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OPERATIONAL GUIDELINES 2018 "AGRICULTURAL MARKETING INFRASTRUCTURE SUB-SCHEME OF INTEGRATED SCHEME FOR AGRICULTURAL MARK...
23/11/2018

OPERATIONAL GUIDELINES 2018 "AGRICULTURAL MARKETING INFRASTRUCTURE SUB-SCHEME OF INTEGRATED SCHEME FOR AGRICULTURAL MARKETING" (w.e.f. 22.10.2018 to 31.03.2020)

AJAY KUMAR GOYAL
M/s: GOYAL & ASSOCIATES
(PROJECT & FINANCE CONSULTANTS)
301, SHIVAM APARTMENT,
26/2, CHAINSINGH KA BAGICHA,
NEW PALASIA,
(BEHIND NAFEES BAKERY)
INDORE (M.P.) 452001

+919752394354

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23/11/2018
04/10/2017
04/10/2017

क्या सचमुच काले धन को खत्म करने की कोशिश बेकार साबित होगी...
मैं स्वीकार करता हूं कि अर्थशास्त्र का मेरा ज्ञान उतना ही है, जितना किसी राजनेता को संविधान का होता है. इसके बावजूद मुझे लगता है कि केवल इसी वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर कुछ कहने के अधिकार से मैं वंचित नहीं हो जाता हूं. कभी-कभी सामान्य-ज्ञान विषयों के विशेषज्ञों की तुलना में अधिक व्यावहारिक एवं सत्य के अधिक निकट बैठे हुए पाए गए हैं. बस, अपने इसी अधिकार और विश्वास को आधार बनाकर मैं यहां विमुद्रीकरण पर कुछ अपने प्रश्न और कुछ राय रखने जा रहा हूं. निःसंदेह इसमें उन लोगों के सवाल और सलाहें भी शामिल हैं, जिन्हें हम 'हम भारत के लोग' कहते हैं.
तो शुरुआत करते हैं, विमुद्रीकरण के उठाए गए कदम पर उठने वाली अंगुलियों से.
इस बारे में अर्थशास्त्रियों के दो धड़े हैं. मनमोहन सिंह जैसे अर्थशास्त्री इस कदम को जीडीपी को दो प्रतिशत कम करने वाला मान रहे हैं. कुछ अन्य की भी राय यही है, लेकिन वे प्रतिशत नहीं बता रहे हैं. मनमोहन सिंह के इस विचार को लोगों ने महज विपक्ष के एक राजनेता का विचार मानकर सिरे से खारिज कर दिया है. हां, अन्य के विचारों के बारे में वह विचार ज़रूर कर रही है.
फिलहाल विमुद्रीकरण के विरोध में तीन तथ्य सबसे अधिक प्रबलता के साथ उठाए जा रहे हैं. इनमें पहला है - आम लोगों को होने वाली परेशानी, दूसरा है - इससे कालाधन खत्म नहीं होगा और तीसरा है - इससे अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ जाएगी.
निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था वाली आशंका आम लोगों को चिंतित करती है, लेकिन कभी-कभी ही, हमेशा नहीं. इस चिंता के बारे में उनके ज़हन में कुछ सवाल उठते हैं, जिनमें से कुछ ये हैं.
क्या जीडीपी इतनी प्रमुख हो गई है कि उसके लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया जाए; देश के कानून तक को?
क्या काले धन की अर्थव्यवस्था को एक नया नाम देकर उसे वैध बना दिया जाए, क्योंकि वह जीडीपी के लिए ज़रूरी है?
इस जीडीपी का बड़ा भाग किस रूप में और किन लोगों की जेब में जाता है?
क्या किसी सरकार को स्वयं को अपने यहां की केवल अर्थव्यवस्था तक ही सीमित रखना चाहिए, और सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्थितियों को इस अर्थव्यवस्था के हवाले करके मूक दर्शक की मुद्रा अख्तियार कर लेनी चाहिए?
अब हम आते हैं इस बात पर कि क्या सचमुच काले धन को खत्म करने की यह कोशिश व्यर्थ सिद्ध होगी? अर्थशास्त्री इस बारे में दुनिया के देशों द्वारा उठाए गए कदमों का उदाहरण देते हुए इस कोशिश को महज़ 'राजनीतिक एवं अहमकाना' कदम मानते हैं. उनके इस निष्कर्ष का ठोस बौद्धिक आधार है - 'दुनिया के बहुत से देश' लेकिन अब यहां फिर कुछ सवाल कौंधते हैं.
भारत दुनिया का एक देश तो है, लेकिन क्या इसी वजह से वह दुनिया के सभी देशों का प्रतिरूप मात्र है?
क्या किसी भी देश की आर्थिक नीति के प्रभाव पर उस देश की सामाजिक संरचना, राजनीतिक चरित्र एवं सांस्कृतिक मूल्यों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता?
क्या भारत में भी काले धन का स्वरूप एवं उसका विस्तार बिल्कुल वैसा ही है, जैसा कि दुनिया के उन देशों में है, जहां यह कदम असफल रहा है?
यदि ऐसा ही था, तो भारत पर अमेरिका तथा यूरोपीय देशों की मंदी का उतना प्रभाव क्यों नहीं पड़ा?
यदि हमारे अर्थशास्त्री इन बिन्दुओं को भी ध्यान में रखकर अपनी बात कहेंगे, तो शायद लोगों को उनकी बातों पर ज़्यादा यकीन हो सकेगा. अन्यथा कम से कम लोग तो ऐसा नहीं ही सोच रहे हैं - 'तेरा क्या होगा रे, नोटबंदी'
डॉ. विजय अग्रवाल वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं...

02/02/2017

मोदी सरकार के तीसरे आम बजट में गांव, किसान, खेती, ढांचागत सुविधाओं के विकास और आर्थिक रूप से कमजोर तबके को राहत देने पर जोर रहा। गरीबों को रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए बड़े अभियान की घोषणा करना, प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपए तक का हेल्थ कवर प्रदान करने के लिए नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, बुनियादी ढांचा विकास पर बल, ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं के लिए 2.87 लाख करोड़ रुपए की सहायता और किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य यह बताता है कि सरकार अपनी पुरानी छवि को तोड़ना चाहती है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार कमजोर वर्गों की मदद के लिए तीन मुख्य योजनाएं शुरू करेगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। किसान बीमा प्रीमियम की मामूली राशि अदा करेगा और कोई नुकसान होने पर उसे मुआवाज मिलेगा। बजट में स्वास्थ्य बीमा योजना की भी घोषणा की गई, जिससे देश की एक तिहाई आबादी को स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। जेटली ने गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को सरकारी सब्सिडी की मदद से रसोई गैस कनेक्शन की सुविधा देने की नई पहल की भी घोषणा की।

1.छोटे टैक्सपेयर्स और छोटे व्यापारियों के लिए
बजट में छोटे करदाताओं को राहत देने की कोशिश की गई है। इनकम टैक्स ऐक्ट की धारा 87 ए के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए कर छूट की अधिकतम सीमा 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है। जेटली ने कहा कि इससे दो करोड़ से अधिक करदाताओं को 3000 रुपये की राहत मिलेगी। धारा 80 जीजी के अंतर्गत मकान किराए के भुगतान के संबंध में कटौती की सीमा 24000 रुपये प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 60000 रुपये प्रतिवर्ष की गई है, जिससे किराए के मकानों में रहने वाले व्‍यक्तियों को राहत मिलेगी।
इनकम टैक्स की धारा 44 एडी के अंतर्गत अनुमानित टैक्सेशन योजना के तहत टर्नओवर या सकल प्राप्तियों को मौजूदा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की गई है, जिसका लाभ लगभग 33 लाख छोटे व्‍यवसायियों को मिलेगा। इससे छोटे और मझोले श्रेणी के व्यवसायियों को विस्‍तृत बही खातों के रख-रखाव और ऑडिटिंग के बोझ से मुक्ति मिलेगी। टैक्स योजना को ऐसे व्‍यवसायियों त‍क बढ़ाया जाएगा, जिनकी अनुमानित 50 प्रतिशत की प्राप्तियों के साथ सकल प्राप्तियां 50 लाख रुपये की हैं।

2.हर परिवार को एक लाख का हेल्थ कवर
वित्त मंत्री ने नई स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना की घोषणा की है। संसद में बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा कि परिवार के सदस्‍यों की गंभीर बीमारी गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डालती है। ऐसे परिवारों की सहायता करने के लिए सरकार एक नई स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा योजना शुरू करेगी, जो प्रति परिवार एक लाख रुपए तक का स्‍वास्‍थ्‍य कवर प्रदान करेगी। । इस प्रस्तवित योजना के तहत ऐसे परिवार के 60 साल से अधिक आयु वाले बीमार लोगों को 30 हजार रुपये का अतिरिक्त टॉप अप पैकेज दिया जाएगा।
वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि किफायती दामों पर गुण्‍वत्‍तापूर्ण दवाओं का निर्माण करना एक बड़ी चुनौती रही है। उन्‍होंने कहा कि हम जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में फिर से तेजी लाएंगे और 2016-17 के दौरान प्रधानमंत्री की जन औषधि योजना के तहत 3000 स्‍टोर खोले जाएंगे। वित्‍त मंत्री ने एक 'राष्‍ट्रीय डायलिसिस सेवा कार्यक्रम' शुरू करने का प्रस्‍ताव रखा है। इसके लिए राशि पीपीपी मॉडल के जरिए राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत उपलब्‍ध कराई जाएगी, जिससे कि सभी जिला अस्‍पतालों में डायलिसिस सेवाएं मुहैया कराई जा सकें।

3.पेंशन और प्रीमियम पर टैक्स छूट
जेटली ने कहा कि पेंशन स्‍कीमें वरिष्‍ठ ना‍गरिकों की वित्तीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। उन्‍होंने राष्‍ट्रीय पेंशन स्‍कीम (एनपीएस) के मामले में सेवानिवृत्ति के समय फंड के 40% तक की निकासी को टैक्स फ्री करने का प्रस्‍ताव किया है। इसी तरह रिटायरमेंट फंड्स और ईपीएफ सहित मान्‍यता प्राप्‍त भविष्‍य निधियों के मामले में 01 अप्रैल 2016 के बाद किए जाने वाले कॉन्ट्रिब्यूशन से सृजित निधि में भी निधि के 40% के टैक्स फ्री होने का समान मानदंड लागू होगा। इसके अतिरिक्‍त, पेंशनभोगी की मृत्‍यु के बाद उसके कानूनी उत्‍तराधिकारी को मिलने वाली वार्षिकी निधि इन तीनों ही मामलों में कर योग्‍य नहीं मानी जाएगी।
उन्‍होंने टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए मान्‍यता प्राप्‍त भविष्‍य और रिटायरमेंट फंड्स में नियोक्‍ता के कॉन्ट्रिब्यूशन की मौद्रिक सीमा को प्रति वर्ष 1.5 लाख रुपये करने का भी प्रस्‍ताव किया है। एनपीएस द्वारा उपलब्‍ध कराई जाने वाली वार्षिकी (एन्‍यूटी) सेवाओं और ईपीएफओ द्वारा कर्मचारियों को मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं को सेवा कर से छूट देने का प्रस्‍ताव किया है। इसके अलावा, उन्‍होंने कुछ मामलों में सिंगल प्रीमियम वार्षिकी (बीमा) पॉलिसियों पर सेवा कर को अदा किए गए प्रीमियम के 3.5 प्रतिशत से घटाकर 1.4 प्रतिशत करने का भी प्रस्‍ताव किया है।
जेटली ने कहा कि औपचारिक क्षेत्र में नए रोजगार के सृजन में तेजी लाने के लिए भारत सरकार कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन में नामांकन कराने वाले सभी कर्मचारियों के लिए उनकी नियुक्ति की तारीख से आरंभिक तीन वर्षों के लिए 8.33 प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारी पेंशन योजना के तहत अंशदान का भुगतान करेगी।

4.डेढ़ करोड़ बीपीएल परिवारों को एलपीजी
बजट में चालू वित्‍त वर्ष के लिए सामाजिक क्षेत्र के लिए अनेक नये उपाय शामिल हैं। वित्‍त मंत्री ने गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्‍शन देने के लिए बजट में 2000 करोड़ रुपए देने की घोषणा की, इस योजना से चालू वर्ष के दौरान गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 1.5 करोड़ परिवारों को लाभ मिलेगा। यह योजना कम से कम दो वर्ष तक जारी रहेगी, ताकि इसके तहत पांच करोड़ बीपीएल परिवारों को शामिल किया जा सके। इस योजना से पूरे देश में रसोई गैस की सर्वसुलभ कवरेज सुनिश्चित होगी। इस कदम से महिलाओं का सशक्तीकरण होगा और उनके स्‍वास्‍थ्‍य की भी रक्षा होगी।
वित्‍त मंत्री ने स्‍वेच्‍छा से एलपीजी गैस की सब्सिडी छोड़ने वाले परिवारों की प्रंशसा करते हुए उनका आभार व्‍यक्‍त किया, जिन्‍होंने माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्‍वैच्छिक रूप से रसोई गैस की सब्सिडी छोड़ दी है।
जेटली ने एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण घोषणा में कहा कि उद्योग संघों की भागीदारी में सूक्ष्‍म, लघु और मझोले उद्यम मंत्रालय की भागीदारी में राष्‍ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति केंद्र की स्‍थापना करने का भी प्रस्‍ताव है। यह केंद्र अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों को केंद्र सरकार की खरीदारी नीति 2012 के अधीन अपनी जिम्‍मेदारी पूरी करने के लिए वैश्विक सर्वश्रेष्‍ठ कार्य विधि अपनाने और स्‍टैंड अप इंडिया पहल का लाभ उठाने के लिए पेशेवर मदद उपलब्‍ध कराएगा। उन्होंने अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं में उद्यमियता को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्‍टैंड अप इंडिया योजना को मंजूरी देने की भी घोषणा की और बताया कि इसके लिए 500 करोड़ रुपए उपलब्‍ध कराए गए है।
इस योजना से प्रत्‍येक श्रेणी के कम-से-कम एक उद्यमी के लिए प्रति बैंक शाखा कम-से-कम ऐसी दो प्रॉजेक्ट को मदद मिलेगी। इस योजना से कम से कम 2.5 लाख उद्यमियों को लाभ मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि अल्‍पसंख्‍यकों के कल्‍याण और स्किल डिवेलपमेंट के लिए बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम तथा उस्‍ताद योजना को प्रभावशाली रूप से लागू किया जाएगा।

5.छोटे करदाताओं को लाभ
छोटे करदाताओं के लिए इनकम टैक्स ऐक्ट 80 GG के तहत मिलने वाली हाउस रेंट की छूट बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है, जबकि पहले यह 24,000 रुपये थी। इसके अलावा 5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं को 87 ए के तहत वित्त वर्ष 2016-17 में 3 हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलेगी। पहले इस पर 2 हजार रुपये की छूट मिल रही थी। इस तरह अब 5 लाख रुपये तक की आय वाले को 5 हजार रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलेगी। जेटली ने एक करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा आय वाले लोगों पर सरचार्ज 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।

6.सस्ते घरों के निर्माण पर छूट
सस्‍ते घर बनाने को बढ़ावा देने के उपाय के तहत वित्‍त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना समयबद्ध तरीके से सभी और विशेषकर गरीबों की आवासीय जरूरतों का समाधान करने के लिए सरकार के आश्‍वासन का साकार रूप है। उन्‍होंने कहा कि जून, 2016 से मार्च 2019 तक मंजूर किए जाने वाले और मंजूरी के तीन वर्ष के भीतर चार मेट्रो शहरों में निर्मित किए जाने वाले 30 वर्ग मीटर के फ्लैटों और अन्‍य शहरों में 60 वर्गमीटर तक के फ्लैटों के निर्माण प्रॉजेक्ट शुरू करने वाले उपक्रमों को लाभों से सौ प्रतिशत कटौती देने का प्रस्‍ताव किया।
पहली बार मकान खरीदने वालों के लिए वित्‍त मंत्री ने अगले वित्‍त वर्ष के दौरान स्‍वीकृत 35 लाख रुपये तक के ऋण हेतु 50 हजार रुपये प्रतिवर्ष के अतिरिक्‍त ब्‍याज के लिए कटौती देने का प्रस्‍ताव किया, बशर्ते मकान की कीमत 50 लाख रुपये से ज्‍यादा न हो। उन्‍होंने कहा कि सरकारी निजी भागीदारी वाली स्‍कीमों सहित केन्‍द्रीय या राज्‍य सरकार की किसी स्‍कीम के तहत 60 वर्गमीटर तक के क्षेत्र में सस्‍ते मकानों के निर्माण को सेवा कर से छूट दी जाएगी।

7.खेती और किसानों के लिए
जेटली ने बजट पेश करते हुए कहा कि उनकी सरकार खाद्य सुरक्षा से और आगे बढ़ने और किसानों में आय सुरक्षा की भावना भरने का इरादा रखती है। बजट में कृषि और किसानों के कल्‍याण के लिए 35,984 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। जेटली ने कहा कि 141 मिलियन हेक्‍टेयर शुद्ध खेती वाले क्षेत्रों में से केवल 65 मिलियन हेक्‍टेयर ही सिंचित हैं। उन्‍होंने 'प्रधानमंत्री सिंचाई योजना' की घोषणा की, जिससे कि अन्‍य 28.5 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के साथ लाने के लिए मिशन मोड में क्रियान्वित किया जा सके।
जेटली ने मार्च 2017 तक 14 करोड़ कृषि जोतों के कवरेज के लिए मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के लिए लक्ष्‍य निर्धारित कर रखा है। यह किसानों को उर्वरक का उचित उपयोग करने में सहायक होगा। इस साल 14 अप्रैल को डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के जन्‍मदिवस पर कृषि उत्पादों के लिए ई-प्लैटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा की। बजट में सभी किसानों तक न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य सुनिश्चित करने के लिए तीन विशिष्‍ट पहलों की घोषणा की गई, जिसमें खरीदारी का विकेन्‍द्रीकरण, एफसीआई के माध्‍यम से ऑनलाइन खरीदारी प्रणाली और दालों की खरीदारी के लिए प्रभावी प्रबंध करना शामिल है।

8. गांवों और कस्बों के लिए बंपर धन
जेटली ने ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को अनुदान के रूप में 2.87 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की। ऐसा 14वें वित्‍त आयोग की सिफारिशों के अनुसार किया है और यह राशि पिछले पांच वर्ष की तुलना में 228% अधिक है। दीनदयाल अंत्‍योदय मिशन को प्रत्‍येक सूखाग्रस्‍त विकास खंड में और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना को ऐसे ही जिलों में शुरू किया जाएगा।
श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन मिशन के तहत 300 रूर्बन कलस्‍टरों को विकसित करने की भी घोषणा की गई। उन्‍होंने 01 मई, 2018 तक शत-प्रतिशत गांवों में विद्यु‍तीकरण की भी घोषणा की। वित्‍त मंत्री ने नैशनल डिजिटल साक्षरता मिशन और डिजिटल साक्षरता अभियान नामक दो नई योजनाओं को भी मंजूरी दी है। पंचायती राज संस्‍थानों की मदद के लिए उन्‍होंने नई योजना राष्‍ट्रीय ग्राम स्‍वराज अभियान का भी प्रस्‍ताव किया है।

9.किसानों की सुध ली
जेटली ने घोषणा की कि सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए खेत और खेत से इतर क्षेत्रों में दिश बदलने की कार्रवाई करेगी। उन्‍होंने कहा कि कृषि और किसान कल्‍याण के लिए कुल 35,984 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। वित्‍त मंत्री ने कहा कि लगभग 20,000 करोड़ रुपये की प्रारंभिक कॉर्पस निधि से नाबार्ड में एक समर्पित और लंबे समय के लिए सिंचाई निधि बनाई जाएगी। इसे प्राप्‍त करने के लिए वर्ष 2016-17 में बजटीय सहायता और बाजार ऋणों के जरिए कुल 12,517 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जेटली ने कहा कि मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड स्‍कीम को अब ज्‍यादा उत्‍साह से लागू किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि मार्च 2017 तक सभी 14 करोड़ जोतों को इसके अंतर्गत शामिल करने का लक्ष्‍य है। उन्‍होंने कहा कि उर्वरक कंपनियों के 2000 मॉडल खुदरा बिक्री केंद्रों को अगले 3 वर्षों के दौरान मृदा और बीज परीक्षण सुविधाएं उपलब्‍ध कराई जाएंगी।
किसानों के लिए पर्याप्‍त और समय पर कर्ज सुनिश्चित करने पर विशेष ध्‍यान दिया गया है। वर्ष 2015-16 में 8.5 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्‍य की तुलना में वर्ष 2016-17 में कृषि ऋण के लिए लक्ष्‍य अब तक का सबसे अधिक 9 लाख करोड़ रुपये का होगा। किसानों पर ऋण चुकाने के भार को कम करने के लिए बजट अनुमान 2016-17 में ब्‍याज सहायता के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

10. बुनियादी ढांचा और निवेश पर जोर
वित्‍त मंत्री ने बुनियादी ढांचा और निवेश पर विशेष जोर देते हुए बताया कि सड़क और राजमार्गों के लिए बजट में 55 हजार करोड़ रुपए की राशि का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित सड़क क्षेत्र के लिए 2016-17 में 97 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे।
सरकार ने ग्रीन फील्‍ड बंदरगाहों को विकसित करने की योजना बनाई है। सरकार राष्‍ट्रीय जल मार्ग के काम में तेजी ला रही है और इन पहलों के लिए 800 करोड़ रुपए उपलब्‍ध कराए गए हैं। नागर विमानन क्षेत्र में बिना प्रयोग और कम प्रयोग वाले हवाई अड्डों को चालू करने के लिए कार्य योजना तैयार की है। 160 हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों पर राज्‍य सरकार के साथ 50 से 100 करोड़ रुपए प्रत्‍येक की सूचक लागत पर पुनरुद्धार किया जाएगा।
विद्युत क्षेत्र के लिए अगले 15 से 20 वर्षों के दौरान परमाणु विद्युत उत्‍पादन में निवेश करने की व्‍यापक योजना बनाई गई है। बुनियादी ढांचे के और विकास के लिए 31,300 करोड़ रुपए अतिरिक्‍त वित्‍तीय राशि को बॉण्‍ड के माध्‍यम से जुटाने की अनुमति दी जाएगी। बीमा और पेंशन तथा परिसंपत्ति पुनर्गठन के क्षेत्र में एफडीआई नीति में सुधार की घोषणा की गई है।

02/02/2017

बजट में गांवों और किसानों के लिए ये है खास:

नई दिल्ली (1 फरवरी): वित्त मंत्री अरुण जेटली कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह (क्रेडिट फ्लो) बढ़ाने के प्रयास के तहत बजट में कृषि ऋण लक्ष्य को एक लाख करोड़ रुपये बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की है। साथ ही, वित्त वर्ष 2017-18 में फार्म लोन टारगेट बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया जो मौजूदा समय में नौ लाख करोड़ रुपये है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में गांवों और किसानों के लिए क्या-क्या निकला, इसका लेखा-जोखा इस प्रकार है...

1- किसानों का आय बढ़ाने पर ध्यान देंगे।

2- किसानों को समय पर कर्ज मिले, इस बात पर ध्यान देंगे। टैक्स देने वालों का सम्मान होगा।

3- नाबार्ड के कंप्यूटरीकरण की ओर ध्यान देंगे ताकि किसानों को कर्ज देने में आसानी होगी।

4- कृषि विकास दर 4.1 पर्सेंट होने की उम्मीद। इस बार फसल अच्छी रहने की उम्मीद।

5- सॉइल हेल्थ कार्ड पर भारत सरकार ध्यान दे रही है। कृषि विज्ञान क्षेत्र में 100 नए लैब बनाए जाएंगे।

6- नाबार्ड के तहत सिंचाई के लिए आवंटित राशि 30 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ कर दी गई।

7- ड्रॉप मोर क्रॉप की योजना नाबार्ड लेकर आ रहा है, इसके लिए 5 हजार करोड़ का प्रावधान।

8- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 9 हजार करोड़। नाबार्ड के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान।

9- कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग का मॉडल लाया जाएगा। कई मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट भी खुलेंगे।

10- मनरेगा को भी नए तरीके से किसानों के सामने पेश किया जाएगा ताकि उनको फायदा पहुंचाया जा सके।

11- किसान, गांव, युवा, गरीब, इन्फ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय क्षेत्र, डिजिटल इंडिया, पब्लिक सर्विस, खर्च पर संयम, सरल टैक्स।

12- मनरेगा में दस लाख तालाब बने। मनरेगा के लिए अब 48 हजार करोड़ रुपये का बजट।

13- गांवों में 133 किमी सड़क हर रोज बन रही है। पहले 73 किमी सड़क रोज बनती थी।

14- स्वच्छ भारत मिशन को कामयाब नाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बढ़ाने की रफ्तार 18 पर्सेंट बढ़ी।

15- राष्ट्रीय पेयजल योजना के तहत आर्सेनिक और जहरीले तत्वों से प्रभावित क्षेत्रों को पानी पहुंचाने की कोशिश।

16- 2019 तक एक करोड़ लोगों को पक्का घर देगी सरकार।

17- डेढ़ लाख गांवों में ब्रॉडबैंड सेवा पहुंचाई जाएगी।

18- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रोज 133 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी।

19- 2019 तक 50 हजार पंचायतें गरीबी मुक्त करने का लक्ष्य बनाया गया है।

20- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 27 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

21- एक करोड़ परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर निकालने का लक्ष्य।

22- 1 मई 2018 तक देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए कहा गया है।

23- वित्त मंत्री ने कहा, मार्च 2017 तक मनरेगा के तहत 10 लाख तालाब बनाने लिए जाएंगे।

24- फसल बीमा अब 30 फीसदी की बजाय 40 फीसदी होगा।

25- पिछले बजट में 5500 करोड़ की तुलना में इस बार 13000 करोड़ रुपये किसान बीमा योजना के लिए दिए गए।

02/02/2017

बजट 2017: किसानों की जमीन पर उतरेंगे पीएम के सपने?

मोदी सरकार का चौथा आम बजट आने में अब चंद दिन हैं. मोदी राज में आसमानी और सुल्तानी कारणों से खेती की हालत काफी पतली हो चुकी है.
कृषि ग्रोथ दर इस दरमियान पिछले तीस सालों के न्यूनतम पर है. प्रधानमंत्री मोदी के सपने को साकार करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किसानों की आय सुरक्षा बीड़ा उठाया है और 2022 तक 5 सालों में किसानों की आमदनी को दोगुना करने की मांगलिक घोषणा उन्होंने अपने पिछले बजट में की है.
आम बजट 2017 की खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इसके लिए उन्होंने कृषि और किसान कल्याण के लिए 35984 करोड़ रुपए का बजट में आवंटन किया है. जिसे पिछले बजट 2015-16 से दोगुना आवंटन बताया गया है.
इसमें ही उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य स्कीम और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसे मोदी सरकार के अग्रणी और महती कार्यक्रमों के भारी भरकम लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाया है. पर कृषि विशेषज्ञ इस कृषि बजट आवंटन को न केवल अपर्याप्त मानते हैं, बल्कि भ्रामक भी मानते हैं.

दोगुनी आय का चुनौती भरा लक्ष्य
असल में फरवरी,2016 में बरेली की किसान रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की मंशा जतायी थी. इसे ही वित्त मंत्री ने बजट में अमली जामा पहनाया है.
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिव्य लक्ष्य को हासिल करने के लिए सात सूत्री रणनीति भी तय की है. और कहा है कि मैंने इस लक्ष्य को एक चुनौती की तरह लिया है. बेहतर रणनीति, सुविचारित प्रोग्राम, पर्याप्त स्रोतों और सुशासन से लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री के सात सूत्र है:-
पर ड्रॉप मोर क्रॉप के मद्देनजर सिंचाई प्रोग्राम पर फोकस, भारी बजट का प्रावधान
2. मिट्टी की उत्पादकता के हिसाब से हर खेत के लिए उन्नत बीज और पोषक तत्वों का प्रावधान
3. फसल पश्चात नुकसान की रोकथाम के लिए वेयर हाउसिंग (भंडार गृह) और कोल्ड स्टोरेज (शीत गृहों) में भारी निवेश
4. खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्यसंवर्धन
5. खामियों को दूर कर राष्ट्रीय कृषि बाजार का निर्माण और 585 कृषि मंडियों को जोड़कर ई ट्रेडिंग प्लेटफार्म मुहैया कराना
6. फसल की सस्ती कीमत के जोखिम कम करने के लिए नई कृषि फसल कीमत स्कीम की शुरुआत
7. खेती से जुड़ी अन्य आर्थिक गतिविधियों जैसे मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन आदि को बढ़ावा
मोदी ने कहा कि मुझ विश्वास है कि किसानों की आय दोगुनी लक्ष्य करने का लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे. लेकिन इन सात सूत्रों में मिट्टी के उत्पादकता संबंधी कार्ड को छोड़ मोदी सरकार बाकी सूत्रों पर अपनी मंशा और नीति पर खरी नहीं उतरी है.

कौन सी आय दोगुनी?
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की घोषणाओं से यह अब तक साफ नहीं है कि 2022 तक किसानों की नॉमिनल आय (सामान्य आय जिससे महंगाई का समायोजन नहीं होता है) या वास्तवित आय (यह महंगाई के प्रभाव को घटा कर आय निकाली जाती है) को दोगुना करने का लक्ष्य है.
किसानों की सामान्य आय को पांच या छह सालों में दोगुना करना अपने आप में कोई चुनौती भरा लक्ष्य नहीं है. पिछले तीस सालों में गिरती पड़ती और ‘अकर्मण्य’ केंद्र सरकारों के राज में यह करिश्मा दो बार हो चुका है.
नीति आयोग के कृषि विशेषज्ञ और सदस्य रमेश चंद के अनुसार 1987-88 से 1992-93 और 2004-05 से 2009-10 के पांच सालों में किसानों की सामान्य आय दोगुनी हो चुकी है.
सबको मालूम है कि 1990-91 में देश की आर्थिक हालत बेहद नाजुक थी और तब लंदन में टनों सोना गिरवी रख कर आवश्यक आयातों के लिए विदेश मुद्रा का प्रबंध करना पड़ा था.
दूसरी बार यह करिश्मा मनमोहन सिंह के राज में हुआ जिनको प्रधानमंत्री मोदी समेत भाजपा का अदना कार्यकर्त्ता भी अकर्मण्य मानता है.
चमत्कारों का चमत्कार
कृषि मूल्य और लागत आयोग के पूर्व मुखिया डॉ. अशोक गुलाटी कहते हैं कि यदि मोदी सरकार पांच सालों में किसानों की वास्तविक आय को दोगुना करने में सक्षम रहती है, तो यह चमत्कारों का चमत्कार होगा और इसके अर्थव्यवस्था पर चौतरफा सकारात्क प्रभाव पड़ेंगे.
भूमंडलीकरण, उदारवाद और विदेशी पूंजी के आसरे विकास के मॉडल को अपनाए आज देश को बीस साल से ऊपर हो गए. पर सच यही है कि कृषि अब भी अर्थव्यवस्था की धुरी बनी हुई है.
हालांकि इस दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट आयी है और यह हिस्सेदारी महज घट कर 13-14 फीसदी रह गई है.
लेकिन देश की 59 फीसदी आबादी आज भी रोजीरोटी के लिए कृषि पर ही आश्रित है. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के कई उद्योगों की खुशहाली और तरक्की कृषि पर ही मुख्यत: टिकी हुई है.
पिछले तीन सालों से किसानों की आय पस्त है, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ भी धराशायी हो गई है. मोदी राज के 2014-15 और 2015-16 में कृषि ग्रोथ दर महज 0.2 और 1.4 फीसदी रही है.
2016-17 में 4.1 फीसदी ग्रोथ दर का अनुमान है यानी इन तीन सालों में औसत कृषि ग्रोथ दर 1.8% ही रहेगी जो मनमोहन सिंह राज की औसत कृषि ग्रोथ दर से बहुत पीछे है.

सिंचाई को चाहिए भीमकाय बजट आवंटन-
किसानों की कुल आय में आज भी सर्वाधिक आय कृषि से होती है. इसके अलावा किसानों को बागवानी, पशु पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और मजदूरी से आय होती है.
प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों ही कृषि आय में बढ़ोतरी के लिए सिंचाई को सबसे अहम मानते हैं. डॉ. गुलाटी का कहना है कि बेहतर सिंचाई सुविधाओं और जल प्रबंधन से खेती की पैदावार 70-80 फीसदी बढ़ जाती है जो किसानों की आय का सबसे प्रमुख स्रोत है. पर इसके लिए भारी भरकम बजटीय आवंटन की आवश्यकता होगी.
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के लिए 2015 में आगामी पांच सालों में 50 हजार करोड़ रुपए आवंटन की घोषणा की गयी थी. अब इस योजना में कई सिंचाई प्रोग्रामों का समावेश हो गया है. पर कृषि विशेषज्ञ इस आवंटन की पर्याप्त नहीं मानते हैं.
कृषि विशेषज्ञ पी के जोशी के अनुसार 1991-2007 के बीच केवल सार्वजानिक नहर योजनाओं पर 2.55 लाख करोड़ रुपए खर्च किये गए. इसके सामने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का पांच सालों में 50 हजार करोड़ रुपए का आवंटन कुछ भी नहीं है.
डॉ. गुलाटी का साफ कहना है कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आगामी पांच सालों में तकरीबन तीन लाख करोड़ रुपए आवश्यकता सिंचाई को होगी यानी तकरीबन हर साल 40-50 हजार करोड़ रुपए.
जाहिर है कि सिंचाई के लिए 10 हजार करोड़ रुपए औसत प्रति साल आवंटन बहुत कम है. पर क्या वित्त मंत्री सिंचाई के लिए 40-50 हजार करोड़ का आवंटन हर साल बजट में कर पायेंगे.

फसल बीमा अब भी पटवारी के भरोसे-
किसानों की आय को दोगुना करने के लिए जरूरी है कि कुदरती मार से फसलों के नुकसान की भरपाई समय से और पर्याप्त हो. प्रधानमंत्री ने सात सूत्रों में फसल बीमा पर जोर दिया है.
इस वजह से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को काफी संवारा और सक्षम किया गया है. जो अब पहले से लाख गुना बेहतर है. इसमें कृषि बीमा प्रीमियम में भारी कमी की गयी है और नुकसान की भरपाई का दायरा भी बढ़ाया गया है.
पिछले बजट में इसके लिए 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया गया है, जो काबिले तारीफ है. पर इसके सरकारी क्रियान्वयन में कोई बदलाव नहीं आया है. वित्त मंत्री ने बजट में बताया था कि सरकार के दखल को दोबारा से पारिभाषित किया जायेगा.
लेकिन अब भी सिंचाई योजना पटवारी के भरोसे ही है, जो किसानों के लिए शैतान से कम नहीं है. पटवारी इस महती योजना के पवित्र उद्देश्यों पर पानी ही फेर सकता है. बाढ़, सूखे और बेमौसम बारिश से प्रभावित खेतों के नुकसान का आकलन और मूल्यांकन पटवारी के जिम्मे हैं.
इस काम में काफी समय लगता है और पटवारी को मिले चढ़ावे के अनुसार ही नुकसान की भरपाई तय होती है. इस योजना का पूरा और तुरंत लाभ किसानों को तभी हो सकता है कि जब फसल के नुकसान और क्षति पूर्ति का आधार विज्ञान सम्मत हो और सूचना तकनीक को उसका आधार बनाया जाये.
चीन यह काम कर चुका है और इससे वहां खेती को असीम लाभ हुआ है. इसके लिए नीति आयोग ने विस्तृत सुझाव दिये हैं, पर होता कुछ नहीं है. डॉ. गुलाटी ने चीन की फसल बीमा प्रणाली का गहन अध्ययन किया है. उनका कहना है कि 6-8 महीनों में चीन की प्रणाली को देश में बखूबी लागू किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य 50 फीसदी किसानों को फसल बीमा योजना के दायरे में लाना है. इसका सीधा मतलब है कि 10 करोड़ हेक्टेयर उपज क्षेत्र (क्रोप्ड एरिया) को फसल बीमा योजना के दायरे में लाने पड़ेगा. देश में कुल 19.50 करोड़ हेक्टेयर उपज क्षेत्र है. वैसे अभी बमुश्किल 15 फीसदी किसान ही इन योजनाओं का लाभ उठा पाए हैं. जाहिर है कि कछुआ चाल से यह निर्धारित समय में यह लक्ष्य पाना असंभव है.

9 लाख करोड़ रुपए का मिथक-
किसानों की पांच साल में दोगुनी आय करने के लिए कई स्तरों पर काम करना पड़ेगा. खेती को लाभप्रद बनाना पड़ेगा, उसकी लागत घटाने पड़ेगी और आसमानी मार के नुकसान की भरपाई करनी पड़ेगी.
पिछले कुछ सालों से खेती केवल नुकसान का सौदा रह गया है. कृषि लागत बेहिसाब बढ़ी है और कृषि आय गहरे दबाव में है. कई फसलों की लागत न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा है.
इस लक्ष्य को पाने के लिए उन्नत बीज का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता की दरकार है. उर्वरक भी महंगे हैं, पर किसानों की उर्वरक सब्सिडी घटायी जा रही है.
सिंचाई के लिए बिजली भी चाहिए. पर कुछ सालों में बिजली भी महंगी हो गयी है. सस्ती दरों पर बिजली मुहैया कराने की जरूरत है. लेकिन मोदी सरकार के योजनाकार, सलाहकार सैद्धांतिक रूप से आर्थिक सहायता के खिलाफ हैं.
जाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी ही आर्थिक मदद बढ़ाने का रास्ता निकाल सकते हैं.
खेती को लाभप्रद बनाना है, तो फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को काफी अधिक बढ़ाना अनिवार्य है.
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में किसानों से लागत से 50 फीसदी लाभप्रद मूल्य देने का वादा किया था, पर वे इससे साफ मुकर गए हैं.
मोदी राज में न्यूनतम समर्थन मूल्य में नाम मात्र की बढ़ोतरी हुई है. मनमोहन सिंह राज में यह बढ़ोतरी औसतन 17 फीसदी थी. तब किसानों की आय में इसका सबसे अहम योगदान था. इन सब कामों को अंजाम देने के लिए बजट में बड़े आवंटन की दरकार होगी.
हर साल बजट में किसानों को लाखों-करोड़ों रुपए का कर्ज देने की बात की जाती है. चालू वित्त वर्ष के लिए यह लक्ष्य 9 लाख करोड़ रुपए का है.
लेकिन कृषि के जानकार देविंदर शर्मा कई बार कह चुके हैं कि इस कर्ज का बमुश्किल 15 फीसदी हिस्सा ही किसानों को मिल पाता है. शेष 85 फीसदी हिस्सा एग्री बिजनेस की कंपनियां ले उड़ती हैं.
हकीकत यह है कि करोड़ों की संख्या में छोटे और सीमांत किसान इस कर्ज का लाभ उठाने से वंचित हैं और कर्ज के लिए सूदखोंरों पर आश्रित हैं. पूरी उम्मीद करनी चाहिए कि वित्त मंत्री सीमांत किसानों की इस समस्या का कोई उपाय अवश्य निकालेंगे.

बाजीगरी से हासिल नहीं होगा चमत्कारी लक्ष्य-
सरकार के ऊपर से नीचे तक हर नुमाइंदे ने कहा कि पिछले बजट में किसानों का बजट आवंटन दोगुना कर दिया गया है. कृषि मंत्री कहते हैं कि कृषि क्षेत्र और कल्याण आवंटन 15809 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 35,984 करोड़ रुपए कर दिया गया है और यह बढ़ोतरी दोगुने से अधिक है.
पर यह केवल वित्त मंत्री की हाथ की सफाई का कमाल था. 15 हजार करोड़ रुपये की ब्याज आर्थिक सहायता मद को वित्त मंत्रालय से उठा कर कृषि मंत्रालय के खातों में डाल दिया गया.
इस राशि को घटा देने से यह आवंटन रह जाता है तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपए यानी महज 4 हजार करोड़ रुपए बढ़ोतरी ही कृषि मंत्रालय को मिली थी, जो कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है.
इस प्रकार की बाजीगरी से आप भरमा सकते हैं लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदल सकते हैं. किसानों की दोगुनी आय के लक्ष्य को पाने के लिए जमीन पर काम पर करना पड़ेगा, वह भी मिशन मोड में. तभी प्रधानमंत्री का यह दिव्य सपना पूरा हो पायेगा. अन्यथा यह भी जुमलों की जमात में शामिल हो जायेगा.

02/02/2017

इस बार आम बजट में नई योजनाओं की घोषणा के बजाए कृषि क्षेत्र की चालू फ्लैगशिप योजनाओं को रफ्तार के प्रबंध किए जाएंगे। देश के कृषि और किसान कल्याण के लिए 45,000 से 50,000 करोड़ बजट का प्रावधान किया जा सकता है। गत वर्ष की अपेक्षा यह धनराशि 10 से 15 हजार करोड़ अधिक है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई नीति और जलवायु परिवर्तन से निपटने के आम बजट में खास इंतजाम किए जाएंगे।

नए क्लस्टर बनाने की घोषणा

कृषि मंत्रायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले बजट में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 10,000 क्लस्टर बनाने का लक्ष्य रखा था। इस लक्ष्य को मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। आम बजट 2017-18 में देशभर में एक लाख नए क्लस्टर बनाने की घोषणा हो सकती है। जैविक खेती को मिशन मोड़ में आगे बढ़ाने के लिए सरकार नई नीति की घोषणा कर सकती है। इस कदम से खेतों में कैमिकल व खाद का उपयोग घटने से भूमि की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी, वहीं किसानों की लागत में कमी आएगी।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती

जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए सरकार बजट में 800 करोड़ का प्रावधान कर सकती है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने वाले उन्नत बीज, शोध आदि के लिए बजट की व्यवस्था होगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड योजना, एकीकृत कृषि बाजार योजना आदि सरकार की फ्लैगशिप योजनाएं हैं। इस बार आम बजट में उक्त योजनाओं के लिए अधिक धन दिया जाएगा। किसानों को आर्थिक सुरक्षा कवच मुहैया कराने वाली नई फसल बीमा योजना में देश के 14 करोड़ किसानों को जोड़ना है। सुस्त रफ्तार के चलते अभी तक 3.5 से 4 करोड़ किसानों को फसल बीमा का कवर मिला है। सरकार को प्रति वर्ष दो गुना किसानों को इससे जोड़ना होगा।

पिछले बजट में फसल बीमा के लिए 5,500 करोड़ का आवंटन

गौरतलब है कि पिछले बजट में फसल बीमा के लिए 5,500 करोड़ का आवंटन किया था। इस बार फसल बीमा का बजट 8000 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। अभी तक नौ करोड़ किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड दिए गए हैं, पांच करोड़ किसानों को कार्ड देना अभी बाकी है। गत बजट में कृ़षि क्षेत्र को 36,000 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इस बार बढ़कर 45 से 50 हजार करोड़ हो सकता है। इसमें .5 फीसदी कृषि कल्याण सेस से मिलने वाली धनराशि भी शामिल होगी।

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