22/01/2025
भारत में अस्थमा एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है। ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2022 के अनुसार, भारत में लगभग 3 करोड़ से अधिक लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। यह संख्या दुनिया में अस्थमा रोगियों की कुल संख्या का एक बड़ा हिस्सा है।
बच्चों और किशोरों में अस्थमा का प्रचलन अधिक है, और यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थोड़ा अधिक पाया जाता है।
अस्थमा के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारणों में वायु प्रदूषण, धूल, धुआं, परागकण, तंबाकू का धुआं और जेनेटिक कारण शामिल हैं।
अस्थमा फेफड़ों की एक दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारी है, जिसमें श्वसन नलिकाओं (एयरवे) में सूजन और संकुचन हो जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
1. आनुवंशिक कारण (Genetic Factors)
यदि परिवार में किसी को अस्थमा है, तो अन्य सदस्यों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है।
2. वातावरणीय कारण (Environmental Factors)
वायु प्रदूषण: धूल, धुआं, केमिकल्स और औद्योगिक प्रदूषण।
परागकण (Pollen): खासतौर पर वसंत ऋतु में।
पेट डेंडर: पालतू जानवरों के बाल और त्वचा के कण।
तंबाकू का धुआं।
3. एलर्जी (Allergies)
कुछ लोगों को धूल, फूलों के परागकण, फफूंद (Mold), खाद्य पदार्थ या दवाइयों से एलर्जी होती है, जिससे अस्थमा ट्रिगर हो सकता है।
4. सांस की बार-बार होने वाली समस्याएं (Respiratory Infections)
बार-बार सर्दी, खांसी या वायरल इंफेक्शन से अस्थमा का खतरा बढ़ सकता है।
5. शारीरिक और मानसिक तनाव
अधिक शारीरिक मेहनत या व्यायाम।
तनाव और चिंता।
6. मौसमी बदलाव (Weather Changes)
ठंडी या बहुत गर्म हवा।
नमी (Humidity) का बढ़ना।
7. डायट और जीवनशैली
जंक फूड, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, और पोषण की कमी।
मोटापा भी अस्थमा के जोखिम को बढ़ा सकता है।
8. दवाइयों और रसायनों का प्रभाव
कुछ दवाइयाँ (जैसे एस्पिरिन या बीटा-ब्लॉकर्स) अस्थमा को ट्रिगर कर सकती हैं।
घरेलू क्लीनर, परफ्यूम, या अन्य रसायनों से भी समस्या हो सकती है।
दोस्तों अगर आपको भी अस्थमा की समस्या है, या फिर सास से संबंधित कोई समस्या है तो आज ही हमें संपर्क करें
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