Shri Maa Bramhani Vaidic Vaastu Consultancy

Shri Maa Bramhani Vaidic Vaastu Consultancy Likesh Kumar Taunk (Vaidic Vaastu Consultant)
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कर्म प्रधान इस धरा में हर जीव अपने वजूद हेतु अंत समय तक प्रयत्नशील रहता है ; प्राणी , मानव , वनस्पती हर कोई एक दुसरे से आकार , रंग , रहन-सहन तथा जीवित रहने की अपनी आदतों में सर्वथा भिन्न है , किन्तु यह भी सनातन सत्य है कि किसी भी जीव का जीवन कभी भी उसके स्वयं क

े ऊपर ही निर्भर नहीं होता वरन प्रकृति एवम् ब्रम्हांड की हर एक वस्तु या घटना उस जीव के ऊपर प्रभावकारी होती है |
स्वयं विश्व प्रसीद्ध वैज्ञानीक अलबर्ट आईंस्टीन ने सिद्ध किया है कि कोई भी निर्जीव वस्तु या पाषाण खंड या महज लकड़ी का टुकडा भी उर्जा का एक स्रोत है , तो फिर जीवित की बात ही क्या ? उनहोंने उर्जा का समीकरण भी विश्व को दिया :-
{ E उर्जा = m जीवित या निर्जीव का भार * c2 प्रकाशीक वेग का दूना } |
तात्पर्य स्पष्ट है कि हर एक उर्जा पिंड दुसरे उर्जा पिंड पर अपना कोई न कोई प्रभाव अवश्य डालता है ; चाहे वह सजीव हो अथवा निर्जीव |
आप इतना तो अब समझ ही सकते है कि पेड़ -पौधे का मानव पर क्या प्रभाव हो सकता है या किसी निर्जीव पिंड पर मानव का या जलीय जीवों पर मानव का या मानव के ऊपर या बाकी थलीय जीवों के ऊपर , जी हाँ हर चीज़ का हर किसी पर ....|
384403 km (238857 miles) सुदूर स्थित चाँद का धरती पर प्रभाव है तभी तो ज्वार-भाटा होते हैं; डाक्टर्स-साईकोलोजीस्ट मानते हैं कि इस घटना का मानव मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव है |

आईये आपकी बात करें कि किसी विशेष महीने में , विशेष दिन किसी विशेष घड़ी एवंम परिस्थिती में आपका जन्म अथवा जीवन से सम्बंधित कोई घटना घटती है जब उस वक़्त कोई ब्रम्हांडीय पिंड {तारे ,सूर्य,नक्षत्र,ग्रह आदि} अपने अन्दर की उर्जाओं के साथ , उस समय आपके या आपकी माता के ऊपर अपना प्रभाव डाल रहे थे जब आपका जन्म हो रहा था , वह जगह पुर्ण प्रभावशील थी अपने पुरे संयोजित किये उर्जाओं के सजीव या निर्जीव पिंडों के साथ जिसे हम वास्तु कहते है |

सीधा मतलब है कि आपके लिए जन्म परिस्थिती का निर्माण कर्ता उर्जाओं के संयोग का आपके पुर्ण जीवन काल में प्रभाव पड़ता ही रहेगा .....

कोई विशेष रंग आपके जीवन को अतिशय उर्जावान / गतिमान बना सकता है...

कोई विशेष वनस्पति या वृक्ष या कोई जानवर भी आपके जीवन को सुखमय बना सकता है...

आप जहां निवासरत है या आपका कार्यक्षेत्र यानि आपका वास्तु आपको जीवन की ऊंचाईयों पर ले जा कर खड़ा कर सकता है...

या धरती पर पाए जाने वाले ८४-रत्नों में से कोई खास रत्न जीवन को सम्पूर्ण बनने में मददगार हो सकता है...

ज़रूरत है वास्तु एवं रत्नों की प्रकृती को वैज्ञानिकता के साथ देखने की....|

आपका जीवन सुखमय हो.....

contact:- [email protected]
mob:- 9300602543
||इति शुभम||

20/07/2024

बात एक राज़ की..... आपके बारे में...

1.- वो जो केवल आप जानते हैं - अपने बारे में - लोग नहीं - आपकी ईच्छा, आंतरिक चाहत, नफरत, वैचारिक उथल-पुथल, भक्ति , विषय-पिपासा... सर्वथा गुप्त
2.- वो जो केवल लोग जानते हैं - आप नहीं - जी हाँ आप ही के बारे में - ईर्ष्या, द्वेष, शारीरिक या साँसों की सुगँध या दुर्गंध, यहाँ-वहाँ खुजाने की आदत , बिना दूरी मेन्टेन किये थूक उड़ाते बात करने की आदत , तमाम वो हरकतें जो आप अनजाने में करते हैं - लोग जानते हैं - आप को तो ईल्म ही नहीं... सर्वथा उजागर
3.- वो जो आप भी जानते हैं और लोग भी - आपके बारे में - आपकी डिग्री, सामाजिक प्रतिष्ठा, घर-जमीन , व्यापार-नौकरी, परिवार , वाहन , रहन-सहन , खान-पान और भी कई बातें... सर्वथा उजागर
4.- वो जो न तो आप जानते हैं और न ही लोग - आपके बारे में - अब चकरा गए - ये बातें हैं आपकी उच्चाकाँक्षा-महत्त्वाकांक्षा , नेतृत्त्व क्षमता , वॉइस का जादू, हुनर , दिमागी क्षमता, बौद्धिक तीव्रता, आगे बढ़ने की असीम ऊर्जा और चाहत , धैर्य , आध्यात्मिकता, छुपी कर्म कौशलता , अपने को प्रदर्शित कर पाने की ताकत , अपने ईष्ट को मानने की ताकत ,कुंडली की ताकत आपके वास्तु की छूपी हुई असीम ऊर्जा ...... ऐसी कई बातें , जो न आप जानते हैं अपके बारे में न ही लोग ... सर्वथा गुप्त....... इसीलिए एक गुरु जरूरी है , इस गुरुपूनम में किसी एक के समक्ष सरेंडर हो जाओ अपना एटीट्यूड छोड़कर...
एक गुरु चुन लो , जो आपको इस जीवन में आपकी छुपी ऊर्जाओं से मिला सके , आपके छुपे " मैं " को आप से मिला सके ...
श्री कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्
वास्तुविद् लिकेश टाँक

09/07/2024

विवाह हेतु मांगलिक..!! क्या सचमुच..??

मंगल दोष क्या वास्तव में आपकी संतान को है; या किसी अर्द्ध जानकर के कहने मात्र से आप अपने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं और अच्छे-2 रिश्ते खोकर उनकी उम्र बढ़ा रहे हैं ...?

"कुंडली के 1-2-4-7-8-12 भाव में मंगल देखकर अर्द्ध जानकार लोग कुंडली को मांगलिक का तमगा दे देते हैं , यदि 6-7 कारणों से मंगल दोष है भी तो 60-70 से भी ज्यादा कारणों से स्वयमेव मंगल दोष का परिहार भी नैसर्गिक रूप से बिना किसी पूजा या कर्मकांड के हो चुका रहता है "...

100 कुंडलीयाँ देखने पाश्चात् 3-4 कुंडलियाँ मांगलिक मिलती हैं मुझे, यानी 95% लोगों का मंगल दोष तो विशेषताओं में बदलता पाया ; और वैसे भी आपकी गलती से अब संतान 30वर्ष पार तो काहेका मंगल दोष ....

बायोडाटा में मांगलिक लिखने से पहले किन्हीं सच्चे जानकार विद्वान को कुंडलियाँ परखवा लो मित्रों ...
किसी के कहने मात्र से रिश्तों की ऐसी-तैसी न हो ... रिश्ते जोड़ो, तोड़-मरोड़ न करो...

वास्तु में दक्षिणी और अग्नि भाग टनाटन रखें ,मंगल वैसे भी फिर आपके सेनापति होकर कवच बन जाते हैं और फिर घर में
💐मंगल...मंगल...मंगल ...मंगल...हो💐
जय श्री कृष्ण

06/06/2024
14/12/2023

अजीब प्रथा बनाये बैठे हैं लोग , अब सब कार्य 14 जनवरी 24 के बाद करेंगे , खर मास लग जायेगा , ऐसे में कोई अच्छा कार्य नहीं करना चाहिए, आदि2.....
बैंक खाता खुलवाया जा सकता है
निवेश किया जा सकता है , इंश्योरेंस ले सकते हैं ,
ऋण का लेना और देना दोनों हो सकता है
और भी बहुत कुछ , मुहूर्त मुझसे ले लो , बस आगे बढ़ते रहो , रुको नहीं ।

दुःखानां तु विनाशाय, वर्धनाय सुखस्य च ।
सर्वभूतहितार्थाय, चलिष्यामो निरन्तरम् ॥
चरामेति चरामेति

05/11/2022

Tip of the day
गुरुवार और शनिवार को बालों पर डाई नहीं

27/10/2022

आज मांगलिक कुंडली के विषय में श्री गुर्जर क्षत्रिय समाज दुर्ग में चर्चा का अंश ....
आभार श्री समाज प्रमुख नारायण भाई ...
नववर्ष की शुभेच्छाओं के साथ
💐💐💐💐

Today's Vaastu Tip...ऑनलाइन कंपनियों से डरना कैसा, जब पॉपुलेशन आधी थी तब भी दुकान चलती थी , अब सवा अरब की आबादी है , और ...
18/10/2022

Today's Vaastu Tip...
ऑनलाइन कंपनियों से डरना कैसा, जब पॉपुलेशन आधी थी तब भी दुकान चलती थी , अब सवा अरब की आबादी है , और ऑनलाइन कम्पनियाँ आ जावे क्या डरना....

जरूरत है अपनी रूढ़ी बदलने की , व्यापार शर्तों पर नहीं फ्लेक्सिबिलिटी से होता है ,आप सुविधाएँ ऑनलाइन कम्पनियों से ज्यादा दो , ....
ग्राहकों के जूते-चप्पल न उतरवाओ,वो खरीदी करने आया है कथा में या अस्पताल में नहीं , पेमेंट कैश नहीं करना चाहता तो कार्ड आदि एक्सेप्ट करो(2% की लाचारी न बताओ), समयानुकूल जो भी बदलाव आवश्यक हैं करें ...

मजे की बात यह कि इन ऑनलाईन कम्पनियों को माल सप्लाई कौन करता है, तब कोई नहीं कहता कि इन्हें माल नहीं देंगे l

प्रतिष्ठान में एटीट्यूड के साथ नहीं सर्विस फर्स्ट एटीट्यूड के साथ बैठो , हर दुकान चल पड़ेगी....

व्यापार में लक्ष्मी का रूप ग्राहक का है , वह आपकी शर्तों के आधीन कदापि नहीं आएगी , उसका स्वागत करना जो सीख गया वो कोवीड में भी मजे में था .... आज भी है और रहेगा ..

विश्वास रखो ऑनलाइन कंपनियां समस्त पूर्ति कभी नहीं कर सकती , पर सुधरो अन्यथा सिधरते समय न लगेगा.....

शुभ हो.....

प्यारे मित्रों,कई लोगों के स्वभाव में एक बात जन्म से लिखी होती है , वह है 'चलेगा'...पर हर स्थान पर यह स्वभाव बिल्कुल उचि...
12/09/2021

प्यारे मित्रों,
कई लोगों के स्वभाव में एक बात जन्म से लिखी होती है , वह है 'चलेगा'...
पर हर स्थान पर यह स्वभाव बिल्कुल उचित नहीं... खासकर जब बात अन्तः वस्त्रों की आवे तो चलेगा शब्द भूल जावें...

कई जगह इन वस्त्रों को गाड़ी पोंछने के कपड़ों से ज्यादा मान्यता नहीं मिलती , या मानकर चलें जैसे सचमुच यह फर्श पोंछने के कपड़े हों ....

दूसरे कपड़ों के धुल जाने के बाद उसके बचे हुवे साबुन पानी से धोया जाता है...
या बस केवल पानी से ही छप-छप किया और सुखाया जाता है...
मैले कुचैले मोजों के साथ इन्हें धोया जाता है , ....

मोजे ,एक इतने घातक होते हैं कि....कभी अगली पोस्ट पर चर्चा करेंगे, आज इतना ही समझ लो कि बाहर से घर आने पर मोजे उतारकर ही अपने घर में प्रवेश करें...सब खतरनाक ऊर्जाओं का खेल है...

जितने चमकते दमकते ऊपरी वस्त्र होते हैं वैसे ही चकाचक अन्तः परिधान हों, बल्कि उससे ज्यादा उज्ज्वल हों , आखिर शरीर का प्रथम आवरण ये ही होते हैं , आगर इसका खयाल रखा जावे तो कई नकारात्मक बातें दिमाग पर असर ही नहीं करेंगी....
मित्रों, सौभाग्य को भी स्वच्छता की आवश्यकता होती है, अंदरूनी स्वच्छता बाहर आत्मविश्वास लाती ही है , गंदे रहने वाले अक्सर बीमारी, हीनभावना, या बाहरी हवा के शिकार होते हैं ,

गीता में श्री हरि ने भी भक्ति योग में स्वयं कहा है कि अंदर और बाहर से स्वच्छ रहने वाले मेरे प्रिय हैं (अध्याय12/श्लोक16)...

और आजकल लोग दिन2 भर नहाते नहीं, छोड़िए साहब 4-5दिनों में नहाने वालों से भी पाला पड़ता है...
और ये सोचते हैं कि वे कामयाब क्यों होते नहीं,क्यों भँवर जाल में फँसे रहते हैं हमेशा....

जो स्वयं स्वच्छ न हों उनके परिधान की क्या बात करें...

स्वछता ,निर्मलता, सौभाग्य और लक्ष्मी जी के ही रूप हैं, सदा आचरण में लायें....
शुभ हो
श्रीकृष्णार्पणम् अस्तु....

स्वामी रामकृष्ण परमहँस, अपने आखिरी के दिनों में रसोई में रोज अपनी पत्नी शारदा देवी से पूछते थे, आज खाने में क्या बनाया ह...
12/06/2021

स्वामी रामकृष्ण परमहँस, अपने आखिरी के दिनों में रसोई में रोज अपनी पत्नी शारदा देवी से पूछते थे, आज खाने में क्या बनाया है...??
उनसे कोई मिलने आये या सत्संग हो रहा हो , तो अचानक बीच मे उठ जाते और पहुँच जाते सीधे रसोई में और आज खाने में क्या बना है ,??..पूछते अपनी पत्नी से...
शरदा देवी को बहुत बुरा लगता था कि कोई मिलने आये तो या सतसंग से परमहँस जी बीच में अचानक उठ जाते । एक दिन शारदा देवी ने पूछ लिया कि आप ऐसा क्यों करते हो यह ठीक नहीं लगता तो परमहंस जी ने कहा कि ...
मन को कहीं लगाना जरूरी है, मुझे किसी बात कोई चीज में कोई लगाव नहीं है और जब किसी को दुनिया की किसी चीज में कोई लगाव न हो तो निर्वाण समक्ष समझना चाहिए, किंतु अभी मुझे अपने आप को कुछ दिन और रोकना है कुछ और कार्य करना चाहता हुँ ,पर कहीं लगाव नहीं हो पा रहा अतः अपना ध्यान तुम्हारी रसोई और खाने में लगाता हुँ । शारदा देवी को बात समझ में आ चुकी थी । इस तरह स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी ने जीवन को लगभग 7वर्ष रोक रखा था , खाने में लगाव रखकर ।
मित्रों , लॉक डाउन है कुछ कार्य विशेष नहीं हो पा रहा हो , मन यहाँ वहाँ जावे या नकारात्मक विचार आवे तो मन को अपनी किसी पसंद की वस्तु या जगह में बांधने की कोशिश करना अच्छा , घर में वो ध्यान खाने या रसोई की तरफ हो सकता है, या और कोई स्वयं की क्रिएटिविटी में जा सकता है , और उसको सबके साथ शेयर करने का आनन्द भी रोमांच भरा हो सकता है ....

स्वामी विवेकानंद जी भी इस बात से दूर नहीं थे , बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वामी विवेकानंद जी को भी खाने खिलाने का भरपूर शौक था ,
क्या आप जानते थे कि उनकी पसंद की डिश क्या थी...
बिरयानी और पुलाव ...
स्वयं बनाकर लोगों को खिलाते और आनंद लेते थे ।

तो...
जिस बात की चिंता हो उसकी सत्ता आपके हाथ हो, यही प्रकृति का नियम है, चिंता-रोग-शोक ,तो प्रकृति कहे लो हाज़िर आपके लिए ...
खुशी -स्वास्थ्य -प्रसन्नता सोची जावे तो पुनः प्रकृति कहे लो हाजिर आपके लिए ....
मन को जहाज के लंगर की तरह तूफान में कहीं ठीक जगह पर लगाएं ताकि शरीर रूपी जहाज स्थिर शांत खड़ा रहे , और जब स्थिति अनुकूल हो जावे तो , निकल पड़ें फिर एक नए सफर पर ...

प्रकृति को स्पष्ट आदेशित करें कि...
*मुझे चाहिये सच्चे रिश्ते-सात्विक भोजन-मेहनत से बनाया भरपूर धन*
बाकी सब ढन ढना ढन ढन....

तो कल आपकी रसोई में क्या बन रहा है या आप क्या बना रहे हैं😋😋😋

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