19/10/2025
सत्यं च येन निरतं रोगं विधूतं, अन्वेषितं च सविधिं आरोग्यमस्य।
गूढं निगूढं औषध्यरूपम्, धन्वन्तरिं च सततं प्रणमामि नित्यं॥
जिन्होंने निरंतर समस्त रोगों का नाश किया है, जिन्होंने आरोग्य की विधि का ज्ञान कराया है, जिन्होंने औषधियों के रहस्यों का अनावरण किया है, उन भगवान धन्वन्तरि को मैं नित्य प्रणाम करता हूँ|