चकोर

चकोर Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from चकोर, Business service, Ghat.

महाप्रयाण की बेला : शाम 5:17                  30 जनवरी 1948 , शाम का वक्त कोई साढ़े चार बजे होंगे  ... बापू के सामने उनक...
30/01/2026

महाप्रयाण की बेला : शाम 5:17

30 जनवरी 1948 , शाम का वक्त कोई साढ़े चार बजे होंगे ... बापू के सामने उनके शाम का भोजन रख दिया गया ... बकरी का दूध , उबली हुई तरकारी , मौसंबी , ग्वारपाठे का रस मिला अदरक , नींबू और घी का काढ़ा ... बस इतना ही ... !!

बापू ने अपना अंतिम भोजन सरदार पटेल के साथ बातचीत करते हुए ... धरती पर बैठकर , खुले आसमान के नीचे , प्रकृति की गोद में ग्रहण किया ...तब वे अपने महाप्रयाण से वे केवल 37 मिनिट दूर थे ... और देशहित पर सरदार पटेल के साथ कुछ जरुरी बातचीत जारी थी ... जिसके चलते रोजाना उनकी तयशुदा प्रार्थना - सभा को 17 मिनिट की देरी हो चुकी थी ... समय के निहायत पाबंद बापू इस बात से थोड़े असहज हुए ... और तुरंत चर्चा को विश्राम देकर चल पड़े अपनी अंतिम मंजिल की और बेखबर , बेपरवाह ...!!

इधर बापू जितने बेखबर थे अपनी मौत से ... उधर बिड़ला हाउस में शाम की प्रार्थना सभा के लिए जमा पांच -छः सौ की भीड़ में तीन वे लोग भी आ चुके थे जो आज बापू की हत्या को अंजाम देने के बुरे इरादों से लैस थे ... उनकी बैचेनी बढ़ती जा रही थी ... बापू लेट हो रहे थे ...

बापू ने देरी की वजह से सभा स्थल तक जाने के लिए तेजी से अपने कदम उठाना शुरू किया ... बापू ने चलते हुए साथ चल रही आभा से चर्चा छेड़ी ... आभा, तू मुझे जानवरों का खाना देती हैं ... और हंस पड़े ... उनका इशारा सुबह दिए गाजर के जूस की तरफ था ... आभा बोली - " बा इसे घोड़ों का चारा कहती थी " ... गांधीजी ने विनोद करते हुए पूछा - " क्या मेरे लिए यह शान की बात नहीं हैं कि जिसे कोई नहीं चाहता उसे मैं चाहता हूँ ?

बापू को सभा स्थल तक पहुँचने के लिए अब चंद कदम ही उठाना शेष थे ... उनके कदम अब नर्म दूब पर पड़ रहे थे ... बापू ने बडबडाते हुए कहा मुझे आज देरी हो गयी हैं ... मुझे यहाँ ठीक 5.00 बजे पहुँच जाना चाहिए था ... देरी मुझे पसंद नहीं ...

अब उनके सामने पांच छोटी छोटी सीढियाँ थी जिसे उन्हौने जल्दी से पार कर लिया ... सामने खड़े लोग उनके चरणों में झुकने लगे ... बापू ने उनके अभिवादन का उत्तर देने के लिए अपने दोनों बाजु आभा और मनु के कन्धों से हटाकर हाथ जोड़ लिए ... तभी भीड़ को चीरकर एक व्यक्ति आगे निकल आया ... सभी को यूँ लगा की वह झुककर प्रणाम करना चाहता हैं ... देर हो रही हैं सोचकर मनु ने उसे रोकना चाहा ... उसने मनु का हाथ छिड़क दिया ... और धक्के से मनु गिर पड़ी ... अब वह व्यक्ति था और उसके सामने गाँधी केवल दो फुट के फासले पर रह गए थे ... उसने तुरंत अपनी पिस्तौल बापू को तरफ तान कर एक के बाद एक तीन गोलियां दाग़ दी ... पहली गोली लगी तब बापू खड़े रहे पर दूसरी लगी तब तक खून के धब्बे उनकी सफ़ेद चादर पर उमड़ आये थे ... अब वे गिरने लगे ... तीसरी गोली लगते ही वे जमीं पर गिरने लगे ... उनके मुंह पर अब " हे राम " ये शब्द तैर रहे थे ...

आजीवन अहिंसा के रास्तों के राही का सफ़र अब पूरा होने आया ... इसके पहले भी बापू की हत्या के पांच विफल प्रयास हुए थे ... और हर बार बापू ने उनमे पकडाए लोगों पर किसी तरह की ना तो शिकायत दर्ज करवाई और ना ही किसी तरह कार्यवाही के लिए कहा ... इसके पूर्व हुए असफल हत्या के प्रयास जिसमे बापू के ऊपर बम फेंककर हमला किया गया था ... जिसमें वे बच गए थे ... और उन्होंने कहा था ... जब भी कोई ऐसा प्रयास हो ... धमाका हो मैं आहात भी अगर हो जाऊ तो भी मुझे आहात करने वाले के प्रति मेरे मन में सद्भाव रहे ... और रहे मेरा चेहरा अविकल ...

प्रकृति ने उनकी यह अंतिम इच्छा भी पूरी की ... मृत्युं के तुरंत पहले उनका चेहरा शांत था और थे चेहरे पर करुणा के भाव ... उनके अपने सहधर्मी भाई ने आज उनके प्राण लिए थे ... हिन्दू पंथ के अति उच्च आदर्श वसुदैव कुटुम्बकम , कर्म के सिद्धांत और सहिष्णुता को सही मायनों में अगर किसी ने जिया हैं तो वे हमारे बापू ही थे ... और पहली बार वर्तमान इतिहास में किसी ने अपनी कथनी और करनी की गजब समानता से सारे विश्व के सामने हिन्दुपंथ की अति उच्च आदर्श वाली बातों को जमीं पर उतारते हुए साकार किया था ... पहली बार विश्व समुदाय ने देश और धर्म के संकुचित दायरों से बाहर निकलकर समान रूप से उन्हें अपनाया था ... महात्मा गाँधी के रूप में इंसानी मूल्यों का जीता जगाता प्रमाण सबके सामने था ... विश्व उनकी मौत पर स्तब्ध था ... अचंभित था ...

संसार का कोई ऐसा देश नहीं ... जहाँ उनके निधन पर शोक ना मनाया गया हो ... आज भी उनका दर्शन पहले से भी अधिक प्रासंगिक हैं ... आज भी कोई अगर थोडा सा भी उनके बताये रास्तों पर चले तो उसे जमाना देर नहीं करता गांधीवादी कहने में ...


गाँधी तुम फिर आना मेरे देश !!!

30 जनवरी प्रायश्चित का दिनराष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष30 जनवरी भारत ही नहीं समूची मानवता के लिए एक बह...
30/01/2026

30 जनवरी प्रायश्चित का दिन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष

30 जनवरी भारत ही नहीं समूची मानवता के लिए एक बहुत ही दुखद दिन है। यह सपनों के टूटने और आशाओं के बिखरने का दिन है। आज के हो दिन सन 1948 में शाम 5 बजकर 17 मिनट पर चली तीन गोलियाँ ने न केवल एक शरीर को नहीं भेदा अपितु भारत की नैतिक चेतना, मनुष्यता की उम्मीद और भविष्य की संभावनाओं को घायल कर दिया। उस क्षण ऐसा लगा मानो इतिहास रुक गया हो, समय थम गया हो, और संसार ने अपनी दिशा खो दी हो। कन्नड़ के प्रसिद्ध कवि ने लिखा कि 30 जनवरी 1948 को भारत में जो हुआ, उसके बाद क्या हुआ यह तो मैं नहीं जानता पर एक बात निश्चित रूप से समझ गया था कि 31 जनवरी की सुबह सूरज नहीं उगेगा।

गांधी तो नहीं लौटे और 31 जनवरी की सुबह सूरज भी उगा। अर्थी से निकलकर भारत आगे भी चला । गांधी का मतलब भी यही है अंधकार से आगे निकलकर चलना। मृत्यु में से जीवन को खोज निकालना। 30 जनवरी 1948 को जो हुआ हम सब भारतवासी उसे रोक नहीं सके। यह दिवस इस बात का संकल्प भी है कि आगे हम ऐसा न होने दें। प्रायश्चित का मतलब यही है कि उसके साथ एक संकल्प भी जुड़ा हुआ है वो सिर्फ पछतावा ही नहीं है।

​30 जनवरी की शाम जब तीन गोलियां चलीं, तो वे केवल धातु के टुकड़े नहीं थे; उन्होंने एक महामानव की धवल धोती पर रक्त के ऐसे धब्बे छोड़ दिए जो कभी नहीं धुल सकते। उस रक्त रंजित तहों में टिक-टिक करती इंगरसोल घड़ी ठहर गई—मानो समय ने भी आगे बढ़ने से इनकार कर दिया हो। बापू का वह चश्मा, जो भावी भारत के सुनहरे भविष्य को देखने का माध्यम था, छिटककर दूर जा गिरा। दृश्य ऐसा था मानो सत्य और अहिंसा का मार्ग अचानक धुंधला गया हो।

हेमिंग्वे ने कहा था—"मौत और घोर विपदा के सामने सहज बने रहना ही सबसे बड़ा साहस है।" गांधी अंतिम सांस तक सहज रहे। वे जानते थे कि जिस 'नटकला' (रस्से पर चलना) के जरिए वे लोगों को मुक्ति दिलाना चाहते हैं, वे लोग कठिन समय में शायद साथ न दें, फिर भी वे अडिग रहे।

​गांधीजी की 'हठधर्मिता' उनकी अहिंसा थी। क्रोध से उबलते इतिहास ने उन्हें मार डाला और उस पर गर्व भी किया, लेकिन वे गांधी के मूल्यों को नहीं मार सके। गांधी ने वह कठिन प्रयोग किया जो सदियों में कोई एक कर पाता है। हिंसा भड़काना और धार्मिक भावनाओं से खेलना आसान है, लेकिन लाखों लोगों को संयमित, नैतिक और 'वैष्णव जन' बनाना अत्यंत दुष्कर कार्य है।

शायद अब भी वह समय नहीं आया है जब भारत गांधीजी की उस “सद्बुद्धि की आवाज़” को सच में सुन सके। संभव है कि जब हम विशाल कारखानों और यांत्रिक उपलब्धियों के मोह से बाहर निकलेंगे, तब जाकर व्यक्ति को वह सर्वोच्च स्थान वापस दे सकेंगे, जो गांधीजी ने अपने जीवन और विशेष रूप से अपने मृत्यु द्वारा उसे प्रदान किया।

फिर भी भारत धन्य है — क्योंकि उसने ऐसे पुत्र को जन्म दिया जिसने “गांधी” का रूप धारण किया। और शायद भारत पुनः धन्य है, क्योंकि उसी ने उसे मृत्यु दी — और इस मृत्यु ने उनके जीवन को एक ऐसी दिव्यता और उजाले से भर दिया जो युगों-युगों तक मानवता की धरोहर को समृद्ध करती रहेगी।

आज हम स्वयं को 'गांधी के बच्चे' कहते हैं। हमारा उत्तरदायित्व केवल उन्हें याद करना नहीं, बल्कि उस कठिन मार्ग पर चलना है जिसे उन्होंने प्रशस्त किया। गांधी आज भी हमारे बीच एक नैतिक प्रकाश पुंज की तरह मौजूद हैं, जो हमें याद दिलाते हैं कि नफरत की गोलियां एक शरीर को शांत कर सकती हैं, पर उस आत्मा को नहीं जो मानवता के कल्याण के लिए धड़कती है।

उनकी शहादत केवल एक जीवन का अंत नहीं थी । जैसा कि महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग्स ने कहा था कि जहां अंत होता है वहीं से एक नई शुरुआत होती है। गांधी का बलिदान मानवता के लिए एक नई शुरुआत है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन।

#गांधी_दर्शन

● अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में महात्मा गांधी नाम की सड़क है।● बांग्लादेश के जशोर में एम जी रोड या महात्मा गांधी रोड है।...
22/12/2025

● अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में महात्मा गांधी नाम की सड़क है।
● बांग्लादेश के जशोर में एम जी रोड या महात्मा गांधी रोड है।
● बेल्जियम के मेकहेलेन में महात्मा गांधी विज्क नाम की रोड है तथा गेंट में महात्मा गांधीवादी नाम की रोड है और मोलेनबीक सेंट जीन में एवेन्यू महात्मा गांधी नाम की रोड है।
● ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में प्राका महात्मा गांधी नामक रोड है।
● कनाडा के विन्निपेग में महात्मा गांधी मार्ग नामक रोड है।
● क्रोएशिया के जगरेब में उलीका महात्मा गाँधीजा नामक रोड है।
● फ्रांस के पेरिस में एवेन्यू डु महात्मा गांधी नामक रोड है।
● जर्मनी के क्रमशः छः शहरों हनोवर,ब्रेमेन,डार्मस्टाट,दसेलडोर्फ,बॉन और स्टटगार्ट में गांधी स्ट्रे,गांधी स्ट्रे,महात्मा गांधी स्टारबी,महात्मा गांधी स्टारबी,गांधी स्ट्रे,महात्मा गांधी स्टारबी नामक रोड है।
● हंगरी में गांधी Utca नामक रोड है।
● इंडोनेशिया के मेदान में जालान गांधी नामक रोड है।
● ईरान के तेहरान शहर में दो रोड क्रमशः उत्तरगांधी और गांधी स्ट्रीट नामक दो रोड हैं।
● इटली के मिलन शहर में वाया महात्मा गांधी नामक रोड है।
● जमैका के किंग्स्टन में गांधी रोड नामक रोड है।
● जॉर्डन के अम्मान शहर में केन्या नैरोबी गांधी एवेन्यू नामक रोड है।
● मारीशस के गुडलैंड्स में गांधी रोड,रोचे टेरे में एस.आई.गांधी स्ट्रीट,ब्यू बेसिन-रोज हिल में क्रमशः महात्मा गांधी गली और महात्मा गांधी लेन,क्वाट्रे बॉर्न में गांधी एवेन्यू तथा बेले रोज में गांधी गली नामक रोड है।
● मेक्सिको के मेक्सिको सिटी में कलजादा महात्मा गांधी नामक रोड है।
● मंगोलिया उलानबटार में महात्मा गांधी स्ट्रीट नामक रोड है।
● मोरक्को के कैसाबलांका में बुलवार्ड घांडी नामक रोड है।
● नीदरलैंड के 27 शहरों में महात्मा गांधी जी के नाम पर रोड है।
● फिलीपींस के मनीला में महात्मा गांधी स्ट्रीट नामक रोड है।
● पोलैंड के वारसा में महात्मा गांधीगो तथा लोज नामक शहर में मोहनदास गांधीगो नामक रोड है।
● सर्बिया के बोलकोवी में गांधीजीवा नमक रोड है।
● दक्षिण अफ्रीका के डरबन में महात्मा गांधी रोड तथा जोहान्सबर्ग में गांधीवर्ग नामक रोड है।
● स्पेन के बार्सिलोना में जार्डिन्स डे गांधी नामक रोड है।
● श्रीलंका के जाफना में महात्मा गांधी रोड नामक रोड है।
● त्रिनिदाद और टोबैगो के देबे में गांधी ग्राम रोड,सैन फर्नांडो में गांधी गली तथा संत हेलेना में गांधी गली नामक रोड है।
● तुर्की के अंकारा में महात्मा गांधी कैडेसी नामक रोड है।
● यूनाइटेड किंगडम के लंदन में गांधी बंद तथा हल पर किंग्स्टन में गांधी मार्ग नामक रोड है।
● संयुक्त राज्य अमेरिका के बोल्डर कोलाराडो में गांधी ड्राइव,डेवी फ्लोरिडा में गांधी गली,क्रॉफर्ड विले में गांधी गली,डरहम में गांधी ड्राइव,फूक्के वारीना में गांधी लेन तथा ह्यूस्टन में महात्मा गांधी जिला नामक रोड है।
● उरुग्वे के मोंटेवीडियो में रामबाला महात्मा गांधी नामक रोड है।

सोचिये पूरी दुनिया जिसे सम्मान देती है उससे अपने देश के कुछ कुटिल लोग अज्ञानता,धर्मांधता,मनुवाद तथा जातिवाद के कारण नफरत करते हैं।
महात्मा गांधी जिन देशों में गए वहां भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी वे पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले व्यक्तित्व हैं,यह हमारा सौभाग्य है कि गांधी भारत मे जन्मे आज पूरा विश्व भारत को गांधी के नाम से जानता है।

पहले कहा,मनरेगा बेकार है।फिर कहा,पैसे नहीं हैं।फिर चुपके सेकाम काट दिया,मजदूरी टाल दी,और अबनाम मिटाने चले हैं।यह सुधार न...
17/12/2025

पहले कहा,
मनरेगा बेकार है।
फिर कहा,
पैसे नहीं हैं।
फिर चुपके से
काम काट दिया,
मजदूरी टाल दी,
और अब
नाम मिटाने चले हैं।

यह सुधार नहीं है,
यह साज़िश है।

तुम्हें योजना से दिक्कत नहीं,
तुम्हें गांधी से दिक्कत है।
क्योंकि गांधी याद दिलाते है
कि सत्ता का मतलब सेवा होता है,
और तुम्हारी सत्ता
सिर्फ़ प्रचार चाहती है।

नाम बदलकर सोच रहे हो
इतिहास बदल जाएगा?
याद रखो,
जिस मिट्टी में
मज़दूर का पसीना गिरा है,
वहाँ गांधी लिखा है।

तुम्हारा डर साफ़ है,
एक आदमी,
जिसके पास न तख़्त था, न ताज,
आज भी तुम्हारी
नींद उड़ाता है।

इसलिए कभी किताबों से हटाते हो,
कभी योजनाओं से,
कभी चुप्पी से मारते हो,
कभी नाम बदलकर।

पर सुन लो,
गांधी न पोस्टर है,
न योजना का शीर्षक।
गांधी वो सवाल है
जो हर भूखे पेट से उठता है।

और जब तक
सवाल ज़िंदा हैं,
तुम्हारी हर कोशिश के बावजूद
गांधी ज़िंदा है।

MNREGA थी, है और रहेगी
लेकिन भाजपा नही रहेगी...

गांधी एक सोच हैं,संकल्प हे ओर सत्य  का प्रतीक हैं जिसे कोई नाथुराम कभी मार नही सकता गांधी को एक बार नही  उन्हें मारने की...
02/10/2025

गांधी एक सोच हैं,संकल्प हे ओर सत्य का प्रतीक हैं जिसे कोई नाथुराम कभी मार नही सकता गांधी को एक बार नही उन्हें मारने की बार बार कोशिस होती रही हे ओर होती रहेगी पर मरते तो शरीर हैं विचार तो अमरत्व लिए होते हे।द्वितीय विश्वयुद्ध विजेता विस्टन चर्चिल जिसको चिढ़ते हुए“अधनंगा फ़क़ीर” कहाँ करते थे वह शरीर के बंधन में बधने वाला कहा था इसकी वैचारिक महक को रोकना कहा किसी ग़ोडसे ओर आई टी सेलो की बस की बात। इसी धुर शांतिप्रिय विरोधी ने पुरे विश्व को दुश्मन जीतने का बम पिस्तोल से भी कही कारगर हथियार सत्याग्रह दिया जिसका आज भी सफल प्रयोग हुआ जा रहा हे ओर यही वह स्वतंत्रता का सिपाही था जिसने भारत की आज़ादी का असल मतलब अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति से जोड़ा,ये गांधी ही थे जिन्होंने बंद कमरों में होते आज़ादी के संघर्ष को सड़कों पर मज़दूरों ओर किसानो के बीच ला खड़ा किया जहाँ आज के नेताओ को रैलीओ में आते व्यक्ति का काला क़मीज़ भी डरा देता हे वही गांधी अपनी आलोचना खुले हृदय से स्वीकार करते थे।ये गांधी ही थे जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद की वास्तविक प्रकृति को समझा ओर चरखे को प्रतीक बना आर्थिक स्वावलम्बन का मंत्र गाँव गाँव पहुँचा ब्रिटिश साम्राज्यवाद की जड़ो पर प्रहार किया हाँ गांधी जी से कई मुद्दों पर असहमत होना ओर आलोचना अपराध नही पर पर अनर्गल बातो ओर सिर्फ़ कुछ वाटस्पिया ज्ञान,फोरवर्ड तथा कुछ मिम के आधार पर गांधी की हत्या को सही ठहराना ओर हत्यारे को नायक सिद्ध करना हमारे किसी विषय पर गम्भीर होने पर सवालिया निशान होगा वैसे विश्व के छापेखानो में सबसे ज़्यादा छपने वाले गांधी कभी मरा नही करते !!

एक थे खंडूरी ✅एक ये है खोनारी ❎Ritu Khanduri  शर्म करो Prem Chand Aggarwal शर्म करो ✊🏻✊🏻✊🏻
22/02/2025

एक थे खंडूरी ✅
एक ये है खोनारी ❎
Ritu Khanduri शर्म करो
Prem Chand Aggarwal शर्म करो ✊🏻✊🏻✊🏻

ये वही नेता है जो अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सौ से अधिक बार खुली प्रेस कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से पत्रकारों से मुखा...
27/12/2024

ये वही नेता है जो अपने प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सौ से अधिक बार खुली प्रेस कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से पत्रकारों से मुखातिब हुए और जिनके बारे बराक ओबामा कहते थे “ जब मनमोहन सिंह बोलते है तो दुनिया सुनती है”

इन्हें,
आज बोलने में माहिर और भाषण कला में पारंगत जिन्हें खुली प्रेस कॉन्फ़्रेंस से डर लगता है वो मनमोहन सिंह को मौनमोहन सिंह कहा करते थे!! बस सिर्फ़ सोचे

नवभारत के निर्माता को नमन🙏

28/01/2024

बिहार का राजनीति बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इस्तीफा मुख्यमंत्री देते हैं। बदल उपमुख्यमंत्री जाते हैं।

24/12/2023

धर्मधाद छौं लगाणु सुणी ल्यावा
सुणी ल्यावा हे उत्तराखण्ड्यों
एक जुट एक मुट ह्वे जावा..

24/12/2023

Address

Ghat
246535

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when चकोर posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share