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15/01/2022

हम गाड़ी की सर्विस तो करवाते है लेकिन क्या हमने अपनी शरीर की सर्विस करवाई कभी?

1. लिवर की सफाई के लिए :

20 ग्राम काली किशमिस और 1 ग्लास पानी लेकर मिक्सर मे ज्युस बनाकर सुबह खाली पेट 15 दिनों तक सेवन करने से लिवर की सफाई होती है |

2. किडनी की सफाई के लिए :

हरा धनिया 40 ग्राम +1 ग्लास पानी मिक्स करके मिक्सर मे पीस करके सुबह खाली पेट लीजिए यह 10 दिनों तक करने से किडनी की सफ़ाई होती है और हमारी किडनी स्वस्थ रहती है।

3. हार्ट की सफाई के लिए :

60 ग्राम अलसी को मिक्सर मे पीस लीजिए फिर सुबह शाम खालीपेट 10-10 ग्राम की मात्रा मे सेवन से हमारा हार्ट (हृदय) स्वस्थ रहता है यह उपाय 1 महिने तक करना है।

4. दिमाग की सफाई के लिए :

बादाम 8 और अखरोट 2 नग लेकर रात को 1 ग्लास पानी मे भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करें। यह पूरे 2 महिनों तक करने से दिमाग को पूरी तरह से जहरमुक्त किया जा सकता है।

5. फेंफडो की सफाई के लिए :

2 चम्मच शहद + 1 चम्मच नींबू का रस + 1 चम्मच अदरक का रस सभी चीजो को मिक्स करके सुबह खाली पेट सेवन करने से बिड़ी, सिगरेट, गुटखा या तंबाकु से जो नुकसान हमारे फेंफडो को हुआ है उन्हे सुधार होगा और हमारे फेंफडे पूरी तरह से स्वस्थ हो जाते है। यह प्रयोग करीब 20 दिनों तक करना है।
औऱ अधिक जानकारी के लिये अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

09/10/2021

बरसात आई और कानों में इतना कह गई।गरमी किसी की भी नहीँ रहती।
राधे राधे

05/07/2021

शतावरी- स्री रोगों में उपयोगी, जाने इसके लाजवाब फायदे

झाडीनुमा दिखने वाल यह पौधा बहुत ही खुबसूरत होने के साथ साथ इसे लोग अपने घरों को सजाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। शतावरी जंगल में स्वत: ही उत्पन्न होने वाल पौधा हैं। इसका आयुर्वेद में औषधीय महत्व है। इसकी लतादार झाड़ियों की पत्तियाँ पतली और सुई की तरह होती हैं। इसका जो फल होता है, वो मटर के दाने की तरह गोल होता हैं, जो पकने पर लाल हो जाता हैं। इसके फूल देखने में बहुत छोटे-छोटे, सफ़ेद रंग के होने के साथ सुगन्धित होते हैं। शतावरी के पौधे को विकसित होने एवं कंद के पूर्ण आकार प्राप्त करने में तीन वर्ष का समय लगता हैं। शतावरी का उपयोग स्री रोगों के निवारण के लिए किया जाता हैं, आइये जानते है इसके लाजवाब फायदों के बारे में।

शतावरी के लाजवाब फायदे

गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी किसी रामबाण से कम नहीं हैं। डिलीवरी के बाद महिलाओं में दूध कम आने की शिकायत होती है, तब महिलायें अगर शतावरी के जड़ का 10 ग्राम चूर्ण गाय के दूध के साथ सेवन करती है, तो स्तन में दूध की मात्रा बढ़ जाती है, इससे बच्चे का और माँ का स्वास्थ्य भी उत्तम बना रहता हैं।
गर्भपात या बांझपन की समस्या से परेशान हैं, तो शतावरी का सेवन इन समस्याओं से मुक्ति दिला सकता है, किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह जरुर लें, लाभ होगा।
शतावरी में एंटी-ओक्सिडेंट और एंटी-इम्फ्लेमेटरी के तत्व पाए जाते हैं, इसमें फोलेट तत्व भी भरपूर मात्रा में पाए जाते है, इसके सेवन से शरीर में विटामिन बी 12 की कमी पूरी होती है तथा शारीरिक कमजोरी को दूर करने के लिए प्रतिदिन एक छोटा चम्मच शतावरी का पाउडर गुनगुने दूध के साथ पीने से कमजोरी दूर होती है।
गला बैठा हुआ हो, आवाज निकलने में दिक्कते हो रही हो, तो शतावरी के चूर्ण में शहद मिलाकर चाटने से गला ठीक होता हैं, आवाज पहले जैसी हो जाती हैं।
शतावरी के जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता हैं।
शतावरी के चूर्ण में दूध मिलाकर उसका लेप बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा साफ़ हो जाता है, बैक्टेरिया नष्ट हो जाते हैं। त्वचा पर कसाव आता हैं।
दूध में शतावरी के चूर्ण को मिलाकर पीने से सेक्सुअल पॉवर में वृद्धि होती हैं।
आज के इस वर्तमान युग में लोग तनाव में रहने के लिए मजबूर हो गये है, तनाव के कारण मस्तिष्क को आराम नहीं मिल रहा और लोग समय से पहले ही बुड्ढे दिखने लग गये है। जरुरत से ज्यादा तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी स्थिति से छुटकारा पाने के लिए शतावरी के चूर्ण को दूध में उबालकर, उसमें थोडा देसी घी मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है, तनाव, चिंता से छुटकारा मिलता हैं।
इम्युनिटी पॉवर बढ़ाने के लिए शतावरी का पाउडर दूध में मिलाकर पीने से फायदा होता हैं।
बवासीर के कारण परेशान है, तो शतावरी का चूर्ण रात को सोते समय गर्म दूध के साथ पीने से बवासीर से मुक्ति मिलती हैं।

18/12/2020

Radhey Radhay

20/11/2019

Jai shri Ram

25/03/2019
25/03/2019

गुस्सा दूर करने के उपाय
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इस पृथ्वी पर शायद ही कोई प्राणी होगा जिसे गुस्सा नहीं आता, जब भी कुछ हमारे मन मुताबिक नहीं होता, तब जो प्रतिक्रिया हमारा मन करता है, वही गुस्सा कहलाता है। वास्तव में "जब हम गुस्सा करते हैं तब हम किसी दूसरे की गलती की सजा खुद अपने को देते हैं।" जब किसी दिन हम मानसिक रूप से परेशान होते हैं, जीवन में किसी चीज या स्थिति से असंतुष्ट होते है, किसी बात पर हमारे दिल ठेस लगती है, जब हम निराश-हताश हो जाते है तब हम मानसिक रूप से ज्यादा बेचैन हो जाते है उस दिन हमें गुस्सा अधिक आता है और छोटी-छोटी बातों पर अधिक तीखी और त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं।

वास्तव में गुस्सा एक भयानक तूफ़ान जैसा है, जो जाने के बाद पीछे अपनी बर्बादी का निशान छो़ड जाता हैं। गुस्से में सबसे पहले दिमाग फिर जबान अपना आपा खोती है, वह वो सब कहती है, जो नहीं बिलकुल भी कहना चाहिए और रिश्तों में जबरदस्त क़डवाहट आ जाती है। और तब तो और भी मुश्किल होती है जब गुस्सा हमारे दिमाग में घर कर जाता है और हमारे अन्दर बदला लेने की सामने वाले को नुकसान पहुँचाने की भावना प्रबल हो जाती है ।

कुछ ऐसे उपाय जिससे हम यथासंभव अपने गुस्से पर काबू कर सकते है ।

🔶दो पके मीठे सेब बिना छीले प्रातः खाली पेट चबा-चबाकर पन्द्रह दिन लगातार खाने से गुस्सा शान्त होता है। बर्तन फैंकने वाला, तोड़ फोड़ करने वाला और पत्नि और बच्चों पर हाथ उठाने वाला व्यक्ति भी अपने क्रोध से मुक्ति पा सकेगा। इसके सेवन से दिमाग की कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।

🔶प्रतिदिन प्रातः काल आंवले का एक पीस मुरब्बा खायें और शाम को एक चम्मच गुलकंद खाकर ऊपर से दुध पी लें। बहुत क्रोध आना शीघ्र ही बन्द होगा।

🔶गुस्सा आने पर दो तीन गिलास खूब ठंडा पानी धीरे धीरे घूँट घूँट लेकर पिएं । पानी हमारेशारीरिक तनाव को कम करके क्रोध शांत करने में मददगार होता है।

🔶गुस्सा बहुत आता हो तो धरती माता को रोज सुबह उठकर हाथ से पाँच बार छूकर प्रणाम करें और सबसे विशाल ह्रदय धरती माँ से अपने गुस्से पर काबू करने और सहनशील होने का वरदान मागें।

🔶पलाश के छोटे छोटे पत्तों की सब्जी खाने से गुस्सा, और पित्त जल्दी ही शांत होता है ।

🔶रविवार को अदरक, टमाटर और लाल रंग के कपड़े गुस्सा अधिक बढ़ाते हैं अत: इनका कम से कम प्रयोग करें ।

🔶जिनको गुस्सा बहुत आता हो, बात- बात में चिड जाते हो वे सोमवार का उपवास करें, या एक समय भोजन करें। रात कों चन्द्रमा कों अर्घ दें तथा अपने गुस्से पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें । इससे भी मन शान्त रहता है, गुस्से पर नियंत्रण रहता है।

🔶बहुत अधिक खट्टी, तीखी, मसालेदार चीजें खाने से आँखें जलती हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है, शीघ्र गुस्सा आता है, अकारण ही सीने और पेट में जलन होती है अत: इन चीजों का बिलकुल त्याग कर देना चाहिए ।

🔶जिन्हे ज्यादा गुस्सा आता हो उन्हें चाय, काफी, मदिरा से परहेज करना चाहिए ये शरीर को उत्तेजित करते है उसके स्थान पर छाछ, मीठा दूध या नींबू पानी का प्रयोग करना चाहिए ।

🔶यदि गुस्सा आने वाला हो तो 5-6 बार गहरी गहरी साँस लीजिए, कुछ पलों के लिए अपनी आँखे बंद करके ईश्वर का ध्यान करें उन्हें प्रणाम करें उनसे अपना कोई भी निवेदन करें। यह गुस्सा कम करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इससे आप भड़कने से पहले ही निश्चित रूप से शांत हो जाएँगे।

🔶जिस स्त्री का पति हर समय बिना बात के ही गुस्सा करता रहता है तो वह स्त्री शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार, सोमवार, गुरुवार या शुक्रवार किसी भी दिन एक नए सफेद कपड़े में एक डली गुड़, चांदी एवं तांबे के दो सिक्के, एक मुट्ठी नमक व गेहूं को बांधकर अपने शयनकक्ष में कहीं ऐसी जगह छिपा कर रख दें जहाँ पति को पता न चले । इसके प्रभाव से भी पति का गुस्सा धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

🔶समान्यता गुस्सा सामने वाले से ज्यादा उम्मीदें पालने से आता है । इसलिए कभी भी सामने वाले से बहुत ज्यादा उम्मीदें ना पालें जिससे आपकी बात ना मानने पर भी आपका दिल बिलकुल ना दुखे।
राधे राधे।।

13/03/2019

मानसिक रोग डिप्रेशन और, भूल जाने का रोग (अल्‍जाइमर) आदि धीरे-धीरे आने वाला विशेषकर बुडापे में हो जाने वाली तकलीफ हें| यह मस्तिष्‍क के स्‍मरण-शक्ति नियंत्रित करने वाले भाग से प्रारम्भ होकर मस्तिष्‍क के दूसरे भागों में फैल जाता है|
इससे बुद्धि, भावों और व्‍यवहार की क्षमता पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

इससे बचने और मुक्ति का एक सूत्र है--

"व्यस्त रहो मस्त रहो"

1-इस रोग से बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है, स्‍वयं को मानसिक रूप से व्‍यस्‍त रखना।
2-नृत्‍य, योग और ध्‍यान लगाने जैसे क्रियाकलापों में भाग लेंना।
3- प्रात सैर पर जाकर हमउम्र लोगों से समूह चर्चा और उनके साथ समय विताना||
4- बच्चों के साथ खेलना, उनको कहानी आदि सुनाना, एकांत से बचना|
5- सामूहिक कार्यक्रमो, जैसे कथा भगवत, सत्संग, धार्मिक स्थानों में सामूहिक भजन कीर्तन, उपदेश देना और लेना|
6- किताबें पढ़ना, बोर्ड गेम्‍स खेलना |
7- समवयस्क के साथ अपने जीवन के श्रेष्‍ठ अनुभवों का आदान प्रदान|

इसके साथ ही संतुलित पोषक आहार ले और अल्‍कोहल, और धूम्रपान, से बचें।
से‍हत के लिए खनिज एवं विटामिन की जरुरी खुराक के बारे में डॉक्‍टर से परामर्श करें। कुछ मामलों में आपको दवाइयां भी दी जा सकती हैं।
आयूर्वेदिक अश्वगंधारिष्ट, असगंध चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, च्यवनप्राश, आदि का सेवन सहायक होता है|
राधे राधे।।

मित्रो! नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन हैएक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नज...
12/03/2019

मित्रो! नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है
एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..
मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।
गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।
नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है
नाभी में देशी गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।
1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द देशी गाय का घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।
2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।
3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।
4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।
नाभी में तेल डालने का कारण
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।
जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।
अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये।
करने से होता है , केवल पढ़ने से नहीं।

12/03/2019

पीरियड्स के दौरान ये 5 गलतियां लड़कियों को कमजोर कर सकती है।

लड़कियों में 12-13 साल की उम्र से मासिक धर्म यानि पीरियड्स का आना प्राकृतिक प्रक्रिया है, यह हर महीने एक नियमित समय पर आते हैं, पीरियड्स के दौरान लड़कियों को कई तरह की परेशनियों से भी गुजरना पड़ता है, जैसे पेट दर्द होना, कमर दर्द होना या कमजोरी महसूस होना, इस दौरान कुछ ऐसी गलतियाँ भी हैं जो अक्सर लड़कियां कर बैठती हैं, आज हम आपको इन्ही गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1- नमक का सेवन

इस दौरान लड़कियों को नमक का सेवन कम से कम करना चाहिए, मसि धर्म के दौरान अधिक नमक का सेवन करने से पेट फूलने लगता है, जिससे दर्द अधिक होने लगता है।

2- लम्बे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल

कई बार लड़कियां लम्बे समय तक एक ही पैड का इस्तेमाल करती हैं, जबकि हर लड़की को 3 से 4 घंटे में पैड बदलते रहना चाहिए, ऐसा न करने से इन्फेक्शन हो सकता है।

3- चाय और कॉफी का सेवन

इस चाय या कॉफी का अधिक सेवन करने से पेट और कमर का दर्द बढ़ जाता है, इसलिए इनका सेवन कम से कम करें।

4- भरपूर नींद न लेना

पीरियड्स के दौरान लड़कियों को भरपूर नींद लेनी चाहिए, भरपूर नींद न लेने से पीरियड्स का समय बढ़ सकता है।

5- खानपान पर ध्यान न देना

इस दौरान अधिकतर लड़कियां खानपान पर ध्यान नही देती हैं, जिससे कमजोरी आने लगती है, और खून की कमी भी हो सकती है, इसलिए इस दौरान संतुलित आहार जरुर लेना चाहिए।

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