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27/05/2022
नर्मदा जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
07/02/2022

नर्मदा जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय हो
19/09/2021

जय हो

महाभारत को पढ़ने, समझने, व सीखने के लिए समय और इच्छा न हो तो भी इसका नवसार सूत्र सबके जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकता है -...
17/09/2021

महाभारत को पढ़ने, समझने, व सीखने के लिए समय और इच्छा न हो तो भी इसका नवसार सूत्र सबके जीवन में उपयोगी सिद्ध हो सकता है -

1 संतानों की गलत माँग और हठ पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया तो अंत में आप असहाय हो जायेंगे = कौरव

2 आप भले ही कितने बलवान हों लेकिन अधर्म के साथ हों तो आपकी विद्या, अस्त्र-शस्त्र, शक्ति और वरदान सब निष्फल हो जायेगा = कर्ण

3 संतानों को इतना महत्वाकांक्षी मत बना दो कि विद्या का दुरुपयोग कर स्वयंनाश कर सर्वनाश को आमंत्रित करे = अश्वत्थामा

4 कभी किसी को ऐसा वचन मत दो कि आपको अधर्मियों के आगे समर्पण करना पड़े = भीष्म पितामह

5 संपत्ति, शक्ति, सत्ता का दुरुपयोग और दुराचारियों का साथ अंत में स्वयंनाश का दर्शन कराता है = दुर्योधन

6 अंध व्यक्ति - अर्थात मुद्रा, मदिरा, अज्ञान, मोह और काम ( मृदुला) अंध व्यक्ति के हाथ में सत्ता भी विनाश की ओर ले जाती है = धृतराष्ट्र

7 व्यक्ति के पास विद्या विवेक से बँधी हो तो विजय अवश्य मिलती है = अर्जुन

8 हर कार्य में छल, कपट, व प्रपंच रचकर आप हमेशा सफल नहीं हो सकते = शकुनि

9 यदि आप नीति, धर्म, व कर्म का सफलतापूर्वक पालन करेंगे तो विश्व की कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर सकती = युधिष्ठिर

रीति, नीति, विद्या, विनय, ये द्वार सुमति के चार।
इनको पाता है वही, जिसका हृदय रहे उदार।।

यदि इन सूत्रों से सीख ले पाना सम्भव नहीं होता है तो महाभारत संभव हो जाता है.

जय श्री कृष्णा

भगवान वामन ने राजा बलि को मारा ही नहीं हैं, तो क्यों मारा यह उत्तर नहीं दिया जा सकता है। अपितु राजा बलि तो सप्त चिरंजीवी...
17/09/2021

भगवान वामन ने राजा बलि को मारा ही नहीं हैं, तो क्यों मारा यह उत्तर नहीं दिया जा सकता है। अपितु राजा बलि तो सप्त चिरंजीवीयों में से एक हैं।

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः। कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरंजीविनः॥'
अर्थात् : अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम ये सभी चिरंजीवी हैं।

इस श्लोक को दीर्घ आयु के लिए नित्य की प्रातः पूजा में पढ़ने की परंपरा है। यह श्लोक बताता है कि इन सात व्यक्तियों की आयु तो चिरकाल अर्थात धरती के अंत तक की हैं।

यह एक बड़ी सुंदर कथा है राजा बलि असुरों के राजा होकर भी इतने महत्वपूर्ण और गौरवशाली क्यों माने जाते हैं।

भगवान वामन ने राजा बलि को अभयदान दिया था, उनकी वचन के प्रति निष्ठा और समर्पण के भाव से प्रसन्न होकर। जब राजा बलि के पास त्रिलोकी का राज्य था और भगवान वामन ने उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी थी, तो उन्होंने सहर्ष अपने गुरु शुक्राचार्य जी के रोकने के बाद भी दान का संकल्प कर दिया था। वे यह भी जानते थे कि यह विष्णु जी ही हैं। ततपश्चात भगवान वामन ने अपने दो पगों में सम्पूर्ण लोकों को नाप लिया और राजा बलि ने अपने संकल्प को पूर्ण करने के लिए तीसरा पग रखने के लिए अपने शीश को झुका कर दिया था। जिसे भगवान ने अपने चरण से छू कर राजा बलि को भी अपना लिया था।

दानव राज बलि को अभयदान के साथ ही वरदान में पाताल का अक्षय राज्य दिया था। यहीं नहीं देवशयन के काल में यह भी माना जाता है कि भगवान विष्णु जी राजा बलि के द्वारपाल के रूप में पाताल में रहते हैं।

दक्षिण भारत में था राजा बलि का राज्य : राजा बलि का राज्य संपूर्ण दक्षिण भारत में था। उन्होंने महाबलीपुरम को अपनी राजधानी बनाया था। राजा बली को केरल में ‘मावेली’ कहा जाता है। यह संस्कृत शब्द ‘महाबली’ का तद्भव रूप है। इसे कालांतर में ‘बलि’ लिखा गया। केरल में मनाया जाने वाला विश्वप्रसिद्ध ओणम त्योहार महाबली की स्मृति में मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध पौराणिक पात्र वृत्र (प्रथम मेघ) के वंशज हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद थे और प्रह्लाद के पुत्र विरोचन के पुत्र राजा महाबली हैं। प्रह्लाद के यह पौत्र हैं।

|| ॐ गं गणपतये नमः ||
17/09/2021

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16/09/2021
11/07/2021

आषाढ शुक्लपक्षप्रतिपदा सेनवमीं तिथि तक गुप्त नवरात्रि रहती है । नवरात्रि में भगवती दुर्गा एवं दशमहाविद्याओं की साधना करने से भक्त की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं माता की कृपा प्राप्त होती है अपने गुरु के मार्ग दर्शन के अनुसार साधना करना चाहिए ।साधक लाभ लें ।

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