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धन्यवाद
12/08/2021

धन्यवाद

Corona warriors have been honoured by Global Pledge Campaign of World Book of Records for serving humanity and dedicated activities in Coronavirus pandemic. They were felicitated with a Certificate of Commitment (Switzerland) for their matchless contribution to serve humanity. The certificate of commitment were bestowed by Dr. Arpan Jain (President, Matrabhasha Unnayan Sansthan, Bharat).
World Book of Records has greatly thankful and enthused about the response and appreciation for its CSR Initiative- Mass Pledge Campaign drive which has been instrumental in motivating people of all continents so that together we will win this fight against COVID-19. Under the pioneering guidance of Mr. Wilhelm Jezler from Zürich, Switzerland (Head of WBR European initiative) to motivate and inspire people with a pledge to be committed to safe and educate others to stay safe in the Covid-19 pandemic period. This global campaign of the pledge has covered people and organizations of 70 countries. WBR bestows certificates of Commitment to people and organizations for espousing the cause of humanity in the Coronavirus pandemic. On being felicitated by the Certificate of Commitment, all personalities were congratulated by Mr. Wilhelm Jezler (Head, WBR - Europe), Shri Santosh Shukla, Supreme Court, Advocate (President, World Book of Records) and Central Working Committee of World Book of Records. World Book of Records

*शहीद खुदीराम बोस* ●●●●●मात्र 18 वर्ष की अल्पायु में हाथों में गीता लेकर फाँसी पर चढ़ गए, ऐसे युवा क्रान्तिकारी खुदीराम ब...
11/08/2021

*शहीद खुदीराम बोस*

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मात्र 18 वर्ष की अल्पायु में हाथों में गीता लेकर फाँसी पर चढ़ गए, ऐसे युवा क्रान्तिकारी खुदीराम बोस जी को कोटिशः नमन।

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

#क्रान्तिकारी #खुदीरामबोस #शहीदखुदीरामबोस #अर्पणजैन #डॉअर्पणजैन #मातृभाषा #हिन्दीग्राम

*कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन* कुछ आवश्यक सुझाव, जिन्हें अपनाने से बढ़ेगा लेखक का प्रकाशकीय दायरा और ... *क्या लिख...
11/12/2020

*कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन*

कुछ आवश्यक सुझाव, जिन्हें अपनाने से बढ़ेगा लेखक का प्रकाशकीय दायरा और ...

*क्या लिखें? क्यों लिखें? और कैसे भेजें?*

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

#शब्दग्राम #हिन्दीविमर्श #संस्मय #हिन्दीग्राम #डॉअर्पणजैन #मातृभाषा #हिन्दी #आलेख #हिंदी #ब्रांडिंग #लेखकीयलोकप्रियता

*(पसंद आने पर पृष्ठ को पसंद (लाइक) करना अथवा कमेंट करना न भूलें)*

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'* का आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें-
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=3418676528187487&id=1456499717738521

कैसे ज़्यादा प्रकाशित होगा आपका लेखन क्या लिखें? क्यों लिखें? और कैसे भेजें? ◆ डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' वर्तमान दौर में हि...

*एक युद्ध-अवसाद के विरुद्ध*✍🏻 *डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मचा हुआ है, कोविड 19। कोरोना अपना कहर बर...
14/06/2020

*एक युद्ध-अवसाद के विरुद्ध*

✍🏻 *डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*

सम्पूर्ण विश्व में हाहाकार मचा हुआ है, कोविड 19। कोरोना अपना कहर बरपा रहा है। देश में लगभग 80 दिनों से लॉक डाउन है, कामकाज ठप्प है, कोरोना से बचना है, घर पर रहना है, इन्हीं हालातों में कामकाजी और नौकरीपेशा भी रोटी की तलाश में हैं। आर्थिक संकट हर दिशा में है, मानसिक अवसाद बढ़ने लगा है, लोग आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। ऐसे काल में व्यक्तिशः जागरुकता आवश्यक है। हमें ज़िन्दगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए लड़ना होगा, शुरुआत करनी होगी, नई शुरुआत आवश्यक है। मान लीजिए, जब आपने अपने काम की पहली शुरुआत की थी या फिर नौकरी की पहली शुरुआत की थी तो कैसे संकटों का सामना किया था, बस उसी को आधार मानकर फिर से शुरुआत कीजिए। यदि कर्ज़ है तो भी चिंता मत कीजिए, जितना कर्ज़ है यदि वो एक साल में दोगुना भी हो गया तो भी एक नहीं दो नहीं तीन या चार साल में समाप्त हो जाएगा, पर यह तब होगा जब हम ज़िन्दा रहेंगे। यदि कोरोना या अवसाद से हार गए तो कर्ज़, तकलीफ़ के साथ एक बदनामी परिवार के लिए भी छोड़ जाएँगे।
कम से कम अवसाद को ख़ुद पर हावी न होने दें, अपनी समस्याएँ साझा करें, अपने ख़ास मित्रों तक ज़रूर बताएँ कि क्या समस्या है? कैसे निपटेंगे? आदि। कभी अवसाद को मन पर हावी न होने दें, इससे आप हारेंगे नहीं बल्कि जिएँगे। जब हम ज़िन्दा रहेंगे तो हर समस्या से जूझकर समाधान तक ले आएँगे, पर हम ही न रहे तो फिर परिवार कैसे जिएगा!
अपना और अपने परिवार का सोचना होगा, हारना नहीं बल्कि जीतने के लिए मेहनत करनी होगी।
मातृभाषा उन्नयन संस्थान विगत 1 जून 2020 से *एक युद्ध अवसाद के विरुद्ध* अभियान संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से हमारी मानवीय ज़िम्मेदारी है कि लोगों को अवसाद में जाने से बचाएँ। तनावमुक्ति हेतु प्रयास करें, और लोगों को सकारात्मक रखने का प्रयास करें। इसी अभियान में संस्थान के अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन 'अविचल', राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य एवं ओज के कवि मुकेश मोलवा जी, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी जी, शिखा जैन जी, भावना शर्मा जी, कवि हिमांशु भावसार जी आदि सुधिजन सतत प्रयासरत हैं। हर सम्भव मदद कर रहे हैं, तनाव मुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। आप भी जुड़ें, अपने आसपास के लोगों को अवसाद से मुक्त करने के लिए जुटे, उन्हें तनाव से बाहर निकालने का प्रयास करें। निश्चित तौर पर हम यह जंग भी जीतेंगे। मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास।
जय हिन्दी!

*डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'*
अध्यक्ष- मातृभाषा उन्नयन संस्थान
www.arpanjain.com
09893877455
#मातृभाषा #एकयुद्धअवसादकेविरुद्ध #हिन्दीग्राम

*पुण्यस्मरण पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि*==========================*मुंशी नवल किशोर जी* #हिन्दीग्राम  #मातृभाषा  #साहित्यका...
19/02/2019

*पुण्यस्मरण पर अश्रुपूरित श्रद्धांजलि*
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*मुंशी नवल किशोर जी*

#हिन्दीग्राम #मातृभाषा #साहित्यकारकोश
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मुंशी नवल किशोर अंग्रेजी शासन के समय के भारत के उद्यमी, पत्रकार एवं साहित्यकार थे। इनकी जिन्दगी का सफर कामयाबियों की दास्तान हैं। शिक्षा, साहित्य से लेकर उद्योग के क्षेत्र में उन्होंने सफलता पायी और जो बात सबसे उल्लेखनीय थी वह यह कि उन्होंने हमेशा मानव मूल्यों का सम्मान किया।

*जीवनी*
मुंशी नवल किशोर का जन्म अलीगढ़ जिले के विस्तोई ग्राम एक कुलीन ब्राह्मण परिवार में सन् १८३६ को हुआ था। शुरू से ही समाचारपत्रों और व्यापार में रूचि थी। कुछ समय तक 'कोहिनूर' में काम करने के बाद 1858 में 22 साल की उम्र में लखनऊ आ गए। यहाँ आते ही उन्होंने नवल किशोर प्रेस स्थापित किया। देखते ही देखते इस प्रेस की ख्याति इतनी बढ़ी कि इसे पेरिस के एलपाइन प्रेस के बाद दूसरा दर्जा दिया जाने लगा। सभी मजहब की पुस्तकों और एक से बढ़ कर एक साहित्यकारों की कृतियों को इस प्रेस ने छापा। कुल प्रकाशन का 65 प्रतिशत उर्दू, अरबी और फारसी तथा शेष संस्कृत, हिन्दी, बंगाली, गुरूमुखी, मराठी, पशतो और अंग्रेजी में है। पूरी दुनिया के बड़े-बड़े पुस्तकालयों में उनके यहां की किताबें मिल जाती है। जापान में मुंशी नवल किशोर के नाम का पुस्तकालय है तो जर्मनी के हाइडिलबर्ग और अमेरिका के हावर्ड विशविद्यालय में उनकी प्रकाशित सामग्री के विशेष कक्ष हैं।

उद्योग के क्षेत्र में भी उनका अपना योगदान है। 1871 में उन्होंने लखनऊ में अपर इण्डिया कूपन पेपर मिल की स्थापना की थी जो उत्तर भारत में कागज बनाने का पहला कारखाना था। शाह ईरान ने 1888 में कलकत्ता में पत्रकारों से कहा ‘हिन्दुस्तान आने के मेरे दो मकसद हैं एक वायसराय से मिलना और दूसरा मुंशी नवल किशोर से’। कुछ ऐसे ही खयालात लुधियाना दरबार में अफगानिस्तान के शाह अब्दुल रहमान ने 1885 में जाहिर किए थे।

बहुआयामी व्यक्तित्व और बहुआयामी सफलताओं को अपने में समेटे मुंशी नवल किशोर को काल के क्रूर हाथों ने 19 फ़रवरी 1895 को सदा के लिए समेट लिया।

*जीवन परिचय*
मुंशी नवल किशोर
* 3 जनवरी 1836 से 19 फरवरी 1895।
* 23 नवंबर 1858 में नवल किशोर प्रेस लखनऊ में शुरू की जहां से विभिन्न भाषाओें की पांच हजार किताबें छापी गईं।
* 26 जनवरी 1858 से अवध अखबार का प्रकाशन किया।
* 1871 में उत्तर भारत की पहली कागज मिल लखनऊ में शुरू की।
* प्रकाशनों ने भारत ही नहीं अरब, ईरान, अफगानिस्तान और उजबेकिस्तान से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किए।
* लखनऊ नगर पालिका के पहले भारतीय सदस्य 1875 में बनने के बाद शहर का चहुमुखी विकास किया।
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श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा मेंआतंकवादीयों ने कार बम से सीआरपीएफ के एक काफिले में शामिल...
14/02/2019

श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतीपोर के पास गोरीपोरा मेंआतंकवादीयों ने कार बम से सीआरपीएफ के एक काफिले में शामिल बस को उड़ा दिया। हमले में 28 जवान शहीद हो गए, जबकि 36 जख्मी हो गए।
शहीद जवानों को मातृभाषा उन्नयन संस्थान की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि...
#हिन्दीग्राम

_क्या आप जानते है क्यों बेहतर है निजी वेबसाईट?_1. लेखन को वैधानिकता देती है, यानि आपने अपना लेखन स्वयं की वेबसाईट/ ब्लॉग...
04/12/2018

_क्या आप जानते है क्यों बेहतर है निजी वेबसाईट?_

1. लेखन को वैधानिकता देती है, यानि आपने अपना लेखन स्वयं की वेबसाईट/ ब्लॉग पर पोस्ट किया है और आपका सृजन किसी के द्वारा यदि कॉपी किया जाता है तो वह दण्डनीय अपराध माना जाएगा ।

2. डिजीटल युग में आपकी पहचान बनाती है निजी वेबसाईट।

3. आप आपनी लिखी किताबें स्वयं की वेबसाईट पर ईबुक के तौर पर भी प्रकाशित कर सकते हैं।

4. आय का बेहतरीन स्त्रोत बन सकती है निजी वेबसाईट।

5. आपकी वेबसाईट से बनेगी आपकी वैश्विक पहचान।

सेंस टेक्नालॉजिस लाया है, अन्तरा-शब्दशक्ति और मातृभाषा.कॉम से जुड़े रचनाकारों के लिए एक बेहतरीन अवसर...

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निजी वेबसाईट बनवाने का खर्च है 12000 रुपये, परन्तु यदि आप अन्तरा-शब्दशक्ति या मातृभाषा.कॉम से जुड़े है तो आपके लिए शुल्क होगा मात्र
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जिसमें आपको मिलेगा
1. डोमेन
2. 1 जीबी होस्टिंग स्पेस
3. ब्लॉग
4. ईबुक पोस्ट करने की सुविधा
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वेब पत्रकारिता संबंधित सरकार को सुझाव... और इसके कानूनन पक्ष
26/06/2018

वेब पत्रकारिता संबंधित सरकार को सुझाव... और इसके कानूनन पक्ष

*क्या आप न्यूज पोर्टल या न्यूज वेबसाईट बनवाने का सोच रहे है?*_*यदि हाँ तो यह मेसेज आपके लिए बहुत महत्वपुर्ण है*_इन्टरनेट...
06/12/2017

*क्या आप न्यूज पोर्टल या न्यूज वेबसाईट बनवाने का सोच रहे है?*
_*यदि हाँ तो यह मेसेज आपके लिए बहुत महत्वपुर्ण है*_

इन्टरनेट पर प्रकाशित समाचार हेतु वेबसाइट बनाई जाती हैं जिसे न्यूज पोर्टल कहा जाता हैं | यह वेब अख़बार या ऑनलाइन समाचार पत्र है, जिसे या तो एक अकेले प्रकाशन के रूप में या एक मुद्रित आवधिक के ऑनलाइन संस्करण के रूप में प्रकाशित किया जाता हैं।

*भारत में वर्तमान में न्यूज वेब साईट का भविष्य बहुत ही उज्जवल हैं, क्योंकि डिजिटल इंडिया के महत्त्व के कारण ही डिजिटल मीडिया का भविष्य संभावनाओं से भरा हुआ हैं|*

*IT+IT=IT जिसका मतलब होता हैं, Indian Talent+ Information Technology=India's Tomorrow*

*1. यदि आप न्यूज पोर्टल बनवाना चाहते हैं और उसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो निम्न लिंक पर क्लिक करियें :*

http://enewsportals.com/

*2. न्यूज पोर्टल सम्बंधित आपके कोई सवाल हो तो निम्न लिंक पर जाइये:*

http://enewsportals.com/?page_id=98

*3. न्यूज पोर्टल बनवाने के लिए लगने वाले खर्च या प्लान के बारे में जानने के लिए क्लिक:*

http://enewsportals.com/?page_id=89

*4. हमारे द्वारा बनायें पोर्टलस का डेमो देखना चाहते हैं तो क्लिक करें:*

http://enewsportals.com/?page_id=92

*5. न्यूज पोर्टल से कमाई कैसे होगी इस बारे में जानना चाहते हैं तो लिंक पर क्लिक करें:*

http://enewsportals.com/?p=257

*6. आप जिस कंपनी के साथ न्यूज पोर्टल का कार्य शुरू करने जा रहे हैं तो पहले जानिए उस शख्स के बारे में जो आपको हमेशा गाइड करेंगे:*

http://enewsportals.com/?page_id=27

*7. आपकी इनक्वाईरी हैं तो क्लिक करें:* http://enewsportals.com/?page_id=147

*नोट-*
1. *यदि आप कम्पनी से EMI में पोर्टल बनवाते है तो विशेषत: जब तक आपके पोर्टल का पुरा पैसा कम्पनी में जमा नहीं होता तब तक डोमेन नेम आपके नाम नहीं होगा*

2. *यदि एक भी EMI समय पर नहीं भरी तो 500रुप़ये पेनल्टी लगेगी व 5 दिन से अधिक दिन विलम्ब होने पर आपको 1500रुपये पेनल्टी लगेगी..*
*कम्पनी को पोर्टल बंद करने का अधिकार हैं|*

3. *दो EMI नहीं भरने पर आपके पोर्टल से आपका मालिकाना हक स्वत: ही समाप्त हो जाएगा |*
*और कम्पनी इस मामले में आपके द्वारा जमा कोई भी पैसा रीफण्ड नहीं करेगी |*

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