25/11/2023
#बुंदेलखंड की अयोध्या है #ओरछा..
विश्व का अकेला मंदिर है जहां #राम की पूजा राजा के रूप में होती है और उन्हें आरती के समय सलामी दी जाती है..
ओरछा को दूसरी #अयोध्या के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहां पर रामराजा अपने बाल रूप में विराजमान हैं। यह जनश्रुति है कि श्रीराम दिन में यहां तो रात्रि में अयोध्या विश्राम करते हैं।
शयन आरती के पश्चात उनकी ज्योति हनुमानजी को सौंपी जाती है, जो रात्रि विश्राम के लिए उन्हें अयोध्या ले जाते हैं-
#सर्व_व्यापक_राम_के_दो_निवास_हैं_खास,
दिवस ओरछा रहता हैं,शयन अयोध्या वास।
शास्त्रों में वर्णित है कि आदि मनु - सतरूपा ने हजारों वर्षों तक शेषशायी विष्णु को बालरूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की। विष्णु ने उन्हें प्रसन्न होकर आशीष दिया और त्रेता में राम, द्वापर में कृष्ण और कलियुग में ओरछा के रामराजा के रूप में अवतार लिया।
इस प्रकार मधुकर शाह और उनकी पत्नी गणेशकुंवरि साक्षात दशरथ और कौशल्या के अवतार थे। त्रेता में दशरथ अपने पुत्र का राज्याभिषेक न कर सके थे, उनकी यह इच्छा भी कलियुग में पूर्ण हुई।
मनोहारी कथा रामराजा के अयोध्या से ओरछा आने की एक मनोहारी कथा है।