25/07/2018
भाग्य और ग्रह-दोष....
हम जिस समय एक के बाद एक सफलता प्राप्त करते हैं, तब हमें लगता है कि ये सब मेरी योग्यता, मेरी मेहनत, मेरे दिमाग तथा मेरे साहस से संभव हुआ है, इसमें किसी देवता, ईश्वर, भाग्य, या प्रार्थना का असर नहीं है। लेकिन जब हम असफल होते हैं, हर कोशिश के बाद भी हमारे कार्य नहीं होते, पूरी मेहनत के बाद भी हम प्रतिस्पर्धा में हार जाते हैं, कई बार हम एक नंबर से या एक कदम से पीछे रह जाते हैं, हमारे साथ के सभी लोग आगे निकल जाते हैं, हम समर्थ होते हुए भी कुछ कर नहीं पाते, बेबस-ठगे से देखते रहते हैं। तब हम सोचते हैं ईश्वर ने हमारे साथ ऐसा क्यों किया, मेरा भाग्य मेरा साथ क्यों नहीं दे रहा क्यों मेरी पूजा-प्रार्थना व्यर्थ हो रही है। इन सबका कारण है आपके ग्रह। जन्म के समय जो आपके ग्रहो की स्थिति थी वह जीवन के अंत तक साथ रहती है। आपके पास रोजगार नहीं है, आपके पास पैसा रुकता नहीं है, आपकी समाज में प्रतिष्ठा नहीं है, आप योग्य हो कर भी चाह कर कुछ नहीं कर सकते, यही है आपकी ग्रह-दशा, आज हम मार्गदर्शन करेंगे की किन ग्रहो के कारण जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता क्यों नहीं मिलती है। अगर आपके पास जन्मपत्री है तो ग्रहों की स्थिति जन्मलग्न- कुंडली में अच्छी तरह देख सकते हैं -
1. अगर आपका जन्म मूल नक्षत्रों में हुआ है तथा लग्न कुंडली में कालसर्प
दोष है, तब आप प्रतिभा संपन्न होते हुए भी किसी भी कार्य में सफल
नहीं होते।
2. यदि लग्न कुंडली में किसी भी स्थान पर शनि-राहू एक साथ हैं और
जन्म गंड-मूल नक्षत्र में हुआ है तो आप कड़ी मेहनत के बाद भी मान-
प्रतिष्ठा खो कर बदनाम हो कर रोजगार का त्याग करते है।
3. जन्म कुंडली में मंगल-केतु साथ है और जन्म के समय गंड-मूल नक्षत्र
योग है तो आप 22-23 वर्ष की उम्र में श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के बाद
बर्खास्त कर दिए जाते है।
4. शनि केंद्र में नीच का हो और गंड-मूल में जन्म हो तो पूरे विश्व में
प्रतिष्ठा, मान सम्मान पा कर भी आप किसी क्षेत्र में सफल नहीं होते।
5. जन्मलग्न में चंद्र-केतु साथ हो और गंड-मूल नक्षत्र का जन्म हो तो हर
एक व्यवसाय में भरी नुक्सान उठा कर बदनामी तथा जेल जाने के योग
बनते हैं।
6. जन्म-राशि के चन्द्रमा से छठे-आठवें या बारहवें स्थान पर वृहस्पति हो
तथा वृषभ राशि का मंगल हो तो व्यक्ति उलटे-सीधे धंधे करके पिता की
धन-सम्पति बर्बाद करके बदनाम तथा बेरोजगार होता है।
7. जन्मलग्न में मंगल-शनि या शनि-राहू साथ हों, कालसर्प दोष या ग्रहण-
दोष हो तो व्यक्ति जिद्दी-कुंठित, परिवार में समाज में किसी से विचार
नहीं मिलते, कोई कार्य-व्यवसाय नहीं करता, अलग-थलग एक कमरे में
रहने वाला, बिना दिनचर्या का जीवन जीने वाला व्यक्ति होता है।