30/03/2026
Raghav chadda ka ye byan kya shi hai.
हर साल वही स्कूल, वही क्लास, वही किताबबे... फिर भी हर बार नया "एडमिशन" और नई फीस ? बच्चे तो वही हैं, पढ़ाई भी वही... लेकिन parents की जेब हर साल हल्की हो जाती है। ये सिर्फ सिस्टम नहीं, एक ऐसा दबाव है जो धीरे-धीरे आम इंसान को तोड़ देता है।
जब कोई इस मुद्दे पर आवाज उठाता है,
तो वो सिर्फ अपनी नहीं, लाखों parents की बात करता है राघव चड्डा ने फिर वही सवाल उठाया-
आखिर हर साल admission के नाम पर फीस क्यों?
शिक्षा हक है, business नहीं। बच्चों के सपनों की कीमत इतनी भारी नहीं होनी चाहिए कि parents के सपने ही टूट जाएं।
अब वक्त है सवाल पूछने का... क्योंकि बदलाव तभी आता है जब आवाज उठती है।