10/12/2018
बोर्ड परिक्षा नजदीक है ,और विद्यार्थियों के साथ साथ अविभावक पर भी प्रेशर बढ रहा है ,,बोर्ड परिक्षा एक पायदान है जिसके ऊपर बच्चों का भविष्य निर्धारित होता है ,,आजकल जिस तरह से प्रतिशत से प्रतिभा को आंका जाने लगा है ऐसे में प्रेशर बनना भी स्वभाविक है !!!
लेकिन सवाल ये है कहां तक उचित है बच्चों पर पढाई का बोझ डालना ,,सभी अविभावक चाहते हैं उनके बच्चे सर्वश्रेष्ठ बने लेकिन सच्चाई ये है दुनियां में भिन्न भिन्न प्रकार के व्यक्ति हैं और सबका मष्तिष्क भी अलग है ,,किसी बच्चे को खेल में रुचि होती है ,,किसी को पैंटिंग में ,,कोई अच्छा नृत्य करता है तो किसी के आवाज में जादू होती है ,,कोई पढ़ाई में परिपुर्ण होता है ,,लेकिन बोर्ड परिक्षा में सभी एक ही तराजू में तौले जाते हैं कि किसको कितने प्रतिशत मिले और इसी से उनका भविष्य निर्धारित हो जाता है !!!
मेरे ख्याल से ये सही नही ,,यही वजह होती है कि छोटे छोटे बच्चे आत्महत्या करने लगे हैं ,,डिप्रेशन में जाने लगे हैं ,,अपने माता पिता से दूर रहने लगे हैं क्योंकि वो आपके पास आते भी हैं तो आपका सारा ध्यान उनकी परिक्षा की तैयारी पर ही होता है ,,जिससे वो चिढ जाते हैं !!
कुलदीप शर्मा