Pawan Nath

Pawan Nath तंत्र मंत्र साधना

02/10/2025

तो काहे का डर इस जगत में सिद्ध कीजिये

बावन भैरव साधना

और बल, साहस, वीरता, अभय, पराक्रम, अमृत्यु, स्वास्थ्य को अपने साथ ले लिजिये।

भैरव, शिव के अंश है और उनका स्वरूप चार भुजा, खड्ग, नरमुण्ड, खप्पर और त्रिशूल धारण किये हुये गले में शिव के समान मुण्ड माला, रूद्राक्ष माला, सपों की माला, शरीर पर भस्म, व्याघ्रचर्म धारण किये हुये, मस्तक पर सिन्दूर का त्रिपुण्ड, ऐसा ही प्रबल स्वरूप है। जो कि दुष्ट व्यक्तियों को पीड़ा देने वाले, और अपने भक्तों, साधकों के हर प्रकार के संकट दूर कर, उन्हें अपने आश्रय में अभय प्रदान कर, बल, तेज, यश, सौभाग्य प्रदान करने में पूर्ण समर्थ देव हैं, भैरव-शिव समान ऐसे देव हैं, जो कि साधक किसी भी रीति से उनकी पूजा-साधना करे-प्रसन्न होकर अपने भक्त को पूर्णता प्रदान करते हैं, भैरव सभी प्रकार की योगिनियों, भूत-प्रेत, पिशाच के अधिपति है। भैरव के विभिन्न चरित्रों, विभिन्न पूजा विधानों, स्वरूपों के सम्बन्ध में शिवपुराण, लिंग पुराण इत्यादि में विस्तृत रूप से दिया गया है।

उच्चकोटि के तांत्रिक ग्रंथों में बताया गया है, कि चाहे किसी भी देवी या देवता की पूजा हो भैरव की पूजा आवश्यक है। जिस प्रकार से गणपति समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं, ठीक उसी प्रकार से भैरव समस्त प्रकार के शत्रुओं का नाश करने में पूर्ण रूप से सहायक है।

आज का जीवन जरूरत से ज्यादा जटिल और दुर्बोध बन गया है, पग-पग पर कठिनाइयां और बाधाएं आने लगी है, अकारण ही शत्रु पैदा होने लगे है, और उनका प्रयत्न यही रहता है कि येन-केन प्रकारेण लोगों को तकलीफ दी जाय या उन्हें परेशान किया जाय, इससे जीवन में जरूरत से ज्यादा तनाव बना रहता है।

इसीलिये आज के युग में अन्य सभी साधनाओं की अपेक्षा भैरव की साधना को ज्यादा महत्त्व दिया जाने लगा है। 'देव्योपनिषद्' में भैरव साधना क्यों की जानी चाहिये इसके बारे में विस्तार से विवरण है, उनका सारा मूल तथ्य निम्न प्रकार से है-

1. जीवन के समस्त प्रकार के उपद्रवों को समाप्त करने के लिये।

2. जीवन की बाधाएं और परेशानियों को दूर करने के लिये।

3. जीवन के नित्य कष्टों और मानसिक तनावों को समाप्त करने के लिये।

4. शरीर में स्थित रोगों को निश्चित रूप से दूर करने के लिये।

5. आने वाली बाधाओं और विपत्तियों को पहले से ही हटाने के लिये।

6. जीवन के और समाज के शत्रुओं को समाप्त करने औ

23/09/2025

#संध्योपासनविधि:!!
(१) पवित्रीकरणम्
ॐ अपवित्र: पवित्रो वेत्यस्य वामदेव ऋषि: विष्णुर्देवता गायत्रीच्छन्द: हृदि पवित्रकरणे विनियोग:।

ॐ अपवित्र पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:।।

(२) त्रिराचमनम्
अन्तर्जानुहस्त: संहताङ्गुलिना शुद्धजलं गृहीत्वा मुक्ताङगुष्ठकनिष्ठेनवामेनान्वारब्धपाणिना ब्रह्मतीर्थेन त्रिरप: पिबेत्।
१ 👉 ॐ केशवाय नमः
२ 👉 ॐ नारायणाय नमः
३ 👉 ॐ माधवाय नमः
४ 👉 ॐ हृषीकेशाय नमः

( ३ ) आसनशुद्धि:
ॐ पृथ्वीतिमन्त्रस्य मेरुपृष्ठ ऋषि: सुतलं छन्द: कूर्मो देवता आसने विनियोग:।

ॐ पृथ्वि त्वया ध‌ता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।।

( ४ ) पवित्रीधारणम्
ॐ पवित्रेस्थोव्वैष्णव्यौ सवितुर्व: प्रसवऽउत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभि: ।
तस्य ते पवित्रते पवित्रपूतस्य यत्काम: पुनेतच्छकेयम्।।

( ५ ) त्र्यायुषमित्यस्य नारायण ऋषि: रुद्रो देवता उष्णिक्छन्द: भस्मधारणे विनियोग:।

( ६ ) स्वस्ति - तिलक धारणम्
ॐ स्वस्ति नऽइन्द्रोव्वृद्धश्रवा: स्वस्ति न: पूषाव्विश्ववेदा:।
स्वस्ति नस्तार्क्षोऽअरिष्टनेमि: स्वस्ति नो बृहस्पतिर्द्दधातु।।

( ७ ) ॐ मानस्तोक इति मन्त्रस्य कुत्स ऋषि: जगती छन्द: एको रुद्रो देवता शिखाबन्धने विनियोग:।

ॐ मानस्तोकेतनये मानऽआयुषि मानोगोषु मानोऽअश्वेषुरीरिष:।
मानोव्वीरान्नुद् द्रभामिनोव्वधी र्हविष्म्मन्त: सदमित्वाहवामहे।।

चिद्रूपिणि महामाये दिव्यतेज: समन्विते।
तिष्ठ देवि शिखाबन्धे तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे।।

( ८ )संकल्प:
ॐ शुभे शोभनेमुहुर्ते अद्य ब्रह्मणो द्वितीयपरार्धे श्रीश्वेयवाराहकल्पे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तैकदेशान्तर्गते पुण्यक्षेत्रे ------ कलियुगे कलिप्रथमचरणे ------- सम्वत्सरे ------- मासे ------- पक्षे -------- तिथौ -------- वासरे ------- नक्षत्रे ------- योग -------- ममोपात्तदुरितक्षयार्थं श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं ब्रह्मवर्चस्वाप्तये
प्रात:/मध्याह्न/सायं संध्योपासनं करिष्ये।

( ९ ) अघमर्षणाचमनम्
ॐ ऋतं चेति त्र्यचस्य माधुच्छन्दसोऽघमर्षण ऋषिरनुष्टुप्छन्दो भाववृत्तं दैवतमपामुपस्पर्शने विनियोग:।

ॐ ऋतं च सत्यञ्चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत।
ततो रात्र्यजायत तत: समुद्रोअर्णव:।।
समुद्रादर्णवादधिसंवत्सरो अजायत।
अहोरात्राणि विदधद्विश्वस्य मि

✨ मंत्र जाप में होने वाले अनुभव ✨🙏 जय गुरुदेव 🙏जब भी कोई साधक किसी भी देवी-देवता का मंत्र जाप करता है, तो उसके साथ कुछ अ...
11/09/2025

✨ मंत्र जाप में होने वाले अनुभव ✨

🙏 जय गुरुदेव 🙏

जब भी कोई साधक किसी भी देवी-देवता का मंत्र जाप करता है, तो उसके साथ कुछ अद्भुत अनुभव होते हैं। यह किसी पुस्तक के आधार पर नहीं, बल्कि हमारे स्वयं के अनुभव और गुरुओं के आशीर्वाद से प्राप्त ज्ञान हैं।

मंत्र जाप के समय शरीर के अंदर ऊर्जा प्रवाहित होने लगती है, जिससे शरीर हल्का हिलने लगता है।

कभी-कभी कमर, कंधे, हाथ, सिर या पेट में दर्द महसूस होता है, उबासी या नींद आने लगती है।

शरीर में कंपन होने लगता है और कभी-कभी सुन्नपन भी महसूस होता है।

कमर से ऊपर की ओर खिंचाव का अनुभव होता है।

ध्यान अपने आप लगने लगता है।

देवी-देवताओं के दर्शन या जीवन की समस्याओं के समाधान स्वयं दिखाई देने लगते हैं।

ऐसा लगता है मानो कोई ऊर्जा हमारे चारों ओर घूम रही है।

👉 अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो घबराएँ नहीं। यह मंत्र की ऊर्जा का प्रभाव है।

👉 मंत्र जाप को कभी न छोड़ें। नियमित रूप से साधना करते रहें।

👉 मंत्र जाप के बाद 15-20 मिनट ध्यान में ज़रूर बैठें।

👉 रोज़ सुबह-शाम कम से कम 1 घंटे (30-40 मिनट
जाप + 15-20 मिनट ध्यान) आसन पर समय दें।

⚡ याद रखें — जैसे व्यायाम से शरीर बनता है और दर्द होता है, उसी प्रकार मंत्र जाप साधना से आत्मिक शक्ति बनती है और यह लक्षण उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

🌸 गुरु मार्गदर्शन में साधना जारी रखें, कभी न डरें और न रुकें। 🌸

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🙏 सतनामो आदेश
🙏 गुरु जी को आदेश
🙏 ओम गुरु जी 🚩
🙏 ओम गोरक्ष आदेश
🙏 जय गुरुदेव 🚩
🙏 जय माँ काली 🚩


#मंत्रजाप #साधना #तंत्रमंत्र #आध्यात्मिकता #शक्तिसाधना #गुरुजी #जयगुरुदेव #भक्ति #ध्यान #गोरखनाथ #कुंडलिनी #हिन्दुध

योनि पूजा क्यों और किसलिए:-तंत्र साधना के पञ्च स्तम्भ जिनमे से एक मैथुन है और जिसमे भी चार भाग लिंग योनि वीर्य और रज है।...
30/07/2025

योनि पूजा क्यों और किसलिए:-

तंत्र साधना के पञ्च स्तम्भ जिनमे से एक मैथुन है और जिसमे भी चार भाग लिंग योनि वीर्य और रज है। इस पुरे ब्रह्माण्ड और सृष्टी के रचना और संचालन का केंद्र ही योनि और लिंग है।जिनमे लिंग शिव और योनि माँ शक्ति का प्रतीक है।अघोर के पंचमकारों में होने के कारण योनि ही शक्ति का पुंज है।विभिन्न प्रकार की साधनाओ में जहा भैरव और भैरवी स्वयं विराजित होते है वह भी उत्पन्न ऊर्जा केवल भैरवी रूपी स्त्री में ही योनि में संचित होती है जो की बाद में भैरव को संसर्ग में प्रदान की जाती है।अतः ये कह सकते है की योनि के बिना तंत्र तो क्या इस ब्रह्माण्ड का सचालन ही नहीं हो सकता।आज के ज़माने में स्त्री को केवल शरीर की भोग की वास्तु बना दिया है जबकि उसमे निहित असली ऊर्जा पुंज को भुला दिया गया है।जिनको कुण्डलिनी का नाम दिया गया है।
कर्म योनी में और हमारे शरीर में यह शक्ति कुंडलिनी के रूप में आश्रित है जिसे जाग्रत किये बिना आगे का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता.
तंत्र शास्त्र में ही स्त्री को माँ आदिशक्ति के रूप में देखा जाता है और उसकी देह पूजा माँ कामाख्या के रूप में की जाती है क्योंकि यदि स्त्री को केवल भोग की वस्तु ना समझा जाए तो उसी को भैरवी के रूप में साध के आप माँ आदिशक्ति के आशीर्वाद के पात्र बन सकते हो क्योंकि ब्रह्मी, वैष्णवी और रौद्री यह तीनो शक्तियाँ एक त्रिकोण के रूप में हर स्त्री के शरीर में स्थापित है इसीलिए इस त्रिकोण को योनिरुपा कहा जाता है और इन शक्तियों की पूजा योनी पीठ के रूप में की जाती है और वास्तव में देखा जाए तो हर स्त्री का शरीर अपने आप में एक योनी पीठ है जिसके बाएं कोण में ज्ञान शक्ति, दायें कोण में इच्छा शक्ति और सब से नीचे वाले कोण में क्रिया शक्ति स्थापित है और योग में इसे कुंडलिनी शक्ति का केंद्र माना गया है।
स्त्री को ही पुरुष का भाग्य तक कहा गया है वेदों में ।क्योकि जिस स्त्री की योनि का ऊर्जा पुंज उसकी कुण्डलिनी को जितना उच्च स्टार का करेगा वो और उसके संपर्क में आने वाले सदस्य उतने ही उच्च भाव में रहेंगे।

क्यों होती है योनि पूजा:-योनि पूजा के द्वारा मिलने वाले फलो का लेखन मैं तो क्या कोई भी नहीं कर सकता फिर भी कुछ बिंदु अवस्य बताऊंगा।

1.अघोर में की जाने वाली क्रियाओ जिनमे स्तंभन मारन उच्चाटन वशीकरन आदि है का सटीक असर करने और उनकी काट दोनों

14/07/2025
जय माता दी
14/07/2025

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हर हर महादेव
14/07/2025

हर हर महादेव

हर प्रकार के बंधन और रुके काम खोलने वाला शक्तिशाली मंत्र और टोटकाआज हम लेकर आए हैं एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र और प्रयोग, ...
09/07/2025

हर प्रकार के बंधन और रुके काम खोलने वाला शक्तिशाली मंत्र और टोटका

आज हम लेकर आए हैं एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र और प्रयोग, जिससे आप किसी भी प्रकार का बंधा हुआ कार्य, दुकान, व्यापार, घर या शरीर पर हुआ ऊपरी असर – सब कुछ खोल सकते हैं।

किन-किन पर होता है यह प्रयोग प्रभावी?

दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे

व्यापार बंद है या नहीं चल रहा

घर में बंधन है, पैसे नहीं टिकते

शरीर पर ऊपरी हवा, बुरी शक्ति, जादू-टोना आदि

कोई भी काम बार-बार अटक जाता है

नौकरी या काम में बार-बार रुकावटें आती हैं

इस प्रयोग की विशेषता

यह कोई 11 दिन, 21 दिन या लंबी साधना नहीं है

सिर्फ कुछ ही दिनों में असर दिखता है

परंतु पूरी श्रद्धा और नियम से करना है

इस प्रयोग को शनिवार या सोमवार से ही शुरू करें

🪔 प्रयोग करने की विधि

🔷 सामग्री:

1. एक मिट्टी का बर्तन/डोंगा

2. तालाब का पानी

3. कुएँ का पानी

4. गंगाजल

5. एक नींबू

6. थोड़ा सा सिंदूर

🛑 पहला प्रयोग: दुकान या व्यापार के लिए

🔹 विधि:

1. एक मिट्टी का बर्तन लें

2. उसमें तीनों जल मिलाएं – कुएं का, तालाब का और गंगाजल

3. उसमें एक नींबू निचोड़ दें

4. उसमें एक चुटकी सिंदूर डाल दें

5. अब उस मिश्रण को अच्छे से मिला लें

6. उस बर्तन पर नीचे दिया गया मंत्र 21 बार पढ़ें

हर बार मंत्र पढ़ने के बाद उसमें फूँक मारें

इस तरह 21 मंत्र = 21 फूँकें

7. अब इस जल को रोजाना अपनी दुकान के चारों ओर छिड़क दें

हर दिन नया जल बनाएं

कुछ ही दिनों में दुकान पर ग्राहक आने लगेंगे, व्यापार खुल जाएगा

🏡 दूसरा प्रयोग: घर में बंधन या गरीबी के लिए

1. एक बड़ा मिट्टी का टोंका लें

2. उसमें कुएँ का पानी, तालाब का पानी और गंगाजल मिलाएं

3. एक नींबू निचोड़ें

4. एक चुटकी सिंदूर डालें

5. मंत्र को 21 बार पढ़ें और हर बार फूँक मारें

6. इस जल को रोज घर के अंदर-बाहर छिड़कें

7. कुछ ही दिनों में घर का बंधन टूटने लगेगा, सुख-समृद्धि आने लगेगी

🙏 तीसरा प्रयोग: शरीर पर ऊपरी बाधा, प्रेतबाधा या टोना-टोटका

1. मिट्टी का बर्तन लें

2. उसमें कुएँ का पानी, तालाब का पानी और गंगाजल डालें

3. एक नींबू निचोड़ें

4. एक चुटकी सिंदूर डालें

5. मंत्र 21 बार पढ़ें और हर बार फूँक मारें

6. उस जल को किसी बड़े बर्तन में डालें

7. उसमें और सामान्य जल मिलाकर रोगी को रोजाना स्नान कराएं

8. कुछ ही दिनों म

07/07/2025

🕉️ गुरु-शिष्य के नियम व सावधानियाँ 🕉️
📿 हर साधक जरूर पढ़े और पालन करें 📿

🔔 गुरु बिना ज्ञान नहीं, और नियम बिना सिद्धि नहीं 🔔

1️⃣ श्रद्धा और विश्वास रखें 🙏
गुरु पर अडिग विश्वास रखें, तभी साधना सफल होती है।

2️⃣ गुरु आज्ञा का पालन करें 🧘
गुरु जो कहें वही करें, स्वेच्छा से कुछ न करें।

3️⃣ साधना गोपनीय रखें 🔒
मंत्र, विधि या अनुभव किसी को न बताएं।

4️⃣ शुद्धता और संयम अपनाएं 🌿
साफ वस्त्र, सात्विक भोजन और पवित्र स्थान रखें।

5️⃣ नियमित साधना करें ⏰
हर दिन तय समय पर साधना करें।

6️⃣ गुरु से विनम्रतापूर्वक संवाद करें 🙇‍♂️
बार-बार एक ही सवाल न पूछें।

7️⃣ फल की जल्दी न करें 🍃
धैर्य रखें, फल समय से मिलेगा।

8️⃣ अहंकार और विवाद से बचें 🚫
दूसरे साधकों या गुरु से वाद-विवाद न करें।

9️⃣ गुरु का अपमान न करें ⚡
गुरु-द्रोह साधक की ऊर्जा और भाग्य को नष्ट कर देता है।

🌸 जो साधक इन नियमों का पालन करता है, उसी के जीवन में दिव्यता और सिद्धि प्रकट होती है। 🌸

🚩 जय गुरु देव!

✍🏻 – आपको यह जानकारी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं और हमारे अकाउंट को फॉलो करें सिद्धि साधना तंत्र-मंत्र से संबंधित सभी जानकारी अकाउंट के ऊपर में निशुल्क रूप से उपलब्ध है

अगर आपके प्यार के बीच मेंकोई तीसरा व्यक्ति आ चुका है तो उसके लिए विद्वेषण क्रिया अगर किसी के घर मै आए दिन क्लेश झगड़े हो...
03/07/2025

अगर आपके प्यार के बीच मेंकोई तीसरा व्यक्ति आ चुका है तो उसके लिए विद्वेषण क्रिया अगर किसी के घर मै आए दिन क्लेश झगड़े होते है पति पत्नी मै या पत्नी मायके जाकर बैठ गई है या पत्नी ने मुकद्दमा कर दिया है जरूरी नहीं की ग्रह नक्षत्र ही खराब हो कोई तंत्र क्रिया का भी असर हो सकता है, शत्रु आपको अगर हद से जायदा परेशान कर रहा है तो उसके लिए बंधन, किलन, उच्चाटन, मारण बहुत तंत्र क्रिया है अगर आपका कही पैसा फंसा हुआ है और वो व्यक्ति आपका पैसा वापस नहीं कर रहा तो मै गारंटी लेता हूं 5 दिन मै बो कदमों मै गिरकर पैसे वापस करेगा बस वो व्यक्ति अगर देने मै सक्षम हुआ तो किसी भी ओर किसी भी तंत्र क्रिया के लिए संपर्क कर सकते है. पवन नाथ
"ॐ ह्रीं क्रीं कालिकायै नमः"

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Pankajkumar Faridabad
Faridabad
121001

Telephone

+919873011750

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