14/09/2022
विडम्बना!!
“हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा हमारा”;
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा।
यही पंक्तियाँ विद्यालय में बचपन से गाते हुए बड़े हुए;
लेकिन फिर समय आया और सब चूहा बिल्ली प्रतिस्पर्धा में लग गए;
जहाँ अंग्रेज़ी में गिट पिट आती है तो पढ़े लिखे हो वरना नहीं;
अंग्रेज़ी फ़िल्में देखते हो तो अच्छे ख़ानदान से हो वरना नहीं;
अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में पढ़ते हो तो होनहार व समझदार हो वरना नहीं;
अंग्रेज़ी गानों पर थिरकना आता है तो आपको नृत्य आता है वरना नहीं;
बच्चे को प्रणाम आता हो या नहीं अंग्रेज़ी का हाय, बाय और हाय-फ़ाय ज़रूर आना चाहिए;
गायत्री मंत्र आता हो या नहीं राइम ज़रूर आनी चाहिए;
अरे! सबसे अधिक तकलीफ़ तो तब होती है जब हमारी पौराणिक कथाएँ भी स्टॉरीटेलिंग के नाम पर अंग्रेज़ी में होती है;
और रामायण की रामायणा, महाभारत की महाभारता, कंस की कंसा, रावण की रावणा, गंगा की गैनज़ेस के रूप में पहचान होती है;
लेकिन ये विडम्बना है की हम भी अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में पढ़े हैं और अपने बच्चों को भी पढ़ा रहे हैं ;
इसका कारण हमारी सरकारों की क्षीण बुद्धि है की हिंदी माध्यम शिक्षा भवन जर्जर हालत में हो गए हैं, अध्यापकों का सम्मान कहीं गढ़ गया है;
माँ को मम्मा बुलाने लगे हैं;
दादी को ग्रैनी बुलाने लगे हैं;
हमारी संस्कृति को पिछड़ी और पाश्चात्य शैली को अभिमानी कहलाने लगे हैं;
जब भोजन उँगलियों से मुँह में जाता था तब स्वाद और पोषण दुगुना हो जाता था और काया स्वस्थ रहती थी;
अब छुरी काँटों से भोजन अंदर जाने में दोनो आधे हो गए और काया रोगग्रसित होने लगी है;
अब शरीर को भी हल्दी से ज़्यादा करक्युमिन की गोलियाँ भाने लगी हैं;
यह कैसी विडम्बना है की हिंदी भी मोबाइल में अंग्रेज़ी में लिखनी पड़ती है;
और हिंदी फ़िल्म जगत के सितारे अंग्रेज़ी में ही बात करते दिखाई पड़ते हैं;
यह कैसी विडम्बना है की हिंदी भी मोबाइल में अंग्रेज़ी में लिखनी पड़ती है!!
आज हिंदी दिवस पर भाषा लज्जित है😣
अपने ही देश में बस एक दिन और पखवाड़े तक ही सीमित है😟
दुनिया में भारतीय फ़ैले हैं लेकिन फिर भी मोबाइल और लैप्टॉप की प्राथमिक भाषा हिंदुस्तान में भी अंग्रेज़ी ही हो गई है चूँकि हिंदी अब किसीको समझ नहीं आती है😳
यह कैसी विडम्बना है की हिंदी भी मोबाइल में अंग्रेज़ी में लिखनी पड़ती है😠😡
- गौरवान्वित एवं लज्जित हिंदी की बेटी,
मितिशा अग्रवाल