14/10/2021
मन बैरागी, तन अनुरागी,
कदम- कदम दुश्वारी है,
जीवन जीना सहज ना समझो,
बहुत बड़ी फनकारी है,
औरों जैसे होकर भी हम,
'बाइज्जत' हैं बस्ती मे,
कुछ लोगों का सीधापन है,
कुछ अपनी 'अय्यारी' है
'साभार'