10/10/2021
कभी बहन की मौत ने डॉक्टर बनने के लिए किया था प्रेरित, आज लाखों लोगों को आँखों की रोशनी देकर नेत्रहीनों के भगवान कहे जाने वाले 'डॉ. संदुक रुइत' पद्मश्री सम्मान से हुए सम्मानित
हमारे बीच आज भी ऐसे कई लोग मौजूद हैं जिन्होंने ना केवल दूसरों के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया है बल्कि आज वो कई लोगों को समाज सेवा करने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं नेपाल के रहने वाले डॉ. संदुक रुइत (Dr. Sanduk Ruit)। जिन्हें नेपाल के लोग आँखों का भगवान मानते हैं। जाने-माने नेत्र चिकित्सक डॉक्टर संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) नई तकनीक के साथ बहुत ही कम कीमत में मोतियाबिंद की सर्जरी करते हैं। उनके इस नेक काम का फायदा देश के लाखों लोगों को हुआ है और उनकी आंखों की रोशनी फिर से लौट आई है। डॉक्टर संदूक रुइत के ज्यादातर मरीज ऐसे लोग होते हैं, जिनके आँखों की प्रॉब्लम शुरूआती दौर में होती है। लेकिन पैसों की कमी के कारण वो इलाज नहीं करवा पाते हैं। डॉक्टर संदूक रूइत (Dr. Sanduk Ruit) की मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि विदेशी होने के बाद भी भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से समानित किया है। आइए जानते हैं डॉ. संदूक रूइत के जीवन का प्रेरणादायी सफर।
बहन की मौत से मिली थी डॉक्टर बनने की प्रेरणा
पूर्वी नेपाल के ताप्लेजुंग जिले की पहाड़ियों के बीच ओलांगचुंग गोला नामक गांव के रहने वाले डॉ. संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) का बचपन काफी अभावों में व्यतीत हुआ। संदूक रूइत को अपने स्कूल पैदल चलकर जाने में एक हफ्ते से ज्यादा का वक्त लगता था। स्कूल ही नहीं, आसपास स्वास्थ्य केंद्र नाम की भी कोई सुविधा नहीं थी। उनके माता-पिता अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने संदूक रूइत जी की पढ़ाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं की। उन्होंने श्री संदूक रुइत (Sanduk Ruit) को दार्जिलिंग पढ़ने भेज दिया, क्योंकि दार्जिलिंग ही उनके गांव से सबसे नजदीक था। संदूक रूइत अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। जब वो 17 साल के हुए थे उसी समय क्षय रोग के कारण उनकी बहन की मौत हो गई थी। बहन की मौत से संदूक रुइत टूट गए। लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और डॉक्टर बनने का प्रण लिया।
ऑस्ट्रेलियाई गुरू की एक सलाह से बदल गई जिंदगी
बहन की मृत्यु से आहत होकर संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) ने डॉक्टर बनने की दिशा में आगे कदम बढ़ाया। दार्जिलिंग में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में हो गया। डॉक्टरी में स्नातक पूरा करने के बाद वो दिल्ली आ गये और फिर यहां स्थित एम्स से उन्होंने नेत्र रोग विज्ञान में तीन वर्षीय कोर्स करके विशेषज्ञता हासिल की। 1980 में पच्चीस वर्ष की आयु में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बन गए। नेपाल वापस आने के अगले ही साल उन्हें नेपाल दृष्टिबाधित सर्वेक्षण में काम करने का मौका मिला, जहां उनकी मुलाकात ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर फ्रेड हालोस से हुई। फ्रेड ने उन्हें एक गुरु की तरह करियर से जुड़ी सलाह दी। वो उनसे प्रभावित हुए और उनके साथ ऑस्ट्रेलिया गए, जहां सिडनी के प्रिंस ऑफ वेल्स अस्पताल में चौदह महीनों तक अध्ययन किया।
कई सालों की मेहनत के बाद सस्ती तकनीक की ईजाद
अपने 14 महीने के अध्ययन के समय भी डॉ. संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) का ध्यान अपने देश के लोगों पर ही रहा। उन्होंने वहां पर मोतियाबिंद ऑपरेशन की सबसे उन्नत तकनीक के बारे में जानकारी एकत्र की। यह तकनीक प्रत्यारोपित अंतः क्रियात्मक लेंस पर आधारित थी। लेकिन इस तकनीक की सबसे बड़ी दिक्कत थी कि वह बहुत महंगी थी। वो लोगों को सस्ता इलाज मुहैया कराना चाहते थे इसलिए उन्होंने कई वर्षों तक मेहनत की। आखिरकार उन्हें सफलता मिली। जिसके बाद उन्होंने हजारों रुपयें के खर्च को चंद सौ रुपयों तक सीमित कर दिया। गरीबों की सेवा के लिए उन्होंने काठमांडू में विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त ‘तिलगंगा आंख के अस्पताल’ की स्थापना की है।
ऐसे बन गए नेपाल के लोगों के भगवान
डॉ. संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) अपनी टीम के साथ मिलकर नेपाल के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों की आंखों का उपचार करते हैं। डॉक्टर संदूक दूर-दराज के इलाकों में जाकर लोगों को दवाइयां मुहैया कराते हैं। इलाज के लिए वो जिस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, उसमें मात्र 5 मिनट का समय लगता है। इस वजह से कम समय में वो ज्यादा लोगों का इलाज कर पाते हैं। डॉ. संदूक रुइत कहते हैं कि “उन्हें अलग-अलग रोगियों से ताकत मिलती है, जो देखने में सक्षम नहीं होते और इलाज के महज 12 घंटे बाद जब उनकी आंखों की पट्टी खुलती है, तो दुनिया की खूबसूरती निहार रहे होते हैं। उनके चेहरे पर उस वक्त की मुस्कराहट वास्तव में मेरे लिए एक शक्तिशाली क्षण होता है, बहुत ही शक्तिशाली क्षण! कई लोग ताउम्र इसके लिए तरसते हैं, यह ताकत किस्मत वालों को नसीब होती है। मैं कितना खुशनसीब हूं कि मेरे पास इसकी बहुतायत है।“
लाखों लोगों का इलाज करने पर भारत सरकार ने किया पद्मश्री सम्मान से सम्मानित
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) नई तकनीक के साथ बहुत ही कम कीमत में मोतियाबिंद की सर्जरी करते हैं। उनके इस नेक काम का फायदा देश के हजारों लोगों को हुआ है और उनकी आंखों की रोशनी फिर से लौट रही है। डॉक्टर रुइत अपने देश में नेत्रों के भगवान के तौर पर पहचाने जाते हैं। उनकी सर्जरी से महज तीन दिन में करीब 400 मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लौट आई है. यही कारण हैं कि उनके सेवा भाव को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है।
लाखों मरीजों की आँखों की रोशनी वापस लाने वाले डॉ. संदूक रुइत (Dr. Sanduk Ruit) आज सही मायने में लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर सफलता की नई कहानी (Success Story) लिखी है। यही कारण है कि आज देश-विदेश में उनके कार्यों की हर कोई प्रशंसा करता है। Bada Business डॉ. संदूक रुइत की मेहनत और उनके कार्यों की तहे दिल से सराहना करता है।
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