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फरवरी में किसान करें इन लता वर्गीय सव्जियों की बुवाई J G PATEL DETROJ DNP ORGANIC AND CONSULTANCY MO.9714712308. किसान फ...
04/02/2023

फरवरी में किसान करें इन लता वर्गीय सव्जियों की बुवाई
J G PATEL DETROJ
DNP ORGANIC AND CONSULTANCY
MO.9714712308.
किसान फरवरी में कौन-कौन सी लता वर्गीय सव्जियों की बुवाई कर सकते हैं. बाजार में आने वाले मौसम और समय को देखते हुए ही किसानों को बुवाई करनी चाहिए जिससे बाज़ार में उसकी मांग के चलते अच्छी कीमत मिल सके. आइए आपको बताते हैं कि आप किन फसलों की बुवाई अगले महीने कर सकते हैं.

चि‍कनी तोरई

इसकी खेती देश के लगभग सभी राज्यों में की जाती है. चिकनी तोरई के सूखे बीजों से तेल भी निकाला जाता है. आपको बता दें कि फल में अधिक मात्रा में पानी होने के कारण इसकी तासीर ठंडी होती है. तोरई की खेती के लिए गर्म तथा आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है और साथ ही जल निकास वाली जीवांशयुक्त सभी प्रकार की मिटटी में इसकी बुवाई की जा सकती है. इतना ही नहीं, अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट या दोमट मिटटी अधिक उपयुक्त मानी गयी है.

उन्नत किस्में- पूसा स्‍नेध, काशी दिव्या, स्वर्ण प्रभा, कल्याणपुर हरी चिकनी, राजेन्द्र तोरई 1, पंत चिकनी तोरई 1 इसकी किस्मों में शामिल हैं.

करेला

गर्मियों में तैयार होने वाली इसकी फसल बहुउपयोगी है. करेला कई बिमारियों के लिए लाभदायक है, इसलिए इसकी मांग भी बाजार में ज़्यादा रहती है. किसान इससे अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं. करेले की फसल को पूरे भारत में कई प्रकार की मिटटी में उगाया जाता है. वैसे इसकी अच्छी वृद्धि और उत्पादन के लिए अच्छे जल निकास युक्त जीवांश वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है.

उन्नत किस्में- किसान फरवरी में करेले की पूसा हाइब्रि‍ड 1,2 की बुआई कर सकते हैं. इसके साथ ही पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, कल्याणपुर, प्रिया को- 1, एस डी यू- 1, कोइम्बटूर लांग, कल्यानपुर सोना, बारहमासी करेला, पंजाब करेला- 1, पंजाब- 14, सोलन हरा, सोलन और बारहमासी भी इनमें शामिल हैं.

लौकी

लौकी में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और खनिज लवण के अलावा पर्याप्त मात्रा में विटामिन पाए जाते हैं. इसकी खेती पहाड़ी इलाकों से लेकर दक्षिण भारत के राज्यों तक की जाती है. इसके सेवन से गर्मी दूर होती है और यह पेट सम्बन्धी रोगों को भी दूर भगाती है. इसकी खेती के लिए गर्म और आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है. सीधे खेत में बुवाई करने के लिए बुवाई से पहले बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोकर रखें. इससे बीजों की अंकुरण प्रक्रिया गतिशील हो जाती है. इसके बाद बीजों को खेत में बोया जा सकता है.

उन्नत किस्में- लौकी की किस्मों में पूसा संतुष्‍टि‍, पूसा संदेश (गोल फल) , पूसा समृध्‍दि‍ एवं पूसा हाईबि‍ड 3, नरेंद्र रश्मिी, नरेंद्र शिशिर, नरेंद्र धारीदार, काशी गंगा और काशी बहार शामिल हैं.

खीरा

खीरे की तासीर ठंडी होती है और यही वजह है कि लोग इसका उपयोग गर्मियों में ज़्यादा करते हैं जिससे अपने आप को गर्मी से बचा सकें. इसका सेवन पानी की कमी को भी दूर करता है. देश के कई क्षेत्रों में इसकी खेती प्राथमिकता पर की जाती है. इसकी खेती के लिए सर्वाधिक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए. साथ ही अच्छे विकास के लिए तथा फल-फूल के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान अच्छा माना जाता है. इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट भूमि, जल निकास के साथ बेहतर मानी जाती है.

उन्नत किस्में- जापानी लौंग ग्रीन, चयन, स्ट्रेट- 8 और पोइनसेट, स्वर्ण पूर्णिमा, पूसा उदय, पूना खीरा, पंजाब सलेक्शन, पूसा संयोग, पूसा बरखा, खीरा 90, कल्यानपुर हरा खीरा, कल्यानपुर मध्यम और खीरा 75, पीसीयूएच- 1, स्वर्ण पूर्णा और स्वर्ण शीतल शामिल हैं.

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Anar ki Kheti ...J G PATEL DETROJ. Mo.9714712308.
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चने और मटर फसल चट कर रही इल्ली DNP ORGANIC AND CONSULTANCY J G PATEL DETROJ AHMEDABAD. MO.9714712308.चने और मटर फसल चट क...
17/01/2023

चने और मटर फसल चट कर रही इल्ली
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J G PATEL DETROJ AHMEDABAD.
MO.9714712308.

चने और मटर फसल चट कर रही इल्ली
मौसम में नमी की मार चना और मटर पर पड़ रही है। 11 डिग्री सेल्सियस तापमान और 70 फीसदी तक नमी ने दोनों फसलों को बीमार कर दिया है। चना पर इल्ली तो मटर पर फलीछेदक और झुलसा का असर दिखने लगा है। फसलों पर फलियां लगती देख किसान कीटनाशक के प्रयोग को लेकर दुविधा में हैं।

किसानों को खेत में रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखने पर पर्णकुंचित पौधे को उखाड़कर गड्डे में डालकर मिट्टी से ढंक दे।

फसल के आस-पास या जाल के रूप में गेंदे को रोपे।
परभक्षी पक्षियो को आकर्षित करने के लिए टी आकार के बास के डंडे 15 नग प्रति एकड़ गाडे़।
फरवरी माह में चने में इल्ली का प्रकोप बढ़ गया है। गहरे भूरे रंग का यह कीट मुलायम और हरे पौधे को खाता है। यह कीट रात में पौधे पर अटैक करता है। सुबह तक तने को खाकर गिरा देता है। फसलों पर इल्ली की रोकथाम के उपाय के लिए खेतों में पानी लगा दें। इल्लियां तैरकर जमीन के ऊपर आ जातीं हैं। जिन्हें पक्षी आसानी से खा लेते हैं। इसके साथ ही दूसरा उपाय भी किसान अपना सकते हैं। शाम के समय खेत में जगह-जगह घास के ढेर लगा दें। रात में बहुत सी इल्लियां घास के नीचे छिप जाती है। जिन्हें सुबह इकट्ठा कर फेंका जा सकता है। किसान फसल में लाईवा एग्रो का शमशीर 1 मिली प्रति लीटर छिड़काव करें आवश्यकतानुसार 10 से 15 दिन बाद दोहरायें।

कीट नियंत्रण के लिए क्विकफास का 1.5 प्रतिशत पाउडर का छिड़काव करें।

मटर को फलीछेदक से बचाने के उपाय
इस मौसम में सफेदा और फलीछेदक फलियों में छेद कर अंदर घुसकर दानों को खाता है। यह कीट फरवरी माह में पौध पर हमलावर हो जाता है। इस कीट से प्रभावित फली को पौधे से अलग कर दें ।मटर की फसल को चूर्णी फफूंद नुकसान पहुंचाता है. इससे बचाव के लिए सल्फर 80 डब्ल्यूएपी 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव कर देना चाहिए या लाईवा एग्रो का फंजी क्योर1 ग्रामप्रति लीटर . यदि फली छेदक का हमला दिख रहा है तो लाईवा एग्रो का प्रो क्लेम का 0.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर या लाईवा एग्रो का शमशीर 1 मिली प्रति लीटर छिड़काव कर दें. विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार फली छेदक या चूर्णी फफूंद जैसे कीट तेजी से हमला करते हैं तो इसकी उत्पादक 60 से 70 प्रतिशत तक कम हो जाती है. किसान को बड़ा नुकसान होता है.

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