17/05/2026
भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक परिस्थितियों के कारण अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसा कोई भी देश नहीं है जो इन प्रभावों से पूर्णतः अछूता रह सके। ऐसे समय में हम सभी नागरिकों का यह दायित्व बन जाता है कि अपने स्तर पर देश की अर्थव्यवस्था और भविष्य को सुरक्षित रखने में योगदान दें। भारत की अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा सीधे रूप से जल पर निर्भर है। चाहे कृषि क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवाएँ हों, स्वच्छता व्यवस्था हो, ऊर्जा उत्पादन हो या उद्योग — हर क्षेत्र की नींव जल पर टिकी हुई है। यदि देश में जल संकट गहराता है, तो इसका सीधा प्रभाव खाद्य उत्पादन, रोजगार, उद्योगों की उत्पादकता और समग्र आर्थिक विकास पर पड़ेगा।
यह स्थिति इसलिए भी अधिक गंभीर है क्योंकि विश्व की लगभग 20% आबादी भारत में निवास करती है, जबकि भारत के पास विश्व के कुल मीठे जल संसाधनों का केवल लगभग 4% हिस्सा उपलब्ध है। बढ़ती जनसंख्या, गिरता भूजल स्तर, प्रदूषण और अनियंत्रित जल दोहन भविष्य के लिए एक बड़े संकट का संकेत दे रहे हैं। इसलिए जल संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है। आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक नागरिक जल बचाने, वर्षा जल संचयन अपनाने, तालाबों और नदियों के संरक्षण तथा जल के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में अपना योगदान दे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध भारत का निर्माण किया जा सके।