Niranjan kumar singh pale Gaya

Niranjan kumar singh pale Gaya जिस पर जग हँसा है , इतिहास वही रचा है !

आपही बतायें
10/06/2026

आपही बतायें

जिम्मेदारीबहुत बुरी चीज है मेरे दोस्त ये शौख और उम्र दोनों खा जाती है ।
09/06/2026

जिम्मेदारी
बहुत बुरी चीज है मेरे दोस्त ये शौख और उम्र दोनों खा जाती है ।

गिर गाय के दूध के प्रमुख फायदे:A2 प्रोटीन युक्त होने के कारण यह कई लोगों को पचाने में अपेक्षाकृत आसान लगता है।कैल्शियम औ...
09/06/2026

गिर गाय के दूध के प्रमुख फायदे:

A2 प्रोटीन युक्त होने के कारण यह कई लोगों को पचाने में अपेक्षाकृत आसान लगता है।
कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर होने के कारण हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
प्रोटीन की अच्छी मात्रा होने से शरीर की वृद्धि और मांसपेशियों के विकास में सहायक है।
विटामिन A, D और B12 जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है।
बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पौष्टिक आहार माना जाता है।
दूध से दही, घी, पनीर आदि बनाने पर भी अच्छी गुणवत्ता प्राप्त होती है।
शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।
ध्यान रखें कि गिर गाय का दूध पौष्टिक है, लेकिन इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इसका सेवन अधिक लाभकारी होता

09/06/2026

Narayan, Narayan

05/06/2026
05/06/2026

मेरे घर का नवनिर्मित मकान में भजन कीर्तन करते हुए मैं और मेरी अतिथि गण

03/06/2026

*वरण करने योग्य हिंदी में, बिना अनुवाद या व्याख्या जोड़े, केवल संस्कृत वाक्य और उनका सीधा हिंदी अनुवाद :-*

1. *अजीर्णे भोजनं विषम् ।*
यदि पहले लिया गया भोजन नहीं पचा है तो अगला भोजन विष के समान है।

2. *अर्धरोगहरी निद्रा ।*
अच्छी नींद आधे रोगों को हर लेती है।

3. *मुद्गदाली गदव्याली ।*
सभी दालों में मूंग श्रेष्ठ है, यह रोगों को हरती है।

5. *अति सर्वत्र वर्जयेत्।*
हर चीज़ की अति वर्जनीय है।

6. *नास्ति मूलमनौषधम् ।*
कोई भी सब्ज़ी ऐसी नहीं है जो औषधि न हो।

7. *न वैद्यः प्रभुरायुषः ।*
कोई वैद्य (डॉक्टर) आयु का स्वामी नहीं है।

8. *चिंता व्याधि प्रकाशाय ।*
चिंता रोगों को बढ़ाती है।

9. *व्यायामश्च शनैः शनैः।*
व्यायाम धीरे-धीरे करना चाहिए।

10. *अजवत् चर्वणं कुर्यात् ।*
बकरी की तरह चबा-चबाकर खाना चाहिए।

11. *स्नानं नाम मनःप्रसाधनकरंदुः स्वप्न-विध्वंसनम् ।*
स्नान मन को प्रसन्न करता है और बुरे स्वप्नों को मिटाता है।

12. *न स्नानमाचरेद् भुक्त्वा।*
भोजन के तुरंत बाद स्नान नहीं करना चाहिए।

13. *नास्ति मेघसमं तोयम् ।*
बारिश के समान शुद्ध जल कोई नहीं।

14. *अजीर्णे भेषजं वारि ।*
अजीर्ण में जल औषधि के समान है।

15. *सर्वत्र नूतनं शस्तं, सेवकान्ने पुरातने ।*
हर चीज़ ताज़ी अच्छी होती है, पर सेवक और चावल पुराने अच्छे होते हैं।

16. *नित्यं सर्वा रसा भक्ष्याः ।।*
हर दिन सभी रस (स्वाद) खाने चाहिए।

17. *जठरं पूरायेदर्धम् अन्नैर्, भागं जलेन च ।*
*वायोः संचरणार्थाय चतर्थमवशेषयेत् ।।*
पेट आधा अन्न से, चौथाई जल से भरें और चौथाई वायु के लिए खाली छोड़ें।

18. *भुक्त्वा शतपथं गच्छेद् यदिच्छेत् चिरजीवितम् ।*
यदि लंबी आयु चाहिए तो भोजन के बाद सौ पग चलना चाहिए।

19. *क्षुत्साधुतां जनयति ।*
भूख भोजन को स्वादिष्ट बनाती है।

20. *चिंता जरा नाम मनुष्याणाम्*
चिंता मनुष्य में जल्दी बुढ़ापा लाती है।

21. *शतं विहाय भोक्तव्यं, सहस्रं स्नानमाचरेत् ।*
भोजन के समय सौ कार्य छोड़ देना चाहिए, स्नान के लिए हजार कार्य।

22. *सर्वधर्मेषु मध्यमाम्।*
सभी बातों में मध्यम मार्ग ही श्रेष्ठ है।

हमारे ऋषियों के ये अमूल्य स्वास्थ्य उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
🙏

27/05/2026

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