25/05/2026
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिलेगा नया बल, PMFME योजना 5 साल और बढ़ाने की तैयारी
नई दिल्ली।
ग्रामीण भारत में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) को अगले पांच वर्षों तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। सरकार इस योजना के दायरे और बजट दोनों को बढ़ाने पर विचार कर रही है, जिससे लाखों ग्रामीण उद्यमियों, किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों और युवा स्टार्टअप्स को लाभ मिलने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार योजना में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों पर भी विचार कर रही है। इनमें सब्सिडी सीमा बढ़ाना, महिलाओं एवं पर्वतीय क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता देना, ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग सहायता को मजबूत करना तथा आधुनिक मशीनरी और प्रशिक्षण सुविधाओं को बढ़ावा देना शामिल है।
वर्तमान में PMFME योजना के तहत देशभर में हजारों सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा चुका है। योजना के माध्यम से आटा चक्की, मसाला उद्योग, मिनी राइस मिल, तेल प्रसंस्करण, फल-सब्जी प्रसंस्करण और डेयरी आधारित छोटे उद्योग तेजी से विकसित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित होते हैं, तो इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे पलायन कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस योजना के अंतर्गत छोटे खाद्य उद्योगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई स्वयं सहायता समूह और युवा उद्यमी स्थानीय उत्पादों को ब्रांड बनाकर बाजार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
ग्रामीण उद्यमिता से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि सरकार प्रशिक्षण, परियोजना रिपोर्ट (DPR), मशीनरी चयन, वित्तीय मार्गदर्शन और विपणन सहायता को और मजबूत करती है, तो भारत का ग्रामीण क्षेत्र आने वाले वर्षों में खाद्य प्रसंस्करण का बड़ा केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, PMFME योजना का विस्तार “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी नई गति देगा।