Kumar traders and Jagdamba welding house

Kumar traders and Jagdamba welding house Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Kumar traders and Jagdamba welding house, Wholesale & Supply Store, Shop no. 6 gt Road opp ramila ground, Ghaziabad.

We provide a broad selection of welding products and accessories, featuring cutting wheels, mig wire, and welding electr...
01/07/2025

We provide a broad selection of welding products and accessories, featuring cutting wheels, mig wire, and welding electrodes. And accessories

For any order contact to us.
07/05/2020

For any order contact to us.

20/02/2020

पू. गुरुजी प्रेरक संस्मरण
*हर बाला माता की प्रतिमा*
सन् 1949 की बात है, एक महिला अपनी आठ वर्षीय बालिका को लेकर श्रीगुरुजी के दर्शनार्थ आई और उससे बोली ‘गुरुजी के गले में पुष्पहार डालकर उनको नमस्कार करो। ‘पुष्पहार लेकर ज्यों ही बालिका श्री गुरुजी की ओर बढ़ी, त्यों ही श्री गुरुजी ने जल्दी से खड़ें होकर पुष्पहार उसके हाथों से ले लिया और बालिका के चरणों का स्पर्श किया। यह देखकर आश्चर्यचकित माता बोली- आपने यह क्या किया? मैं तो अपनी बच्ची को आपसे आशीर्वाद दिलाने लाई थी और एक आप है कि उसके चरण स्पर्श कर रहे हैं।
श्री गुरुजी ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया- आपके लिए वह बच्ची होगी, परन्तु मेरे लिए तो वह साक्षात ‘‘माँ‘‘ है।
*ताई, मैं जाऊं?*
एक कठिन प्रसंग, किन्तु बाद में आया । उसी दिन श्री गुरुजी को कार्यार्थ प्रवास के लिये जाना था । डॉ. पांडे जी से पूछने पर उन्होंने कहा, “वैसे कहा जाय तो इस समय का संपूर्ण प्रवास क्रम ही स्थगित करना चाहिये । कम से कम आज तो आप मत जाईये । स्वास्थ्य इतना बिगड़ा हुआ है कि आगे क्या होगा इसका अंदाजा आज नहीं आ सकता। चाहे तो आप कल प्रस्थान करें, तब तक अंदाजा आ सकेगा ।” श्री गुरुजी ने कहा कि जो पूर्व नियोजित प्रवासक्रम है उसको स्थगित करना (Postpone) तो संभव नहीं है। ताईजी की उस अवस्था में श्री गुरुजी उनसे पूछने के लिये गये । पूछा, “ताई, मैं जाऊं?”। ताईजी ने कहा, “जा बेटा” । घर में जो अन्य लोग थे, आपस में बात करने लगे कि? “ताई मैं जाऊं?” यह लगातार पूछते रहने के लिये ही इस महापुरूष ने ताईजी के पेट में नौ मास तक वास किया होगा । और जा बेटा ऐसा हमेशा कहने के लिये ही क्या ताईजी ने इनको नौ मास अपने पेट में रखा था! श्री गुरूजी ने प्रवास के लिये प्रस्थान किया । ताईजी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी डॉ. पांडे और अन्य डॉक्टरों ने सम्हाल ली ।

कठोर कर्मठता ताईजी की एक विशेषता थी और श्री भाऊजी की भी वही विशेषता थी। अपना कर्तव्य करते हुए कठोर कर्मठता और जो समय बचता था, सारा व्रत वैकल्य, पुरश्चरण, अनुष्ठान, आदि में व्यतीत होता था । श्री गुरूजी का ग्रहयोग ही मानो ऐसा दिखता है कि प्रारंभिक जीवन में कठोर कर्मठता रखने वालों के साथ ही उनका पाला पड़ा था ।

*पूजा पर्व – रात भर पूजा पात्र स्वच्छ करो*
श्री अमिताभ महाराज के साथ श्री गुरुजी सारगाछी आश्रम में गये । अमिताभ महाराज ने स्वामी अखंडानंदजी महाराज से श्री गुरूजी का परिचय करा दिया । श्री गुरूजी जैसे उच्च विद्या विभूषित व्यक्ति का स्वीकार करने से उनको हर्ष होना चाहिये था । स्वामी अखंडानंद जी, किन्तु अलग ढंग से सोचते थे । यह ऊंची शिक्षा प्राप्त होगा, परन्तु अपने लिये क्या स्वीकार करने योग्य है, इसकी यथोचित परीक्षा किये बगैर वे तैयार नहीं थे । एक अलग संदर्भ का वाक्य जो स्वामी अखंडानंदजी के लिये पूर्णत: लागू पड़ता है, मेरे स्मरण में है ।” “He was slow to appreciate, and slower still to express it” इतनी उंची शिक्षा प्राप्त व्यक्ति को अमिताभ महाराज ने लाया, तो उसे रहने दो, ऐसा कहकर उन्होने श्री गुरूजी की कोई खास दखल नहीं ली, ऐसा लगा । एक-दो दिन के बाद श्री गुरूजी को एक काम करने के लिये कहा । दीपावली के पर्व पर रातभर जगन्माता की पूजा चलती थी । पूजा के बर्तन रात्री में अनेक बार पुकुर (छोटा जलाशय) के पानी से धोकर स्वच्छ करने का काम करने को श्री गुरुजी को कहा गया । स्वामीजी ने अमिताभ महाराज से कहा, “वह तुम्हारा गोलवलकर है, उसे कहना कि इतने सारे पूजा के बर्तन ठीक ढंग से स्वच्छ करने चाहिये ।” श्री गुरुजी पूरे एकाग्र चित्त से उस काम को रातभर करते रहे । स्वामी अखंडानंदजी ने श्री गुरुजी का काम, बर्तनों की स्वच्छता देखकर दूसरे दिन अमिताभ महाराज से कहा, “मैं उसे स्वीकार करने योग्य मानता हूं ।” श्री गुरूजी के श्रद्धेय गुरू महाराज भी ऐसे थे कि बिना कठोर परीक्षा के, उनका स्वीकार करने के लिये भी तैयार नहीं थे । श्री गुरूजी के प्रारंभिक जीवन काल में ऐसे ही लोगों से उनका पाला पड़ा था । कर्मकठोर जीवन की नींव मानों उनके प्राथमिक जीवनकाल में डाली गई थी ।
*पूजनीय डॉक्टरजी की सेवा शुश्रुषा*
परमपूजनीय डॉक्टर जी के संपर्क में श्री गुरूजी, एक अधिकारी के नाते नहीं आये थे । वहां भी उनके संपर्क का आरंभ सेवा-शुश्रुषा कार्य से ही हुआ था । डॉक्टरजी बहुत बीमार थे । नासिक (महाराष्ट्र) में उनका औषधोपचार चल रहा था । डॉक्टर जी की सेवा-शुश्रुषा एक कठिन, कष्टप्रद काम था । उनको बहुत पसीना आता था । हर २० – २५ मिनिट के पश्वात बनियन गीली हो जाने से बदलनी पड़ती थी । दवा पानी, परहेज, यह सब कुछ श्री गुरूजी ही देखते थे । इस सेवा कार्य का अनुभव कर डॉक्टर जी ने उनकी क्षमता को समझ लिया था । स्वयं का कठोर जीवन और कर्मकठोर लोगों से पाला पड़ना, यही विशेषता श्री गुरूजी के जीवन मे हम देखते हैं ।

*अपने प्रति कठोर, दूसरों के प्रति बहुत सहृदय*
श्री गुरूजी स्वयं अपने प्रति बहुत कठोर थे । आम तौर पर ऐसा दिखायी देता है कि स्वयं अपने प्रति कठोर रहने वाले दूसरों के प्रति भी कठोर रहते हैं । औरों को तकलीफ देते रहते हैं । श्री गुरूजी की विशेषता थी कि उनका स्वभाव ऐसा नहीं था । वे दूसरों के प्रति बहुत अधिक सहृदयता से व्यवहार करते थे । जब मैं उनके घर में रहने गया था तब मुझे यह अनुभव हुआ । यह मेरे लिये कोई श्रेय की बात नहीं थी, फिर भी कह देता हूं व्यवस्थित रहने का मेरा स्वभाव नहीं था । सुबह जगने के पश्चात् बिस्तर ठीक तह करके नियोजित स्थान पर रखने की आदत मुझे नहीं थी । श्री गुरूजी के मकान में पहली मंजिल पर बैठकर खाता था, पास ही श्री गुरूजी का कमरा था । लॉ कॉलेज में मुझे सुबह जाना रहता था इसलिये जल्दी जगकर, प्रातर्विधि, चाय पान आदि से निवृत होकर कॉलेज में चला जाता था । इस जल्दबाजी में अपना बिस्तरा लपेट कर नियोजित स्थान पर रखने का मुझे विस्मरण हो जाता था । कॉलेज में यह याद आती थी कि बिस्तर को लपेट कर रखना मैं भूल गया था । परंतु कॉलेज से लौटने के पश्चात् देखना था कि बिस्तर लपेट कर नियोजित स्थान पर रख दिया गया है । कमरे में मैं और नाना वैद्य, दो ही रहते थे । मैंने नाना को कहा कि, “माफ करना, मेरा बिस्तर आपको रखना पड़ता है । आपको कष्ट होता हैं, परन्तु मेरी आदत ही कुछ खराब है ।” नाना ने कहा, “आपका बिस्तर मैं कहां रखता हूं, जब मैं सुबह जगता तो तुम्हारा बिस्तर तो वहां दिखता ही नहीं ।” यह सुनकर मैं घबरा गया । मैंने सोचा कि दूसरे दिन कॉलेज में न जाते हुए और दूसरी सीढ़ी से टेरेस में जाना और मेरे बिस्तर को कौन लपेटता है, उसे देखता । दूसरे दिन वैसा करने पर मैंने देखा कि श्री गुरूजी ने ही मेरा बिस्तर लपेट कर नियोजित स्थान पर रख दिया था । इस बारे में उन्होंने कभी मुझे कहा नहीं, उलाहना देना तो दूर रहा। स्वयं अपने बारे में कठोर परन्तु दूसरों के बारे में उदारता, उनकी विशेषता थी ।

18/02/2020

18 फरवरी/बलिदान-दिवस

*अग्निधर्मी पत्रकार रामदहिन ओझा*

रामदहिन ओझा का जन्म श्री सूचित ओझा के घर 1901 की महाशिवरात्रि को ग्राम बाँसडीह (जिला बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा वहीं हुई। इसके बाद इनके पिता ने इन्हें उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता भेज दिया। वहाँ इनका सम्पर्क क्रान्तिकारियों से हुआ। इन्होंने स्वाधीनता संग्राम में कूदना शिक्षा से अधिक जरूरी समझा।

1921 में जब गांधी जी ने सत्याग्रह का आह्नान किया, तो जो सात सत्याग्रही सर्वप्रथम जेल गये, उनमें ये भी थे। गांधी जी ने अपने पत्र ‘हरिजन’ में इनके साहस की प्रशंसा करते हुए इन्हें ‘सप्तर्षिमंडल’ की संज्ञा दी थी। इनकी गतिविधियों से चिंतित होकर 11 मार्च 1921 को बलिया के जिलाधीश ने इन्हें तुरन्त जिला छोड़ने का आदेश दिया। अतः ये गाजीपुर आकर स्वतन्त्रता के लिए अलख जगाने लगे। इस पर 15 अप्रैल को गाजीपुर के जिलाधीश ने भी इन्हें जिला छोड़ने को कह दिया। 16 मई, 1921 को इन्हें गिरफ्तार कर छह महीने का कठोर कारावास दिया गया। 30 जनवरी, 1922 को फिर इन्हें पकड़कर एक साल के लिए जेल में डाल दिया।

सजा पूरी कर वे कोलकाता चले गये और वहाँ ‘विश्वमित्र’ नामक दैनिक समाचार पत्र से जुड़ गये। कुछ समय बाद वे ‘युगान्तर’ नामक साप्ताहिक समाचार पत्र के सम्पादक बने। इसके मुखपृष्ठ पर यह पंक्ति छपती थी - मुक्त हों हाथ, हथकड़ी टूटे, राष्ट्र का सिंहनाद घर-घर हो। इसी से पता लगता है कि समाचार पत्र में क्या होता होगा। इसके बाद वे ‘शेखावाटी’ समाचार पत्र के सम्पादक भी बने। वे जिस पत्र में भी रहे, उनकी कलम सदा अंग्रेजों के विरुद्ध आग ही उगलती रही।

युगान्तर में 4 अगस्त, 1924 को उन्होंने लिखा, ‘‘मालूम पड़ता है भारतीय सदा गुलाम ही रहना चाहते हैं। वह भी मामूली गुलाम नहीं। संसार के इतिहास में ऐसी गुलामी खोजे नहीं मिलेगी। पशु भी पिंजरे में बन्द रहने पर दो बूँद आँसू बहा सकते हैं; पर गुलाम भारतीय दिल खोलकर रो भी नहीं सकते।’’

इस पर शासन ने उन्हें कोलकाता छोड़ने का भी आदेश दे दिया। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। 1930 के नमक आन्दोलन में उन्होंने भाग लिया। शासन ने उन्हें बलिया से 27 अक्तूबर को गिरफ्तार कर छह माह के कठोर कारावास का दण्ड दिया। यह स्वाधीनता संग्राम में इनकी चौथी गिरफ्तारी थी; पर इससे भी झुकने या टूटने की बजाय इनका उत्साह और बढ़ गया।

शासन ने इन्हें रास्ते से हटाने का एक सरल मार्ग ढूँढा। इन्हें खाने में हल्का जहर दिया जाने लगा। इसके कारण 17 फरवरी, 1931 को इनकी तबियत बहुत खराब हो गयी। बलिया जेल के अधिकारियों ने बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें स्थानीय जमींदार महावीर प्रसाद के निवास पर पहुँचा दिया।

महादेव प्रसाद अपनी गाड़ी से उन्हें बलिया चिकित्सालय ले गये। वहाँ पर भी उन्हें उचित चिकित्सा नहीं मिली। इस पर उन्हें जानकी प्रसाद जी के आवास पर लाया गया। वहाँ रात भर तड़पने के बाद 18 फरवरी, 1931 की प्रातः उनका निधन हो गया। इस प्रकार उन्होंने केवल 30 साल की अल्पायु में ही बलिदानी चोला पहन लिया।

रामदहिन जी जैसे पत्रकारों के बारे में ही प्रख्यात पत्रकार बाबूराव विष्णु पराड़कर ने लिखा है, ‘‘वे ही सम्पादक थे, जिनसे धनी घृणा करते थे। शासक क्रुद्ध रहा करते थे। जो हमारे ही जैसा एक पैर जेल में रखकर धर्मबुद्धि से पत्र का सम्पादन किया करते थे।’’................................

06/11/2018

Happy Diwali to all ✨🙏✨

22/10/2018

👉*जहाँ हमारा स्वार्थ समाप्त होता है ..*
*वही से हमारी इंसानियत आरम्भ होती है !!*
*लोग कहते है कि आदमी को अमीर होना चाहिए..*
*और गांव के बुज़ुर्ग़ो का कहना है कि आदमी का जमीर होना चाहिए...।।*

*चित्र* ही नहीं...
* #चरित्र* भी सुंदर हो।"
*भवन* ही नहीं...
* #भावना* भी सुंदर हो।"
*साधन* ही नहीं...
* #साधना* भी सुंदर हो।"
*दृष्टि* ही नहीं...
* #दृष्टिकोण* भी सुंदर हो।""।।
🌹Good morning

have a beautiful day

08/07/2018

Ye lo dhamaka joke
😂😂😂😂😃😃😆😆
शहर के सबसे बड़े बैंक में एक बार एक बुढ़िया आई ।😊😊
उसने मैनेजर से कहा :- “मुझे इस बैंक में कुछ रुपये जमा करने हैं”😃😃

मैनेजर ने पूछा :- कितने हैं ?😋

वृद्धा बोली :- होंगे कोई दस लाख ।😎

मैनेजर बोला :- वाह क्या बात है, आपके पास तो काफ़ी पैसा है, आप करती क्या हैं ?😲😲

वृद्धा बोली :- कुछ खास नहीं, बस शर्तें लगाती हूँ ।😂😂

मैनेजर बोला :- शर्त लगा-लगा कर आपने इतना सारा पैसा कमाया है ? कमाल है…😳😳

वृद्धा बोली :- कमाल कुछ नहीं है, बेटा, मैं अभी एक लाख रुपये की शर्त लगा सकती हूँ कि तुमने अपने सिर पर विग लगा रखा है ।😜😜

मैनेजर हँसते हुए बोला :- नहीं माताजी, मैं तो अभी जवान हूँ और विग नहीं लगाता ।😔😔

तो शर्त क्यों नहीं लगाते ? वृद्धा बोली ।😌😌

मैनेजर ने सोचा यह पागल बुढ़िया खामख्वाह ही एक लाख रुपये गँवाने पर तुली है, तो क्यों न मैं इसका फ़ायदा उठाऊँ… मुझे तो मालूम ही है कि मैं विग नहीं लगाता ।😏😏

मैनेजर एक लाख की शर्त लगाने को तैयार हो गया ।👍

वृद्धा बोली :- चूँकि मामला एक लाख रुपये का है, इसलिये मैं कल सुबह ठीक दस बजे अपने वकील के साथ आऊँगी और उसी के सामने शर्त का फ़ैसला होगा ।😉😉

मैनेजर ने कहा :- ठीक है, बात पक्की…👍

मैनेजर को रात भर नींद नहीं आई.. वह एक लाख रुपये और बुढ़िया के बारे में सोचता रहा ।🙍

अगली सुबह ठीक दस बजे वह बुढ़िया अपने वकील के साथ मैनेजर के केबिन में पहुच और कहा :- क्या आप तैयार हैं ?😆😆

मैनेजर ने कहा :- बिलकुल, क्यों नहीं ?😇😇

वृद्धा बोली :- लेकिन चूँकि वकील साहब भी यहाँ मौजूद हैं और बात एक लाख की है, अतः मैं तसल्ली करना चाहती हूँ कि सचमुच आप विग नहीं लगाते, इसलिये मैं अपने हाथों से आपके बाल नोचकर देखूँगी । 😁😁

मैनेजर ने पल भर सोचा और हाँ कर दी, आखिर मामला एक लाख का था ।
वृद्धा मैनेजर के नजदीक आई और धीर-धीरे आराम से मैनेजर के बाल नोचने लगी । उसी वक्त अचानक पता नहीं क्या हुआ, वकील साहब अपना माथा दीवार पर ठोंकने लगे ।😱😱

मैनेजर ने कहा :- अरे.. अरे.. वकील साहब को क्या हुआ ?😱😱

वृद्धा बोली :- कुछ नहीं, इन्हें सदमा लगा है, मैंने इनसे पाँच लाख रुपये की शर्त लगाई थी कि आज सुबह दस बजे मैं शहर के सबसे बड़े बैंक के मैनेजर के बाल नोचकर दिखा दूँगी ।😜😜😝😝😂😂😂

ठोको ताली – एक दम ताजा है…!!👏👏👐👐😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝😝hus lo re kya rakha hai bjp congress mai.....!!!!

08/07/2018

चचा वोट डालकर बाहर आए और पोलिंग एजेंट से पूछा - तेरी चाची वोट डाल गई क्या?
एजेंट ने लिस्ट चेक कर के कहा - जी चचा वह वोट डाल गई!!
चचा भरे गले से बोले- जल्दी आता तो शायद मिल जाती,
पोलिंग एजेंट - क्यो चाचा आप साथ नही रहते?
चचा - बेटा उसे मरे हुए 15 साल हो गए हर बार वोट डालने आती है पर मिलती नही

13/02/2018

05/02/2018

Like my page

Hello guys
In this page you have to see all stuff related to my thought and emotions and some nature photos

Address

Shop No. 6 Gt Road Opp Ramila Ground
Ghaziabad
201001

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm

Telephone

9312558489

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Kumar traders and Jagdamba welding house posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share