11/05/2026
॥ जय श्री राम ॥
॥ जय भगवान परशुराम ॥
> “धर्मो रक्षति रक्षितः”
भगवान परशुराम जी ने सदैव अन्याय, अत्याचार एवं अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म एवं समाज की रक्षा का संदेश दिया।
उन्हीं के आदर्शों से प्रेरित होकर हम सामान्य वर्ग, विद्यार्थियों एवं समाज के अधिकारों की रक्षा हेतु संकल्पित हैं।
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ज्ञापन
विषय : दिनांक 14/05/2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में संभावित निर्णय, यूजीसी के प्रस्तावित प्रावधानों एवं आरक्षण व्यवस्था में असमानता के विरोध में ज्ञापन।
सेवा में,
माननीय जिलाधिकारी / उपजिलाधिकारी / तहसीलदार /
मुख्य कार्यपालन अधिकारी (BDO) / संबंधित अधिकारी महोदय,
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम सभी सदस्य एवं पदाधिकारी भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा की ओर से आपके माध्यम से शासन एवं प्रशासन का ध्यान एक अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील विषय की ओर आकर्षित करना चाहते हैं।
दिनांक 14/05/2026 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में यूजीसी एवं आरक्षण व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय आने की संभावना है। उक्त विषय को लेकर देशभर के सामान्य वर्ग, विशेषकर ब्राह्मण समाज एवं मेधावी विद्यार्थियों में गहरी चिंता एवं व्यापक असंतोष व्याप्त है।
हमारा संगठन यह मानता है कि शिक्षा, रोजगार एवं न्याय व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त होना चाहिए। किंतु वर्तमान परिस्थितियों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों एवं युवाओं को अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, उच्च कटऑफ एवं मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि आरक्षण व्यवस्था के कारण योग्यता एवं अंक प्रणाली में भारी असमानता देखने को मिलती है।
आज सामान्य वर्ग के लाखों प्रतिभाशाली विद्यार्थी कठिन परिश्रम एवं उच्च अंक प्राप्त करने के बावजूद अवसरों से वंचित हो रहे हैं। इससे युवाओं में निराशा, असुरक्षा एवं अन्याय की भावना लगातार बढ़ रही है।
यदि दिनांक 14 मई 2026 को आने वाला निर्णय सामान्य वर्ग एवं देश के करोड़ों युवाओं के हितों के विरुद्ध जाता है, तो यह केवल विद्यार्थियों के भविष्य पर आघात नहीं होगा, बल्कि समाज में व्यापक असंतोष एवं विभाजन की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
अतः भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा निम्न बिंदुओं के माध्यम से अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराती है—
हमारी प्रमुख मांगें :
1. सामान्य वर्ग एवं मेधावी विद्यार्थियों के हितों के विरुद्ध किसी भी प्रकार का निर्णय लागू न किया जाए।
2. यूजीसी के ऐसे किसी भी प्रस्तावित प्रावधान को निरस्त किया जाए जिससे सामान्य वर्ग के युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
3. शिक्षा एवं रोजगार में योग्यता आधारित समान अवसर की नीति लागू की जाए।
4. आरक्षण व्यवस्था की पुनः समीक्षा कर संतुलित एवं न्यायसंगत व्यवस्था लागू की जाए।
5. सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों एवं युवाओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
6. ऐसा कोई भी कानून या प्रावधान लागू न किया जाए जिससे समाज में असंतोष, भेदभाव एवं अन्याय की भावना उत्पन्न हो।
7. शासन एवं प्रशासन सभी वर्गों के मध्य समानता, न्याय एवं सामाजिक संतुलन बनाए रखने हेतु ठोस कदम उठाए।
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मान्यवर,
हम आपसे विनम्र निवेदन करते हैं कि देश के करोड़ों सामान्य वर्गीय विद्यार्थियों एवं युवाओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार किया जाए, जिससे भारी जनमत के विरुद्ध कोई निर्णय लागू न हो तथा समाज में व्यापक असंतोष की स्थिति उत्पन्न न होने पाए।
यदि सामान्य वर्ग एवं मेधावी युवाओं की भावनाओं की लगातार उपेक्षा की जाती है तथा उनके हितों के विरुद्ध निर्णय लागू किया जाता है, तो संगठन एवं समाज के लोग लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। आवश्यकता पड़ने पर उग्र आंदोलन की दिशा में भी कदम बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा इस प्रकार के अन्यायपूर्ण एवं असंतुलित प्रावधानों का पुरजोर विरोध करती है, कड़ा विरोध करती है एवं निरंतर विरोध करती रहेगी।
अतः आपसे निवेदन है कि हमारी भावनाओं एवं मांगों को शासन तक पहुंचाकर न्यायोचित कार्यवाही कराने का कष्ट करें।
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भवदीय
अनिल कुमार पांडे
प्रदेश अध्यक्ष
भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा
मध्य प्रदेश
📞 संपर्क सूत्र : 63862233887
॥ जय श्री राम ॥
॥ जय भगवान परशुराम ॥