Saharan sales corporation

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28/02/2016

सरसों: सफेद रोली या छाछया रोग मे पत्ती में सफेद पाउडर जमा होता,नियंत्रण- सल्फर पाउडर 80%(सल्फ़ोविट)1kg /एकड़ 160ली पानी से छिड़कें।

28/02/2016

राजस्थान

चावल निर्यात में गिरावट और स्टॉक ज्यादा बचने का अनुमान: आईजीसी

साल 2015-16 के दौरान भारत से चावल निर्यात अनुमान में हल्की कटौती की गयी है। 2015-16 के दौरान भारत से चावल निर्यात घटकर सिर्फ 91 लाख टन रह सकता है, इससे पहले जनवरी की रिपोर्ट में 92 लाख टन निर्यात का अनुमान लगाया गया था। हालांकि पिछले साल भारत से करीब 118 लाख टन चावल निर्यात हुआ था, इंटरनेशनल ग्रेन काउंसिल (आईजीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार।

आईजीसी के अनुसार निर्यात कम होने से 2015-16 के दौरान देश में चावल का एंडिंग स्टॉक बढ़ सकता है और एंडिंग स्टॉक 117 लाख टन रह सकता है, जबकि जनवरी की रिपोर्ट में एंडिंग स्टॉक 110 लाख टन रहने का अनुमान था।

आईजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 के दौरान वैश्विक स्तर पर चावल उत्पादन अनुमान में करीब 7 लाख टन बढ़ोतरी की गयी है और इस साल दुनियाभर में 47.40 करोड़ टन चावल उत्पादन होने का अनुमान है, इससे पहले जनवरी की रिपोर्ट में 47.33 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।

हालांकि साल 2014-15 के मुकाबले इस साल दुनियाभर में चावल का उत्पादन कम रहने का अनुमान है, 2014-15 के दौरान दुनियाभर में 47.93 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ है।

आईजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 के दौरान थाईलैंड और वियतनाम से चावल का निर्यात बढ़ सकता है।

इस साल थाईलैंड से 100 लाख टन और वियतनाम से 71 लाख टन चावल निर्यात होने का अनुमान है जबकि साल 2014-15 के दौरान थाईलैंड से 98 लाख टन और वियतनाम से 70 लाख टन चावल निर्यात हुआ है।

03/02/2016

एपीडा के मुताबिक भारतीय बासमती निर्यातको को ईरान से 15 दिसंबर 2015 के बाद निर्यात की अनुमति मिलने के बाद कमाई बढ़ने की उम्मीद है।

05/01/2016

राजस्थान

सरकारी चावल खरीद में तेजी, अब तक 28 फीसदी की बढ़त

इस साल सरकार द्वारा चावल की खरीद में तेजी देखने को मिली है। फसल वर्ष 2015-16 में सरकार दिसंबर अन्त तक 1.89 करोड़ टन चावल की खरीद कर चुकी है। जो पिछले साल के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा है। पिछले साल इस समय तक 1.48 करोड़ टन की खरीद की गयी थी। चावल खरीद का फसल वर्ष 1 अक्टूबर से शुरू होता है।

चावल की मात्रा में बढ़त के लिए एजेंसियों द्वारा हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ में ज्यादा खरीद प्रमुख वजह रही है। इस साल हरियाणा से पिछले साल के मुकाबले 41.6 फीसदी ज्यादा चावल खरीदा गया है। वहीं पंजाब से 20.1 फीसदी और छत्तीसगढ़ से 41.8 फीसदी ज्यादा खरीद हुई है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मुताबिक पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों में खरीद शुरू हो चुकी है।

सरकार ने इस विपणन सत्र में करीब 3 करोड़ टन चावल की खरीद का अनुमान लगाया है। हालांकि खरीद की गति को देखते हुए खाद्य सचिव वृंदा स्वरूप ने अनुमान जताया है कि “इस साल चावल की कुल खरीद अनुमान से अधिक रह सकती है’। सितंबर 30 को खत्म हुए पिछले फसल वर्ष में सरकारी एजेंसियों ने 2.8 करोड़ टन चावल की खरीद की थी। जो 3 करोड़ टन के लक्ष्य से कम था।

गौरतलब है कि मॉनसून की कमी के चलते इस साल खरीफ उत्पादन कम रहने के अनुमान से चावल की कीमतों खासकर गैर बासमती चावल में तेजी देखी जा रही है। उद्योग संघठन एसोचैम के अनुसार चावल उत्पादन 8.9 करोड़ टन तक रह सकता है। हालांकि सरकार द्वारा जारी अनुमान के मुताबिक 2015-16 के फसल वर्ष में खरीफ चावल का उत्पादन 9.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

04/01/2016

चने व मसूर मे गेरुआ (रस्ट) रोग की रोकथाम

चने व मसूर की फसल मे रस्ट जिसे हिन्दी मे गेरुआ या किट्ट रोग भी कहते है, बुवाई के लगभग 55-60 दिन बाद फली बनते समय आता है। यह रोग फफूंद के कारण फैलता है।

रोग फैलने के कारण:-

इस रोग के लिए नम और ठंड़ा वातावरण अनुकूल होता है।
यह रोग फसल मे जनवरी के मध्य से फसल पकने तक अधिक आता है।
रोग के लक्षण:-

पत्तियां घनी होने लगती है जिससे छोटे गोल या अण्डाकार भूरे धब्बे दिखाई देते है।
यह धब्बे दालचीनी के रंग के चूर्णिल धब्बे के रूप मे भी होते है।
छोटे-छोटे धब्बे मिलकर बड़े धब्बे बनाते है।
यह धब्बे पत्ती की दोनों सतह पर बनते है लेकिन यह धब्बे निचली सतह पर अधिक होते है।
कभी कभी यह धब्बे तने और फलियों पर भी दिखाई देते है।
प्रभावित पत्तियां सूखकर गिर जाती है और बाद मे पूरा पौधा सूख जाता है।
रोकथाम के उपाय:-

रोकथाम हेतु 500 ग्राम गंधक (सल्फर) 80% डबल्यूडीजी प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी मे घोल कर छिड़काव करें।
या
रोग के लक्षण दिखते ही 500 ग्राम मैन्कोजेब प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी मे मिलाकर छिड़काव करें। यदि आवश्यकता हो तो 10 दिन के अन्तराल पर पुनः छिड़काव करें।
अगली बार गेरूआ रोग की प्रतिरोधी किस्मों की बुवाई करें तथा उचित फसल चक्र अपनायें।

02/01/2016

राजस्थान

सरकार का इस साल कृषि पैदावार बढ़ाने पर रहेगा ज़ोर
, जनवरी

केंद्र सरकार वर्ष 2016 में कृषि पैदावार बढ़ाने, उत्पादन लागत को कम करने, विपणन व्यवस्था को सुधारने और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को अधिक प्राथमिकता देगी, केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा। कृषि मंत्री ने घोषणा की कि सभी 585 थोक कृषि मंडियों को मार्च 2018 के अंत तक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 50,000 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत जिलावार सिंचाई योजना अगले वर्ष तक तैयार हो जाएगी।

उन्होने बताया कि सरकार किसानों के कल्याण और फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि, 'उत्पादन की लागत को कम करना, बेहतर बाजार प्रदान करना, नई प्रौद्योगिकियों का व्यापक इस्तेमाल इस वर्ष के लिए हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में है। सरकार वित्त वर्ष 2015-16 में पांच करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान करेगी और बाकी नौ करोड़ किसानों को अगले वित्त वर्ष के अंत तक इसे दिया जाएगा। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक कृषि बाजार की स्थापना की दिशा में हुई प्रगति के बारे में मंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ जैसे 8 राज्यों को 214 मंडियों को ई-प्लेटफॉर्म से जोडऩे के लिए 111.16 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश ने भी ई-कृषि बाजार प्लेटफॉर्म की स्थापना के प्रति अपनी रूचि दिखायी है।

कृषि मंत्री ने कहा इस साल सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाने, जैविक खेती, पशुपालन और मत्स्यपालन को प्रोत्साहित करने और उन्हे बढ़ाने पर ज़ोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के बारे में मंत्री ने कहा, 'जिला वार सिंचाई योजना को तैयार करने के लिए अधिकारियों को प्रशिक्षित कर मार्च 2016 तक 100 जिले मे सिंचाई योजना तथा शेष बचे जिलों की योजनाएं अगले वर्ष तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।'

01/01/2016

सरसों: अभी का मौसम रसचूसक कीटो के लिए अनुकूल है। जिससे 35% तक उपज कम हो सकती है। बचाव हेतु 5gm इमिडाक्लोप्रिड़ 70WG/15ली पानी छिड़कें।

30/12/2015

गेंहू मे अधिकतम लाभ के लिये समय पर करे सिंचाई

प्रदेश मे ज़्यादातर क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई हो चुकी है। कई बार देखा गया है कि किसान भाई सिंचाई को लेकर असमंजस मे रहते है अतः इसको ध्यान मे रखते हुये हम सिंचाई के बारे मे बताने जा रहे हैं। पौधों के अच्छे विकास के लिए समय से सिंचाई आवश्यक है। यदि सिंचाई की पर्याप्त उपलब्धता है तो उन क्षेत्रों में निम्नवत सिंचाई करें:

पहली सिंचाई
क्राउन रूट (ताज मूल अवस्था पर, बुवाई के 20-25 दिन बाद)।
दूसरी सिंचाई
कल्ले निकलते समय (बुवाई के 40-45 दिन बाद)
तीसरी सिंचाई
गांठें बनते समय (बुवाई के 60-65 दिन बाद)
चौथी सिंचाई
पुष्प अवस्था मे (बुवाई के 80-85 दिन बाद)
पाँचवी सिंचाई
दुग्ध अवस्था मे (बुवाई के 100-105 दिन बाद)
छटी सिंचाई
दाना भरते समय (बुवाई के 115-120 दिन बाद)
दोमट एवं भारी दोमट मृदाओं की दशा में निम्नलिखित अवस्थाओं पर 4 सिंचाइयाँ अच्छी उपज दे सकती हैं:

पहली सिंचाई
बोआई के 20-25 दिनों के बाद
दूसरी सिंचाई
पहली सिंचाई के 20-22 दिनों के बाद
तीसरी सिंचाई
दूसरी सिंचाई के 20-25 दिनों के बाद
चौथी सिंचाई
तीसरी सिंचाई के 20-25 दिनों के बाद
सीमित सिंचाई साधनों की दशा में :

यदि केवल तीन सिंचाइयाँ उपलब्ध होती हैं तो यह शिखर मूल अवस्था, बाली निकलते समय एवं दुग्ध रचना अवस्था पर की जानी चाहिए।
यदि केवल दो सिंचाइयाँ उपलब्ध हैं तो शिखर मूल अवस्था और पुश्पन अवस्था पर इनका प्रयोग कीजिए।
यदि केवल एक सिंचाई उपलब्ध है तो शिखर मूल अवस्था पर फसल की सिंचाई कीजिए।
सिंचाई करते समय निम्न बातों का ध्यान रखें:

हल्की मृदा में सिंचाई सुविधा होने पर सिंचाई हल्की(लगभग 6से.मी.) तथा दोमट व भरी मृदा मे सिंचाई कुछ गहरी (लगभग 8 से.मी.) करें।
खेत मे पानी अधिक समय तक न खड़ा रहे, इसके लिए जल-निकास की भी अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

28/12/2015

सरसों: फसल को पाले (कोहरा) से बचाने हेतु मिट्टी मे नमी बनाए रखे और 50gm सल्फर 80WDG/15ली पानी मे 8 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़के।

07/11/2015

राजस्थान

रबी फसलों की बुवाई में चना और ज्वार में बढ़त, रकबा 83.95 लाख हेक्टेयर के पार

जयपुर, नवंबर 7(आरएमएल)

देश के कई राज्यों में रबी फसलों की बुवाई शुरू हो गयी है। कई हिस्सों में चना और ज्वार की बुवाई ने तेजी पकड़ी है जबकि रबी की मुख्य फसल गेहूं और सरसों की बुवाई पिछले वर्ष के मुक़ाबले अभी पिछड़ी हुई है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई के प्रारंभिक आँकड़ो के अनुसार नवंबर 6 तक देश में रबी फसलों की बुआई 83.95 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 87.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी। दलहन की बुआई 28.65 लाख हेक्टेयर में हुई है, जिसमें चना की बुवाई 30 फीसदी बढ़कर 22 लाख हेक्टेयर हो चुकी है,जबकि पिछले साल इसी समय तक 16.82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। वही मौजूदा सत्र में तिलहन की बुवाई 19.91 लाख हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है, जो पिछले रबी सत्र के इसी समय 31.76 लाख हेक्टेयर से काफी कम है।

रबी फसलों की बुवाई के प्रारंभिक आंकड़े -

फसल

2015-16 में बुवाई क्षेत्र (लाख हेक्टेयर)

2014-15 में बुवाई क्षेत्र (लाख हेक्टेयर)

गेहूं

2.76

4.47

दलहन

28.65

29.73

मोटे अनाज

32.52

21.09

तिलहन

19.91

31.76

धान

0.12

0.22

कुल

83.95

87.27



केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ो के अनुसार सरकार ने वर्ष 2015-16 के रबी सीजन में खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य बढ़ाकर 13.3 करोड़ टन कर दिया है। जो पिछले साल रबी सीजन के वास्तविक उत्पादन 12.63 करोड़ टन से करीब 66.2 लाख टन अधिक है, जबकि रबी के दौरान 130 लाख टन दालों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि रबी की प्रमुख फसल गेहूँ पिछले वर्ष असामान्य मौसम से प्रभावित हुई थी,कृषि मंत्रालय के चतुर्थ अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2014-15 में भारत में गेहूँ का उत्पादन घटकर 889.4 लाख टन रहा जबकि पिछले वर्ष उत्पादन 958.5 लाख टन हुआ था।

05/11/2015

खेती मे उर्वरक की मात्रा को प्रभावित करने वाले 8 कारक

जयपुर, नवंबर 4, (आरएमएल) उर्वरक की मात्रा को निर्धारित करने के कई कारक है। यदि इन कारको को ध्यान मे रखकर उर्वरक की मात्रा कम या अधिक की जाये तो खेती मे अधिकतम फायदा ले सकते है। उर्वरक की मात्रा को प्रभावित करने वाले 8 प्रमुख कारक इस प्रकार है।

फसल की किस्म :- अलग-अलग फसलों कि पोषक तत्व संम्बधी आवष्यकता अलग-अलग होती हैं। उदाहरण के लियें दलहनी फसलों की नत्रजन की आवश्यकता गेहॅू या गन्नों की फसल की तुलना में कम होती हैं।
मृदा उर्वरता व गठन :- जो मृदाएं कमजोर अथवा कम उर्वरा होती हैं उन में अधिक खाद की आवश्यकता होती हैं। जैसे बलुई भूमियों में दोमट मृदाओं की अपेक्षा एक ही फसल को अधिक खाद देना पड़ता हैं।
शस्य चक्र :- फसल चक्र में यदि हरी खाद उगा रहें हैं या दलहनी फसल उगा रहें है, तो इसके बाद बाली फसलों को नत्रजन के खादों की कम आवश्यकता हैं।
खरपतवार का प्रकोप :- यदि खेत में खरपतवारों का प्रकोप अधिक हैं, तो फसल की खाद सम्बधी आवश्यकता बढ़ जाती हैं।
मृदा में नमी की मात्रा :- मृदा में नमी की मात्रा कम हैं। और सिंचाई के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं तो भूमि में खाद की मात्रा भी कम दी जाती हैं।
खाद की किस्म :- एक ही तत्व को खेत में देने के लिये, बाजार में कई एक उर्वरक उपलब्ध होते हैं। जिन खादों में तत्व की प्रतिशतता अधिक होती हैं। उनकी मात्रा कम करते हैं।
मौसम :- शुष्क मौसम होने पर खेत में उर्वरक की कम मात्रा प्रयोग की जाती है। अधिक वर्षा वालें क्षेत्र में खाद तत्व उद्वीपन से या अपधावन द्वारा अधिक नष्ट होते हैं।
खाद देने की विधि:- खाद देने की विधि भी खाद की मात्रा को कम या अधिक करती है। उदाहरण के लिए हम खेत में नत्रजन देने के लिए यूरिया उर्वरक के घोल का छिड़काव करें, तो फसल की आवश्यकता पूर्ति के लिए कम खाद की आवष्यता होगी और यदि खाद ठोस रूप में मृदा में बिखेर दी जाये तो इसकी अधिक मात्रा की आवश्यकता होगी । यूरिया को हल्की नम मिट्टी के साथ रात भर मिला कर रखें तथा दूसरे दिन मिट्टी का छिड़काव करें ।

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