06/01/2026
इतना क्या ही बिगाड़ा होगा इन जातंकवादियों का डॉ अंबेडकर जी ने जो ये आए दिन उनका किसी न किसी रूप में अपमान करते रहते हैं? बाबा साहेब से तो जो उस वक्त बन पड़ा वह किया। और सबके लिए किता। एक अकेला था इतनी बड़ी आबादी में फिर भी वही बर्दाश्त नहीं हो रहा सोचो पूरी आबादी शिक्षित और सतर्क हो जाए तो?
हां उन्होंने बस कुछ कड़े और वाजिब सवाल पूछे थे धर्म और समाज से जो हर व्यक्ति को ज़रूर पहुंचने चाहिए लेकिन अफ़सोस यह कि इन विरोधियों ने अपनी स्मृति और शास्त्र भी ठीक से नहीं पढ़े हैं। आप कल्पना कीजिए किसी काल्पनिक फिल्म में भी जब जाति का अपमान हो तब भी बावल होता है वह तो शास्त्र हैं।
किसी को महान बताए है इसमें हमें कोई आपत्ति नहीं लेकिन किसी को नीच बताया है इसकी अस्वीकृति सदा रहेगी इसके लिए शास्त्रों में ही नहीं आचरण में भी सुधार की आवश्यकता मनुवादियों को है। यदि सुधार नहीं हो सकता तो खुलेआम स्वीकार कीजिए कि हम जातिवादी हैं। पर आज के समय जातांकवाद नहीं चलेगा।
और यह बताओ कि क्यों देश को गृहयुद्ध की ओर लेकर जाने में तुले हो? सामाजिक बंटवारा तो सुधारा नहीं गया तो क्या फिर से देश का बंटवारा चाहते हो? दुनिया तरक्की कर रही है उनका आज रोबोटिक और तकनीकी जमाने में हम किसी भी सूरत में मुकाबला नहीं कर सकते हैं और तुम बेजान और तस्वीरें फाड़ने, तोड़ने में लगे हो।
और देखो मीडिया भी क्या कह रहा कि अंबेडकर जैसा पोस्टर? अब अंबेडकर जैसे से दिक्कत है या अंबेडकर से दिक्कत है या अंबेडकरवादियों से दिक्कत है बता दीजिए। हालांकि दिक्कत पूरी अनुसूचित जाति से है क्योंकि उनका इस देश में सिवाय संविधान के कोई अपना नहीं है और यही तुम्हारी मनमानी रोकता है।
हालांकि जानते ये विरोधी भी हैं कुछ उखाड़ नहीं पाओगे लेकिन एक अनुरोध है कि क्यों समाज को बरगला रहे हो और युवाओं का करियर ख़राब कर रहे हो? यदि युद्ध, धर्म, जाति या वर्चस्व का इतना ही शौक है तो जाओ बांग्लादेश और पाकिस्तान वहां से हिंदुत्व की शुरुआत तथा धर्म की रक्षा करो उसके बाद यहां बात कर लेंगे।
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