Yogesh Sethi

Yogesh Sethi Genetic brain Profiling can re-design your life. Each person has a different Genetic design with som

आप और मैं, सदा बातों  मैं व्यस्त रहते हैं! कभी यह सोचा है कि जब हम किसी से बात कर रहे होते है तो क्या हम उसे 100 % सुन र...
11/04/2020

आप और मैं, सदा बातों मैं व्यस्त रहते हैं! कभी यह सोचा है कि जब हम किसी से बात कर रहे होते है तो क्या हम उसे 100 % सुन रहे होते हैं ? क्या हम उनको सुनते समय, उनकी कही गयी बात का जवाब नहीं दे रहे होते खुद को ? ध्यान से सोचिये ……………! आपको इसका जवाब हाँ में मिलेगा!

यही से शुरुआत होती है , ग़लतफ़हमी की !

चुकि हम ने ठीक से सुना नहीं कि उन्होने क्या कहा , जो उन्होने कहा ही नहीं हमने वो सुना, तो फिर उसे हम क्या समझेगे या उनकी कही बात का क्या जवाब देंगे! ज़ाहिर है गलत ही समझेंगे और गलत ही जवाब देंगे! और जब शुरुआत ही गलत है तो अंजाम सही कैसे होगा!

आज मैं रिश्तो के बारे में लिखना चाहता हूँ"रिश्ते बस रिश्ते होते हैं , कुछ एक पल के, कुछ दो पल के,रिश्ते बस रिश्ते होते ह...
11/04/2020

आज मैं रिश्तो के बारे में लिखना चाहता हूँ

"रिश्ते बस रिश्ते होते हैं ,
कुछ एक पल के,
कुछ दो पल के,
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं!"

दोस्तों, शायद मेरी बात आपको अटपटी लगे लेकिन यह सच है कि रिश्ते सचमुच ही एक या दो पल के ही होते हैं! मैने यह ज़िन्दगी में बहुत नज़दीक से जीया है! मेरे पिता जी कहा करते हैं कि कोई किसी को याद नहीं करता बल्कि उसके द्वारा दिए गए सुखों को याद करते हैं! पहले तो मुझे यह ठीक नही लगा, लेकिन कुछ समय बीतने पर इसे खुद अनुभव किया, अपने मित्र के जीवन से !
एक समय मेरे एक मित्र हुआ करते थे, वह मेरे दिल के बहुत करीब थे! हालांकि हमारी दोस्ती कुछ खास पुरानी नहीं थी हमारी उम्र में भी काफी अंतर था! लगभग मुझसे बीस साल बड़े थे, फिर भी दिल के नज़दीक थे! जब हम पहली बार मिले तो एक छोटी सी बिज़नेस डील हुई थी हमारे बीच, उसमे भी मुझे नुकसान ही हुआ था! हम कुछ समय बाद दोबारा मिले तो वह कुछ तकलीफ में थे, बिज़नेस ठप हो चुका था ! पैसा खत्म हो गया था , घर खर्च भी मुश्किल से चल पा रहा था! रोज़ के घर खर्च के लिए भी उधार लेना पड़ता था, बहुत परेशानी वाले दिन थे उनके!

मुलाकात हुई , बात हुई और हमारी दोस्ती की शुरुआत हुई !

लगभग रोज़ मिलना शुरू हो गया, उनके जीवन के लगभग हर पहलू से जान-पहचान होने लगी! जैसा कि हर कहानी में होता है कुछ अच्छा था और कुछ बुरा भी था! दोस्त था तो मुझे उन्हे और उनके हर रूप को चाहे वह जैसा भी हो स्वीकार करना था और किया भी! मैं उनके दर्द में भागीदार हो गया, उनका दर्द मुझे अब अपना लगने लगा! परेशान रहने लगा मैं उनके लिए! इसका असर मेरे काम पर भी पड़ने लगा! मैं उनका दर्द महसूस कर के रोने लगा! दो बेटियां थी उनकी, जो मुझे अपनी बहन सी लगने लगी थी! बड़ी बेटी शायद 12th क्लास में थी और छोटी 9th में! बड़ी पढ़ाई में कुछ कमज़ोर थी और छोटी Intelligent थी! भाभी जी का स्वाभाव भी बहुत अच्छा था, उनकी लव मैरिज थी! भाभी जी क्रिस्चियन फैमिली से थी और भाई साहब पंजाबी! जैसा की अक्सर होता था आजकल भी होता है, Inter Cast Marriage आसानी से स्वीकार नहीं होती! शादी मे तमाम तरह तरह के झंझट हुए, झगड़े हुए, मार खाई लेकिन शादी तो करके माने! भाभी जी के पेरेंट्स ने स्वीकार कर लिया और उनकी तरफ़ से सब ठीक था लेकिन भाई साहब के परिवार ने भाभी जी से संबध नहीं बनाये! दूरी बनाए रखी! समय चलता रहा, भगवान ने उन्हे एक बेटी से नवाज़ा! प्यारी सी बच्ची थी वो! कुछ समय बीता बेटी के आने के बाद घर का माहौल हल्का हुआ परिवार ने भाभी जी से मिलाना शुरू किया ! धीरे धीरे सब ठीक होने लगा! कुछ समय बाद छोटी बेटी भी आ गई, सब बढ़िया चलता रहा कुछ 16 सालो तक! कुल मिला कर बढ़िया परिवार था!

एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ बिखरने लगा! भाई साहब को बिज़नेस मे बहुत घाटा हुआ, उनके बिज़नेस पार्टनर ने उन से मुँह मोड़ लिया!

यहाँ से शुरू करते हैं बात रिश्तो की ! (यही वह समय था जब मैं भाई साहब से जुड़ा था )

पैसा ख़त्म होने लगा था , घर में तनाव बढ़ने लगा था ऐसा लग रहा था कि पैसा और प्यार एक ही तराजू के पलड़ो में रखे है! जैसे जैसे एक पलड़ा (पैसा) हल्का हो रहा था, दूसरा पलड़ा (तनाव) भारी होने लगा था! 16 सालो की शादी के रिश्ते में दरारे पड़ने लगी थी! एक रिश्ता जो सिर्फ और सिर्फ प्यार से, अपनेपन से शुरू हुआ था, जिसमे प्यार फला फूला था, अपने Peek तक पहुँचा था, वह हिलने लगा लगा था! उसकी नींव कमज़ोर होने लगी थी! कल तक दोनों के प्यार की कहानियाँ सुनते सुनाते थे, आज उन्ही की लड़ाई की आवाज़ सुनाई देने लगी थी! सब कुछ बिखरने लगा था! यहाँ पहली बार एहसास हुआ कि पापा शायद ठीक कहते हैं "कोई किसी को याद नहीं करता, सिर्फ उसके दिए सुखो को याद करते हैं"

मैं यहाँ किसी को दोष नहीं दे रहा, ना ही अपना कोई मत रख रहा हूँ! मैं बस सूत्रधार हू यहाँ! जो हुआ बार Neutral हो कर लिख रहा हू! बस ऐसे समय में होने वाले Side Effects को देख कर परेशान था!

भाभी जी की कोई गलती नही थी, उन्हे भी तो घर चलना था और घर चलने के लिए पैसो की ज़रूरत होती है ,वह हैं नही! भाई साहब ने तो जैसे हार ही मान ली थी! कुछ करने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहे थे! इसी बात पर रोज़ बहस होती थी! चाहे जो भी कहे जिस आपसी समझ की ज़रूरत होती है समय में, वह नही दिख रही थी आपस में! ऐसा लग रहा था कि जीवन का आधार सिर्फ पैसा ही है!

भाई साहब खाने के बहुत शौकीन थे और बनाने के भी! घर में सामान की कमी के कारन अक्सर भाभी जी पर गुस्सा होते थे कि सामान क्यों नहीं है घर में! समस्या दोनों तरफ से थी!

भाई साहब बहुत परेशान रहने लगे थे! हम लगभग रोज़ ही मिलते थे! वह मुझ से दिल की सारी बात करते थे! उनकी परेशानी को मैने जैसे अपनी मान लिया था इसलिए मैं भी परेशान हो चला था! उनके लिए रोने लगा था मैं! जब भी उनके बारे सोचता था रो पड़ता था! एक दिन मैने एक फैसला लिया जिससे मेरे घर में भी तूफान आ गया! भाई साहब की मदद के लिए मैंने उनके साथ बिज़नेस शुरू करने का फैसला लिया! जिसका मेरे घर मे बहुत विरोध हुआ जो कि सही भी था कुछ हद तक! क्योकि हारे हुए लँगड़े घोड़े पर कौन दांव लगाना चाहेगा!

लेकिन मैं नहीं माना और उनके साथ बिज़नेस शुरू किया!

बिज़नेस के लिए हम Delhi से Dehradun तक, Himanchal के Interior Area में, छत्तीसगढ़ के Korba Mines तक घूमने लगे! कुछ Heavy Trucks जो Mines में इस्तेमाल होते हैं उनके Spare Parts का बिज़नेस था! रात दिन एक कर रहे थे हम! ना दिन ता चैन था ना रात का आराम, सिर्फ काम की चिंता थी! इन सब की वज़ह से मेरा अपना बिज़नेस कम होने लगा जोकि Natural था अगर मैं बिज़नेस को समय नहीं दूँगा तो वह कैसे चलेगा! लेकिंग मेरे पर तो जैसे एक धुन सवार थी कि भाई साहब का बिज़नेस फिर से Stand करना है!

मुझे लगने लगा कि हमारा यह रिश्ता, रिश्ते से कुछ ज़यादा हो चला है! प्यार, अपनापन सब कुछ तो था हम दोनों के बीच!

लेकिन एक दिन फिर से पापा की कही बात सामने आ गयी "कोई किसी को याद नहीं करता, बस उसके दिए सुखों को याद करते हैं!"
मुझे याद है वो दिन, हम दोनों मेरी कार में Delhi से Dehradun जा रहे थे! रास्ते में किसी डील को लेकर हमारा एक छोटी सा argument हुआ जोकि अक्सर होता था, होना ही चाहिए क्योकि इसी तरह तो बात कर के कुछ नया निकलता है ! जब तक दूध को रगड़ो नहीं मक्खन नहीं निकलेगा! मुझे कभी नहीं लगा कि उन्हे इस तरह की बातचीत से कोई परेशानी होती थी बल्कि वो तो खुद इसे अच्छा समझते थे! लेकिन उस दिन ना जाने क्या हुआ, हालाँकि उन्होने कुछ साफ कहा नही! मुझे लगा कि उस दिन से वो मुझे ignore करने लगे! बिज़नेस बढ़िया चल रहा था! भाई साहब अब मुझे अक़्सर ignore करने लगे, बिज़नेस डील्स के लिए अकेले बिना बताये ही जाने लगे! कुछ पूछने पर कहते " मैंने फ़ोन किया था तुम्हे लेकिन मिला नही या busy था", कुछ भी कह कर टाल देते थे!

धीरे धीरे समझ आने लगा कि वो जान कर मुझे ignore कर रहे हैं! शायद मेरी अब ज़रूरत नहीं थी! बिज़नेस Well Established हो गया था! हमारी कोई Written Partnership Deed नही थी और भाई साहब ही सब हिसाब देखते थे, मुझे दूध मे से मक्खी की तरह बाहर निकाल दिया, लेकिंन प्यार से!

रिश्तो ने एक बार फिर से करवट ली, पुराने रिश्तो में फिर से बहार आ गई थी! पैसो की कमी अब नहीं थी और भाई साहब और भाभी जी के रिश्ते में फिर से गर्माहट आने लगी!
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ एक पल के कुछ दो पल के, रिश्ते बस रिश्ते होते हैं,

कुछ परो (feather) से हल्के होते हैं, बरसो के तले चलते-चलते भारी भरकम हो जाते हैं,
कुछ भारी भरकम होते हैं, बरसो के तले चलते-चलते हल्के फुल्के हो जाते हैं,
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ एक पल के कुछ दो पल के, रिश्ते बस रिश्ते होते हैं!!
नाम होते है रिश्ते के, कुछ रिश्ते नाम के होते हैं,
रिश्ता वो अगर मर जाये भी, बस नाम से जीना होता है,
रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ एक पल के कुछ दो पल के, रिश्ते बस रिश्ते होते हैं!!

आपका

योगेश

Every Child is a Genius but it's our duty to find them their way. Come join me in the mission to give our children less ...
28/01/2020

Every Child is a Genius but it's our duty to find them their way. Come join me in the mission to give our children less struggle and fewer errors life by doing a simple "Brain Profiling Test". Ask me how.....

Dear Friends,As we all know, every child is a genius and here to do something special. But due to lack of some experienc...
23/01/2020

Dear Friends,
As we all know, every child is a genius and here to do something special. But due to lack of some experience and knowledge, we missed sometimes and children suffer. Please join our mission to find the "Genetic Ability and Potential" of every child and help them to live an "error-free life".

Dear Parents, Parenting is a 20 years job but neither we trained nor we paid for it. We nurture our kids on the basis of...
22/01/2020

Dear Parents,
Parenting is a 20 years job but neither we trained nor we paid for it. We nurture our kids on the basis of some oral instructions by our elders, some Gyan from nears & dears and mostly based on our gut feeling. Most of us are totally clueless about the design of our Children. "Yes", I mentioned the word "Design".
We don't know much about our kids. Believe me its a fact. How many of you know about the learning pattern, learning speed, learning preferences of your kids? Along with this how many of you know about the memory sequence, duration of focused learning, subject preferences, Stream Selection after Tenth class, Carrier choices and Money profile. Every human comes with a Design and every design has "An Operational Manual" or "A Blueprint". You can have that for errorfree life of you and your Kid. Please don't hesitate to contact us. mail us at [email protected] for better understanding or Give us a missed call of 8222909030. We will call you back.

Regards Always

01/01/2020

The poet is encougarging us to fulfill our life goals.

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