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10/11/2022
सरकारी नौकरी छोड़ गाँवों की स्थिति सुधारने के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले ‘डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी’ को सरकार ने किया...
29/01/2022

सरकारी नौकरी छोड़ गाँवों की स्थिति सुधारने के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले ‘डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी’ को सरकार ने किया पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी (उत्तराखंड)

“धारा के विरुद्ध तैरने का हुनर हर किसी के पास नहीं होता। एक अच्छा तैराक वही होता है जो विपरीत तैर कर भी अपनी मंजिल तक पहुंच जाए”। इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) के संस्थापक डॉ.अनिल प्रकाश जोशी जी। जिन्होंने समाज सेवा करने और ग्रामिणों की स्थिति सुधारने के लिए अपनी सरकारी महाविद्यालय में प्राध्यापक की नौकरी तक छोड़ दी। उन्होंने विज्ञान व लोक विज्ञान का समावेश कर उत्तराखंड समेत हिमालयी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर संवारने की ठानी। उत्तराखंड से लेकर पूर्वोत्‍तर राज्यों तक के गांवों में उनके द्वारा किए गए कार्यों का ही परिणाम है कि वो आज पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित हुए हैं। लेकिन डॉ. अनिल जोशी जी के लिए अपनी नौकरी छोड़ने और समाज सेवा करने का कार्य करना इतना आसान नहीं था। आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की प्रेरणादायक कहानी।

पिछले 35 साल से पर्यावरण के लिए कर रहें हैं काम

उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के रहने वाले डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी एक पर्यावरणविद हैं, जो पिछले 35 सालों से पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यहीं नहीं हिमालय पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन को भी संचालित करते हैं जो देशभर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। इन्होंने शुरू से ही गांव के लोगों और गांव के संसाधनों पर काम किया है। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी हेस्को नाम संस्था भी चलाते हैं जिसमें पर्यावरण को सुधरने के प्रयासों पर काम किया जाता है। इन्होंने इस काम के लिए अपनी प्रोफेसर की नौकरी तक छोड़ दी और इस क्षेत्र में आ गए।

समाजसेवा करने के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी विभिन्न राज्यों में 10 हजार से अधिक गांवों को हेस्को के कराए गए कार्यों से लाभान्वित कर चुकें हैं। डॉ.जोशी जी को वर्ष 1976 में प्राध्यापक के पद पर नियुक्ति मिली, मगर मन में हिमालय और पहाड़ की चिंता ही लगी हुई थी। 1983 में उन्होंने कुछ प्राध्यापकों व विद्यार्थियों को साथ लेकर हेस्को संगठन की स्थापना कर इसका रास्ता तलाशा। फिर लोक विज्ञान और विज्ञान का समावेश कर गांव-समाज की बेहतरी को कार्य करने की मुहिम शुरू कर दी। लेकिन अपनी सरकारी नौकरी के कारण वो इस काम को पूरा समय नहीं दे पा रहे थे। उनकी नौकरी उनके काम में बाधा बनने लगी थी जिसके बाद 1992 में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वह पूरी तरह से गांव एवं समाज की सेवा में समर्पित हो गए। उन्होंने 'लोकल नीड मीट लोकली' का नारा देते हुए स्थानीय संसाधनों से स्थानीय जरूरतें पूरी करने पर जोर दिया। राज्य में उनके प्रयासों से 38 गांव मॉडल के रूप में विकसित किए गए हैं।

गांव को बनाया आत्मनिर्भर

डॉ. जोशी जी की स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से संवारने के लिए प्रसाद कार्यक्रम की उनकी मुहिम काफी प्रभावी रही है। वैष्णोदेवी, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री में इस पहल के तहत स्थानीय फसलों पर आधारित प्रसाद स्थानीय लोगों से ही तैयार कराया गया। इससे रोजगार भी मिला और खेती को संबल भी। जल स्रोतों के संरक्षण पर भी कार्य किया गया और अब तक 125 जलधारे पुनर्जीवित किए गए हैं। उन्होंने ना केवल उत्तराखंड, बल्कि अन्य हिमालयी राज्यों में गांव व स्थानीय समुदाय की उन्नति के लिए भी कार्य किया है।

कौन बनेगा करोड़पति में भी हुए थे आमंत्रित

बीते दिनों अनिल जोशी जी कौन बनेगा करोड़पति के कर्मवीर स्पेशल शो में भी आमंत्रित किए गए थे. जहां पर अनिल जोशी जी ने न सिर्फ महानायक अमिताभ बच्चन के सवालों का जवाब दिया था, बल्कि शो के दौरान ही पर्यावरण संरक्षण की बातें भी साझा की थी. शो के माध्यम से उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर किया, साथ ही देशवासियों को हवा, मिट्टी और पानी के संरक्षण का संदेश भी दिया। शो में उन्होंने 25 लाख रुपए भी जीते थे।

पद्मश्री एवं पद्मभूषण सहित कई सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित

डॉ. अनिल जोशी जी अपने इस सराहनीय कार्यों की बदौलत कई सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। भारतीय समाज में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2006 में उन्हें पद्मश्री के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया था यही नहीं उन्हें उत्तराखंड में सामाजिक कार्यों के लिए 2020 में पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस ने उन्हें 1999 में जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया और द वीक पत्रिका ने उन्हें 2002 में ‘मैन ऑफ द ईयर’ चुना। 2006 में उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग में अपने प्रयासों के लिए जमनालाल बजाज पुरस्कार भी प्राप्त किया है।

अपने कार्यों से गांव की दशा बदलने वाले डॉ. अनिल जोशी जी आज सही मायने में लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) है। उन्होंने अपने कार्यों की बदौलत सफलता की कहानी (Success Story) लिखी है। समाज को आज ऐसे लोगों की बहुत जरूरत है। Bada Business डॉ. अनिल जोशी जी के समाज सेवा के लिए किए गए कार्यों की तहे दिल से सराहना करता है।

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22/01/2022

➤क्या आप बिज़नेस को शुरू करने में इन परेशानियों में अटके हुए है?◄
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