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वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चन्द्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है!वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चन्द्र गृह का प्रतिनिधित्...
06/10/2015

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चन्द्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है!

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चन्द्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है! कुंडली में यदि चंद्र शुभ प्रभाव में हो तो मोती अवश्य धारण करना चाहिए ! चन्द्र मनुष्य के मन को दर्शाता है, और इसका प्रभाव पूर्णतया हमारी सोच पर पड़ता है! हमारे मन की स्थिरता को कायम रखने में मोती अत्यंत लाभ दायक सिद्ध होता है! इसके धारण करने से मात्री पक्ष से मधुर सम्बन्ध तथा लाभ प्राप्त होते है! मोती धारण करने से आत्म विश्वास में बढहोतरी भी होती है ! हमारे शरीर में द्रव्य से जुड़े रोग भी मोती धारण करने से कंट्रोल किये जा सकते है जैसे ब्लड प्रशर और मूत्राशय के रोग , लेकिन इसके लिए अनुभवी ज्योतिष की सलाह लेना अति आवशयक है, क्योकि कुंडली में चंद्र अशुभ होने की स्तिथि में मोती नुक्सान दायक भी हो सकता है! पागलपन जैसी बीमारियाँ भी कुंडली में स्थित अशुभ चंद्र की देंन होती है , इसलिए मोती धारण करने से पूर्व यह जान लेना अति आवशयक है की हमारी कुंडली में चंद्र की स्थिति क्या है! छोटे बच्चो के जीवन से चंद्र का बहुत बड़ा सम्बन्ध होता है क्योकि नवजात शिशुओ का शुरवाती जीवन , उनकी कुंडली में स्थित शुभ या अशुभ चंद्र पर निर्भर करता है!

मोती धारण करने की की विधि

यदि आप चंद्र देव का रत्न मोती धारण करना चाहते है, तो 5 से 8 कैरेट के मोती को चाँदी की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद के घोल में डाल दे! उसके बाद पाच अगरबत्ती चंद्रदेव के नाम जलाये और प्रार्थना करे की हे चन्द्र देव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न, मोती धारण कर रहा हूँ , कृपया करके मुझे आशीर्वाद प्रदान करे! तत्पश्चात अंगूठी को निकाल कर ॐ सों सोमाय नम: का 108 बारी जप करते हुए अंगूठी को अगरबत्ती के उपर से घुमाए फिर मंत्र के पश्चात् अंगूठी को शिवजी के चरणों से लगाकर कनिष्टिका ऊँगली में धारण करे! मोती अपना प्रभाव 4 दिन में देना आरम्भ कर देता है, और लगभग 2 वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निष्क्रिय हो जाता है! 2 वर्ष के पश्चात् पुनः नया मोती धारण करे! अच्छे प्रभाव प्राप्त करने के लिए साऊथ सी का 5 से 8 कैरेट का मोती धारण करे! मोती का रंग सफ़ेद और कोई काला दाग नहीं होना चाहिए !

06/10/2015

प्रस्तुत है आज के मुहूर्त

शुभ विक्रम संवत- 2072, अयन- दक्षिणायन, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्‌- 1436, मु. मास- जुअल-हज्जा, तारीख- 22
दिवस ‍तिथि- नवमी।
दिवस नक्षत्र- पुनर्वसु।
शुभ समय- सुबह 10.30 से दोपहर 1.30 तथा 3.00 से 4.30 बजे तक।
दिशाशूल- उत्तर, वायव्य।
सुझाव- गुड़-धनिया अर्पण कर तथा अपने पितृदेव को प्रणाम कर घर से निकलें।

05/10/2015

यह एक खनिज पत्थर है। अपनी रासायनिक संरचना में यह जिर्कोनियम का सिलिकेट रुप माना जाता है। इसकी उत्पति सायनाइट की षिलाओं के अन्दर होती है। यह एक पारदर्षी रत्न है। इसके अन्दर जाला धुंधलापन अथवा कट के निषान अवश्य पाये जाते है। लेकिन जितना साफ गोमेद होता है उतना उत्तम माना जाता है। गोमेद काफी सस्ता रत्न होता है। लेकिन अपने आकर्षक रंग व गुणों के कारण इसे नवरत्नों में सम्मानित स्थान प्राप्त है। गोमेद को राहू ग्रह का प्रतिनिधि रत्न माना जाता है।

इसलिए राहु ग्रह से संबंधित समस्त दोष तथा राहु दषा जनित समस्या दुष्प्रभाव गोमेद धारण करने से दूर हो जाते है। अंतः दैत्य ग्रह राहु की दशा को ठीक करने के लिए गोमेद धारण करना चाहिए। राहु ग्रह के प्रकोप से मानसिक तनाव बढ़ता है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध आता है। कार्यकुषलता में निर्णायक कमी आती हे। निर्णय लेने की क्षमता क्षीण हो जाती है तथा योजनाएं असफल हो जाती है। ऐसे व्यक्तियों को गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए। गोमेद धारण करने वाले के समक्ष शत्रु टिक नहीं पाता इससे शत्रुओं का भय समाप्त हो जाता है। जिन बच्चों का मन पढ़ाई में ना लगता हो तथा बहुत शरारतें करते हो। उन्हें गोमेद पहनाने से लाभ पहुंचता है। इसको धारण करने से सुख सम्पति में भी वृद्धि होती है। गोमेद रत्न यद्यपि कई रंगों में उपलब्ध होता हैं लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से राहु रत्न गोमेद वही कहलाता है, जो गो-मूत्र के रंग वाला हो। यह अत्यधिक प्रचलित राहु रत्न स्थान तथा भाषा भेद के अनुसार अपने-अपने क्षेत्र में विभिन्न नामों से पुकारा जाता है। गोमेद को देवभाषा संस्कृत में तृणवर, तपोमणि, राहुरत्न, स्वर भानु, पीतरत्न, गोमेद, रत्नगोमेदक, हिन्दी में गोमेद, गुजराती में गोमूत्रजंबु, मराठी में गोमेदमणि, उर्दू, फारसी में जरकुनिया अथवा जारगुन, बंगाली में लोहितमणि, अरबी में हजारयमनि, बर्मा में गोमोक, चीनी में पीसी तथा आंग्ल भाषा में अगेट नाम से जाना जाता है।

05/10/2015

प्रस्तुत है आज के मुहूर्त



शुभ विक्रम संवत- 2072, अयन- दक्षिणायन, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्‌- 1436, मु. मास- जुअल-हज्जा, तारीख- 21।



दिवस तिथि- अष्टमी।



दिवस नक्षत्र- आर्द्रा।



शुभ समय- सुबह 9.00 से 10.30 तथा दोपहर 3.00 से 6.00 बजे तक।



दिशाशूल- पूर्व, आग्नेय।



सुझाव- दर्पण में अपना चेहरा देखकर तथा अपने पितृदेव को प्रणाम कर घर से निकलें।

04/10/2015

नक्षत्र के अनुसार पौधे। रखते हैं रत्नों जैसा प्रभाव।

राशि और नक्षत्र के अनुसार वृक्ष

राशि ग्रह दिशा नक्षत्र पौधा

मेष मंगल दक्षिण मृगशिर, चित्रा, घनिष्ठा खैर, लाल चंदन, बिल्व पत्र

वृषभ शुक्र पूर्व भरणी, फाल्गुनी, पू. षाढ़ा आंवला, पलाश, अशोक

मिथुन बुध ईशान कोण अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती नागकेसर, चीड़, महूआ

कर्क चंद्र अग्निकोण रोहिणी, हरत, श्रवण अमलताश, पलाश, हरसिंगार

सिंह सूर्य मध्य कृतिका, उ. फाल्गुनी, उषाढ़ा आक, गूलर, कटहल

कन्या बुध ईशान कोण अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती कटहल, अमृता, आंवला

तुला शुक्र पूर्व भरणी, पू. फाल्गुनी, पू. षाढ़ा अशोक, अरंडी, सप्तपर्णी

वृश्चिक मंगल दक्षिण मृगशिर, चित्रा, घनिष्ठा खैर, बिल्व पत्र, लाल चंदन

धनु गुरु उत्तर पुनर्वसु, विशाखा, पू. भाद्रपद पीपल, बरगद, बांस, आम

मकर शनि पश्चिम पुष्य, अनुराधा, उ. भाद्रपद करंज, पीपल, नीम

कुंभ शनि पश्चिम पुष्य, अनुराधा, उ. भाद्रपद शमी, पीपल, नीम

मीन गुरु उत्तर पुनर्वसु, विशाखा, पू. भाद्रपद पीपल, हल्दी, बरगद

सूर्य ग्रह के आराध्य वृक्ष आक, चंद्र का पलाश, मंगल का खैर, बुध का आंधीझाड़ा, गुरु का पीपल, शुक्र का गुलर, शनि का शमी राहू का दुर्वा व रक्त चंदन तथा केतु का कुशा व अश्वगंधा है।

04/10/2015

1. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मनी प्लांट लगाना बहुत ही शुभ होता है। ज्योतिष के अनुसार मनी प्लांट शुक्र ग्रह का कारक है। शुक्र की उपस्थिति में पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं।
2. घर में कांटेदार व दूध (जिनके कटने-छिलने पर सफेद द्रव्य निकलता हो) वाले पौधे नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि कांटे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। गुलाब जैसे कांटेदार पौधे लगाए जा सकते हैं पर इसे घर की छत पर रखें तो बेहतर रहेगा।
3. घर में बांस के पौधे लगा सकते हैं। फेंगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख व समृद्धि के प्रतीक होते हैं।
4. घर या कार्यस्थल (दुकान व ऑफिस) की पॉजिटिव एनर्जी को बढ़ाने के लिए गुलदस्तों में रोज ताजे फूल लगाएं। फूलों के गुलदस्ते ताजगी व सौभाग्य की वृद्धि करते हैं। मुरझाए फूल व पत्तियां नेगेटिव एनर्जी उत्पन्न करती हैं।
5. बेडरूम में किसी भी तरह के पौधे लगाने से बचना चाहिए। इससे मैरिड लाइफ पर बुरा असर पड़ सकता है। डाइनिंग व ड्रॉइंग रूम में गमले रखे जा सकते हैं।
6. यदि घर की किसी दीवार पर पीपल उग आए तो उसे पूजा करके हटाते हुए गमले में लगा देना चाहिए। पीपल को बृहस्पति ग्रह का कारक माना जाता है।
7. बोनसाई पौधा भी घर में तैयार नहीं करने चाहिए और न ही बाहर से लाकर लगाने चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार बोनसाई पौधा घर में रहने वाले सदस्यों का आर्थिक विकास रोकते हैं।
8. तुलसी का पौधा बेहद कल्याणकारी, बहुउपयोगी, पवित्र एवं शुभ माना जाता है। तुलसी में एंटीबायोटिक सहित अनेक औषधीय गुण होते हैं। इसका स्पर्श व इसकी हवा दोनों लाभकारी है। इसलिए इसे घर में अवश्य लगाना चाहिए। तुलसी का पौधा वायु प्रदूषण को भी कम करता है। तुलसी का पौधा घर के ब्रह्म स्थल यानी बीचोंबीच लगाना चाहिए। वैसे इसे घर के किसी भी कोने में लगाया जा सकता है। इसे गंदे स्थान पर न लगाएं।
9. गुलाब, चंपा व चमेली के पौधे घर में लगाना अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे मानसिक तनाव व अवसाद में कमी आती है।
10. बेडरूम के नैऋत्य कोण में टेराकोटा या चीनी मिट्टी के फूलदानों में सूरजमुखी के असली या नकली फूल लगा सकते हैं।
11. पौधे व फूलों का उपयोग घर के नुकीले कोणों व उबड़-खाबड़ जमीन को ढकने के लिए किया जा सकता है।
12. घर में खूबसूरत पत्ती वाले पौधे जैसे- साइकस, एक्लिया, अर्लिया, फिलोडेण्ट्रोन व ऐरिका आदि लगाए जा सकते हैं।

04/10/2015

प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2072, अयन- दक्षिणायन, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्‌- 1436, मु. मास- जुअल-हज्जा, तारीख- 20।
दिवस ‍तिथि- सप्तमी।
दिवस नक्षत्र- मृगशिरा।
शुभ समय- सुबह 9.00 से दोपहर 12.00 तथा 1.30 से 3.00 बजे तक।
दिशाशूल- पश्चिम, नैऋत्य, ईशान।
सुझाव- पान खाकर तथा अपने पितृदेव को प्रणाम कर घर से निकलें।

मूँगा रत्नMoonga (Red Coral) Ratan Facts and BenefitsRed Coral in Englishलाल रंग के मूंगा रत्न (Red Coral Stone) को मंग...
04/10/2015

मूँगा रत्नMoonga (Red Coral) Ratan Facts and Benefits



Red Coral in English

लाल रंग के मूंगा रत्न (Red Coral Stone) को मंगल ग्रह का रत्न माना जाता है। ज्योतिषी मानते हैं कि इसे धारण करने से मंगल ग्रह की पीड़ा शांत होती है। इस रत्न को भौम रत्न, पोला, मिरजान, लता मणि, कोरल, प्रवाल के नाम से भी जाना जाता है। मूंगा रत्न ज्यादातर लाल रंग का होता है परंतु यह गहरे लाल, सिंदूरी लाल, नारंगी आदि रंग के भी पाए जाते हैं।
मूंगा के तथ्य (Facts of Moonga or Red Coral in Hindi)
* मूंगा के बारे में यह माना जाता है कि मूंगा एक वनस्पति है जिसका एक पेड़ है लेकिन यह रत्न समुद्र में पाया जाता है।
* मूंगा जितना समुद्र की गहराई में होता है इसका रंग उतना ही हल्का भी होता है।
मूंगा के लिए राशि (Moonga for Rashi)
मेष तथा वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मूंगा रत्न, सबसे बेहतरीन माना जाता है।
मूंगा के फायदे (Benefits of Red Coral or Moonga in Hindi)
* मूंगा धारण करने से नज़र नहीं लगती है और भूत-प्रेत का डर नहीं रहता है।
* आत्मविश्वास तथा सकारात्मक सोच में वृद्धि होती है।
* आकर्षण शक्ति बढ़ती है तथा लोगों का देखने का नजरिया बदलता है।
* मूंगा को पहनने से क्रूर तथा जलन का नाश हो जाता है।
स्वास्थ्य में मूंगा का लाभ (Benefits of Red Coral or Moonga in Health)
* मूंगा रत्न को धारण करने से रक्त संबंधित सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।
* जो जातक हृदय रोगों से ग्रस्त हैं उन्हें मूंगा धारण करना चाहिए।
* मिर्गी तथा पीलिया रोगियों के लिए यह रत्न उत्तम साबित माना गया है।
कैसे पहने मूंगा (How To Wear Red Coral)
मूंगा या किसी भी अन्य रत्न को धारण करने से पहले अच्छे ज्योतिषी से अवश्य सलाह ले लेनी चाहिए। मूंगा मंगलवार के दिन अनामिका में धारण करना चाहिए। पुरुषों को दाएं हाथ में और स्त्रियों को बाएं हाथ की अनामिका उंगली में मूंगा धारण करने का विधान है।
मूंगा का उपरत्न (Substitutes of Red Coral)
मूंगा के स्थान पर लाल हकीक, तामड़ा या संग-सितारा (Sang-Sitara) धारण किया जा सकता है।

03/10/2015

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पन्ना, बेरिल (Be3Al2(SiO3)6) नामक खनिज का एक प्रकार है जो हरे रंग का होता है और जिसेक्रोमियम और कभी-कभी वैनेडियम की मात्...
03/10/2015

पन्ना, बेरिल (Be3Al2(SiO3)6) नामक खनिज का एक प्रकार है जो हरे रंग का होता है और जिसेक्रोमियम और कभी-कभी वैनेडियम की मात्रा से पहचाना जाता है।[1] खनिज की कठोरता मापने वाले 10 अंकीय मोहस पैमाने पर बेरिल की कठोरता 7.5 से 8 तक होती है।[1] अधिकांश पन्ने बहुत अधिकअंतर्विष्ट होते हैं, इसलिए उनकी मजबूती (टूटने की प्रतिरोधक क्षमता) का वर्गीकरण आम तौर पर निम्न कोटि के रूप में किया जाता है। शब्द "एमरल्ड" (हिंदी: पन्ना) का आगमन (पुरातन फ़्रांसिसी शब्द: एस्मेरौड और मध्यकालीन लैटिन शब्द: एस्मराल्डस से आयातित, मध्य अंग्रेज़ी शब्द: एमरौड के माध्यम से) ग्रीक शब्द स्मारगडॉस – σμάραγδος ("हरित मणि") के माध्यम से लैटिन शब्द स्मारगडस से हुआ है, इसका मूल स्रोत एक सामी शब्द इज़्मरगड(אזמרגד) है, जिसका अर्थ "पन्ना" या "हरा" है।
पन्ना को मई महीने में जन्म लेने वालों का पारंपरिकजन्म-रत्न के साथ-साथ वृष, कर्क और कभी-कभीमिथुन के ज्योतिष-चिह्न का पारंपरिक रत्न माना जाता है। पन्नों से संबंधित अनेक विलक्षण उपाख्यानों में से एक 16वीं सदी के इतिहासकारब्रैंटम का उपाख्यान था जिन्होंने कई प्रभावशाली पन्नों को स्पेनी पन्नों के रूप सन्दर्भित किया जिन्हेंकोरटेज़ के तहत लैटिन अमेरिका से वापस यूरोप में लाया गया था। कोरटेज़ के सबसे उल्लेखनीय पन्नों में से एक पर निम्नलिखित अवतरण को उत्कीर्णकिया गया था: Inter Natos Mulierum non sur-rexit mayor (जिसका हिंदी अर्थ है - एक औरत से उत्पन्न उनमें से एक महान आदमी नहीं हुआ है। XI, 11), जो बपतिस्मा-दाता जॉन को सन्दर्भित करता था। ब्रैंटम ने इस उत्कीर्णन को प्रकृति की इतनी सुंदर और सरल उत्पाद का पवित्र वस्तु दूषक माना और इस कृत्य को कोरटेज़ की बेशकीमती मोती (जिसे उन्होंने ए ब्यूटीफुल एण्ड इन कॉम्पेयरेबल पर्ल नामक एक रचना समर्पित की) के नुकसान और इस कृत्य के तुरंत बाद मरने वाले फ़्रांस के राजा चार्ल्स IX की मौत का भी कारण माना.
पन्ना धारण करने की विधि

यदि आप बुध देव के रत्न, पन्ने को धारण करना चाहते है, तो 3 से 5 कैरेट के पन्ने को स्वर्ण या चाँदी की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्ल पक्ष के बुधवार को सूर्य उदय होने के पश्चात् इसकी प्राण प्रतिष्ठा करे! इसके लिए सबसे पहले अंगुठी को दूध,,,गंगा जल शहद, और शक्कर के घोल में डाल दे, फिर पांच अगरबत्ती बुध देव के नाम जलाएं।

03/10/2015

प्रस्तुत है आज के मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2072, अयन- दक्षिणायन, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्‌- 1436, मु. मास- जुअल-हज्जा, तारीख- 19।
दिवस ‍तिथि- षष्ठी।
दिवस नक्षत्र- रोहिणी।
शुभ समय- सुबह 7.30 से 9.00 तथा दोपहर 1.30 से 4.30 बजे तक।
दिशाशूल- पूर्व।
सुझाव- अदरक साथ में लेकर तथा अपने पितृदेव को प्रणाम कर घर से निकलें।

02/10/2015

प्रस्तुत है आज के मुहूर्त



शुभ विक्रम संवत- 2072, अयन- दक्षिणायन, मास- आश्विन, पक्ष- कृष्ण, हिजरी सन्‌- 1436, मु. मास- जुअल-हज्जा, तारीख- 18।



दिवस ‍तिथि- पंचमी।



दिवस नक्षत्र- कृत्तिका।



शुभ समय- सुबह 7.30 से 10.30 तथा दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक।



दिशाशूल- पश्चिम, नैऋत्य।



सुझाव- दही खाकर तथा अपने पितृदेव को प्रणाम कर घर से निकलें।

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Jaipur
302006

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