22/03/2023
बुलंद हौसले! अथक परिश्रम और छोटी सोच का बड़ा जादू!
एक विशाल वृक्ष भी एक बिंदी समान बीज से का ही परिणाम है और यकीनन यह हकीकत एक नव उद्यमी के लिए हौसला लेने लायक है!
आज व्यवसाय या उद्यम का क्रेज हो चला है. कारण अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग हैं. कोई व्यापार व्यापारिक पृष्ठभूमि से होने के कारण व्यवसाय क्षेत्र मे है, कई स्वरोजगार, आजीविका के लिए, कई साईड इनकम के लिए तो अनेक अपनी रुचि से आमदनी के लिए, बेरोजगारी की इंतहा से भी कई लोग अपना बिजनेस शुरू करने का प्रेरक है.
परंतु आशातीत सफलता शायद ही सबको मिलती है, अपने थोड़े से अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं इसका कारण उपयुक्त वातावरण का ना होने के साथ साथ सामान्यतः जनमानस की मानसिकता है जहां रचनात्मकता, नवीनीकरण, रिस्क लेने से घबराहट और बड़ी सोच का ना होना भी बड़ा कारण है, साथ ही व्यवस्था और प्रशासन की लालफीताशाही, सिथिल अधिकारी और हर कदम पर सक्रिय करप्शन, भारष्टाचार भी हैं.
वातावरण अनुकूल शायद ही मिले तो यहां एक उद्यमी को अपने इरादे बड़े और अपनी सोच मजबूत रखकर एक आयोजित तरीके से अपना विकास प्रयत्न नियोजित करना ही बेहतरीन विकल्प है.
"उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः!
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः !"
सच माने मात्र जुगाड, राजनैतिक सांठ गांठ ही विकास का रास्ता नहीं है. बाजार व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण आपके ग्राहक हैं! कहा गया है ग्राहक ही भगवान है, customer is the King, तो एक सफल उद्यमी हमेशा इस प्रयत्न में रहता है कि कैसे वह अपने ग्राहकों की जरूरतों को समझे उनके जीवन को अपने उत्पाद से कैसे अधिक सरल, उत्साह और संतुष्टि से परिपूर्ण करे.
यहां आप भारतीय रेल द्वारा परोसा जानेवाला नाश्ता देख सकते हैं और इसमें दी जानेवाली वस्तुओं को गौर से देखें. कितना बड़ा बाजार है, प्रतिदिन लाखों लोगों द्वारा उपभोग किया जाता है. इसमें प्रति आहार दी जानेवाली वस्तुओं की मात्रा देखिए, क्या vocal for local मात्र जुमले से हकीकत नही बन सकता? बन सकता है पर क्या उद्यमियों की ऐसी तैयारी आपको दिखती है? इस मात्रा में उत्पादन और उसका डिस्ट्रीब्यूशन संभव है? क्या ऐसा सहकारिता का प्रयत्न है? शायद नहीं, विकास win-win की सोच से ही संभव है आज अनेक बिजनेस इंक्यूबेटर उपलब्ध हैं, उनसे व्यवसाय के गुण सीखकर और बाजार से पूंजी प्राप्त करें