Holistic Human Capital Development

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07/11/2023
06/02/2022

*मत चूको चौहान*

वसन्त पंचमी का शौर्य

*चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण!*
*ता उपर सुल्तान है, चूको मत चौहान!!*

वसंत पंचमी का दिन हमें "हिन्दशिरोमणि पृथ्वीराज चौहान" की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी इस्लामिक आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ बंदी बनाकर काबुल अफगानिस्तान ले गया और वहाँ उनकी आंखें फोड़ दीं।

पृथ्वीराज का राजकवि चन्द बरदाई पृथ्वीराज से मिलने के लिए काबुल पहुंचा। वहां पर कैद खाने में पृथ्वीराज की दयनीय हालत देखकर चंद्रवरदाई के हृदय को गहरा आघात लगा और उसने गौरी से बदला लेने की योजना बनाई।

चंद्रवरदाई ने गौरी को बताया कि हमारे राजा एक प्रतापी सम्राट हैं और इन्हें शब्दभेदी बाण (आवाज की दिशा में लक्ष्य को भेदनाद्ध चलाने में पारंगत हैं, यदि आप चाहें तो इनके शब्दभेदी बाण से लोहे के सात तवे बेधने का प्रदर्शन आप स्वयं भी देख सकते हैं।

इस पर गौरी तैयार हो गया और उसके राज्य में सभी प्रमुख ओहदेदारों को इस कार्यक्रम को देखने हेतु आमंत्रित किया।

पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पहले ही इस पूरे कार्यक्रम की गुप्त मंत्रणा कर ली थी कि उन्हें क्या करना है। निश्चित तिथि को दरबार लगा और गौरी एक ऊंचे स्थान पर अपने मंत्रियों के साथ बैठ गया।

चंद्रवरदाई के निर्देशानुसार लोहे के सात बड़े-बड़े तवे निश्चित दिशा और दूरी पर लगवाए गए। चूँकि पृथ्वीराज की आँखे निकाल दी गई थी और वे अंधे थे, अतः उनको कैद एवं बेड़ियों से आजाद कर बैठने के निश्चित स्थान पर लाया गया और उनके हाथों में धनुष बाण थमाया गया।

इसके बाद चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज के वीर गाथाओं का गुणगान करते हुए बिरूदावली गाई तथा गौरी के बैठने के स्थान को इस प्रकार चिन्हित कर पृथ्वीराज को अवगत करवाया

‘‘चार बांस, चैबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, चूको मत चौहान।।’’

अर्थात् चार बांस, चैबीस गज और आठ अंगुल जितनी दूरी के ऊपर सुल्तान बैठा है, इसलिए चौहान चूकना नहीं, अपने लक्ष्य को हासिल करो।

इस संदेश से पृथ्वीराज को गौरी की वास्तविक स्थिति का
आंकलन हो गया। तब चंद्रवरदाई ने गौरी से कहा कि पृथ्वीराज आपके बंदी हैं, इसलिए आप इन्हें आदेश दें, तब ही यह आपकी आज्ञा प्राप्त कर अपने शब्द भेदी बाण का प्रदर्शन करेंगे।

इस पर ज्यों ही गौरी ने पृथ्वीराज को प्रदर्शन की आज्ञा का आदेश दिया, पृथ्वीराज को गौरी की दिशा मालूम हो गई और उन्होंने तुरन्त बिना एक पल की भी देरी किये अपने एक ही बाण से गौरी को मार गिराया।

गौरी उपर्युक्त कथित ऊंचाई से नीचे गिरा और उसके प्राण पंखेरू उड़ गए। चारों और भगदड़ और हा-हाकार मच गया, इस बीच पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार एक-दूसरे को
कटार मार कर अपने प्राण त्याग दिये।

*"आत्मबलिदान की यह घटना भी 1192 ई. वसंत पंचमी वाले दिन ही हुई

हर हर महादेव, जय बाबा केदारनाथ।।👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏" केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़...
02/02/2022

हर हर महादेव, जय बाबा केदारनाथ।।
👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
" केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी "
एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की - कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।
पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा - बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।
बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला - कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा - तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा - नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
उन्होंने कहा - लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था - लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है।

🙏🙏आपकी भक्ति को प्रणाम🙏🙏l

On 26th Jan 1930, we gave the declaration of Purna Swaraj from the British rule. On 26th Jan 1950, we adopted our Consti...
26/01/2022

On 26th Jan 1930, we gave the declaration of Purna Swaraj from the British rule. On 26th Jan 1950, we adopted our Constitution & declared ourselves a Republic.

My heartiest greetings to all fellow Indians on 73rd

#गणतंत्र_दिवस

24/01/2022

Good morning friends. 23rd January is a day extremely close to my heart. 18 years ago, on this day, we earned the right to proudly display our National Flag in our homes, offices, etc freely with respect and dignity on all days of the year, thanks to a historic Supreme Court judgement.

Before 23 Jan 2004, we Indians weren’t allowed to display the flag except on designated national holidays..It took a decade long legal struggle to win the right to display the Tiranga on all days of the year.

I urge everyone to proudly display the National Flag and dedicate ourselves to making the India of our dreams.

16/01/2022

प्रेम सत्य है प्रेम शाश्वत
प्रेम विरह है प्रेम में तड़पन,
प्रेम ही ईश्वर प्रेम ही जीवन
प्रेम ही मन का है दर्पण!

जब प्रेम ह्रदय में छा जाए
जो मन को अपने भा जाए,
उसको रखना निज जीवन में,
जो प्रीत हृदय में जगा जाए

12/01/2022

सर्वे

ज्यादा सैलरी वाली बहू मत ढूँढिए !
ज्यादा संस्कारों वाली बहु ढूँढिए !!

टिंग-टॉन्ग.... दरवाजे पर घन्टी बजती है।

बहु देखना कौन है? सोफे पर लेटकर टीवी देख रहे ससुर ने कहा।
माया किचन से निकलकर दरवाज़ा खोलती है।
हां जी, आप कौन?
'महिलाओं की स्थिति पर एक सर्वे चल रहा है। उसी की जानकारी के लिए आई हूँ।' दरवाज़े पर खड़ी महिला ने जवाब दिया।
कौन है बहु? पूछते हुए ससुरजी बाहर आ जाते हैं।

महिला- 'बाऊजी सर्वे करने आई हूँ।'

घनश्याम जी- 'हां पूछिए'

महिला- 'आपकी बहु सर्विस करती हैं या हाउस वाइफ हैं?'
माया हाउस वाइफ बोलने ही वाली होती है कि उससे पहले घनश्याम जी बोल पड़ते हैं।

घनश्याम जी- 'सर्विस करती है'

'किस पद पर हैं और किस कंपनी में काम कर रही हैं?' महिला ने पूछा।

घनश्याम जी कहते हैं
वो एक नर्स है, जो मेरा और मेरी पत्नी का बखूबी ध्यान रखती है। हमारे उठने से लेकर रात के सोने तक का हिसाब बहु के पास होता है। ये जो मैं आराम से लेटकर टीवी देख रहा था ना वो माया की बदौलत ही है।

माया बेबीसीटर भी है। बच्चों को नहलाने, खिलाने और स्कूल भेजने का काम भी वही देखती है। रात को रो रहे बच्चे को नींद माँ की थपकी से ही आती है।

मेरी बहु ट्यूटर भी है। बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी इसी के कंधे पर है।

घर का पूरा मैनेजमेंट इसी के हाथों में है। रिश्तेदारी निभाने में इसे महारत हासिल है।

मेरा बेटा एयरकंडीशन्ड ऑफिस में चैन से अपने काम कर पाता है तो इसी की बदौलत। इतना ही नहीं ये मेरे बेटे की एडवाइजर भी है।

ये हमारे घर की इंजन है। जिसके बग़ैर हमारा घर तो क्या इस देश की रफ़्तार ही थम जाएगी।

बाऊजी मेरे फॉर्म में इनमें से एक भी कॉलम नहीं है, जो आपकी बहु को वर्किंग कह सके।

घनश्याम जी मुस्कुराते हुए कहते हैं, फिर तो आपका ये सर्वे ही अधूरा है।

महिला- 'लेकिन बाऊजी इससे इनकम तो नहीं होती है ना।

घनश्याम जी कहते हैं, अब आपको क्या समझाएं।
इस देश की कोई भी कंपनी ऐसी बहुओं को वो सम्मान, वो सैलरी नहीं दे पाएंगी।
बड़ी शान से वो कहते हैं, मेरी हार्ड वर्किंग बहु की इनकम हमारे घर की मुस्कुराहट है !

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