15/02/2023
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अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातक सामान्यतः सुन्दर ,चतुर, सौभाग्यशाली एवं स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं.परम्परा से विपरीत अपनी आधुनिक सोच के लिए मित्रों में प्रसिद्ध होते हैं. ये सभी से बहुत प्रेम करने वाले होते हैं परन्तु ये अपने ऊपर किसी का भी दबाव नहीं सहते हैं. इनको स्वतंत्र कार्य करने एवं निर्णय लेने की आदत होती है इसलिए किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप इनको पसंद नहीं होता है. इनकी उन्नति भी स्वतंत्र कार्य करने और स्वतंत्र निर्णय लेने के कारण ही होती है .
यह स्वभाव से गुणी, धैर्यवान एवं प्रखर बुद्धि के स्वामी होते हैं. धन ऐश्वर्य युक्त जीवन में इनको किसी भी प्रकार का अभाव नहीं झेलना पड़ता है. अपने कार्य के प्रति रुझान और लगन के कारण यह लोग कम उम्र में ही सफलता प्राप्त करते हैं एवं आपका यश और कीर्ति समाज में चारों और फैलता है. आप अन्तेर्मुखी एवं धैर्यवान होते हैं और जल्द ही किसी की बातों का विश्वास नहीं करते. आपको अपने मनोभाव पर नियंत्रण रखने में कभी-कभी कठिनाई महसूस होती है परन्तु यह आवश्यक भी है. क्रोध आने पर आप किसी की भी नहीं सुनते. आप आत्म नियंत्रण खो बैठते हैं और क्रोध में कई बार अपनी हानि करा बैठते हैं. आपको क्रोध जितनी शीघ्रता से आता है उतनी ही तीव्रता से उतर भी जाता है.
अश्वनी नक्षत्र में जन्मे जातक अक्सर सेक्स के मामलों में उतावले होते हैं. किसी भी स्त्री से मिलने के बाद आप उसके प्रति विशेष रुझान एवं लगाव महसूस करते हैं यही आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है. आप अपने कार्य सज्जनता की उपेक्षा लड़ाई झगड़े से करवाने में सदा सक्षम रहते हैं.
अश्वनी नक्षत्र के जातक साज सज्जा में अधिक विश्वास रखते हैं इसलिए सदा ही आकर्षक , महंगी और आरामदायक वस्तुओं में रूचि रखते है. अपने जीवन के 30 वर्ष तक आप कई प्रकार के उतार चढ़ाव झेलते हैं. उसके उपरान्त ही आपका आगे बढ़ने का रास्ता साफ़ और सुगम होता है.
आप अपने परिवार से बहुत जुड़े हुए रहते हैं परन्तु कुछ परिजन आपके जिद्दीपन के कारण आपको पसंद नहीं करते . पिता की उपेक्षा आपको माता से अधिक सहयोग और प्रेम प्राप्त होता है . 26 से 30 वर्ष की आयु में विवाह संभव है. संतान में पुत्र संतति की संभावना अधिक होगी.
इस नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ सुन्दर, धन-धान्य युक्ता, श्रृंगार में रूचि रखने वाली होती हैं. अश्वनी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं मीठा बोलती हैं और बहुत अधिक सहनशील भी होती है. माता पिता की लाडली एवं आज्ञाकारी पुत्री होने के साथ-साथ ईश्वर में भी पूरी आस्था रखती हैं. सदा बड़ों का आदर एवं गुरु का सम्मान करने वाली अश्वनी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ मनोहर छवि एवं बुद्धिशाली होती है.
प्रथम चरण -
इस चरण का स्वामी मंगल हैं. इस चरण में जन्मे जातकों को दूसरों की वस्तुएं उठाने की आदत होती है. जन्म नक्षत्र स्वामी केतु लग्नेश मंगल का मित्र होने के कारण जातक की मंगल एवं केतु की दशा शुभ फल देंगी.मंगल गृह भी शुभ फल देगा.
द्वितीय चरण -
इस चरण का स्वामी शुक्र हैं. अश्वनी के द्वितीय चरण में जन्म होने के कारण जातक कड़ी मेहनत से कतरायेगा और छोटे छोटे अल्प अवधी वाले कार्य करने में रूचि रखेगा. जन्म नक्षत्र स्वामी केतु लग्नेश मंगल का मित्र है और नक्षत्र चरण स्वामी शुक्र भी केतु से मित्रतापूर्वक व्यवहार रखता है इसलिए जातक की मंगल, शुक्र एवं केतु की दशा शुभ फल देंगी.
तृतीय चरण -
इस चरण का स्वामी बुध हैं. शास्त्रों के अनुसार अश्वनी नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक सुन्दर , धनी एवं ऐश्वर्यशाली होते हैं. मंगल और केतु की दशा अति उत्तम फल देगी परन्तु नक्षत्र चरण स्वामी बुध केतु से शत्रु भाव रखता है इस कारण बुध की दशा में जातक अशांत एवं विचलित रहेगा.
चतुर्थ चरण -
इस चरण का स्वामी चन्द्रमा हैं. शास्त्रों के अनुसार अश्वनी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक भोगी एवं दीर्घायु होते है. नक्षत्र स्वामी केतु, लग्नेश मंगल का मित्र है. नक्षत्र चरण स्वामी चन्द्रमा , केतु से शत्रु भाव रखता है अतः जातक को मंगल एवं केतु की दशा उत्तम फल देंगी परन्तु चन्द्रमा की दशा में जातक अशांत एवं उद्विग्न रहेगा
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