Rangilo kumaun mero chhabilo garhwal

Rangilo kumaun mero chhabilo garhwal Raj tour and travel

11/09/2018
Yaad aaya kuch
10/09/2018

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Uttarakhand ki khubsurat wadiya
10/09/2018

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हमारी संस्कृति हमारी परम्परा शादी बियाह में भोजन बनाते हुए पंडित जी
17/03/2018

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09/11/2017

समस्त उत्तराखण्ड वासियों को उत्तराखण्ड़ राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

इस रैबार से ठीक 'रैबार' नहीं गया साहब..!जंगल में मोर नाचा किसने देखा, किसने देखा ? जी हां, उत्तराखंड का भविष्य तय करने क...
08/11/2017

इस रैबार से ठीक 'रैबार' नहीं गया साहब..!

जंगल में मोर नाचा किसने देखा, किसने देखा ? जी हां, उत्तराखंड का भविष्य तय करने के लिए आयोजित हुए 'रैबार 2017' का हश्र कुछ ऐसा ही रहा । रैबार तो सिर्फ नाम भर कर रहा, बाकी तो यह पूरा सत्ता और सितारों के मिलन का पावर शो रहा । कुछ नामचीन हस्तियों का जमावड़ा तो जरूर लगा लेकिन रैबार यानि संदेश राजमहल की दीवारों के पीछे ही गुम हो गया। हो सकता है 12 घंटे तक राजमहल में चले रैबार में बड़ी काम की बातें हुई हों। अपनी जड़ों से दूर जाकर कामयाब पहाड़ियों ने बड़ी-बड़ी काम की बातें की हों। सरकार को भी विकास के रोजगार के संसाधन बढाने के,और पलायन रोकने के मंत्र दिए हों ।लेकिन सवाल यह है कि किसने सुने वो मंत्र और किसने की उन पर चर्चा ? वाकई यह रैबार एक समुद्र मंथन की मानिद था तो कौन था वहां जो यह रैबार प्रदेश भर में पहुंचाता ? कौन यह बताता कि मंच से जो मंत्र उत्तराखंड के भविष्य को लेकर या यूं कहिए नए उत्तराखंड की नींव रखने को लेकर बांचे गए वो शब्द व्यवहारिक हैं भी या नहीं ? कौन था वहां ऐसा सुनने वाला ? शायद कोई नहीं। हर कोई वहां किसी न किसी मोह पाश में बंधा था, यूं मानो वही बोलने वाले और वही सुनने वाले। न कोई सवाल न कोई जवाब न कोई चर्चा। पूरा अयोजन न सिर्फ उम्मीद के विपरीत रहा बल्कि कई गंभीर सवाल भी छोड़ गया। आश्चर्य यह रहा कि इस मंथन से मीडिया को दूर रखा गया। सरकार ने उतना ही बताया जितना चाहा, वो भी मात्र औपचारिकता के लिए। अब ऐसे में कैसे संभव है कि आयोजन पर सवाल न उठे ? दरअसल यहीं से आयोजन सवालों में घिरता चला गया, कार्यक्रम का नाम रखा गया रैबार और जिसके माध्यम से रैबार यानि संदेश आमजन तक पहुंचता, उसी पर लगा दी बंदिश। आखिर क्यों और किसे खटक रही थी मीडिया की मौजूदगी ? यह कोई राजनीतिक दल की गोपनीय बैठक तो नहीं थी, यह तो उत्तराखंड के मुद्दों पर खुली चर्चा थी। सरकार को भी ऐसा कोई डर नहीं होना चाहिए था। अच्छा ही होता उत्तराखंड मूल की नामचीन हस्तियों के विचार संदेश के तौर पर प्रचारित-प्रसारित होते, उन पर जनमत भी लिया जाता । मीडिया इसमें उपयोगी ही साबित होता लेकिन अचरज है कि सरकार ने क्यों यह उचित नहीं समझा, क्यों इतनी गोपनियता बनाए रखी ? दूसरा अहम सवाल यह है कि आयोजन की मंशा के मद्देनजर इसमें अधिकाधिक जनसहभागिता होनी चाहिए थी, लेकिन इसके विपरीत इसे वीवीआईपी बना दिया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के सरोकारों से जुड़ी शख्सियत, राज्य आंदोलन में शिद्दत से जुड़े रहे प्रमुख आंदोलनकारियों और राज्य के मुद्दों पर जमीनी काम कर रहे समाजिक कार्यकर्ताओं को क्यों नहीं आमंत्रित किया गया ? एक अहम सवाल यह भी कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल जिन्हें कि कार्यक्रम का मुख्य चेहरा प्रचारित किया गया, उन्होंने कार्यक्रम से आखिरी क्षणों में किनारा किया या उनका कार्यक्रम था ही नहीं ? दोनो ही स्थितियों में सरकार पर सवाल है। यदि कार्यक्रम में उनका आना तय नहीं था तो क्यों मुख्यमंत्री अंत तक एक अन्य उनके आने का प्रचार करते रहे ? एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल यह भी कि कार्यक्रम वाकई यदि उत्तराखंड के भविष्य से जुडा था और इसमें उत्तराखंड मूल के सफल प्रवासियों को ही आमंत्रित किया जाना था तो क्यों उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आमंत्रित किया गया ? जबकि उत्तराखंड के सवालों के लिये आदित्यनाथ आज सर्वाधिक प्रासंगिक भी हैं। यह वह अनुत्तरित सवाल हैं जिनका जवाब संभवत: किसी जिम्मेदार के पास नहीं, ऐसे ही तमाम सवालों पर रैबार कटघरे में हैं । खैर अब बात मुद्दे की, यह इत्तेफाक है कि एक ओर देहरादून में इस आयोजन की तैयारी जोरों पर थी और उसी बीच मोदी के जैम्स बांड कहे जाने वाले अजित डोवल के पुत्र शौर्य डोवल को लेकर सोशल मीडिया में खबरें वायरल थीं, दिलचस्प यह भी कि खुद शौर्य डोवल भी इस कार्यक्रम का हिस्सा थे। वायरल खबरों के मुताबिक शौर्य जिस इंडिया फाउंडेशन नाम की संस्था के निदेशक हैं, वह रसूखदार लोगों, विदेशी कंपनियों, उद्योगपतियों, केंद्रीय मंत्रियों और सचिवों को एक छत के नीचे एकत्र करने का मंच बना हुआ है । संस्था नीतिगत व संवेदनशील मसलों पर सेमिनार आयोजित करती है, जिसमें कंपनियों से विज्ञापन सेमिनार और पत्रिका प्रकाशन के नाम पर मोटी स्पांसरशिप ली जाती है। शौर्य डोवल को लेकर वायरल हो रही इस खबर में कितनी सत्यता है, यह कहा नहीं जा सकता लेकिन उत्तराखंड में आयोजित रैबार को लेकर जरूर ऐसा ही कुछ सामने आ रहा है। हकीकत यह है कि यह आयोजन सरकार का था ही नहीं। कार्यक्रम की मास्टर माइंड पूरी तरह से हिल मेल नाम की दिल्ली की एक संस्था थी । इस संस्था का कर्ताधर्ता कोई टीवी पत्रकार बताया जा रहा है। दिलचस्प यह है कि पूरे आयोजन में पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई लेकिन पूरी रुपरेखा उसी के द्वारा कुछ मीडिया सलाहकारों के साथ मिलकर तैयार की गई।संस्था ने कार्यक्रम के लिए अच्छी खासी स्पांसरशिप और पत्रिका प्रकाशन के नाम पर सरकारी और प्राइवेट विज्ञापन भी बटोरे । बहुत संभव है कि इसीलिए मीडिया को कार्यक्रम से दूर भी रखा गया, अन्यथा कोई एक भी कारण ऐसा नहीं कि राज्य स्थापना के उपलक्ष्य में आयोजित किसी कार्यक्रम को सीमित कर दिया जाए । चलिये यदि वाकई ऐसा है तो यह बेहद गंभीर है, तब इसमें सिर्फ संस्था ही नहीं राज्य सरकार भी सवालों के घेरे में हैं। कोई भी संस्था आखिर सरकार का इस तरह इस्तेमाल कैसे कर सकती है ? जब कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास में पूरे सरकारी संरक्षण में आयोजित हो रहा हो, सभी मेहमान हाई प्रोफाइल हों तो कार्यक्रम के नाम पर किसी भी तरह की 'उगाही' क्यों ? बहरहाल सरकार ने जिस तरह प्रचारित किया, मुख्यमंत्री खुद वीडियो के जरिए 'रैबार मां आवा' की अपील करते रहे उस पर रैबार कहीं भी खरा नहीं उतरा । पर्दे की पीछे हो सकता है आयोजक संस्था के कर्ताधर्ताओं के मंसूबे कुछ हद तक जरूर पूरे हो गए हों, लेकिन सच यही है कि उत्तराखंड हर बार की तरह एक बार फिर छला गया ।

अगर उत्तराखंड के बारे में ज्यादा नही जानते तो एक बार  हाजी मोहम्मद अकरम साहब से जरूर मिले। आपको उत्तराखंड और यंहा की संस...
08/11/2017

अगर उत्तराखंड के बारे में ज्यादा नही जानते तो एक बार हाजी मोहम्मद अकरम साहब से जरूर मिले। आपको उत्तराखंड और यंहा की संस्कृति की विशालता देखने को मिलेगी।

ये वीडियो यूट्यूब के लोकरंगटीवी चैनल ने रामनगर में शूट किया इस तरह के और वीडियो के लिए आप उनके यूट्यूब चैनल को नीचे दिए लिंक पर सब्सक्राइब कर सकते है।

Youtube

हर पहाड़ी को ये विडिओ देखनी चाहिए | फसक। रामनगर चैप्टर | Fasak | Lokrang TV फसक के इस एपिसोड में हमारी टीम रामनगर पहुँची वहाँ हमारी मुलाक़ात हाजी मोहम्मद अकर...

Batao in me kaun se garhwali fruit Hai.Must comments plz.
14/07/2017

Batao in me kaun se garhwali fruit Hai.
Must comments plz.

सुप्रभातउत्तराखंड के पहाड़ों में पाए जाने वाला फल काफल उत्तराखण्डी संस्कृति का वह हिस्सा है, जिसने पहाड़ों से निकल कर दूर...
19/05/2017

सुप्रभात

उत्तराखंड के पहाड़ों में पाए जाने वाला फल काफल उत्तराखण्डी संस्कृति का वह हिस्सा है, जिसने पहाड़ों से निकल कर दूर देशों तक अपनी पहचान बनाई है। इसकी खूबियों के चलते बेड़ू पाको बारमासा, ओ नरैण काफल पाको चैता.. गीत को गोपाल दा (गोपाल बाबू गोस्वामी) ने अपनी अनमोल आवाज दी थी और तब से यह जंगली फल जुबां में मिठास घोलने के साथ-साथ आज भी लोगों के कानों में गूंजता है। खट्टे-मीठे स्वाद को खुद में समेटा काफल हर किसी को भाता है। गर्मियों में लोग जहां इस पहाड़ी फल का जमकर आनंद ले रहें है ।

www.danikuttarakhand.com

उत्तराखण्ड मैं शराब बंदी से बारातियों में आई भारी गिरावट 😜😜
18/05/2017

उत्तराखण्ड मैं शराब बंदी से बारातियों में आई भारी गिरावट 😜😜

18/05/2017

#पंसद_आये_ताे_लाइक_व_शेयर_करना_ना_भूले

गढवाल में रहने वाले से किसी ने कहा....

"कैसे रहते हो तुम इन गदनों और ऊंचे नीचे डांडों में,
कैसे चल पाते हो इन कुमरों अर किनगोड़ा के कांडों में।।"

जब लग गई बात दिल को तो भैजी ने जवाब कुछ यूँ दिया....

सुन भुला इतना दम नही तेरे पिंजरे के शेर की दहाड़ में,
जितनी दहाड़ से गढ़वाली दादा खांस देते है पहाड़ में।।
ब्वे के हाथ की बनी रोटी
और हरे लूंणमर्च की चटकार में,
वो मिठास नहीं मिल सकती हे लाटा तेरे बाज़ार में।।

दुनिया फंस चुकी हो चाहे
चिप्स चौमीन के जाल में,
पर वो स्वाद कभी नहीं मिल सकता भैजी जो है घर्या दाल में।।

तेरे फ़िल्टर और शील बंद पानी मे हुआ मिलावट का खेल है,
मेरे नौल़े अर धारे के आगे ये पानी फिर भी फेल है।।

तेरे कूलर पंखे, ए सी मे.. वो हवा नहीं मिल पाती है,
जो ताजी ठंडी कडक हवा, मेरे डांडो से आती है।।

बर्गर पिजा चौमिन आदि में
वो स्वाद नहीं मिल पाता है,
जो घोट घोट कर बने हुए,
अल्लू के थिंचोडी में आता है।।

तेरी तंदूरी रुमाली रोटी सब,
गिच्चे मे लपटाती है,
कड़क कुरमुरी रोटी तो आग मे ही पक पाती है।।

दादा दादी और चाचा चाची
तुम्हे दूर के लगते हैं,
गढवाल मे तो ये अभी भी
एक कुटुम्भ में रहते हैं।।

जितने तेरे केलेंडर में
शनि और रविवार हैं,
उससे कई गुना ज्यादा तो, गढवाली तीज त्यौहार है।।

वो भी बोला हे भाई जी मुझे भी नही रहना अब इस जी के जंजाल मे.
चल अभी मुझको भी ले चल तू गढवाल मे........

#पलायन_रोको_अभियान

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Haldwani
263635

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+91 8477-853629

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