Astrology Consultancy - International Astrologer Dr. Ravi Acharya

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Astrology Consultancy - International Astrologer Dr. Ravi Acharya International World Famous Astrologer Gold Medalist Dr. Ravi Acharya ( Expert in Love, Family & Rela

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13/02/2021

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10/10/2020

नवरात्रा 17 से होंगे शुरू, इस बार नवमी व दशहरा एक ही दिन

16 अक्टूबर को खत्म होगा अधिक मास, अगले दिन होगी नवरात्रि की घट स्थापना, 25 को दशहरा

अक्टूबर माह हिंदी पंचांग के हिसाब से बहुत खास रहेगा। इस माह में नवरात्र, दशहरा और शरद पूर्णिमा जैसे पर्व मनाए जाएंगे। गुरुवार को अधिक मास की पूर्णिमा रहेगी। अधिक मास 3 साल में एक बार आता है। इस वजह से इस पूर्णिमा का विशेष महत्व है। कोरोना महामारी में पिछले 6 महीने से धार्मिक कार्यक्रमों पर असर पड़ा है। इसमें नवरात्र, गणेश उत्सव, जन्माष्टमी सहित कई पर्व मंदिरों की बजाय घरों में ही मनाए गए।

अक्टूबर महीने में आएंगे कई खास तीज-त्योहार, कमला एकादशी पर पूजा-पाठ के बाद दान का है महत्व

13 अक्टूबर को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है।
16 अक्टूबर को अधिक मास की अमावस्या है। इस दिन अधिक मास खत्म होगा।
17 तारीख को आश्विन मास के नवरात्र शुरू हो रहे है। इस दिन घट स्थापना होगी।
20 अक्टूबर को अंगारक विनायकी चतुर्थी है। इस दिन भगवान गणेश के लिए व्रत करें।.
24 तारीख को दुर्गा अष्टमी है। इसे महाष्टमी भी कहते हैं। इस दिन देवी दुर्गा की विशेष पूजा करें व व्रत रखें।
25 अक्टूबर को दुर्गा नवमी है। इस दिन छोटी कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। कन्याओं को धन का दान दें और शिक्षा से संबंधित चीजें भेंट करें। दशहरा भी इसी दिन है। श्रीराम के साथ ही शमी के पेड़ की भी पूजा इस दिन की जाती है।
27 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी है। यह व्रत सभी पापों का प्रभाव खत्म करने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत करें।
30 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा है। मान्यता है कि इस तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था। यह श्री कृष्ण की भक्ति का दिन है। इस दिन महालक्ष्मी का पूजन भी करें।
31 अक्टूबर से कार्तिक मास शुरू हो जाएगा। पंचांग भेद से इस दिन पूर्णिमा है।

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08/06/2020

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महाशिवरात्रि :- महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त महाशिवरात्रि इस बार 21 फरवरी को है। महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 6...
21/02/2020

महाशिवरात्रि :- महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि इस बार 21 फरवरी को है। महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 64 जगहों पर शिवलिंग उत्‍पन्न हुए थे। हालांकि 64 में से केवल 12 ज्‍योर्तिलिंगों के बारे में जानकारी उपलब्‍ध. इन्‍हें 12 ज्‍योर्तिलिंग के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि की रात को ही भगवान शिव शंकर और माता शक्ति का विवाह संपन्न हुआ था।

महाशिवरात्रि की तिथि: 21 फरवरी 2020
रात्रि प्रहर की पूजा का समय: 21 फरवरी 2020 को शाम 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक

19/02/2020
बुधवार विशेष:-  बुधवार के दिन दुर्गा मां की भी होती है पूजाबुधवार के दिन दुर्गा मां की भी आराधना की जाती है। इस दिन को ब...
22/01/2020

बुधवार विशेष:- बुधवार के दिन दुर्गा मां की भी होती है पूजा

बुधवार के दिन दुर्गा मां की भी आराधना की जाती है। इस दिन को बल, विद्या और बुद्धि प्राप्ति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। दुर्गा मां को बल और सभी दुखों का निवारण करने वाली देवी माना गया है। बुधवार के दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही फलदायी होता है। अगर अधिक समय नहीं हो तो 12 वें अध्याय और कुंजीकास्तोत्र का पाठ कर लेना चाहिए।

13/01/2020
किस धातु के बर्तन में खाना बनाने के क्या फायदे ❗सोनासोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शर...
09/01/2020

किस धातु के बर्तन में खाना बनाने के क्या फायदे ❗

सोना

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

चाँदी

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

कांसा

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

तांबा

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

पीतल

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

लोहा

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोहतत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

स्टील

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान ही होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का किसी भी रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

मिट्टी

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते हैं । इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैं मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।
आइये चले प्रकृति की ओर!!

👉 घर की खिड़कियों के लिए क्या कहता है वास्तु नियम-घरों में स्थित खिड़कियों को हम सिर्फ रोशनी और हवा आने का माध्यम मानते है...
08/01/2020

👉 घर की खिड़कियों के लिए क्या कहता है वास्तु नियम-
घरों में स्थित खिड़कियों को हम सिर्फ रोशनी और हवा आने का माध्यम मानते हैं,लेकिन इसके साथ-साथ खिड़कियां जीवन में सुख-समृद्धि भी लाती है। वास्तुविज्ञान के अनुसार भवन में यदि खिड़कियों की संख्या एवं दिशा सही हो तो,यह जीवन में रोशनी ला सकती हैं,अगर गलत हैं तो इसके कारण बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। घर बनवाते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि इनकी संख्या सम होनी चाहिए- जैसे 2 ,4 ,6 ,8 ,10 इत्यादि विषम संख्या में खिड़कियों का होना शुभ नहीं माना गया है।

वास्तु में खिड़कियों के लिए दिशा भी निर्धारित की गई है। इसके अनुसार घर की पूर्व, पश्चिम एवं उत्तर दिशा में खिड़कियों का होना लाभकारी माना गया है। दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी गई है अतः इस दिशा में खिड़कियां बनवाने से बचना चाहिए। अगर इस दिशा में खिड़कियां बनाना जरूरी हों तो इन्हें कम से कम खोलें।

👉 शुभ होंगी ऐसी खिड़कियां-
शुभ प्रभाव के लिए इनको हमेशा साफ़ और स्वच्छ रखें । कोशिश करें कि घर के मुख्यद्वार के दोनों तरफ समान आकार की खिड़कियां हों, ऐसा करने से चुंबकीय चक्र पूरा होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह लगातार बना रहता है।हवा और रौशनी के लिए खिड़की का आकार जितना बड़ा हो उतना अच्छा माना गया है। इन्हें खोलते या बंद करते समय किसी भी तरह की आवाज़ नहीं होनी चाहिए,ये नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ती हैं।

पूर्व दिशा सूर्यदेव की दिशा है अतः इस दिशा में खिड़कियां अधिक होनी चाहिए। इस दिशा में बनी हुई खिड़कियों से न केवल सूरज की पहली किरण प्रवेश करती है अपितु इस रौशनी के साथ घर में सौभाग्य भी प्रवेश करता है। इससे परिवार के सदस्यों को यश और तरक्की मिलती है। उत्तर दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर से है इस दिशा में खिड़कियां रखने से कुबेर देवता की कृपा बनी रहती है।

👉 इन बातों का रखें ध्यान
✅ यदि मुख्यद्वार के पास खिड़कियां टूटी-फूटी, गंदी या पुरानी होंगी तो परिवार के सदस्यों को मानसिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
✅ भवन निर्माण के समय पुरानी खिड़कियों को नहीं लगाना चाहिए अन्यथा परिवार के सदस्यों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
✅ भवन निर्माण के समय खिड़कियों का आकार छोटा नहीं होना चाहिए वास्तु में यह अनुचित मानी गई हैं।
✅.यदि खिड़की के सामने कोई बिजली का खम्बा ,टावर या डिश एंटीना लगा हो तो बच्चों के करियर में बाधाएं उत्पन्न होती हैं । ऐसी अवस्था में खिड़कियों पर मोटे परदे डालकर रहें ताकि नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश न कर सके।
✅.शुभ एवं सकारात्मक परिणामों के लिए

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