10/10/2020
World mental health day, जो कि आज है, तो बात कर ली जाए मानसिक स्वास्थ्य की, आंकड़ों के अनुसार पूरे विश्व में हर 40 सेकेंड में कोई ना कोई आत्महत्या कर रहा है। भारत में भी अवसाद एक बड़ी समस्या है, WHO के आंकड़े कहते हैं कि 20 फीसदी भारतीय मानसिक तौर पर अवसाद ग्रस्त हैं।
ऐसे में जब कोरोनाकाल के चलते अधिकतम लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं ऐसे में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के दिन सुनिए गगन मुदगल जी की लिखी नज़्म, मेरे यानी गौरव जैन “पत्रकारजी” के साथ जिसमें उन्होंने एक मानसिक रोगी या अवसादग्रस्त आदमी या औरत के बारे में समाज के नजरिये को कहने की कोशिश की है।
नज़्म – मेन्टल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य)
कोई रो रहा है बहुत जोरों जोरों
पर अंदर ही अंदर, जी ही जीे में अपने
कि आवाज़ हम तक नहीं आ सके
कि आवाज़ हम तक अगर आ गई तो
उसे हम दिलासे तो देंगे ही, ये भी कहेंगे
ज़रा सो लिया कर, दवा खा लिया कर
बदन चैन पाएगा तो ज़ेहन भी ख़ुश रहेगा
मगर हम कभी भी
न ये जान पाएँगे उसकी बिमारी भला है तो है क्या
दिमागी बिमारी भी कोई बिमारी है क्या
सो घर लौटते वक़्त सोचेंगे हम ये
वो बीमार हरगिज़ नहीं है
दवाएँ न दी जाएँ उसको
दुआएँ दी जाएँ उसे बस दुआएँ
वो पागल नहीं भी था पहले अगर
तो अब हो गया है
वो पागल !
– गगन मुदगल
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