाम नहीं है। एनजीओ बनाने के पीछे कोई सामाजिक उद्देश्य होना चाहिए और उसके काम का लाभ समाज तथा जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए।

एक एनजीओ की जिम्मेदारी अपने लाभार्थियों, सदस्यों, सहयोगियों, डोनर्स, सरकारी विभागों और समाज के प्रति होती है। इसलिए हमारा मानना है कि एनजीओ को दी जाने वाली कंसल्टेंसी भी सही जानकारी, पारदर्शिता, जिम्मेदारी और नैतिक तरीके पर आधारित होनी चाहिए।

चाणक्य एनजीओ कंसल्टेंसी भारत में एनजीओ, ट्रस्ट, सोसायटी, सेक्शन 8 नॉन-प्रॉफिट कंपनियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल एंटरप्रेन्योर्स को प्रोफेशनल कंसल्टेंसी, डॉक्यूमेंटेशन और मार्गदर्शन की सेवाएं प्रदान करती है।

लेकिन हमारे लिए हर व्यक्ति जो कंसल्टेंसी के लिए संपर्क करता है, केवल एक क्लाइंट नहीं है।

हम सामाजिक क्षेत्र में सही उद्देश्य से काम करने वाले लोगों को समाज में बदलाव लाने वाले लोगों — सोशल चेंज-मेकर्स के रूप में देखते हैं।

इसलिए हमारा उद्देश्य केवल किसी की फाइल तैयार करना, रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना या प्रोजेक्ट प्रपोजल बनाना नहीं है। जहां जरूरत हो, हम यह भी समझने और बताने का प्रयास करते हैं कि संस्था की वर्तमान स्थिति क्या है, वह किस काम के लिए तैयार है, कहां सुधार की जरूरत है और आगे बढ़ने का सही तरीका क्या हो सकता है।

1. हम किन लोगों और संस्थाओं को सहयोग देते हैं

हम उन एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल एंटरप्रेन्योर्स को कंसल्टेंसी और मार्गदर्शन देना चाहते हैं जो वास्तव में समाज के लिए काम कर रहे हैं या सही उद्देश्य के साथ सामाजिक कार्य शुरू करना चाहते हैं।

हम ऐसे लोगों और संस्थाओं को सहयोग देना चाहते हैं जो:

- समाज और जरूरतमंद लोगों के लिए वास्तविक काम करना चाहते हैं
- अपने एनजीओ के उद्देश्यों के प्रति गंभीर हैं
- अपने काम में पारदर्शिता रखना चाहते हैं
- संस्था के पैसे और संसाधनों का सही उपयोग करना चाहते हैं
- अपने काम और खर्च का उचित रिकॉर्ड रखना चाहते हैं
- जरूरी नियमों और कंप्लायंस का पालन करना चाहते हैं
- अपनी गतिविधियों का सही डॉक्यूमेंटेशन रखना चाहते हैं
- संस्था में जिम्मेदार टीम और मैनेजमेंट विकसित करना चाहते हैं
- सदस्यों, सहयोगियों और वॉलंटियर्स को साथ लेकर काम करना चाहते हैं
- लंबे समय तक सामाजिक उद्देश्य के लिए काम करने की सोच रखते हैं

एनजीओ का रजिस्ट्रेशन जरूरी है, लेकिन केवल रजिस्ट्रेशन हो जाने से कोई संस्था अच्छी और विश्वसनीय एनजीओ नहीं बन जाती।

उसकी पहचान और विश्वसनीयता उसके वास्तविक सामाजिक काम, सही मैनेजमेंट, पारदर्शिता, अनुभव और जिम्मेदारी से बनती है।

2. पहले सामाजिक जरूरत को समझें, उसके बाद फंडिंग के बारे में सोचें

कई बार एनजीओ बनाने के तुरंत बाद पहला सवाल होता है:

“फंडिंग कहां से मिलेगी?”

लेकिन इससे पहले एक ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल होना चाहिए:

“हम समाज की किस समस्या या जरूरत के लिए काम करना चाहते हैं?”

एनजीओ और उसके सदस्यों को पहले यह समझना चाहिए:

- हमारे क्षेत्र में वास्तविक समस्या या जरूरत क्या है?
- किन लोगों को हमारी मदद या काम की जरूरत है?
- हम उनके लिए क्या उपयोगी काम कर सकते हैं?
- क्या यह काम हमारे एनजीओ के उद्देश्यों के अनुसार है?
- क्या हमारी टीम इस काम को कर सकती है?
- इसे शुरू करने के लिए हमारे पास अभी क्या उपलब्ध है?
- आगे इसे बढ़ाने के लिए किन लोगों और संसाधनों की जरूरत पड़ेगी?
- जो काम हम करेंगे उसका रिकॉर्ड कैसे रखेंगे?

किसी प्रोजेक्ट को केवल इसलिए नहीं चुनना चाहिए कि उस विषय में ग्रांट उपलब्ध है।

पहले संस्था का उद्देश्य, समाज की जरूरत और काम करने की क्षमता देखनी चाहिए। उसके बाद उस काम के लिए सही फंडिंग के अवसर तलाशे जाने चाहिए।

फंडिंग हमारे सामाजिक उद्देश्य को पूरा करने का माध्यम होनी चाहिए। केवल फंडिंग पाने के लिए संस्था को बार-बार अपना उद्देश्य और काम नहीं बदलना चाहिए।

3. हम पहले यह समझते हैं कि संस्था को वास्तव में क्या जरूरत है

कई बार कोई एनजीओ किसी खास रजिस्ट्रेशन, एफसीआरए, प्रोजेक्ट प्रपोजल, फंडिंग एप्लीकेशन या दूसरी सेवा के लिए हमसे संपर्क करता है।

लेकिन संभव है कि संस्था जिस सेवा के लिए आई है, उस समय उसकी पहली जरूरत कुछ और हो।

इसलिए काम के अनुसार हम पहले यह समझने का प्रयास करते हैं:

- संस्था कब और किस रूप में रजिस्टर्ड हुई
- संस्था के उद्देश्य क्या हैं
- वह किन क्षेत्रों में काम करना चाहती है
- संस्था को काम करते हुए कितना समय हुआ है
- उसने अब तक वास्तव में क्या-क्या काम किया है
- उसके लाभार्थी कौन हैं
- संस्था की गवर्निंग बॉडी और मैनेजमेंट की स्थिति क्या है
- टीम और वॉलंटियर्स की भागीदारी कैसी है
- अकाउंट्स और ऑडिट की स्थिति क्या है
- एनुअल रिपोर्ट और गतिविधियों के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं
- जरूरी रजिस्ट्रेशन और कंप्लायंस की स्थिति क्या है
- संस्था को प्रोजेक्ट पर काम करने का कितना अनुभव है
- जिस काम के लिए वह आवेदन करना चाहती है, उसके लिए वह पात्र है या नहीं

इसके बाद सही सलाह दी जा सकती है कि संस्था को अभी क्या करना चाहिए।

एक अनुभवी कंसल्टेंट का काम केवल यह कहना नहीं होना चाहिए:

“आप फीस दीजिए, हम आवेदन कर देते हैं।”

कई बार सही प्रोफेशनल सलाह यह भी हो सकती है:

“अभी आवेदन करने की जल्दी न करें। पहले इन कमियों को पूरा करें और संस्था को मजबूत करें।”

4. अलग-अलग स्थिति में हमारा काम भी अलग होता है

किसी संस्था की स्थिति को समझने के बाद सामान्य रूप से तीन परिस्थितियां सामने आ सकती हैं।

(क) संस्था सही है, पात्र है और तैयार है — हम कंसल्टेंसी देते हैं

जहां संस्था संबंधित काम के लिए पात्र और तैयार है, वहां हम जरूरत के अनुसार प्रोफेशनल कंसल्टेंसी, डॉक्यूमेंटेशन और आवेदन से संबंधित मार्गदर्शन देते हैं।

हमारी सेवाओं में जरूरत के अनुसार शामिल हो सकते हैं:

- एनजीओ, ट्रस्ट और सोसायटी रजिस्ट्रेशन कंसल्टेंसी
- सेक्शन 8 नॉन-प्रॉफिट कंपनी रजिस्ट्रेशन कंसल्टेंसी
- 12ए/12एबी और 80जी रजिस्ट्रेशन कंसल्टेंसी
- सीएसआर-1 और एनजीओ दर्पण संबंधी कंसल्टेंसी
- एफसीआरए रजिस्ट्रेशन और प्रायर परमिशन के लिए डॉक्यूमेंटेशन और मार्गदर्शन
- एनजीओ प्रोफाइल तैयार करना
- एनुअल रिपोर्ट तैयार करना
- प्रोजेक्ट प्रपोजल और कॉन्सेप्ट नोट तैयार करना
- प्रोजेक्ट और एप्लीकेशन डॉक्यूमेंटेशन
- कंप्लायंस संबंधी मार्गदर्शन
- एनजीओ मैनेजमेंट और संस्था को मजबूत करने संबंधी कंसल्टेंसी
- जरूरत के अनुसार अन्य प्रोफेशनल डॉक्यूमेंटेशन और मार्गदर्शन

हमारा काम जानकारी देना, सही स्थिति समझना, मार्गदर्शन करना, डॉक्यूमेंटेशन तैयार करना और तय काम के अनुसार प्रोफेशनल सहायता देना है।

(ख) संस्था सही है, लेकिन अभी पात्र या तैयार नहीं है — हम पहले मार्गदर्शन देते हैं

किसी एनजीओ का उद्देश्य अच्छा हो सकता है और वह वास्तविक सामाजिक काम करना चाहता हो, लेकिन फिर भी वह किसी खास रजिस्ट्रेशन, ग्रांट या अवसर के लिए अभी पात्र न हो।

ऐसी संस्था में कुछ कमियां हो सकती हैं, जैसे:

- जरूरी अनुभव पूरा नहीं होना
- पर्याप्त सामाजिक गतिविधियां नहीं होना
- गतिविधियों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं होना
- एनुअल रिपोर्ट तैयार नहीं होना
- अकाउंट्स या ऑडिट की स्थिति सही नहीं होना
- जरूरी कंप्लायंस पूरे नहीं होना
- टीम और मैनेजमेंट कमजोर होना
- प्रोजेक्ट का अनुभव कम होना
- संस्था की प्रोफाइल पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होना

ऐसी स्थिति में केवल एप्लीकेशन जमा कर देना समाधान नहीं है।

हम ऐसी संस्था को बताते और मार्गदर्शन देते हैं कि:

- अभी क्या कमी है
- क्या-क्या पूरा करना जरूरी है
- संस्था अपनी क्षमता के अनुसार कौन-से वास्तविक सामाजिक काम कर सकती है
- अपने काम का रिकॉर्ड कैसे रखे
- टीम और वॉलंटियर्स कैसे जोड़े
- जरूरी डॉक्यूमेंटेशन कैसे बनाए
- कंप्लायंस में क्या सुधार करे
- अपनी प्रोफाइल और अनुभव को वास्तविक काम के आधार पर कैसे मजबूत करे

इसका उद्देश्य किसी संस्था को कागजों में पात्र दिखाना नहीं है।

उद्देश्य यह है कि संस्था वास्तविक काम और सही तैयारी के आधार पर पात्र बने।

इसलिए यदि कोई संस्था आज पात्र नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसके लिए रास्ता बंद है। यदि उसका उद्देश्य सही है, तो उसे यह समझाया जा सकता है कि आगे क्या करना है और किस प्रकार अपनी संस्था को उस स्तर तक तैयार करना है।

(ग) उद्देश्य या तरीका गलत है — हम कंसल्टेंसी नहीं देते

कुछ मामलों में समस्या पात्रता की नहीं, बल्कि उद्देश्य और काम करने के तरीके की होती है।

हम ऐसे काम के लिए कंसल्टेंसी नहीं देते जिसमें:

- ऐसी गतिविधियां दिखाई जाएं जो वास्तव में हुई ही नहीं
- झूठे लाभार्थी दिखाए जाएं
- फर्जी प्रोजेक्ट बनाए जाएं
- संस्था का झूठा अनुभव दिखाया जाए
- पुराने दिनांक के रिकॉर्ड बनाकर अनुभव दिखाने का प्रयास हो
- गलत एनुअल रिपोर्ट या प्रोफाइल तैयार करने को कहा जाए
- अकाउंट्स या खर्च के गलत आंकड़े दिखाने को कहा जाए
- सरकारी विभाग, डोनर या दूसरी संस्था को गलत जानकारी दी जाए
- ग्रांट या डोनेशन का गलत उपयोग करने की मंशा हो
- एनजीओ को मुख्य रूप से व्यक्तिगत कमाई का साधन बनाने का उद्देश्य हो
- रिश्वत, ब्रोकरेज या गलत प्रभाव के माध्यम से काम कराने की अपेक्षा हो
- कोई अन्य गैर-कानूनी या अनैतिक उद्देश्य हो

हमारा मानना है कि हर व्यक्ति को केवल इसलिए क्लाइंट बनाना जरूरी नहीं है कि वह कंसल्टेंसी फीस देने के लिए तैयार है।

गलत काम के लिए कंसल्टेंसी से इनकार करना भी हमारी प्रोफेशनल और सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

5. सामाजिक काम शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी फंडिंग जरूरी नहीं है

यह बात नए एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए विशेष रूप से समझने योग्य है।

कई लोग सोचते हैं:

“पहले ग्रांट मिलेगी, उसके बाद काम शुरू करेंगे।”

बड़े प्रोजेक्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, उपकरण, स्टाफ, स्वास्थ्य सेवाओं, बड़े ट्रेनिंग प्रोग्राम या बड़े स्तर पर काम करने के लिए निश्चित रूप से धन की जरूरत हो सकती है।

लेकिन सामाजिक क्षेत्र के बहुत से काम बिना बड़ी फंडिंग या बहुत कम खर्च में भी शुरू किए जा सकते हैं।

जैसे:

- जागरूकता कार्यक्रम
- शिक्षा संबंधी मार्गदर्शन
- पर्यावरण जागरूकता
- पौधारोपण और स्थानीय पर्यावरण गतिविधियां
- समुदाय के लोगों को किसी विषय पर जानकारी देना
- जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देना
- वॉलंटियर के माध्यम से सामाजिक गतिविधियां
- स्थानीय स्तर पर बैठक और जनसंपर्क
- सामाजिक मुद्दों पर अभियान
- अपने क्षेत्र की जरूरतों का पता लगाना और लोगों को जोड़ना

ऐसे काम में केवल पैसा ही जरूरी नहीं है।

जरूरत होती है:

- सही सोच और स्पष्ट विजन की
- काम करने वाले लोगों की
- जिम्मेदार टीम की
- सहयोगियों की
- वॉलंटियर्स की
- समाज और समुदाय की भागीदारी की
- उपलब्ध ज्ञान और कौशल की
- योजना और नियमित प्रयास की

इसलिए सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए:

“हमें पैसा कहां से मिलेगा?”

एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी होना चाहिए:

“हमारे पास अभी जो लोग, समय, ज्ञान, कौशल और संसाधन हैं, उनसे हम समाज के लिए क्या काम शुरू कर सकते हैं?”

यदि कुछ सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर किसी वास्तविक समस्या पर काम करना चाहते हैं, तो वे अपनी क्षमता के अनुसार शुरुआत कर सकते हैं।

धीरे-धीरे टीम बन सकती है। वॉलंटियर्स जुड़ सकते हैं। काम का अनुभव बढ़ सकता है। संस्था अपने काम का रिकॉर्ड रख सकती है। समाज में पहचान बन सकती है और आगे बड़े काम के लिए संस्था बेहतर तरीके से तैयार हो सकती है।

यदि किसी एनजीओ या सामाजिक कार्यकर्ता को यह समझने में कंसल्टेंसी चाहिए कि कम संसाधनों में क्या काम शुरू किया जा सकता है, टीम कैसे बनाई जाए, गतिविधियों की योजना कैसे बने, रिकॉर्ड कैसे रखा जाए और संस्था को धीरे-धीरे कैसे मजबूत किया जाए, तो हम इस प्रकार का मार्गदर्शन भी देते हैं।

फंडिंग काम को बढ़ा सकती है, लेकिन काम करने की इच्छा, सही नेतृत्व और जिम्मेदार टीम की जगह फंडिंग नहीं ले सकती।

6. केवल एक ग्रांट या डोनर पर निर्भर रहने के बजाय संस्था को मजबूत बनाएं

एनजीओ को फंडिंग की जरूरत हो सकती है और अच्छे प्रोजेक्ट के लिए ग्रांट, सीएसआर फंडिंग, डोनेशन और दूसरी आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण होती है।

लेकिन संस्था को इस तरह विकसित करना चाहिए कि उसका पूरा अस्तित्व केवल एक ग्रांट या एक डोनर पर निर्भर न रहे।

इसके लिए संस्था को धीरे-धीरे मजबूत करना चाहिए:

- अपनी गवर्निंग बॉडी और मैनेजमेंट
- सक्रिय सदस्य
- टीम और वॉलंटियर नेटवर्क
- समुदाय से जुड़ाव
- काम करने का अनुभव
- डॉक्यूमेंटेशन
- अकाउंट्स और वित्तीय व्यवस्था
- कंप्लायंस
- अलग-अलग सही और कानूनी माध्यमों से संसाधन जुटाने की क्षमता
- समान उद्देश्य वाली संस्थाओं और लोगों के साथ सहयोग

किसी एक प्रोजेक्ट की फंडिंग समाप्त होने के बाद भी संस्था का सामाजिक उद्देश्य समाप्त नहीं होना चाहिए।

फंडिंग संस्था के काम को बढ़ाने का माध्यम है; फंडिंग ही संस्था बनाने का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

7. अच्छी एनजीओ प्रोफाइल केवल अच्छा दस्तावेज नहीं है

कई बार लोग सोचते हैं कि एक अच्छी और आकर्षक एनजीओ प्रोफाइल तैयार हो जाए तो संस्था मजबूत दिखाई देने लगेगी।

लेकिन वास्तविकता यह है कि अच्छी प्रोफाइल अच्छे काम से बनती है।

इसका सामान्य क्रम इस प्रकार है:

सामाजिक जरूरत की पहचान → वास्तविक काम → टीम और वॉलंटियर्स → सही मैनेजमेंट → रिकॉर्ड → अकाउंट्स → कंप्लायंस → डॉक्यूमेंटेशन → अनुभव → विश्वसनीय प्रोफाइल

डॉक्यूमेंटेशन का काम संस्था के वास्तविक काम को सही, व्यवस्थित और प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत करना है।

अच्छी एनुअल रिपोर्ट उस काम की जगह नहीं ले सकती जो हुआ ही नहीं।

अच्छा प्रोजेक्ट प्रपोजल उस अनुभव की जगह नहीं ले सकता जो संस्था के पास है ही नहीं।

और आकर्षक एनजीओ प्रोफाइल उस संस्था को अनुभवी नहीं बना सकती जिसने अभी तक वास्तविक काम नहीं किया।

इसलिए जब हम कहते हैं कि संस्था अपनी प्रोफाइल मजबूत करे, तो उसका अर्थ केवल प्रोफाइल डॉक्यूमेंट को सुंदर बनाना नहीं है।

पहले संस्था और उसका वास्तविक काम मजबूत होना चाहिए; उसके बाद डॉक्यूमेंटेशन उस काम को सही तरीके से प्रस्तुत करे।

8. ग्रांट और फंडिंग से संबंधित कंसल्टेंसी में हमारा काम क्या है

एनजीओ को ग्रांट, सीएसआर या अन्य फंडिंग अवसरों के लिए आवेदन करते समय प्रोफेशनल मदद की जरूरत हो सकती है।

हम जरूरत के अनुसार:

- पात्रता की शर्तें समझने में सहायता कर सकते हैं
- संस्था की वर्तमान स्थिति और तैयारी देख सकते हैं
- उपलब्ध डॉक्यूमेंटेशन की समीक्षा कर सकते हैं
- जरूरी डॉक्यूमेंटेशन में कमियां बता सकते हैं
- प्रोजेक्ट प्रपोजल तैयार या उसकी समीक्षा कर सकते हैं
- कॉन्सेप्ट नोट तैयार कर सकते हैं
- प्रोजेक्ट बजट और जरूरी दस्तावेज तैयार करने में सहायता कर सकते हैं
- एनजीओ प्रोफाइल और एनुअल रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं
- एप्लीकेशन के दस्तावेज व्यवस्थित करने में सहायता कर सकते हैं
- आवेदन की प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन दे सकते हैं

यह फंडिंग से संबंधित प्रोफेशनल कंसल्टेंसी और डॉक्यूमेंटेशन का काम है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि हम फंडिंग दिलाने या उसकी गारंटी देने का काम करते हैं।

हम यह कह सकते हैं:

“हम एनजीओ को सीएसआर से संबंधित प्रोजेक्ट प्रपोजल और फंडिंग एप्लीकेशन के लिए प्रोफेशनल मार्गदर्शन और डॉक्यूमेंटेशन की सेवाएं देते हैं।”

लेकिन यह कहना हमारे काम की सही प्रकृति नहीं होगी:

“हम एनजीओ को सीएसआर फंडिंग दिलाते हैं।”

यही बात सरकारी ग्रांट, अन्य फंडिंग और विदेशी अंशदान से संबंधित मामलों पर भी लागू होती है।

9. सहायता देना और परिणाम की गारंटी देना अलग बातें हैं

यह अंतर समझना बहुत जरूरी है।

हम कह सकते हैं:

“हम एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंटेशन और आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन देते हैं।”

लेकिन हम यह नहीं कहते:

“हम एफसीआरए रजिस्ट्रेशन की गारंटी देते हैं।”

क्योंकि अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी विभाग या प्राधिकरण का होता है।

यही बात ग्रांट और फंडिंग पर भी लागू होती है।

कंसल्टेंट संस्था को सही जानकारी, तैयारी, डॉक्यूमेंटेशन और आवेदन में मदद कर सकता है। लेकिन जिस निर्णय का अधिकार किसी सरकारी विभाग, कंपनी, डोनर या फंडिंग संस्था के पास है, उसकी गारंटी कंसल्टेंट नहीं दे सकता।

इसलिए हमारी कंसल्टेंसी फीस हमारे प्रोफेशनल काम, समय, अनुभव, मार्गदर्शन और डॉक्यूमेंटेशन के लिए होती है।

वह किसी अप्रूवल, ग्रांट या फंडिंग को खरीदने की कीमत नहीं है।

10. हम लाइजनिंग, ब्रोकरेज या फंडिंग की गारंटी का काम नहीं करते

चाणक्य एनजीओ कंसल्टेंसी ग्रांट, डोनेशन, सीएसआर फंड, सरकारी ग्रांट या विदेशी अंशदान दिलाने वाले एजेंट या ब्रोकर के रूप में काम नहीं करती।

हमारी सेवाओं में शामिल नहीं है:

- ग्रांट या अप्रूवल के लिए लाइजनिंग
- फंडिंग ब्रोकरेज
- ग्रांट दिलाने के बदले कमीशन या प्रतिशत लेना
- एनजीओ और डोनर के बीच फंडिंग दिलाने वाले एजेंट के रूप में काम करना
- किसी विशेष संपर्क या प्रभाव से अप्रूवल दिलाने का दावा
- सीएसआर फंडिंग की गारंटी
- सरकारी ग्रांट या डोनेशन की गारंटी
- रजिस्ट्रेशन या एप्लीकेशन अप्रूवल की गारंटी
- कंसल्टेंसी फीस देने पर फंडिंग मिलने का दावा
- एनजीओ या डोनर की ओर से फंड इकट्ठा करना

हमारा काम प्रोफेशनल कंसल्टेंसी, सही जानकारी, डॉक्यूमेंटेशन और मार्गदर्शन देना है।

11. कंसल्टेंट मार्गदर्शन देता है, एनजीओ को चलाने की जिम्मेदारी संस्था की है

कंसल्टेंट सलाह दे सकता है, डॉक्यूमेंटेशन तैयार कर सकता है और प्रक्रिया में मदद कर सकता है। लेकिन संस्था को चलाने की जिम्मेदारी उसके अपने ट्रस्टी, गवर्निंग बॉडी, बोर्ड, पदाधिकारियों और मैनेजमेंट की होती है।

उन्हीं की जिम्मेदारी है:

- संस्था के फैसले लेना
- सामाजिक कार्यक्रम चलाना
- लाभार्थियों के लिए वास्तविक काम करना
- रिकॉर्ड रखना
- अकाउंट्स और पैसे का सही प्रबंधन करना
- जरूरी कंप्लायंस पूरे करना
- स्टाफ और वॉलंटियर्स का प्रबंधन करना
- ग्रांट और डोनेशन का सही उपयोग करना
- संस्था और उसके काम के प्रति जवाबदेह रहना

कंसल्टेंट का काम संस्था को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करना है।

कंसल्टेंट संस्था के मैनेजमेंट की जगह नहीं ले सकता और न ही संस्था अपनी जिम्मेदारी कंसल्टेंट पर डाल सकती है।

12. सही कंसल्टेंसी के लिए दोनों तरफ से ईमानदारी जरूरी है

एनजीओ को कंसल्टेंट से सही जानकारी, सही मार्गदर्शन और प्रोफेशनल काम की उम्मीद होनी चाहिए।

इसी तरह कंसल्टेंट को भी संस्था से सही और वास्तविक जानकारी मिलनी चाहिए।

संस्था हमसे क्या उम्मीद कर सकती है

- वास्तविक स्थिति के अनुसार सलाह
- काम की स्पष्ट जानकारी
- सही प्रोफेशनल मार्गदर्शन
- उचित डॉक्यूमेंटेशन
- झूठे वादे नहीं
- कृत्रिम पात्रता तैयार करना नहीं
- फंडिंग की झूठी गारंटी नहीं
- ब्रोकरेज या गलत प्रभाव के दावे नहीं

हम संस्था से क्या उम्मीद करते हैं

- सही और पूरी जानकारी
- वास्तविक दस्तावेज
- गतिविधियों और लाभार्थियों की सही जानकारी
- जहां जरूरी हो, सही वित्तीय जानकारी
- वास्तविक अनुभव
- नियमों का पालन करने की इच्छा
- जिम्मेदार मैनेजमेंट
- संस्था के सामाजिक उद्देश्य के प्रति ईमानदारी

गलत जानकारी के आधार पर सही डॉक्यूमेंटेशन तैयार नहीं किया जा सकता।

इसलिए एनजीओ और कंसल्टेंट—दोनों के बीच विश्वास का आधार सही जानकारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी होना चाहिए।

13. एनजीओ का रजिस्ट्रेशन शुरुआत है — मंजिल नहीं

एक अच्छी संस्था धीरे-धीरे बनती है:

रजिस्ट्रेशन → सामाजिक जरूरत की पहचान → वास्तविक गतिविधियां → टीम और वॉलंटियर्स → सही मैनेजमेंट → रिकॉर्ड → अकाउंट्स → कंप्लायंस → अनुभव → डॉक्यूमेंटेशन → अच्छी प्रोफाइल → पात्रता → सही अवसर → आगे का विकास

इस प्रक्रिया का कोई सही शॉर्टकट नहीं है।

एनजीओ बनाने के बाद केवल यह न सोचें:

“अब हमें ग्रांट कहां से मिलेगी?”

यह भी सोचें:

- हम किस समस्या के लिए काम करना चाहते हैं?
- हम किन लोगों के लिए काम करना चाहते हैं?
- हम अभी अपनी क्षमता से क्या शुरू कर सकते हैं?
- हमारे साथ कौन लोग काम करेंगे?
- टीम और वॉलंटियर्स कैसे जुड़ेंगे?
- हम अपने काम में पारदर्शिता कैसे रखेंगे?
- अपने काम का रिकॉर्ड कैसे रखेंगे?
- संस्था का अनुभव कैसे बढ़ेगा?
- भविष्य में बड़ी फंडिंग मिलने पर हम उसे जिम्मेदारी से कैसे संभालेंगे?
- संस्था लंबे समय तक कैसे काम करती रहेगी?

ये सवाल भी फंडिंग जितने ही जरूरी हैं।

14. चाणक्य एनजीओ कंसल्टेंसी का काम करने का तरीका

हमारी कार्य-पद्धति को सरल रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है:

पहले समझें

संस्था, उसके उद्देश्य, काम, लोगों और वास्तविक जरूरत को समझें।

फिर स्थिति देखें

संस्था का अनुभव, डॉक्यूमेंटेशन, पात्रता और वर्तमान तैयारी देखें।

सही जरूरत पहचानें

जो सेवा मांगी गई है, केवल उसी को न देखें; संस्था को वास्तव में किस चीज की जरूरत है, यह समझें।

सही मार्गदर्शन दें

अभी क्या किया जा सकता है और आगे क्या सुधार करना है, यह स्पष्ट करें।

संस्था को मजबूत होने में मदद करें

टीम, गतिविधियां, रिकॉर्ड, मैनेजमेंट, कंप्लायंस और डॉक्यूमेंटेशन बेहतर करने का रास्ता बताएं।

वास्तविक काम का सही डॉक्यूमेंटेशन करें

जो काम संस्था ने वास्तव में किया है और जो प्रोजेक्ट वह वास्तव में करना चाहती है, उसे प्रोफेशनल तरीके से प्रस्तुत करें।

तैयार होने पर आगे की कंसल्टेंसी दें

जहां संस्था पात्र और तैयार है, वहां जरूरत के अनुसार आवेदन, डॉक्यूमेंटेशन और प्रक्रिया में प्रोफेशनल सहायता दें।

हर स्तर पर नैतिकता रखें

झूठे दस्तावेज नहीं, कृत्रिम पात्रता नहीं, गलत शॉर्टकट नहीं, लाइजनिंग नहीं, ब्रोकरेज नहीं और परिणाम की गारंटी नहीं।

15. एनजीओ और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए हमारा संदेश

सामाजिक क्षेत्र को पैसे की जरूरत है, लेकिन केवल पैसे से कोई अच्छा एनजीओ नहीं बनता।

इसके लिए चाहिए:

सही उद्देश्य, ईमानदार सोच, काम करने वाले लोग, जिम्मेदार टीम, वास्तविक सामाजिक काम, पारदर्शिता, अनुभव और लगातार प्रयास।

फंडिंग अच्छे काम को बढ़ा सकती है, लेकिन फंडिंग सामाजिक सेवा की भावना पैदा नहीं कर सकती।

रजिस्ट्रेशन संस्था को कानूनी पहचान देता है, लेकिन केवल रजिस्ट्रेशन उसे समाज में विश्वसनीय नहीं बनाता।

प्रोजेक्ट प्रपोजल संस्था की योजना को अच्छी तरह प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन वह संस्था के वास्तविक अनुभव की जगह नहीं ले सकता।

डॉक्यूमेंटेशन वास्तविक काम को सही तरीके से दिखा सकता है, लेकिन वह वास्तविक काम की जगह नहीं ले सकता।

कंसल्टेंसी सही दिशा, जानकारी और प्रोफेशनल मदद दे सकती है, लेकिन संस्था की अपनी जिम्मेदारी और वास्तविक पात्रता की जगह नहीं ले सकती।

सबसे महत्वपूर्ण बात:

पहले समाज की जरूरत को समझें।
फिर तय करें कि आप क्या करना चाहते हैं।
अपनी टीम तैयार करें।
जो संभव है उससे काम शुरू करें।
काम का सही रिकॉर्ड रखें।
संस्था को मजबूत करें।
और उसके बाद उस काम को बढ़ाने के लिए उचित फंडिंग और अवसर तलाशें।

चाणक्य एनजीओ कंसल्टेंसी का उद्देश्य वास्तविक एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल एंटरप्रेन्योर्स को इस दिशा में सहयोग देना है ताकि वे:

- सही जानकारी प्राप्त करें
- अपनी वास्तविक स्थिति समझें
- सही मार्गदर्शन प्राप्त करें
- अपने काम का उचित डॉक्यूमेंटेशन करें
- संस्था को बेहतर तरीके से चलाएं
- जरूरी कंप्लायंस पूरे करें
- वास्तविक अनुभव और पात्रता विकसित करें
- अपने सामाजिक उद्देश्य के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों

03/08/2026

નૈતિકતા, પાત્રતા અને સામાજિક જવાબદારી સાથે એનજીઓ કન્સલ્ટન્સી

ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સીની વિચારધારા અને કામ કરવાની રીત
એનજીઓ એટલે માત્ર ટ્રસ્ટ, સોસાયટી અથવા સેક્શન 8 નોન-પ્રોફિટ કંપનીનું રજિસ્ટ્રેશન કરાવી લેવું એટલું જ નથી. એનજીઓની સ્થાપના પાછળ કોઈ સાચો સામાજિક હેતુ હોવો જોઈએ અને તેના કામનો લાભ સમાજ તથા જરૂરિયાતમંદ લોકો સુધી પહોંચવો જોઈએ.

એનજીઓની જવાબદારી તેના લાભાર્થીઓ, સભ્યો, સહયોગીઓ, ડોનર્સ, સરકારી વિભાગો અને સમાજ પ્રત્યે હોય છે. તેથી અમારું માનવું છે કે એનજીઓને આપવામાં આવતી કન્સલ્ટન્સી પણ સાચી માહિતી, પારદર્શિતા, જવાબદારી અને નૈતિક કાર્યપદ્ધતિ પર આધારિત હોવી જોઈએ.

ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સી ભારતમાં એનજીઓ, ટ્રસ્ટ, સોસાયટી, સેક્શન 8 નોન-પ્રોફિટ કંપનીઓ, સામાજિક કાર્યકરો અને સોશિયલ એન્ટરપ્રેન્યોર્સને પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સી, ડોક્યુમેન્ટેશન, સલાહ અને જરૂરી માર્ગદર્શનની સેવાઓ આપે છે.
પરંતુ અમારી કાર્યપદ્ધતિ માત્ર દરેક પૂછપરછને કન્સલ્ટન્સી અસાઇનમેન્ટ અથવા ક્લાયન્ટમાં બદલવાની નથી.
અમે પહેલાં સંસ્થાને, તેના હેતુને, તેની સાચી જરૂરિયાતને, હાલની સ્થિતિને, અનુભવને અને તૈયારીને સમજવાનો પ્રયાસ કરીએ છીએ. જ્યાં પાત્રતાની જરૂર હોય ત્યાં એ પણ જોઈએ છીએ કે સંસ્થા જે રજિસ્ટ્રેશન, અરજી, પ્રોજેક્ટ અથવા તક માટે આગળ વધવા માંગે છે, તેના માટે તે હાલમાં કેટલી તૈયાર અને પાત્ર છે.
સામાજિક ક્ષેત્રમાં સાચા હેતુથી કામ કરતા લોકોને અમે માત્ર ક્લાયન્ટ તરીકે નહીં, પરંતુ સમાજમાં બદલાવ લાવનારા લોકો — સોશિયલ ચેન્જ-મેકર્સ તરીકે જોઈએ છીએ.
તેથી પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સીનો હેતુ માત્ર અરજી તૈયાર કરવી, રજિસ્ટ્રેશન માટે ફાઇલ કરવી કે ફંડિંગની તકો શોધવી ન હોવો જોઈએ. જ્યાં જરૂર હોય ત્યાં સંસ્થાને વધુ મજબૂત, જવાબદાર અને લાંબા સમય સુધી અસરકારક રીતે કામ કરવા માટે યોગ્ય માર્ગદર્શન આપવું પણ જરૂરી છે.

1. અમે કોને સહયોગ આપીએ છીએ
અમે એવા એનજીઓ, સામાજિક કાર્યકરો અને સોશિયલ એન્ટરપ્રેન્યોર્સને કન્સલ્ટન્સી અને માર્ગદર્શન આપવા ઇચ્છીએ છીએ, જેઓ ખરેખર સમાજ માટે કામ કરી રહ્યા છે અથવા સાચા હેતુથી સામાજિક કામ શરૂ કરવા માંગે છે.

અમે ખાસ કરીને એવા લોકો અને સંસ્થાઓ સાથે કામ કરવા ઇચ્છીએ છીએ, જેઓ:
- સમાજ અને જરૂરિયાતમંદ લોકો માટે સાચું કામ કરવા માંગે છે
- પોતાના એનજીઓના હેતુઓ પ્રત્યે ગંભીર છે
- પોતાના કામમાં પારદર્શિતા રાખવા માંગે છે
- સંસ્થાના નાણાં અને અન્ય સાધનોનો યોગ્ય ઉપયોગ કરવા માંગે છે
- પોતાના કામ અને ખર્ચનો યોગ્ય રેકોર્ડ રાખવા માંગે છે
- જરૂરી નિયમો અને કમ્પ્લાયન્સનું પાલન કરવા માંગે છે
- પોતાની પ્રવૃત્તિઓનું યોગ્ય ડોક્યુમેન્ટેશન રાખવા માંગે છે
- સંસ્થામાં જવાબદાર ટીમ અને મેનેજમેન્ટ ઊભું કરવા માંગે છે
- સભ્યો, સહયોગીઓ અને વોલન્ટિયર્સને સાથે લઈને કામ કરવા માંગે છે
- લાંબા સમય સુધી પોતાના સામાજિક હેતુ માટે કામ કરવાની ભાવના ધરાવે છે
એનજીઓનું રજિસ્ટ્રેશન જરૂરી છે, પરંતુ માત્ર રજિસ્ટ્રેશન થઈ જવાથી કોઈ સંસ્થા સારી અને વિશ્વસનીય એનજીઓ બની જતી નથી.
તેની ઓળખ અને વિશ્વસનીયતા તેના સાચા સામાજિક કામ, યોગ્ય મેનેજમેન્ટ, પારદર્શિતા, અનુભવ અને જવાબદારીથી બને છે.

2. પહેલાં સામાજિક જરૂરિયાત સમજો, પછી ફંડિંગ વિશે વિચારો
ઘણી વખત એનજીઓ શરૂ કર્યા પછી પહેલો પ્રશ્ન હોય છે:
“ફંડિંગ ક્યાંથી મળશે?”

પરંતુ તેના પહેલાં વધુ મહત્વનો પ્રશ્ન હોવો જોઈએ:
“અમે સમાજની કઈ સમસ્યા અથવા જરૂરિયાત માટે કામ કરવા માંગીએ છીએ?”

એનજીઓ અને તેના સભ્યોએ પહેલાં વિચારવું જોઈએ:
- અમારા વિસ્તારમાં સાચી સામાજિક સમસ્યા કે જરૂરિયાત શું છે?
- કયા લોકો અથવા સમુદાયને સહાયની જરૂર છે?
- અમે તેમના માટે કયું ઉપયોગી કામ કરી શકીએ?
- શું આ કામ અમારી સંસ્થાના હેતુઓને અનુરૂપ છે?
- શું અમારી ટીમ આ કામ કરી શકે છે?
- આ કામ શરૂ કરવા માટે હાલમાં અમારી પાસે શું ઉપલબ્ધ છે?
- આગળ કામ વધારવા માટે કયા લોકો અને સાધનોની જરૂર પડશે?
- અમે કરેલા કામનો યોગ્ય રેકોર્ડ કેવી રીતે રાખીશું?

કોઈ પ્રોજેક્ટ માત્ર એટલા માટે પસંદ ન કરવો જોઈએ કે તે વિષય માટે ગ્રાન્ટ ઉપલબ્ધ છે.
પહેલાં સંસ્થાનો હેતુ, સમાજની સાચી જરૂરિયાત અને સંસ્થાની કામ કરવાની ક્ષમતા જોવી જોઈએ. ત્યાર પછી તે કામ માટે યોગ્ય ફંડિંગની તક શોધવી જોઈએ.
ફંડિંગ આપણા સામાજિક હેતુને આગળ વધારવાનું સાધન હોવું જોઈએ. માત્ર ફંડિંગ મેળવવા માટે સંસ્થાએ વારંવાર પોતાનો હેતુ અને કામની દિશા બદલવી ન જોઈએ.
સમાજની જરૂરિયાતો સમય સાથે બદલાઈ શકે છે અને સંસ્થાનું કાર્યક્ષેત્ર પણ સાચી જરૂરિયાત મુજબ આગળ વધી શકે છે. પરંતુ પ્રોજેક્ટની પસંદગી સંસ્થાના હેતુ, અનુભવ, ક્ષમતા અને જે લોકો માટે તે કામ કરે છે તેમની સાચી જરૂરિયાત સાથે જોડાયેલી હોવી જોઈએ.

3. અમે પહેલાં સમજીએ છીએ કે સંસ્થાને ખરેખર શું જોઈએ છે
ઘણી વખત કોઈ એનજીઓ કોઈ ખાસ રજિસ્ટ્રેશન, એફસીઆરએ, પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ, ફંડિંગ એપ્લિકેશન અથવા બીજી કોઈ સેવા માટે અમારો સંપર્ક કરે છે.
પરંતુ સંસ્થા જે સેવા માંગે છે, તે જ તે સમયે તેની સૌથી પહેલી જરૂરિયાત હોય એવું જરૂરી નથી.

તેથી કામ પ્રમાણે અમે પહેલાં આ બાબતો સમજવાનો પ્રયાસ કરીએ છીએ:
- સંસ્થા ક્યારે અને કયા સ્વરૂપે રજિસ્ટર્ડ થઈ
- સંસ્થાના હેતુઓ શું છે
- તે કયા ક્ષેત્રમાં કામ કરવા માંગે છે
- સંસ્થાને કામ કરતા કેટલો સમય થયો છે
- અત્યાર સુધી તેણે ખરેખર શું કામ કર્યું છે
- તેના લાભાર્થીઓ કોણ છે
- ગવર્નિંગ બોડી અને મેનેજમેન્ટની સ્થિતિ કેવી છે
- ટીમ અને વોલન્ટિયર્સની ભાગીદારી કેટલી છે
- એકાઉન્ટ્સ અને ઓડિટની સ્થિતિ શું છે
- એન્યુઅલ રિપોર્ટ અને પ્રવૃત્તિઓના રેકોર્ડ ઉપલબ્ધ છે કે નહીં
- જરૂરી રજિસ્ટ્રેશન અને કમ્પ્લાયન્સની સ્થિતિ શું છે
- સંસ્થાને પ્રોજેક્ટ પર કામ કરવાનો કેટલો અનુભવ છે
- જે કામ માટે તે અરજી કરવા માંગે છે, તેના માટે તે પાત્ર છે કે નહીં

આ બધું સમજ્યા પછી સંસ્થાને હાલમાં શું કરવું જોઈએ તે અંગે વધુ યોગ્ય સલાહ આપી શકાય છે.

અનુભવી કન્સલ્ટન્ટનું કામ માત્ર એટલું કહેવાનું ન હોવું જોઈએ:
“તમે ફી આપો, અમે અરજી કરી દઈએ.”

ક્યારેક સાચી પ્રોફેશનલ સલાહ આ પણ હોઈ શકે છે:
“હમણાં અરજી કરવાની ઉતાવળ ન કરો. પહેલાં આ ખામીઓ દૂર કરો અને સંસ્થાને મજબૂત બનાવો.”

4. અલગ સ્થિતિમાં અમારી કામગીરી પણ અલગ હોય છે
સંસ્થાની સ્થિતિ સમજ્યા પછી સામાન્ય રીતે ત્રણ પ્રકારની પરિસ્થિતિ હોઈ શકે છે.
(ક) સંસ્થા સાચી છે, પાત્ર છે અને તૈયાર છે — અમે કન્સલ્ટન્સી આપીએ છીએ
જ્યાં સંસ્થા સંબંધિત કામ માટે પાત્ર અને તૈયાર હોય ત્યાં અમે તેની જરૂરિયાત મુજબ પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સી, ડોક્યુમેન્ટેશન અને અરજી સંબંધિત માર્ગદર્શન આપીએ છીએ.

અમારી સેવાઓમાં જરૂરિયાત પ્રમાણે સામેલ થઈ શકે છે:
- એનજીઓ, ટ્રસ્ટ અને સોસાયટી રજિસ્ટ્રેશન કન્સલ્ટન્સી
- સેક્શન 8 નોન-પ્રોફિટ કંપની રજિસ્ટ્રેશન કન્સલ્ટન્સી
- 12એ/12એબી અને 80જી રજિસ્ટ્રેશન કન્સલ્ટન્સી
- સીએસઆર-1 અને એનજીઓ દર્પણ સંબંધિત કન્સલ્ટન્સી
- એફસીઆરએ રજિસ્ટ્રેશન અને પ્રાયર પરમિશન માટે ડોક્યુમેન્ટેશન અને માર્ગદર્શન
- એનજીઓ પ્રોફાઇલ તૈયાર કરવી
- એન્યુઅલ રિપોર્ટ તૈયાર કરવો
- પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ અને કોન્સેપ્ટ નોટ તૈયાર કરવી
- પ્રોજેક્ટ અને એપ્લિકેશન ડોક્યુમેન્ટેશન
- કમ્પ્લાયન્સ સંબંધિત માર્ગદર્શન
- એનજીઓ મેનેજમેન્ટ અને સંસ્થાને મજબૂત બનાવવા માટેની કન્સલ્ટન્સી
- જરૂર મુજબ અન્ય પ્રોફેશનલ ડોક્યુમેન્ટેશન અને માર્ગદર્શન

અમારું કામ સાચી માહિતી આપવું, સંસ્થાની સ્થિતિ સમજવી, યોગ્ય માર્ગદર્શન આપવું, ડોક્યુમેન્ટેશન તૈયાર કરવું અને નક્કી કરેલા કામ મુજબ પ્રોફેશનલ સહાય આપવાનું છે.

(ખ) સંસ્થા સાચી છે, પરંતુ હજુ પાત્ર અથવા તૈયાર નથી — અમે પહેલાં માર્ગદર્શન આપીએ છીએ
કોઈ એનજીઓનો હેતુ સારો હોઈ શકે છે અને તે ખરેખર સામાજિક કામ કરવા માંગતી હોઈ શકે છે. તેમ છતાં તે કોઈ ખાસ રજિસ્ટ્રેશન, ગ્રાન્ટ અથવા તક માટે હાલમાં પાત્ર ન પણ હોય.

આવી સંસ્થામાં કેટલીક ખામીઓ હોઈ શકે છે, જેમ કે:
- જરૂરી અનુભવ પૂરતો ન હોવો
- પૂરતી સામાજિક પ્રવૃત્તિઓ ન થઈ હોવી
- પ્રવૃત્તિઓનો રેકોર્ડ યોગ્ય રીતે ન રાખ્યો હોવો
- એન્યુઅલ રિપોર્ટ તૈયાર ન હોવો
- એકાઉન્ટ્સ અથવા ઓડિટની સ્થિતિ યોગ્ય ન હોવી
- જરૂરી કમ્પ્લાયન્સ પૂરાં ન થયાં હોવા
- ટીમ અને મેનેજમેન્ટ પૂરતા મજબૂત ન હોવા
- પ્રોજેક્ટનો અનુભવ ઓછો હોવો
- સંસ્થાની પ્રોફાઇલ હજુ પૂરતી વિકસેલી ન હોવી

આવી સ્થિતિમાં માત્ર એપ્લિકેશન તૈયાર કરીને જમા કરી દેવી એ યોગ્ય ઉકેલ નથી.

અમે આવી સંસ્થાને સમજાવીએ અને માર્ગદર્શન આપીએ છીએ કે:
- હાલમાં શું ખૂટે છે
- શું પૂરું કરવું જરૂરી છે
- સંસ્થા પોતાની હાલની ક્ષમતા મુજબ કયું સાચું સામાજિક કામ કરી શકે
- પોતાના કામનો રેકોર્ડ કેવી રીતે રાખવો
- ટીમ અને વોલન્ટિયર્સને કેવી રીતે જોડવા
- જરૂરી ડોક્યુમેન્ટેશન કેવી રીતે તૈયાર કરવું
- કમ્પ્લાયન્સમાં શું સુધારવું
- પોતાના સાચા કામના આધારે અનુભવ અને પ્રોફાઇલ કેવી રીતે મજબૂત કરવી

આનો હેતુ કોઈ સંસ્થાને માત્ર કાગળ પર પાત્ર બતાવવાનો નથી.
હેતુ એ છે કે સંસ્થા સાચા કામ અને યોગ્ય તૈયારીના આધારે ખરેખર પાત્ર બને.
આથી કોઈ સંસ્થા આજે પાત્ર ન હોય તો તેનો અર્થ એવો નથી કે તેના માટે આગળનો રસ્તો બંધ છે.
જો તેનો હેતુ સાચો હોય તો તેને સમજાવી શકાય છે કે આગળ શું કરવું અને કેવી રીતે પોતાની સંસ્થાને જરૂરી સ્તર સુધી તૈયાર કરવી.

(ગ) હેતુ અથવા કામ કરવાની રીત ખોટી છે — અમે કન્સલ્ટન્સી આપતા નથી
કેટલાક કેસમાં સમસ્યા પાત્રતાની નથી, પરંતુ હેતુ અથવા કામ કરવાની રીતની હોય છે.
અમે એવા કામ માટે કન્સલ્ટન્સી આપતા નથી જેમાં:
- જે પ્રવૃત્તિ થઈ જ નથી તે થઈ હોવાનું બતાવવું
- ખોટા લાભાર્થીઓ બતાવવા
- બનાવટી પ્રોજેક્ટ બતાવવા
- સંસ્થાનો ખોટો અનુભવ બતાવવો
- જૂની તારીખના ખોટા રેકોર્ડ બનાવી અનુભવ બતાવવાનો પ્રયાસ કરવો
- ખોટી અથવા ભ્રામક એન્યુઅલ રિપોર્ટ કે પ્રોફાઇલ તૈયાર કરાવવી
- એકાઉન્ટ્સ અથવા ખર્ચના ખોટા આંકડા બતાવવા
- સરકારી વિભાગ, ડોનર અથવા અન્ય સંસ્થાને ખોટી માહિતી આપવી
- ગ્રાન્ટ અથવા ડોનેશનનો ખોટો ઉપયોગ કરવાની મનશા હોવી
- એનજીઓને મુખ્યત્વે વ્યક્તિગત કમાણીનું સાધન બનાવવાનો હેતુ હોવો
- લાંચ, બ્રોકરેજ અથવા ખોટા પ્રભાવથી કામ કરાવવાની અપેક્ષા હોવી
- અન્ય કોઈ ગેરકાયદેસર અથવા અનૈતિક હેતુ હોવો

અમારું માનવું છે કે દરેક વ્યક્તિને માત્ર એટલા માટે ક્લાયન્ટ બનાવવો જરૂરી નથી કે તે કન્સલ્ટન્સી ફી આપવા તૈયાર છે.
ખોટા કામ માટે કન્સલ્ટન્સી આપવાનો ઇનકાર કરવો પણ અમારી પ્રોફેશનલ અને સામાજિક જવાબદારીનો ભાગ છે.
5. સામાજિક કામ શરૂ કરવા માટે હંમેશાં મોટી ફંડિંગ જરૂરી નથી
આ વાત ખાસ કરીને નવા એનજીઓ અને સામાજિક કાર્યકરોએ સમજવી જરૂરી છે.

ઘણા લોકો વિચારે છે:
“પહેલાં ગ્રાન્ટ મળશે, પછી કામ શરૂ કરીશું.”

મોટા પ્રોજેક્ટ, ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર, સાધનો, સ્ટાફ, આરોગ્ય સેવાઓ, મોટા ટ્રેનિંગ પ્રોગ્રામ અથવા મોટા સ્તરે કામ કરવા માટે ચોક્કસપણે નાણાંની જરૂર પડી શકે છે.

પરંતુ ઘણા સામાજિક કામ મોટી ફંડિંગ વગર અથવા ખૂબ ઓછા ખર્ચે પણ શરૂ કરી શકાય છે.

જેમ કે:
- જાગૃતિ કાર્યક્રમો
- શિક્ષણ સંબંધિત માર્ગદર્શન
- પર્યાવરણ અંગે જાગૃતિ
- વૃક્ષારોપણ અને સ્થાનિક પર્યાવરણ પ્રવૃત્તિઓ
- લોકોને ઉપયોગી માહિતી આપવી
- જરૂરિયાતમંદ લોકોને ઉપલબ્ધ સરકારી યોજનાઓ વિશે માહિતી આપવી
- વોલન્ટિયર્સ દ્વારા સામાજિક પ્રવૃત્તિઓ
- સ્થાનિક સ્તરે બેઠક અને લોકો સાથે સંપર્ક
- સામાજિક મુદ્દાઓ પર અભિયાન
- પોતાના વિસ્તારની જરૂરિયાતો સમજવી અને લોકોને જોડવા

આવા કામમાં માત્ર પૈસા જ જરૂરી નથી.

જરૂર પડે છે:
- સાચી વિચારધારા અને સ્પષ્ટ વિઝનની
- કામ કરવા તૈયાર લોકોની
- જવાબદાર ટીમની
- સહયોગીઓની
- વોલન્ટિયર્સની
- સમાજ અને સમુદાયની ભાગીદારીની
- ઉપલબ્ધ જ્ઞાન અને કૌશલ્યની
- યોગ્ય આયોજનની
- સમયની
- સતત પ્રયાસ અને પ્રતિબદ્ધતાની

એટલે પ્રશ્ન માત્ર આ ન હોવો જોઈએ:
“અમને પૈસા ક્યાંથી મળશે?”
એક મહત્વનો પ્રશ્ન આ પણ હોવો જોઈએ:
“અમારી પાસે હાલમાં જે લોકો, સમય, જ્ઞાન, કૌશલ્ય અને સાધનો છે, તેનાથી અમે સમાજ માટે શું કામ શરૂ કરી શકીએ?”

જો કેટલાક સામાજિક કાર્યકરો મળીને કોઈ સાચી સામાજિક સમસ્યા માટે કામ કરવા માંગતા હોય, તો તેઓ પોતાની ક્ષમતા પ્રમાણે શરૂઆત કરી શકે છે.
ધીરે-ધીરે ટીમ બની શકે છે. વોલન્ટિયર્સ જોડાઈ શકે છે. કામનો અનુભવ વધી શકે છે. સંસ્થા પોતાના કામનો યોગ્ય રેકોર્ડ રાખી શકે છે. સમાજમાં તેની ઓળખ બની શકે છે અને આગળ મોટા કામ માટે સંસ્થા વધુ સારી રીતે તૈયાર થઈ શકે છે.
જો કોઈ એનજીઓ અથવા સામાજિક કાર્યકરને સમજવું હોય કે ઓછા સાધનોમાં શું કામ શરૂ કરી શકાય, ટીમ કેવી રીતે બનાવવી, પ્રવૃત્તિઓનું આયોજન કેવી રીતે કરવું, રેકોર્ડ કેવી રીતે રાખવો અને સંસ્થાને ધીમે-ધીમે કેવી રીતે મજબૂત બનાવવી, તો અમે આ પ્રકારનું માર્ગદર્શન પણ આપીએ છીએ.
ફંડિંગ કામને વધારી શકે છે, પરંતુ કામ કરવાની ઇચ્છા, સાચું નેતૃત્વ અને જવાબદાર ટીમનું સ્થાન ફંડિંગ લઈ શકતું નથી.

6. માત્ર એક ગ્રાન્ટ અથવા ડોનર પર આધાર રાખવાને બદલે સંસ્થાને મજબૂત બનાવો
એનજીઓને ફંડિંગની જરૂર પડી શકે છે અને સારા પ્રોજેક્ટ માટે ગ્રાન્ટ, સીએસઆર ફંડિંગ, ડોનેશન અને અન્ય આર્થિક સહાય મહત્વપૂર્ણ હોય છે.
પરંતુ સંસ્થાને એવી રીતે વિકસાવવી જોઈએ કે તેનું સમગ્ર અસ્તિત્વ માત્ર એક ગ્રાન્ટ અથવા એક ડોનર પર આધારિત ન રહે.

તે માટે સંસ્થાએ ધીમે-ધીમે મજબૂત કરવું જોઈએ:
- પોતાની ગવર્નિંગ બોડી અને મેનેજમેન્ટ
- સક્રિય સભ્યો
- ટીમ અને વોલન્ટિયર નેટવર્ક
- સમુદાય સાથેનો સંપર્ક
- કામ કરવાનો અનુભવ
- ડોક્યુમેન્ટેશન
- એકાઉન્ટ્સ અને નાણાકીય વ્યવસ્થા
- કમ્પ્લાયન્સ
- યોગ્ય અને કાયદેસર રીતે સાધનો અને સહાય મેળવવાની ક્ષમતા
- સમાન હેતુ ધરાવતા લોકો અને સંસ્થાઓ સાથે સહયોગ

કોઈ એક પ્રોજેક્ટની ફંડિંગ પૂરી થઈ જાય એટલે સંસ્થાનો સામાજિક હેતુ પણ પૂરો થઈ જવો જોઈએ નહીં.
ફંડિંગ સંસ્થાના કામને વધારવાનું સાધન છે; ફંડિંગ મેળવવું જ સંસ્થા બનાવવાનો હેતુ ન હોવો જોઈએ.

7. સારી એનજીઓ પ્રોફાઇલ માત્ર સારો ડોક્યુમેન્ટ નથી
ઘણા લોકો માને છે કે સારી અને આકર્ષક એનજીઓ પ્રોફાઇલ તૈયાર થઈ જાય એટલે સંસ્થા મજબૂત દેખાશે.
પરંતુ સાચી વાત એ છે કે સારી પ્રોફાઇલ સારા અને સાચા કામથી બને છે.

તેનો સામાન્ય ક્રમ આ રીતે સમજી શકાય:
સામાજિક જરૂરિયાતની ઓળખ → સાચું કામ → ટીમ અને વોલન્ટિયર્સ → યોગ્ય મેનેજમેન્ટ → રેકોર્ડ → એકાઉન્ટ્સ → કમ્પ્લાયન્સ → ડોક્યુમેન્ટેશન → અનુભવ → વિશ્વસનીય પ્રોફાઇલ

ડોક્યુમેન્ટેશનનું કામ સંસ્થાના સાચા કામને યોગ્ય, વ્યવસ્થિત અને પ્રોફેશનલ રીતે રજૂ કરવાનું છે.
સારી રીતે લખાયેલ એન્યુઅલ રિપોર્ટ એવા કામની જગ્યા લઈ શકતી નથી જે ખરેખર થયું જ નથી.
સારો પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ એવા અનુભવની જગ્યા લઈ શકતો નથી જે સંસ્થા પાસે છે જ નહીં.
અને આકર્ષક એનજીઓ પ્રોફાઇલ એવી સંસ્થાને અનુભવી બનાવી શકતી નથી જેણે હજી સુધી ખરેખર કામ કર્યું નથી.
એટલે જ્યારે અમે કહીએ છીએ કે સંસ્થાએ પોતાની પ્રોફાઇલ મજબૂત કરવી જોઈએ, તેનો અર્થ માત્ર પ્રોફાઇલ ડોક્યુમેન્ટને સુંદર બનાવવો નથી.
પહેલાં સંસ્થા અને તેનું સાચું કામ મજબૂત થવું જોઈએ; ત્યારબાદ ડોક્યુમેન્ટેશન એ કામને યોગ્ય રીતે રજૂ કરે.

8. ગ્રાન્ટ અને ફંડિંગ સંબંધિત કન્સલ્ટન્સીમાં અમારું કામ શું છે
એનજીઓને ગ્રાન્ટ, સીએસઆર અથવા અન્ય ફંડિંગની તક માટે અરજી કરતી વખતે પ્રોફેશનલ મદદની જરૂર પડી શકે છે.

જરૂર મુજબ અમે:
- પાત્રતાની શરતો સમજવામાં મદદ કરી શકીએ
- સંસ્થાની હાલની સ્થિતિ અને તૈયારી જોઈ શકીએ
- ઉપલબ્ધ ડોક્યુમેન્ટેશનની સમીક્ષા કરી શકીએ
- જરૂરી ડોક્યુમેન્ટેશનમાં શું ખૂટે છે તે જણાવી શકીએ
- પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ તૈયાર કરી શકીએ અથવા તેની સમીક્ષા કરી શકીએ
- કોન્સેપ્ટ નોટ તૈયાર કરી શકીએ
- પ્રોજેક્ટ બજેટ અને જરૂરી ડોક્યુમેન્ટ તૈયાર કરવામાં મદદ કરી શકીએ
- એનજીઓ પ્રોફાઇલ અને એન્યુઅલ રિપોર્ટ તૈયાર કરી શકીએ
- એપ્લિકેશનના ડોક્યુમેન્ટ ગોઠવવામાં મદદ કરી શકીએ
- અરજીની પ્રક્રિયા વિશે માર્ગદર્શન આપી શકીએ

આ ફંડિંગ સંબંધિત પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સી અને ડોક્યુમેન્ટેશનનું કામ છે.
તેનો અર્થ એ નથી કે અમે ફંડિંગ અપાવવાનું અથવા તેની ગેરંટી આપવાનું કામ કરીએ છીએ.

અમારી ભૂમિકા યોગ્ય રીતે આ પ્રમાણે કહી શકાય:
“અમે એનજીઓને સીએસઆર સંબંધિત પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ અને ફંડિંગ એપ્લિકેશન માટે પ્રોફેશનલ માર્ગદર્શન અને ડોક્યુમેન્ટેશનની સેવાઓ આપીએ છીએ.”

પરંતુ આ કહેવું અમારા કામનું સાચું વર્ણન નથી:
“અમે એનજીઓને સીએસઆર ફંડિંગ અપાવીએ છીએ.”
આ જ વાત સરકારી ગ્રાન્ટ, અન્ય ફંડિંગ અને વિદેશી યોગદાન સંબંધિત બાબતોમાં પણ લાગુ પડે છે.

9. મદદ કરવી અને પરિણામની ગેરંટી આપવી — બંને અલગ બાબતો છે
આ તફાવત સમજવો ખૂબ જરૂરી છે.

અમે કહી શકીએ:
“અમે એફસીઆરએ રજિસ્ટ્રેશન માટે જરૂરી ડોક્યુમેન્ટેશન અને અરજીની પ્રક્રિયામાં માર્ગદર્શન આપીએ છીએ.”

પરંતુ અમે એવું નથી કહેતા:
“અમે એફસીઆરએ રજિસ્ટ્રેશનની ગેરંટી આપીએ છીએ.”

કારણ કે અંતિમ નિર્ણય સંબંધિત સરકારી વિભાગ અથવા સત્તાધિકારીનો હોય છે.
આ જ વાત ગ્રાન્ટ અને ફંડિંગ માટે પણ લાગુ પડે છે.
કન્સલ્ટન્ટ સંસ્થાને સાચી માહિતી, તૈયારી, ડોક્યુમેન્ટેશન અને અરજીમાં મદદ કરી શકે છે. પરંતુ જે નિર્ણયનો અધિકાર સરકારી વિભાગ, કંપની, ડોનર અથવા ફંડિંગ સંસ્થા પાસે છે તેની ગેરંટી કન્સલ્ટન્ટ આપી શકતો નથી.

તેથી અમારી કન્સલ્ટન્સી ફી અમારા પ્રોફેશનલ કામ, સમય, અનુભવ, માર્ગદર્શન અને ડોક્યુમેન્ટેશન માટે હોય છે.
તે કોઈ રજિસ્ટ્રેશનના અપ્રૂવલ, ગ્રાન્ટ અથવા ફંડિંગ મેળવવાની કિંમત કે ગેરંટી નથી.

10. અમે લાયઝનિંગ, બ્રોકરેજ અથવા ફંડિંગની ગેરંટીનું કામ કરતા નથી
ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સી ગ્રાન્ટ, ડોનેશન, સીએસઆર ફંડ, સરકારી ગ્રાન્ટ અથવા વિદેશી યોગદાન અપાવનારા એજન્ટ અથવા બ્રોકર તરીકે કામ કરતી નથી.

અમારી સેવાઓમાં સામેલ નથી:
- ગ્રાન્ટ અથવા અપ્રૂવલ મેળવવા માટે લાયઝનિંગ
- ફંડિંગ બ્રોકરેજ
- ગ્રાન્ટ અપાવવાના બદલામાં કમિશન અથવા ટકાવારી લેવી
- એનજીઓ અને ડોનર વચ્ચે ફંડિંગ અપાવનારા એજન્ટ તરીકે કામ કરવું
- કોઈ ખાસ સંપર્ક અથવા પ્રભાવથી અપ્રૂવલ અપાવવાનો દાવો કરવો
- સીએસઆર ફંડિંગની ગેરંટી આપવી
- સરકારી ગ્રાન્ટ અથવા ડોનેશનની ગેરંટી આપવી
- રજિસ્ટ્રેશન અથવા એપ્લિકેશન અપ્રૂવલની ગેરંટી આપવી
- કન્સલ્ટન્સી ફી આપવાથી ફંડિંગ મળશે એવો દાવો કરવો
- એનજીઓ અથવા ડોનર તરફથી ફંડ એકત્રિત કરવું

અમારું કામ પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સી, સાચી માહિતી, ડોક્યુમેન્ટેશન અને માર્ગદર્શન આપવાનું છે.

11. કન્સલ્ટન્ટ માર્ગદર્શન આપે છે, એનજીઓ ચલાવવાની જવાબદારી સંસ્થાની પોતાની છે

કન્સલ્ટન્ટ સલાહ આપી શકે છે, ડોક્યુમેન્ટેશન તૈયાર કરી શકે છે અને જરૂરી પ્રક્રિયામાં મદદ કરી શકે છે. પરંતુ સંસ્થા ચલાવવાની જવાબદારી તેના પોતાના ટ્રસ્ટીઓ, ગવર્નિંગ બોડી, બોર્ડ, હોદ્દેદારો અને મેનેજમેન્ટની હોય છે.

તેમની જવાબદારી છે:
- સંસ્થાના નિર્ણય લેવા
- સામાજિક કાર્યક્રમો ચલાવવા
- લાભાર્થીઓ માટે સાચું કામ કરવું
- રેકોર્ડ રાખવા
- એકાઉન્ટ્સ અને નાણાંનું યોગ્ય મેનેજમેન્ટ કરવું
- જરૂરી કમ્પ્લાયન્સ પૂરાં કરવા
- સ્ટાફ અને વોલન્ટિયર્સનું મેનેજમેન્ટ કરવું
- ગ્રાન્ટ અને ડોનેશનનો યોગ્ય ઉપયોગ કરવો
- સંસ્થા અને તેના કામ માટે જવાબદાર રહેવું

કન્સલ્ટન્ટનું કામ સંસ્થાને વધુ સારી રીતે અને જવાબદારીપૂર્વક કામ કરવામાં મદદ કરવાનું છે.
કન્સલ્ટન્ટ સંસ્થાના મેનેજમેન્ટની જગ્યા લઈ શકતો નથી અને સંસ્થા પણ પોતાની જવાબદારી કન્સલ્ટન્ટ પર મૂકી શકતી નથી.

12. સાચી કન્સલ્ટન્સી માટે બંને તરફથી ઈમાનદારી જરૂરી છે
એનજીઓને કન્સલ્ટન્ટ પાસેથી સાચી માહિતી, યોગ્ય માર્ગદર્શન અને પ્રોફેશનલ કામની અપેક્ષા હોવી જોઈએ.

તે જ રીતે કન્સલ્ટન્ટને પણ સંસ્થા તરફથી સાચી અને વાસ્તવિક માહિતી મળવી જરૂરી છે.
સંસ્થા અમારી પાસેથી શું અપેક્ષા રાખી શકે

- સાચી સ્થિતિના આધારે સલાહ
- કામની સ્પષ્ટ માહિતી
- યોગ્ય પ્રોફેશનલ માર્ગદર્શન
- સાચું ડોક્યુમેન્ટેશન
- ખોટા વચનો નહીં
- બનાવટી પાત્રતા તૈયાર કરવી નહીં
- ફંડિંગની ખોટી ગેરંટી નહીં
- બ્રોકરેજ અથવા ખોટા પ્રભાવના દાવા નહીં

અમે સંસ્થા પાસેથી શું અપેક્ષા રાખીએ છીએ

- સાચી અને સંપૂર્ણ માહિતી
- વાસ્તવિક ડોક્યુમેન્ટ
- પ્રવૃત્તિઓ અને લાભાર્થીઓની સાચી માહિતી
- જ્યાં જરૂરી હોય ત્યાં સાચી નાણાકીય માહિતી
- સંસ્થાનો સાચો અનુભવ
- નિયમોનું પાલન કરવાની તૈયારી
- જવાબદાર મેનેજમેન્ટ
- સંસ્થાના સામાજિક હેતુ પ્રત્યે ઈમાનદારી

ખોટી માહિતીના આધારે સાચું ડોક્યુમેન્ટેશન તૈયાર કરી શકાય નહીં.

તેથી એનજીઓ અને કન્સલ્ટન્ટ વચ્ચે વિશ્વાસનો આધાર સાચી માહિતી, પારદર્શિતા અને બંને તરફની જવાબદારી હોવો જોઈએ.

13. એનજીઓનું રજિસ્ટ્રેશન શરૂઆત છે — અંતિમ લક્ષ્ય નથી

એક સારી અને મજબૂત સંસ્થા ધીમે-ધીમે વિકસે છે:
રજિસ્ટ્રેશન → સામાજિક જરૂરિયાતની ઓળખ → સાચી પ્રવૃત્તિઓ → ટીમ અને વોલન્ટિયર્સ → યોગ્ય મેનેજમેન્ટ → રેકોર્ડ → એકાઉન્ટ્સ → કમ્પ્લાયન્સ → અનુભવ → ડોક્યુમેન્ટેશન → સારી પ્રોફાઇલ → પાત્રતા → યોગ્ય તકો → આગળનો વિકાસ

આ પ્રક્રિયાનો કોઈ સાચો શોર્ટકટ નથી.

એનજીઓ બનાવ્યા પછી માત્ર આ ન વિચારવું જોઈએ:
“હવે અમને ગ્રાન્ટ ક્યાંથી મળશે?”

આ પણ વિચારવું જોઈએ:
- અમે કઈ સામાજિક સમસ્યા માટે કામ કરવા માંગીએ છીએ?
- અમે કયા લોકો માટે કામ કરવા માંગીએ છીએ?
- અમારી હાલની ક્ષમતા પ્રમાણે અત્યારે શું શરૂ કરી શકીએ?
- અમારી સાથે કોણ કામ કરશે?
- ટીમ અને વોલન્ટિયર્સ કેવી રીતે જોડાશે?
- અમારા કામમાં પારદર્શિતા કેવી રીતે રાખીશું?
- કામનો રેકોર્ડ કેવી રીતે રાખીશું?
- સંસ્થાનો અનુભવ કેવી રીતે વધારશું?
- ભવિષ્યમાં મોટી ફંડિંગ મળે તો તેને જવાબદારીથી કેવી રીતે સંભાળીશું?
- સંસ્થા લાંબા સમય સુધી કેવી રીતે કામ કરતી રહેશે?

આ પ્રશ્નો પણ ફંડિંગ જેટલા જ મહત્વપૂર્ણ છે.

14. ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સીની કામ કરવાની રીત

અમારી કાર્યપદ્ધતિને સરળ રીતે આ પ્રમાણે સમજી શકાય:
પહેલાં સમજવું

સંસ્થા, તેના લોકો, હેતુ, વિઝન, સાચું કામ અને જરૂરિયાત સમજવી.

પછી હાલની સ્થિતિ જોવી

સંસ્થાનો અનુભવ, ડોક્યુમેન્ટેશન, પાત્રતા અને હાલની તૈયારી જોવી.

સાચી જરૂરિયાત ઓળખવી

માત્ર સંસ્થાએ કઈ સેવા માગી છે તે નહીં, પરંતુ તેને ખરેખર શેની જરૂર છે તે સમજવું.

યોગ્ય માર્ગદર્શન આપવું
હાલમાં શું કરી શકાય અને આગળ શું સુધારવું જરૂરી છે તે સ્પષ્ટ કરવું.
સંસ્થાને મજબૂત થવામાં મદદ કરવી
ટીમ, પ્રવૃત્તિઓ, રેકોર્ડ, મેનેજમેન્ટ, કમ્પ્લાયન્સ અને ડોક્યુમેન્ટેશન વધુ સારું કરવા માટે માર્ગ બતાવવો.
સાચા કામનું યોગ્ય ડોક્યુમેન્ટેશન કરવું
સંસ્થાએ ખરેખર જે કામ કર્યું છે અને જે પ્રોજેક્ટ ખરેખર કરવા માંગે છે તેને પ્રોફેશનલ રીતે રજૂ કરવું.
તૈયાર થયા પછી આગળની કન્સલ્ટન્સી આપવી
જ્યાં સંસ્થા પાત્ર અને તૈયાર હોય ત્યાં જરૂર મુજબ અરજી, ડોક્યુમેન્ટેશન અને પ્રક્રિયામાં પ્રોફેશનલ મદદ આપવી.
દરેક સ્તરે નૈતિકતા જાળવવી

ખોટા ડોક્યુમેન્ટ નહીં, બનાવટી પાત્રતા નહીં, ખોટા શોર્ટકટ નહીં, લાયઝનિંગ નહીં, બ્રોકરેજ નહીં અને પરિણામની ગેરંટી નહીં.

15. એનજીઓ અને સામાજિક કાર્યકરો માટે અમારો સંદેશ
સામાજિક ક્ષેત્રને પૈસાની જરૂર છે, પરંતુ માત્ર પૈસાથી સારી એનજીઓ બનતી નથી.

તે માટે જરૂરી છે:
સાચો હેતુ, ઈમાનદાર વિચાર, કામ કરવા તૈયાર લોકો, જવાબદાર ટીમ, સાચું સામાજિક કામ, પારદર્શિતા, અનુભવ અને સતત પ્રયાસ.

ફંડિંગ સારા કામને વધારી શકે છે, પરંતુ ફંડિંગ પોતે સામાજિક સેવા કરવાની ભાવના ઊભી કરી શકતું નથી.
રજિસ્ટ્રેશન સંસ્થાને કાયદેસરની ઓળખ આપે છે, પરંતુ માત્ર રજિસ્ટ્રેશન તેને સમાજમાં વિશ્વસનીય બનાવતું નથી.
પ્રોજેક્ટ પ્રપોઝલ સંસ્થાની યોજનાને સારી રીતે રજૂ કરી શકે છે, પરંતુ તે સંસ્થાના સાચા અનુભવની જગ્યા લઈ શકતો નથી.

ડોક્યુમેન્ટેશન સાચા કામને યોગ્ય રીતે રજૂ કરી શકે છે, પરંતુ તે સાચા કામની જગ્યા લઈ શકતું નથી.
કન્સલ્ટન્સી સાચી દિશા, માહિતી અને પ્રોફેશનલ મદદ આપી શકે છે, પરંતુ તે સંસ્થાની પોતાની જવાબદારી અને સાચી પાત્રતાની જગ્યા લઈ શકતી નથી.

સૌથી મહત્વની વાત:
પહેલાં સમાજની જરૂરિયાત સમજો.
પછી નક્કી કરો કે તમે શું કરવા માંગો છો.
તમારી ટીમ તૈયાર કરો.
જે શક્ય છે તેનાથી કામ શરૂ કરો.
કામનો સાચો રેકોર્ડ રાખો.
સંસ્થાને મજબૂત બનાવો.
અને ત્યાર પછી તે કામને વધારવા માટે યોગ્ય ફંડિંગ અને તકો શોધો.

ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સીનો હેતુ સાચા એનજીઓ, સામાજિક કાર્યકરો અને સોશિયલ એન્ટરપ્રેન્યોર્સને આ દિશામાં સહયોગ આપવાનો છે જેથી તેઓ:
- સાચી માહિતી મેળવી શકે
- પોતાની વાસ્તવિક સ્થિતિ સમજી શકે
- યોગ્ય માર્ગદર્શન મેળવી શકે
- પોતાના કામનું યોગ્ય ડોક્યુમેન્ટેશન કરી શકે
- સંસ્થાને વધુ સારી રીતે ચલાવી શકે
- જરૂરી કમ્પ્લાયન્સ પૂરાં કરી શકે
- સાચો અનુભવ અને પાત્રતા વિકસાવી શકે
- પોતાના સામાજિક હેતુ માટે વધુ સારી રીતે તૈયાર થઈ શકે

અમારા માટે જવાબદાર એનજીઓ કન્સલ્ટન્સીનો અર્થ છે:
માર્ગદર્શન — ગેરંટી નહીં.
મદદ — પરિણામનું વચન નહીં.
ડોક્યુમેન્ટેશન — ખોટી માહિતી તૈયાર કરવી નહીં.
સાચી પાત્રતા — માત્ર કાગળ પરની પાત્રતા નહીં.
પ્રોફેશનલ કન્સલ્ટન્સી — લાયઝનિંગ અથવા બ્રોકરેજ નહીં.
સંસ્થાને મજબૂત બનાવવી — માત્ર ગ્રાન્ટ પાછળ દોડવું નહીં.
પહેલાં સામાજિક જરૂરિયાત અને હેતુ — ત્યાર પછી ફંડિંગ.
ફંડિંગનો સહયોગ — તેના પર સંપૂર્ણ નિર્ભરતા નહીં.
કન્સલ્ટન્ટનું માર્ગદર્શન — પરંતુ સંસ્થાની પોતાની જવાબદારી સાથે.

એક મજબૂત એનજીઓ માત્ર રજિસ્ટ્રેશન કરાવવાથી અથવા ગ્રાન્ટ મેળવવાથી બનતી નથી.

મજબૂત એનજીઓ સાચા હેતુ, યોગ્ય લોકો, વાસ્તવિક સામાજિક કામ, જવાબદાર મેનેજમેન્ટ, પારદર્શિતા, જવાબદારી, અનુભવ અને સમાજ માટે સતત કામ કરવાની પ્રતિબદ્ધતાથી બને છે.

આ જ વિચાર સાથે ચાણક્ય એનજીઓ કન્સલ્ટન્સીનો પ્રયાસ માત્ર એનજીઓને પ્રોફેશનલ સેવાઓ આપવાનો નથી, પરંતુ સામાજિક ક્ષેત્રમાં કામ કરતી સંસ્થાઓ અને લોકોને સાચી દિશામાં આગળ વધવામાં મદદ કરવાનો પણ છે — જેથી સામાજિક ક્ષેત્ર વધુ જવાબદાર, પારદર્શક અને અસરકારક બની શકે.

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